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हमारा संविधान जीवंत दस्तावेज़-कोविद

भारत का संविधान पारित किए जाने की वर्षगांठ

'संविधान को जनता जीवन में सार्थक बनाए'

स्वतंत्र आवाज़ डॉट कॉम

Monday 27 November 2017 03:00:55 AM

president ramnath kovid at the inauguration of the constitution day celebrations

नई दिल्ली। राष्ट्रपति रामनाथ कोविद ने 26 नवंबर 1949 को भारत का संविधान पारित किए जाने की वर्षगांठ पर नई दिल्ली में सर्वोच्च न्यायालय के संविधान दिवस समारोह का उद्घाटन किया। राष्ट्रपति ने इस अवसर पर कहा कि हमारा संविधान गतिहीन नहीं है, बल्कि एक जीवंत दस्तावेज़ है। उन्होंने कहा कि संविधान सभा इस बात के प्रति सजग थी कि संविधान को नए धागों से अंतर गुंथित करने की आवश्यकता पड़ेगी। उन्होंने कहा कि गतिशील जगत में लोगों की सेवा करने का यह उत्कृष्ट तरीका है। उन्होंने कहा कि इन वर्षों में संसद ने संविधान में अनेक व्यावहारिक और महत्वपूर्ण संशोधन किए हैं। गौरतलब है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी संविधान दिवस पर देश को संबोधित करते हुए संविधान निर्माता बाबासाहब डॉ भीमराव अंबेडकर को देश की ओर से विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित की है।
राष्ट्रपति रामनाथ कोविद ने कहा कि संविधान एक अमूर्त आदर्श मात्र नहीं है, इसे देश की हर गली, हर गांव और हर मोहल्ले में आम जनता के जीवन को सार्थक बनाना होगा। उन्होंने कहा कि संविधान को रोजमर्रा के अस्तित्व से जुड़ना होगा और उसे अधिक सुरक्षित बनाना होगा। राष्ट्रपति ने कहा कि संवैधानिक परियोजना का केंद्र बिंदु विश्वास था एक-दूसरे पर विश्वास, संस्थानों के बीच विश्वास, देशवासियों की अच्छाई में विश्वास और भावी पीढ़ियों की बुद्धिमत्ता पर विश्वास। उन्होंने कहा कि विश्वास की यह भावना संवैधानिक शासन में अंतर्निहित है। राष्ट्रपति ने कहा कि हमारा संविधान राजनीतिक, आर्थिक और सामाजिक लोकतंत्र का एक उत्कृष्ट ढांचा तैयार करता है, यह ढांचा तीन सिद्धांतों या स्तंभों स्वतंत्रता, समानता और भाईचारे पर आधारित है।
रामनाथ कोविद ने कहा कि समाज के निचले स्तर पर संविधान के मूल्यों और सामाजिक, आर्थिक तथा राजनीतिक विकास के परिणामों के प्रति बुनियादी वचनबद्धता अवश्य जारी रहनी चाहिए। उन्होंने कहा कि इसके लिए यह जरूरी है कि हम अधीनस्थ संस्थानों को सभी क्षेत्रों में शीर्ष स्थानों के समकक्ष लाने के लिए निरंतर प्रयास करें। कार्यक्रम में राष्ट्रपति रामनाथ कोविद को भारत के प्रधान न्यायधीश न्यायमूर्ति दीपक मिश्रा ने दो पुस्तकों ‘द कांस्टिट्यूशन एट 67’ और ‘इंडियन ज्यूडिशियरीः एनुअल रिपोर्ट 2016-17’ की प्रथम प्रतियां भेंट कीं। गौरतलब है कि संविधान दिवस पर देश के और हिस्सों में भी अनेक कार्यक्रम आयोजित किए गए, जिनमें संविधान निर्माता बाबासाहब डॉ भीमराव अंबेडकर को विभिन्न तरीके से विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित की गईं।

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