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तमिलनाडु में और भी चक्रवाती तूफान का अलर्ट

तमिलनाडु और कर्नाटक के अनेक क्षेत्रों में हालात गंभीर

जल निकासी में और भी ज्यादा वृद्धि होने की संभावना

स्वतंत्र आवाज़ डॉट कॉम

Sunday 3 December 2017 12:25:30 AM

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चेन्नई। तमिलनाडु और कर्नाटक के अनेक क्षेत्रों में चक्रवाती तूफान और भारी बारिश से हालात गंभीर हैं और केंद्रीय जल आयोग ने चौकसी बरतने की सलाह दी है। तमिलनाडु के कृष्‍णागिरी जिले में दक्षिण पेन्‍नार में पोन्‍नाइयारू नदी पर कृष्‍णागिरी बांध के कपाट टूटने के मामले में केंद्रीय जल आयोग ने रिपोर्ट प्रस्तुत कर दी है। रिपोर्ट के अनुसार सितंबर 2017 में भारी वर्षा के कारण कर्नाटक और आंध्र प्रदेश में पोन्‍नाइयार नदी के ऊपरी जलग्रह में कृष्‍णागिरी बांध का जलाशय पूर्ण स्‍तर पर पहुंच गया था और उसने नीचे की ओर पानी छोड़ना शुरू कर दिया था, जिसके कारण निचले जलाशयों में भी पानी का प्रवाह बढ़ गया और सथानुर बांध भी पूर्ण जलाशय स्‍तर के करीब पहुंच गया था, ऐसी स्थि‍ति में 29 नवंबर 2017 को कृष्‍णागिरी बांध का एक कपाट क्षतिग्रस्‍त हो गया और पानी क्षतिग्रस्‍त कपाट से बहने लगा। परियोजना प्राधिकारियों तथा जिला प्राधिकारियों ने भी क्षतिग्रस्‍त कपाट पर अधिक दवाब को कम करने के लिए अतिरिक्‍त ढलान खोल दिए। जिला प्राधिकारियों ने क्षतिग्रस्‍त कपाट से उत्‍पन्‍न स्थिति के बारे में निचले जिलों को भी चेतावनी दे दी थी।
केंद्रीय जल आयोग यानी सीडब्‍ल्‍यूसी ने उपलब्‍ध आंकड़ों एवं परियोजना प्राधिकारियों से प्राप्‍त आंकड़ों के आधार पर सूचना का विश्‍लेषण किया था। सीडब्‍ल्‍यूसी के विश्‍लेषण से पता चला है कि 29 नवंबर 2017 को सुबह 6 बजे कृष्‍णागिरी बांध में क्षति के कारण 170 क्‍यूमेक औसतन अधिक पानी बह रहा है। जलाशय में भी लगभग 10 क्‍यूमेक पानी बह रहा है। इससे पानी के स्‍तर में 1.2 एम की कमी आई। ढलान का आकार 12.19x610 एम है। ढलान की ऊंचाई 6 एम है, यदि निकासी का यही प्रवाह बनाए रखा जाए तो पानी को ढलान के उच्‍च स्‍तर तक आने में लगभग 96 घंटे लगेंगे, क्‍योंकि जलाशय में पानी का स्‍तर गिरना शुरू हो गया है। संभावना है कि कपाट से पानी की निकासी घटती जाएगी। केंद्रीय जल आयोग का अनुमान है कि क्षतिग्रस्‍त द्वार एवं ढलान से निकासी पहले ही अधिकतम स्‍तर से गुजर चुकी है और अब क्‍योंकि जलाशय में पानी का स्‍तर घट गया है, धीरे-धीरे पानी के बहाव में कमी आएगी।
सीडब्‍ल्‍यूसी की रिपोर्ट के अनुसार सथानुर बांध कृष्‍णागिरी बांध के नीचे की ओर है, चूंकि सथानुर बांध पहले ही अपने पूर्ण जलाशय स्‍तर पर था, कृष्‍णागिरी जलाशय के क्षतिग्रस्‍त कपाट से जल प्रवाह की प्रत्‍याशा में सथानुर परियोजना प्राधिकारियों ने 29 नवंबर 2017 की सांय पानी छोड़ना शुरू कर दिया। उनतीस नवंबर से औसत निकासी लगभग 64 क्‍यूमेक थी। इससे सथानुर बांध का जलाशय स्‍तर लगभग 0.30 एम कम हो गया है। तीस नवंबर 2017 को सथानुर बांध में उपलब्‍ध बाढ़ कुशन 16 एमसीएम है। अगले 96 घंटे के दौरान ऊपरी बांध से लगभग 170 क्‍यूमेक की निरंतर निकासी से पानी की आवक लगभग 57 एमसीएम के करीब हो जाएगी। इसका मतलब है कि बांध स्‍तर को पूर्ण जलाशय स्‍तर तक रखने के लिए अगले चार दिनों में सथानुर बांध को लगभग 170 क्‍यूमेक पानी छोड़ना होगा, जिससे नीचे की ओर बहाव की कोई समस्‍या नहीं होगी। ऐसी स्थिति पैदा हुई है कि कोमोरीन क्षेत्र में चक्रवाती तूफान बन गया है, जिसके कारण तमिलनाडु में दूर-दूर तक बरसात हो रही है और 4 दिसंबर 2017 के आस-पास एक और चक्रवाती तूफान बनने की संभावना है। बीच में पड़ने वाले जलग्रही क्षेत्र में वर्षा पर गहरी नज़र रखनी होगी। पोन्‍नाइयार बेसिन कुंड के लिए आईएमडी चेन्‍नई के पूर्वानुमान इस प्रकार हैं-
तमिलनाडु कर्नाटक राज्य में दूसरे दिन अर्थात 2 और 3 दिसंबर 2017 के बीच 26-50 एमएम वर्षा के मद्देनजर 250 क्‍यूमेक के करीब जल निकासी में वृद्धि होने की संभावना है। केंद्रीय जल आयोग के वेझवाचानुर स्थित गैज एंड डिस्‍चार्ज स्‍टेशन पर, जोकि सथानुर बांध के 22 किलोमीटर नीचे की ओर है, सथानुर बांध से होने वाली निकासी का प्रभाव दिखाई देना शुरू हो गया है। उनतीस नवंबर 2017 की सांय 9 बजे से 30 नवंबर 2017 की सुबह 9 बजे तक 12 घंटों के दौरान पानी के स्‍तर में 1.25 एम की वृद्धि हुई है, जिसमें औसत प्रवाह लगभग 135 क्‍यूमेक रहा है। इसका प्रभाव अगले 12 घंटों के दौरान पोन्‍नाइयार नदी पर सीडब्‍ल्‍यूसी द्वारा संचालित एक अन्‍य गैज स्‍टेशन विल्‍लुपुरम में भी देखने को मिलेगा। यदि बरसात के साथ ही पानी की निकासी में 250 क्‍यूमेक की वृद्धि होती है तो अगले 96 घंटों के दौरान इन स्‍टेशनों पर लगभग 0.5 से 0.6 एम तक की और बढ़ोतरी देखने में आएगी। कुड्डालोर नगर के पास नदी के समुद्र में गिरने वाले स्‍थान पर निचले ढलान मार्ग में पूर्ण चंद्रमा के कारण उच्‍च ज्‍वारभाटे तथा चक्रवाती तूफान का प्रभाव पड़ सकता है, जिससे समुद्र के प्रवाह में व्‍यवधान आने की संभावना है तथा संगम के पास कुछ जलप्‍वालन भी हो सकता है जो ज्‍वारभाटे की स्थिति पर निर्भर है।
सीडब्‍ल्‍यूसी की रिपोर्ट के अनुसार कृष्‍णा बांध को पहुंची क्षति के कारण स्थिति और नहीं बिगड़ी है, चूंकि ढलान में से नीचे की ओर पानी का पहले ही अधिकतम बहाव हो चुका है और अब पानी के प्रवाह में कमी आएगी, परंतु ‘ओक्‍ची’ चक्रवाती तूफान के साथ कनार्टक के क्षेत्र में बरसाती प्रभाव की गहन निगरानी रखनी पड़ेगी। कृष्‍णागिरी बांध से अधिक निकासी के कारण सथानुर बांध में पानी की आमद अधिकांशत: सामान्‍य रहेगी, बशर्ते कि बीच के जलग्रहों में बरसात का असर न पड़े। बरसात का पूर्वानुमान इस क्षेत्र में लगभग 25-50 एमएम है, जिसके कारण बांध में पानी की आमद तेजी से बढ़ सकती है, जिससे रिपोर्ट में सावधानीपूर्वक निगरानी रखे जाने की सलाह दी गई है। सथानुर बांध के निचले स्‍थानों तथा समुद्र के संगम के निकट सथानुर से निकासी तथा समुद्री ज्‍वारभाटे के प्रभाव की निगरानी रखनी होगी और इसके साथ ही बंगाल की खाड़ी में होने वाली गतिविधियों को भी ध्‍यान में रखना होगा। भारी बरसात से होने वाले प्रभाव को ध्‍यान में रखते हुए अगले 5-7 दिन में पूरे पोन्‍नाइयार सिस्‍टम की गहरी निगरानी रखनी होगी।
कृष्‍णागिरी जलाशय का निर्माण तमिलनाडु के कृष्‍णागिरी जिले के कृष्‍णागिरी नगर से लगभग 10 किलोमीटर दूर पेरियामूथूर गांव के पास पोन्‍नाइयार नदी पर किया गया था। यह 12O 28’ उत्तरी अक्षांश तथा 78O 11’ पूर्वी देशांतर पर स्थित है। गौरतलब है कि केआरपी बांध का निर्माण मार्च 1955 में शुरू हुआ और नवंबर 1957 में पूर्ण कर सिंचाई के लिए खोल दिया गया था। जलाशय की संग्रहण क्षमता 47.156 एमसीएम है। सथानुर बांध का निर्माण तमिलनाडु के तिरुवन्‍नामलई जिले में तिरुवन्‍नामलई नगर के पास वर्ष 1957 के दौरान पूरा किया गया था। यह 12O 12’ उत्तर और 78O 35’ 30” पूर्व में स्थित है। इसकी सकल संग्रहण क्षमता 228.91 एमसीएम है। केंद्रीय जल आयोग ने सथानुर बांध पर पानी की आमद का पूर्वानुमान 2017 से उत्तरपूर्वी मानसून सत्र के बाद शुरू किया है। कृष्‍णागिरी बांध और सथानुर बांध के बीच पड़ने वाला जलग्रह क्षेत्र 2,000 वर्ग किलोमीटर है। दोनों बांधों के बीच की दूरी 117 किलोमीटर है।

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