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सरकारी
विज्ञापन व्यवस्था में बदलाव हो
लखनऊ। ऑल इंडिया स्मॉल न्यूज़
पेपर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष शिवशंकर त्रिपाठी ने राज्य सरकार
से मांग की है कि उत्तर प्रदेश के समस्त विभागों, निगमों और
परिषदों से समाचार पत्रों को सीधे मिलने वाले विज्ञापनों को
सूचना विभाग के माध्यम से जारी किए जाने की बाध्यता तुरंत
समाप्त की जाए, अब तक चली आ रही इस व्यवस्था के कारण लघु एवं
मध्यम समाचार-पत्र भुखमरी के कगार पर पहुंच गए हैं। त्रिपाठी
ने राज्य के प्रमुख सचिव सूचना विजय शंकर पांडेय से भेंट कर
उनको पत्र लिखकर कहा है कि यदि इन विज्ञापनों का शीघ्र ही
विकेंद्रीयकरण न किया गया तो उत्तर प्रदेश के इन समाचार-पत्रों
का अस्तित्व समाप्त हो जायेगा।
उन्होंने कहा कि विज्ञापन एजेंसियां
समाचार पत्रों का एडवांस भुगतान लेकर उस धनराशि से अन्य
व्यवसाय करती हैं और लघु समाचार-पत्रों को उनके पास बार-बार
दौड़ना होता है। ऐसे कई उदाहरण हैं कि छोटे समाचार-पत्रों के
भुगतान नहीं हो पाए हैं, ऐसी विज्ञापन एजेंसियों के विरूद्घ
कोई कार्यवाही भी नहीं हुई है। उन्होंने कहा कि कई विज्ञापन
एजेंसियां फर्जी पता देकर करोड़ों रूपए के बिलों के भुगतान
लेकर भाग चुकी हैं। त्रिपाठी ने कहा कि निगमों इत्यादि के
विज्ञापनों की विकेन्द्रीयकरण व्यवस्था समाप्त होने से इस
समस्या पर काबू पाया जा सकता है और लघु समाचार-पत्रों को उनका
हक मिल सकता है जिसको प्राप्त करने के लिए वे संघर्ष कर रहे
हैं।

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