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ओजस्वी धर्मनिष्ठ मोहन जोशी नहीं रहे!

विहिप, संघ, हिंदू और शिक्षा समाज में भारी शोक

मोहन जोशी को श्रद्धांजलि देने वालों का तांता

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Monday 4 December 2017 02:04:45 AM

mohan joshi

नई दिल्ली/ कोटा। विश्व हिंदुत्व और सनातन धर्म की प्रतिष्ठा शिक्षा एवं चरित्र निर्माण के महान कार्यकलापों के लिए अपना जीवन समर्पित करने वाले संघ और विश्व हिंदू परिषद के विख्यात एवं ओजस्वी नेता कवि संपादक मोहन जोशी आज नहीं रहे। वे 83 वर्ष के थे और विहिप के केंद्रीय कार्यालय संकट मोचन आश्रम रामकृष्णपुरम नई दिल्ली में उन्होंने अंतिम श्वाँस ली। राजस्थान के कोटा जिले में रामगंज मंडी तहसील के खैराबाद गांव में 13 दिसंबर 1934 को एक किसान और पूजा-पाठी के घर में जन्में मोहन जोशी के निधन से विश्व हिंदू परिषद बेहद शोकाकुल है और उनके विभिन्न क्षेत्रों में योगदान को यादकर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की जा रही है। विहिप भाजपा और संघ परिवार के दिग्गज़ लोग उन्हें श्रद्धांजलि देने पहुंचे हैं। विश्व हिंदू परिषद के महामंत्री चंपत राय ने बताया कि राजस्थान विश्वविद्यालय जयपुर से राजनीति विज्ञान में स्नातकोत्तर, रशियन भाषा में डिप्लोमा तथा हिंदी साहित्य सम्मेलन प्रयाग से साहित्यरत्न मोहन जोशी का संस्कृत, गुजराती, मराठी, बांग्ला और उड़िया भाषा पर बड़ा अधिकार था और वे बहुत ओजस्वी वक्ता के रूप में भी प्रसिद्ध थे।
मोहन जोशी विद्यार्थी जीवन में खेलकूद, अभिनय, भाषण, वाद-विवाद प्रतियोगिताओं में अपने विद्यालय का प्रतिनिधित्व करते थे। प्रारंभिक काल से ही सामाजिक, आध्यात्मिक एवं जनसेवा कार्यों में उनकी रुचि और सहभागिता रही। वे गौरक्षा आंदोलन और आचार्य बिनोवा भावे के भूदान आंदोलन में शामिल रहे। लोकनायक जयप्रकाश नारायण से प्रेरित सम्पूर्ण क्रांति आंदोलन एवं आपातकाल में उन्होंने राजस्थान में विद्यार्थी परिषद के प्रांत संगठन मंत्री के रुपमें कार्य किया। विद्यार्थी परिषद के प्रांत संगठन मंत्री रहते हुए त्रैमासिक पत्रिका तरुण शक्ति एवं विद्यार्थी हुंकार पाक्षिक पत्र का भी उन्होंने अनेक वर्ष तक संपादन किया। वर्ष 1978 से 1985 तक जयपुर से प्रकाशित अनंत मंगल मासिक पत्रिका के भी वे संपादक रहे। वे पांच वर्ष की उम्र से ही संघ की शाखा में जाने लगे थे और मोहन जोशी ने तीनों संघ शिक्षा वर्ग प्रचारक बनने के बाद ही किए। वर्ष 1957 में विस्तारक के नाते उन्हें सर्वप्रथम झालावाड़ जिले में भेजा गया, फिर वहीं जिला प्रचारक तत्पश्चात जयपुर प्रांतीय कार्यालय प्रमुख एवं सायं शाखाओं के भाग प्रचारक रहे। सन् 1965 से 1970 तक वे जयपुर महानगर प्रचारक साथ ही साथ प्रांतीय कार्यालय प्रमुख रहे और 1971 से 1977 तक विद्यार्थी परिषद के प्रांत संगठन मंत्री एवं राजस्‍थान में आदर्श विद्या मंदिर का व्यवस्थापन कार्य किया।
विश्व हिंदू परिषद के महामंत्री चंपत राय कहते हैं कि मोहन जोशी ने भारतीय जनसंघ कार्यालय की देखभाल से लेकर अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के प्रांत संगठन मंत्री, आदर्श विद्या मंदिर के उपाध्यक्ष एवं प्रबंधक, राजस्थान के सभी विद्यालयों की देखभाल, विवेकानंद केंद्र, कन्याकुमारी के निर्माण हेतु धन संग्रह एवं उसका हिसाब-किताब, भारतीय मजदूर संघ आदि के कार्य विस्तार में महत्वपूर्ण योगदान दिया, यह सब करते हुए उनके साथ जयपुर संघ कार्यालय प्रमुख और सायं शाखाओं का काम भी सदा जुड़ा रहा। आपातकाल में मोहन जोशी ने जहां एक ओर सत्याग्रह के लिए युवकों को तैयार किया, वहीं जेल में बंद लोगों के परिजनों से भी सम्पर्क बनाए रखा। चंपत राय बताते हैं कि आपातकाल की समाप्ति के पश्चात जुलाई 1977 में मोहन जोशी को राजस्थान राज्य का विश्व हिंदू परिषद का प्रांत संगठन मंत्री बनाया गया। इस कालखंड में उन्होंने अजमेर जिले के ब्यावर क्षेत्र में अपनी शक्तियों का केंद्रीयकरण किया और दस वर्ष तक सतत् प्रयत्न करके चौहानवंशीय मुसलमानों के साथ निकट संपर्क स्थापित किया, परिणामस्वरूप इन हजारों मुस्लिम परिवारों ने अपने पूर्वजों की मूल परंपरा को स्वीकार किया और पुन: आशापुरा माता के उपासक बन गए एवं अपने घरों में हिंदुत्व के महान योद्धा पृथ्वीराज चौहान के चित्र लगा लिए। इस कार्य से मोहन जोशी बहुत विख्यात हुए और इस कारण कई समाचार पत्रों ने उनके साक्षात्कार तथा लेख प्रकाशित किए।
चंपत राय बताते हैं कि वर्ष 1984 में विश्व हिंदू परिषद में परावर्तन विभाग प्रारंभकर मोहन जोशी को अखिल भारतीय प्रमुख बनाया गया था, यही कार्य विश्व हिंदू परिषद में धर्मप्रसार के रूप में जाना जाता है। मोहन जोशी ने देश में भ्रमण कर हजारों लोगों को हिंदू धर्म में वापस आने को प्रेरित किया और इस कार्य में उन्हें सफलता मिली। वे यह समझाने में सफल रहे कि भारत में जो भी मुसलमान या ईसाई हैं, वे यहीं के मूल निवासी हैं, उन्हें हिंदू धर्म में वापस लाने का जो कार्य कभी स्वामी श्रद्धानंद ने किया था, उसे मोहन जोशी ने ही संगठित रूप से आगे बढ़ाया। इस कार्य के लिए देश के हर प्रांत में उन्होंने समिति तथा सैकड़ों जिलों में संयोजक बनाए। राममंदिर आंदोलन तीव्र होने पर उन्होंने बंगाल, असम और ओडिशा में शिलापूजन का दायित्व भी निभाया। चंपत राय कहते हैं कि मोहन जोशी साहित्यिक रुचि के व्यक्ति थे। वे छात्र जीवन में स्थानीय कवि सम्मेलनों में प्राय: भाग लेते थे, किंतु प्रचारक बनने पर उनका इधर से ध्यान हट गया, फिर भी चीन और पाकिस्तान के युद्ध के बाद उनकी कविताओं की पुस्तक 'भारत की पुकार' प्रकाशित हुई, जिसके लिए काका हाथरसी और तत्कालीन रक्षामंत्री जगजीवन राम ने उन्हें शुभकामना संदेश भेजे। दीनदयाल उपाध्याय के देहांत पर उन्होंने व्यथित होकर एक ही रात में 51 कविताएं लिखीं। वे दीवाली और वर्ष प्रतिपदा पर एक नई कविता लिखकर अपने परिचितों को भेजा करते थे।
मोहन जोशी ने वर्ष 2012 में 'भारत जागरण संस्थान' गठित किया और उसके माध्यम से 'भारत जागरण' पाक्षिक बुलेटिन प्रकाशित किया, जिसे वे अप्रैल 2017 तक प्रकाशित कराते रहे। धर्मप्रसार कार्यवृद्धि के लिए उन्होंने धर्मनारायण शर्मा के माध्यम से भारतीय जनसेवा संस्थान नामसे एक समिति भी पंजीकृत कराई। सादगी की प्रतिमूर्ति मोहन जोशी ने समाज को जागरूक करने हेतु देश की पुकार कविता संग्रह, सफल जीवन की कहानियां, धर्मप्रसार एक राष्ट्रीय कर्तव्य, रमण गीतामृत, पूज्य देवराहा बाबा की अमृतवाणी, परावर्तन राष्ट्र रक्षा का महामंत्र, सफेद चोला काला दिल, संसद में धर्मांतरण पर बहस, धर्मांतरण राष्ट्रद्रोह का षडयंत्र, भारत में ईसाई साम्राज्य की स्थापना हेतु पोप एवं अमेरिका का षडयंत्र, चर्च का चक्रव्यूह, ईसाई मायाजाल से सावधान, मुस्लिम आरक्षण राष्ट्रघाती विषवृक्ष, बारूद के ढेर पर हिंदुस्थान, उत्तिष्ठित जाग्रत, हिंदुओं के सीने पर कानूनी रायफल, जागो जगाओ देश बचाओ, पाप का गढ़ और बच्चों के शिकारी, वेटिकन के भेड़िए, विजय भव:, चैतन्य प्रवाह एवं जीवन प्रवाह कविता संग्रह, स्वतंत्र भारत के शूरवीर सेनानी, कारगिल युद्ध के बलिदानी वीरों की गाथा, उपनिषद कथामृत और उनकी अंतिम पुस्तक महाभारत की दिव्य आत्माएं का प्रकाशन अगस्त 2013 में हुआ। राष्ट्रीय महत्व के समाचारों का विशेष रूपसे चर्च और इस्लाम की भारतविरोधी गतिविधियों के समाचारों का संकलन उनकी रुचि का विषय था। उन्होंने इसका एक विशाल संग्रह किया। वे अध्ययन करते थे, विषयवस्तु का चयन करते थे और स्वयं टाइप कराते थे। टाइप कराना, संपादन करना, छपवाना वे स्वयं करते थे।
चंपत राय बताते हैं कि वर्ष 2011 में विश्व हिंदू परिषद की प्रन्यासी मंडल की बैठक एर्णाकुलम् में हुई थी, हम आठ-दस कार्यकर्ता राजधानी एक्सप्रेस ट्रेन से दिल्ली लौट रहे थे, सबके कोच अलग-अलग थे, बीच-बीच में जहां से जलपान, भोजन आता था, सभी को वितरित करने के लिए कोई न कोई जाता था, जुगलकिशोर दोपहर का भोजन देने के लिए गए तो सहयात्रियों ने बताया कि मोहन जोशीजी ने तो प्रात:काल का जलपान भी नहीं किया, बार-बार नमक खा रहे हैं। मोहन जोशी ने लघुशंका के लिए जाने की इच्छा व्यक्त की, परंतु स्वयं उठ नहीं सके और जुगलजी ने प्रयासपूर्वक उन्हें उठाया, तभी ध्यान में आ गया कि शरीर पर लकवे का प्रकोप हो गया है। ट्रेन में ही विचार हुआ कि इन्हें मुंबई के पनवेल उतार लिया जाए। तत्काल मुंबई के कार्यकर्ताओं को फोन किए गए, ट्रेन के गार्ड को बताया गया तो अगले ही स्टेशन पर रेलवे के डॉक्टर और पुलिस उपस्थित थी, डॉक्टर ने उन्हें ट्रेन में ही चेक किया। वे चाहते थे कि मोहन जोशी को तुरंत यहीं अस्पताल में भर्ती कराया जाए, परंतु हमने उन्हें पनवेल में उतारकर मुंबई में इलाज कराने का प्रस्ताव किया, जिसे सबने मान लिया। पनवेल रेलवे स्टेशन पर मुंबई के कार्यकर्ता एम्बुलेंस के साथ उपस्थित थे। जोशीजी को सीधे डॉ सुनील अग्रवाल के अस्पताल पहुंचा दिया गया। डॉक्टर का परिवार भी मूलत: कोटा का होने तथा संघ के संबंधों के कारण वे मोहन जोशी के प्रति श्रद्धा रखते हैं। चिकित्सा में पता लगा कि मोहन जोशी के मस्तिष्क के रक्तप्रवाह में अवरोध हुआ है। लगभग दो महीने वे वहां रहे, सब प्रकार से ठीक हो गए, दिल्ली आए, उनके प्रवास तो बंद हो गए, तथापि वे नियमित रूपसे शाखा जाते थे।
पिछले एक साल से उनका कमरे से बाहर निकलना भी बंद था, उनकी सेवा में दो सेवक बालमुकुंद एवं प्रिय चंदन रहते थे। आज 4 दिसंबर प्रात:काल 04.45 बजे बालमुकुंद ने सूचित किया कि सारी रात उनकी श्वाँस बहुत तेज आवाज़ के साथ चल रही थी, सेवक ने प्रात:काल 04.30 बजे पाया कि उनकी श्वाँस की आवाज़ अचानक बंद हो गई है, शरीर ठंडा हो गया था, चिकित्सक को बुलाया गया, चिकित्सक ने बता दिया कि शरीर शांत हो चुका है, मोहन जोशी प्रात: ब्रह्ममुहूर्त में ब्रह्मलीन हो गए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, भाजपा के वरिष्ठ नेता लालकृष्‍ण आडवाणी, संघ प्रमुख मोहन भागवत, भाजपा अध्यक्ष अमित शाह, उत्तर प्रदेश भाजपा के अध्यक्ष महेंद्रनाथ पांडेय, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, उत्तर प्रदेश भाजपा के मीडिया प्रमुख हरीशचंद्र श्रीवास्तव हरीशजी, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के नेता इंद्रेश कुमार, सरकार्यवाह सुरेश भय्याजी जोशी, सुरेश सोनी, दत्तात्रय होसबले, डॉ कृष्ण गोपाल, वी भगैय्या, स्वांत रंजन, मुकुंद सीआर, सुनील कुलकर्णी, जगदीश प्रसाद, अनिरुद्ध देशपांडे, अरुण कुमार, सुनील देशपांडे, पराग अभ्यंकर, राजकुमार मटाले, गुणवंत कोठारी, मंगेश भेंडे, अनिल ओक, डॉ मनमोहन वैद्य, नरेंद्र कुमार, सुरेश चंद्र, विनोद कुमार, अद्वैत चरण दत्त, उपमुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश केशव मौर्य और डॉ दिनेश शर्मा, विहिप नेता प्रवीण तोगड़िया, विहिप प्रवक्ता विनोद बंसल, राजस्‍थान, मध्य प्रदेश के संघ और विहिप के नेताओं, शिक्षण संस्‍थानों ने उनके निधन पर श्रद्धांजलि अर्पित की है।

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