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दारूल उलूम पर लगे प्रतिबंध
नई दिल्ली। भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव विनय कटियार ने
दूसरे प्रशासनिक सुधार आयोग की रपट को लेकर केंद्र सरकार और
दारूल उलूम देवबंद को कठघरे में खड़ा किया है। कटियार ने कहा कि
कांग्रेसी नेता वीरप्पा मोइली की अध्यक्षता में गठित दूसरे
प्रशासनिक सुधार आयोग की आठवीं रिपोर्ट में कहा गया है कि 1994
में देवबंद के उलेमाओं से आतंकी मसूद अजहर की अक्सर बातचीत
होती रहती थी।
रिपोर्ट में इस्लामिक आतंकवाद को एक चुनौती के रूप में
बताया गया है। कटियार ने कहा कि यदि केंद्र सरकार आयोग की
रिपोर्ट से सहमत है तो उसे दारूल उलूम देवबंद पर तत्काल
प्रतिबंध लगाना चाहिए। यदि असहमत है तो उसे विश्व प्रतिष्ठित
इस्लामी शिक्षा केंद्र को बदनाम करने के लिए देवबंद के उलेमाओं
से सार्वजनिक तौर पर माफी मांगनी चाहिए।
भाजपा नेता ने मीडियाकर्मियों को धार्मिक कट्टरता पर
आधारित आतंकवाद शीर्षक से आयोग के कथित आरंभिक अंशों की
प्रतियां भी वितरित की, जिसमें कहा गया है कि कश्मीर को भारत
से आजाद कराने के उद्देश्य से गठित हरकत उल मुजाहिदीन और हरकत
उल जेहाद इस्लामी के सदस्यों में एका कराने की नीयत से जनवरी
1994 में भारत आए अजहर ने अपनी गिरफ्तारी से पहले देवबंद के
प्रमुख उलेमाओं से इस सम्बंध में कई बार मुलाकात की थी।
उन्होंने कहा कि आयोग की यह टिप्पणी ही देवबंद पर प्रतिबंध
लगाने के लिए काफी है।
कटियार ने जून 2008 में छपी इस रिपोर्ट की धारा 3.5.4
के हवाले से कहा कि भारत में इस्लामिक आतंकवाद के लिए स्टूडेंट
इस्लामिक मूवमेंट ऑफ इंडिया [सिमी] की भूमिका को भी देखा जाना
चाहिए। कटियार ने मुंबई पर 26 नवम्बर 2008 को हमला
करने वाले आतंकवादियों के रहने-खाने की व्यवस्था करने वालों के
नाम उजागर करने की मांग दोहराई और कहा कि उन्हें महाराष्ट्र के
रायगढ़ के उड़न क्षेत्र में रखा गया था।

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