|
कथा यूके
भारत से इंग्लैंड तक का सफर
मुंबई।
इंदु शर्मा कथा सम्मान और कथा यूके आज एक दूसरे के पर्याय हो
चुके हैं। सन् ।995 में भारत में इंदु शर्मा मेमोरियल की नींव
रखी गई थी। संभावनाशील कवियत्री एवं कहानीकार इंदु शर्मा का
अल्पायु में ही कैंसर से जंग लड़ते हुए निधन हो गया था।
तेजेन्द्र शर्मा ने अपनी पत्नी इंदु की यादों को यादगार बनाया
और मुम्बई में 'इंदु शर्मा कथा सम्मान' की शुरूआत की। इसके
महत्व से अभिभूत राहुल देव, विश्वनाथ सचदेव और सिने अभिनेता
नवीन निश्चल ट्रस्टी के रूप में जुड़े। जहां तक मुझे लगता है
भारत का शायद यह पहला ऐसा प्रसिद्ध सम्मान है जिसे एक लेखक
द्वारा अपनी लेखिका पत्नी की स्मृति में किसी कथाकार को दिया
जाता है।
इंदु शर्मा कथा सम्मान समारोह 5 वर्षों तक भारत में एअर
इंडिया के आडिटोरियम में आयोजित किया जाता रहा। यहां
गीतांजलिश्री, धीरेन्द्र अस्थाना, अखिलेश, देवेन्द्र और मनोज
रूपड़ा सम्मानित हुए। इन पांच समारोहों में धर्मवीर भारती,
राजेन्द्र यादव, मनोहर श्याम जोशी, गोविन्द मिश्र, जगदंबा
प्रसाद दीक्षित, कन्हैयालाल नंदन, ज्ञान रंजन और कामतानाथ जैसी
गरिमामय विभूतियों ने पधारकर कार्यक्रम को गरिमा और ऊंचाईयां
प्रदान कीं। परिवार को स्थायित्व देने के उद्देश्य से
तेजेन्द्र शर्मा को भारत और लंदन में से एक देश चुनना पड़ा और
प्राथमिकता देते हुए उन्होंने लंदन को चुना। सो इंदु शर्मा कथा
सम्मान का केन्द्र लंदन हो जाना स्वाभाविक था। इस सम्मान की
सफलता और उसके शिखर पर पहुंचने पर इस सम्मान को अंतर्राष्ट्रीय
स्वरूप मिला और इस बैनर को नाम दिया गया कथा यूके।
कथा यूके यूनाइटेड किंगडम में बसे दक्षिणी एशिया के
लेखकों का आज एक सशक्त समुदाय है। सन 2000 से अंतर्राष्ट्रीय
इंदु शर्मा कथा सम्मान शुरू हुआ और पहली बार यह सम्मान पाने
वाली थीं प्रख्यात लेखिका चित्रा मुदगल। कथा यूके सम्मान 2000
से 2005 तक लंदन के नेहरू सेंटर में दिया जाता रहा। तेजेन्द्र
शर्मा और साथ ही लंदन में रह रहे साहित्यकारों ने इस बात को
महसूस किया कि लंदन की ज़मीन पर भारत के साहित्यकार सम्मानित
हो रहे हैं तो ब्रिटेन के हिन्दी साहित्यकारों के लिये भी एक
सम्मान क्यों न शुरू किया जाए। तेजेन्द्र शर्मा के व्यक्तित्व
की यह विशेषता है कि यदि ऐसे किसी कार्य के लिये उनको विश्वास
में लिया जाए तो वे उस कार्य में अग्रणी भूमिका में आ जाते
हैं। वर्ष 2000 में ही पदमानंद साहित्य सम्मान भी शुरू किया
गया और इसके प्रथम सम्मानित साहित्यकार हुए डाक्टर सत्येन्द्र
श्रीवास्तव।
एक लेखक द्वारा दो सम्मान समारोह आयोजित करना और वह भी
ब्रिटेन में, कितनी बड़ी ज़िम्मेदारी का काम है, यह आप समझ
सकते हैं। वर्ष 2006 में एक ऐसी ऐतिहासिक घटना घटी। इसका किसी
को गु़मान भी नहीं था। वह थी हाउस आफ लॉर्डस में
अंतर्राष्ट्रीय इंदु शर्मा कथा सम्मान का आयोजन। हाउस ऑफ
लॉर्ड्स के इतिहास में यह महत्वपूर्ण घटना है कि वहां पर किसी
भारतीय भाषा का सम्मान समारोह आयोजित किया गया। वहां ये सम्मान
समारोह 3 वर्ष तक होते रहे लेकिन कथा यूके को राजपथ से जनपथ पर
आना अनिवार्य था सो सन 2009 का सम्मान समारोह हाउस ऑफ कामन्स
में आयोजित किया गया और अब 2010 का कथा यूके सम्मान समारोह भी
हाउस ऑफ कॉमन्स में आयोजित होने जा रहा है। कथा यूके एवं उससे
जुड़े लोगों की लगन और मेहनत का परिणाम है कि बिना किसी शोर
शराबे और बिना किसी सरकारी अनुदान के ब्रिटेन की संसद में
हिन्दी का परचम फहरा दिया गया है। संयुक्त राष्ट्र और अमेरिका
में हिन्दी को एक सम्मान और स्थान दिलाने का जो काम भारत सरकार
और हिन्दी के मठाधीश मिल कर नहीं करवा पाये वही काम कथा यूके
ने ब्रिटेन में अकेले कर दिखाया है।
सूरज प्रकाश कथा यूके के भारतीय प्रतिनिधि हैं। पत्रकार
अजित राय सम्मान हेतु मीडिया का काम देखते हैं। भारत में कथा
यूके बिना किसी रूकावट के क्रियाशील है। कथा यूके मुंबई में वी
केयर से जुड़ी है जहां कैंसर के मरीज़ों के लिये नकद, दवा आदि
के रूप में सहायता करती है, कथा यूके क्राई संस्था से भी जुड़ी
है जहां हर वर्ष वहीं के दो बच्चों को गोद लेकर एक वर्ष के
लिये उनके खाने-पीने, पढ़ने लिखने आदि का खर्च वहन करती है।
कथा यूके 'गाडगे महाराज की धर्मशाला से जुड़ी है जहां कैंसर
पीड़ितों के इलाज एवं उनके साथ्र रहने वाले उनके तिमारदारों को
रखा जाता है और उनको रियायती दरों पर भोजन और आवास उपलब्ध
कराया जाता है। इस धर्मशाला में वहां रहने वाले मरीजों एवं
उनके तिमारदारों को अन्नदान, धनदान करके उनकी ज़रूरतों को पूरा
करने में सहयोग करने के लिये प्रयत्नशील है। कथा यूके घाटकोपर,
मुंबई में स्थित मानव जीवन सेवा ट्रस्ट से जुड़ी है जहां उसने
अनाथों के लिये वस्त्रदान किये जो अनाथों के साथ-साथ
आदिवासियों में भी वस्त्रों को वितरित करने का कार्य करती है।
कथा यूके लंदन में और भारत में आने वाले हिन्दी
साहित्यकारों के सम्मान में वृहद साहित्यिक गोष्ठियों का आयोजन
करती आ रही है और इस तरह से देश-विदेश में साहित्यकारों में
आपसी विचार-विमर्श से समस्याओं के समाधान खोजने के प्रयास किये
जाते हैं। किसी संस्था को सतत् 16 वर्षों तक निर्बाध रूप से
चलाना आसान नहीं है और कार्यक्रम के स्तर को लगातार शीर्ष पर
बनाये रखना तो और भी दुष्कर कार्य है। कथा यूके, लेखकों के चयन
में इस बात का विशेष ध्यान रखती है कि रचना का सम्मान हो और
साथ ही उसके सृजनकर्ता का भी। कथा यूके अपनी पारदर्शिता के
लिये जानी जाती है जिसका अन्दाज़ इसीसे लगाया जा सकता है कि
सामान्य-ज्ञान की प्रतियोगिताओं की कई पत्रिकाओं में
अंतर्राष्टीय इंदु शर्मा कथा सम्मान से संबंधित सवाल पूछे जाते
हैं।
पाठकों के मन में यह जिज्ञासा हो सकती है कि कथा यूके
ने अपनी 16 वर्ष की साहित्यिक सम्मान यात्रा में किन लेखकों को
सम्मानित किया है। इससे इन सम्मानित लेखकों के नाम जुड़े
हैं-गीतांजलिश्री, धीरेन्द्र अस्थाना, अखिलेश, देवेन्द्र, मनोज
रूपड़ा, चित्रा मुदगल, संजीव, ज्ञान चतुर्वेदी, एसआर हरनोट,
विभूति नारायण राय, प्रमोद कुमार तिवारी, असग़र वजाहत, महुआ
माजी, नासिरा शर्मा, भगवानदास मोरवाल एवं 2010 के सम्मान
विजेता हृषीकेश सुलभ। इसी प्रकार लंदन में पदमानन्द साहित्य
सम्मान से सम्मानित कवि एवं लेखक इस प्रकार हैं, डाक्टर
सत्येन्द्र श्रीवास्तव, दिव्या माथुर, भारतेन्दु विमल, नरेश
भारतीय, अचला शर्मा, उषा राजे सक्सेना, गोविन्द शर्मा, गौतम
सचदेव, उषा वर्मा, मोहन राणा और वर्ष 2010 के सम्मानित रचनाकार
हैं कादंबरी मेहरा और महेन्द्र दवेसर।
ब्रिटेन की कई संस्थाएं कथा यूके के साथ मिल कर
कार्यक्रम आयोजित करती हैं। पिछले कुछ सालों से लंदन में
काउंसलर ज़कीया ज़ुबैरी द्वारा संचालित संस्था एशियन कम्युनिटी
आर्ट्स के साथ कथा यूके हिन्दी-उर्दू कहानी, कविता एवं ग़ज़ल
आदि से जुड़े कार्यक्रम आयोजित कर रही है। समुद्र पार रचना
संसार (प्रवासी कहानी संग्रह), प्रवासी हिन्दी ग़ज़ल के
अतिरिक्त कहानियों, उपन्यास एवं संगीत की ऑडियो पुस्तकें
प्रकाशित की गई हैं। बर्मिंघम की संस्था गीतांजलि हर वर्ष कथा
यूके के सम्मानित साहित्यकारों का सम्मान स्थानीय काउंसिल जनरल
के कार्यालय में करती है। डाक्टर कृष्ण कुमार एवं जय वर्मा कथा
यूके के साथ पूरा सहयोग करते हैं।
पाठक सोच रहे होंगे कि आख़िर मैंने कथा यूके का यह
ब्यौरा आप लोगों के समक्ष क्यों रखा, तो इसका उत्तर यह है कि
विदेश की सरज़मीं पर किस तरह से एक भारतीय लेखक ने हिन्दी को
सम्मान दिलाया है और मुझे इस बात का गर्व है कि मैं कथा यूके
की एक सामान्य सी कार्यकर्ता हूं और स्वयं को इससे इसलिये भी
जुड़ा महसूस करती हूं क्योंकि यह सम्मान एक नारी यानि इंदु
शर्मा से जुड़ा है। इससे सुकून मिलता है कि साहित्य जगत से
लगातार जुड़े रहने का एक सशक्त ज़रिया है कथा यूके। रचना और
उसके सृजनकर्ता का सम्मान करने का एक बड़ा मंच है 'कथायूके
सम्मान'। आखिर कथायूके लंदन में सबसे सम्मानित सदन हाउस ऑफ लॉर्डस में भी हिंदी गूंजी है और 2010 के कथायूके सम्मान के लिए भी हाउस ऑफ कॉमंस ने स्थान दिया है।

|