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हाउस ऑफ कॉमन्स में हिंदी का सम्मान
उच्चायुक्त ने
कथा यूके सम्मान प्रदान किया

लंदन। ब्रिटेन में भारत के उच्चायुक्त नलिन सूरी ने
ब्रिटिश संसद के हाउस ऑफ़ कॉमन्स में हिन्दी लेखक हृषिकेश सुलभ
को उनके कथा संकलन ‘वसन्त के हत्यारे’ के लिये ‘सोलहवां
अंतर्राष्ट्रीय इन्दु शर्मा कथा सम्मान’ प्रदान किया। इस अवसर
पर उन्होंने ब्रिटेन में बसे हिन्दी लेखक महेन्द्र दवेसर और
कादम्बरी मेहरा को ग्यारहवां पद्मानंद साहित्य सम्मान भी
प्रदान किया। ब्रिटेन में लेबर पार्टी के सांसद बैरी गार्डिनर
और वीरेन्द्र शर्मा ने सम्मान समारोह की मेज़बानी की।
ब्रिटिश सांसद बैरी गार्डिनर ने अपने भाषण की शुरूआत
हिन्दी में की। उन्होंने कहा कि जिन सवालों का जवाब राजनीति
नहीं दे पाती, उनका जवाब साहित्य में खोजा जा सकता है। हज़ारों
सालों से हम लेखकों कवियों का इसलिये सम्मान करते हैं क्योंकि
उनके शब्द हमेशा हमें जटिल प्रश्नों से जूझने में मदद करते
हैं, वे हमारी इच्छाओं और सपनों को शब्द प्रदान करते हैं।
उन्होंने रॉबर्ट बर्न्स की प्रेम के बारे में एक चर्चित कविता
का ज़िक्र करते हुए कहा कि लेखक जो लिखता है उन शब्दों को हम
समय के पार भी याद रखते हैं।
साउथहॉल
के सांसद वीरेन्द्र शर्मा ने कहा कि ब्रिटेन की संस्थाओं और
समाज में हिन्दी को जो स्थान मिलना चाहिये था वह अभी नहीं
मिला। उन्होंने कहा कथा यूके यहां सभी भारतीय भाषाओं के बीच
संवाद बनाने का जो काम कर रही है उससे हिन्दी को उसका उचित
सम्मान दिलाने में बहुत मदद मिलेगी, हमें इसका राजनीतिक समर्थन
करना चाहिये। उन्होंने कहा कि भारत को ठीक से समझने के लिये
भारतीय भाषाएं जानना ज़रूरी है। सांसद वीरेन्द्र शर्मा ने कहा
कि ब्रिटेन के अधिकांश प्रवासी भारतीय हिन्दी बोलते समझते हैं,
भले ही उनकी मातृभाषा गुजराती, पंजाबी, उर्दू या अन्य हो।
उच्चायुक्त नलिन सूरी ने कहा कि कथा यूके का यह आयोजन
यहां विभिन्न भाषाई समुदायों को जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका
निभा रहा है। उन्होंने आश्वासन दिया कि ब्रिटेन के दूर-दराज़
इलाकों में हिन्दी किताबों को पाठकों तक पहुंचाने के लिये
भारतीय उच्चायोग हर संभव सहयोग प्रदान करेगा। यहां के हिन्दी
लेखक किसी भी मामले में दूसरे देशों के लेखकों से कमतर नहीं
हैं।
सोलहवें अंतर्राष्ट्रीय इन्दु शर्मा कथा सम्मान से
अलंकृत कथाकार हृषिकेश सुलभ ने कहा कि उनके लिए लिखना जीने की
शर्त है। बिहार की जिस ज़मीन से वे आते हैं वहां एक एक सांस के
लिये संघर्ष करना पड़ता है। उन्होंने कहा कि हमारी साझा
संस्कृति को राजनीति की नज़र लग गई है, हम लेखक उसे बचाने की
लड़ाई लड़ रहे हैं, न्याय का सपना अभी भी अधूरा है और वंचित के
पक्ष में खड़ा होना लेखक की सबसे बड़ी ज़िम्मेदारी है।
ग्यारहवें पद्मानंद सम्मान से अलंकृत महेन्द्र दीपक दवेसर और
कादम्बरी मेहरा ने कहा कि इस सम्मान के बाद उनके साहित्य में
पाठकों की नई दिलचस्पी पैदा होगी।
भारतीय उच्चायोग के मंत्री समन्वय आसिफ़ इब्राहिम ने
कहा कि आज की हिन्दी को हमें ऐसा बनाना होगा जिससे युवा पीढ़ी
आसानी से जुड़ सके, चाहे इस प्रक्रिया में भाषा की शुद्धता कम
हो जाए मगर इससे साहित्य प्रासंगिक बनेगा और अधिक से अधिक
लोगों तक पहुंच सकेगा। अभी भी हमारे अधिकतर लेखक अतीत के प्रति
मोहग्रस्त हैं और पुराने ज़माने की बातों में डूबे हुए हैं।
उन्होंने कहा कि मेरा अनुरोध है कि वे नये ज़माने की ज़रूरतों
को समझें और वर्तमान के हिसाब से साहित्य रचना करें।
कथा यूके के महासचिव तेजेन्द्र शर्मा ने कहा कि यह
समारोह ब्रिटेन में बसे एशियाई लेखकों के बीच संवाद का माध्यम
बन रहा है। हिन्दी, अंग्रेज़ी, उर्दू, बांग्ला, पंजाबी सहित कई
भाषाओं के लेखक हमसे जुड़ रहे हैं। कथा यूके द्वारा प्रकाशित
इन लेखकों की प्रतिनिधि रचनाओं से ब्रिटेन में साहित्य
संस्कृति की नई एशियाई छवि उभरी है। उन्होंने पिछले वर्ष के
दौरान दुनियां भर में हुई कथा यूके कि गतिविधियों की जानकारी
देते हुए कहा कि हम विभिन्न समुदायों के बीच संवाद की नई पहल
कर रहे हैं। यह इस आयोजन के इतिहास में यह महत्वपूर्ण अवसर है
जब ब्रिटेन के दो सांसद – बैरी गार्डिनर, वीरेन्द्र शर्मा –
हाउस ऑफ़ कॉमन्स में इसकी मेज़बानी कर रहे हैं। उन्होंने कहा
कि आने वाले वर्षों में कथा यूके साहित्य, संस्कृति से जुड़े
गंभीर विचार विमर्श आयोजित करेगा।
ब्रिटने में लेबर पार्टी की काउंसलर ज़कीया ज़ुबैरी ने
कहा कि हिन्दी उर्दू की साझा संस्कृति को बचाने के लिये
ब्रिटेन में बहुत कुछ करने की ज़रूरत है। इससे हम साहित्य को
उस नई पीढ़ी तक ले जा सकेंगे जो अपनी जड़ों से कट रही है।
महात्मा गांधी अंतर्राष्ट्रीय हिन्दी विश्वविद्यालय के कुलपति
विभूति नारायण राय ने हृषिकेश सुलभ की कहानियों पर विस्तार से
चर्चा की। उन्होंने कहा कि सुलभ हिन्दी के उन गिने चुने
कथाकारों में हैं जिनकी कहानियों में आज का मुस्लिम परिवेश
जीवन्त है। उनकी कहानियों में गज़ब की पठनीयता है जो पाठकों को
देर तक बांधे रखती है।
बीबीसी हिन्दी सेवा की पूर्व प्रमुख अचला शर्मा ने
पद्मानंद साहित्य सम्मान से अलंकृत महेन्द्र दवेसर और कादम्बरी
मेहरा की कहानियों की विस्तार से चर्चा करते हुए कहा कि दोनों
का कथा संसार एक दूसरे से अलग है पर कई मौक़ों पर एक दूसरे के
समानांतर भी चलता है क्योंकि परिवेश साझा है। दीप्ति शर्मा ने
सम्मानित कथाकार हृषिकेश सुलभ की कहानी वसन्त के हत्यारे के
अंशों का नाटकीय पाठ किया। कथाकार सूरज प्रकाश ने हृषिकेश
सुलभ, पत्रकार अजित राय ने महेन्द्र दवेसर और जय वर्मा ने
कादम्बरी मेहरा के मानपत्र पढ़े। समारोह की शुरूआत में
लेखक-फ़िल्मकार निखिल कौशिक ने वन्दना प्रस्तुत की। कार्यक्रम
का संचालन सनराईज़ रेडियो और टीवी की सरिता सभरवाल ने किया।
समारोह में ब्रिटिश सांसद लॉर्ड तरसेम किंग, मोनिका
मोहता (निदेशक नेहरू सेन्टर), सुराकेश शर्मा (उपसचिव–विदेश
मंत्रालय), आनन्द कुमार (हिन्दी एवं संस्कृति अधिकारी), मोहन
कांत गौतम (नीदरलैण्ड), काउंसलर सुनील चोपड़ा, काउंसलर जगदीश
गुप्त, प्रो मुग़ल अमीन, डॉ नज़रुल बोस, बीबीसी हिन्दी के
पूर्व अध्यक्ष कैलाश बुधवार, विजय राणा, मोहन राणा, दिव्या
माथुर, उषा राजे सक्सेना, केबीएल सक्सेना, शमील चौहान, असमा
सूत्तरवाला, सहित इस अवसर पर साहित्य, राजनीति, मीडिया,
व्यवसाय, समाज सेवा एवं अन्य क्षेत्रों से जुड़ी कई हस्तियां
मौजूद थीं।

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