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खाद्य पदार्थ उद्योग एक बड़ा नियोक्ता-कोविद

दिल्ली में विश्व खाद्य भारत सम्मेलन-2017 का समापन

'खाद्य प्रसंस्करण की गुणवत्ता को और बेहतर बनाएं'

स्वतंत्र आवाज़ डॉट कॉम

Monday 6 November 2017 01:34:41 AM

president ramnath kovid

नई दिल्ली। राष्ट्रपति रामनाथ कोविद ने नई दिल्ली में ‘विश्व खाद्य भारत सम्मेलन-2017’ के समापन में कहा है कि इस सम्‍मेलन से भारत के खाद्य और खाद्य प्रसंस्करण उद्योग में उपलब्‍ध व्‍यापक एवं असीम अवसरों को प्रदर्शित करने में मदद मिली है, यह ‘भारतीय व्‍यंजनों का कुंभ मेला’ साबित हुआ है। राष्ट्रपति ने कहा कि खान-पान वास्‍तव में संस्कृति के साथ-साथ वाणिज्यि‍क संभावनाओं को भी दर्शाता है, भारत में मौजूदा समय में 370 अरब अमेरिकी डॉलर मूल्‍य के खाद्य पदार्थों की खपत होती है, वर्ष 2025 तक यानी एक दशक से भी कम समय में यह आंकड़ा 1 ट्रिलियन डॉलर के स्‍तर पर पहुंच जाने की उम्मीद है। राष्ट्रपति ने सम्मेलन की शानदार और सही अर्थों में ऐतिहासिक सफलता के लिए आयोजकों को बधाई दी।
राष्ट्रपति रामनाथ कोविद ने कहा कि भारत की समूची खाद्य मूल्य श्रृंखला में व्‍यापक अवसर उपलब्‍ध हैं, जिनमें फसल कटाई उपरांत सुविधाएं, रसद, कोल्‍ड स्‍टोरेज श्रृंखला और विनिर्माण शामिल हैं। उन्होंने कहा कि यह एक ऐसा क्षेत्र है, जिसमें व्‍यापक कारोबारी इच्‍छा निहित है, खाद्य पदार्थ उद्योग एक बड़ा नियोक्ता हो सकता है और यह संभावना भारत जैसे देश के लिए विशेष मायने रखती है, क्‍योंकि यहां काफी बड़ी तादाद में युवा हैं और यह भी उल्लेखनीय है कि महिलाएं खाद्य क्षेत्र में बड़ी तल्‍लीनता से जुटी हुई हैं। उन्‍होंने कहा कि विशेषकर देश के ग्रामीण क्षेत्रों में छोटी खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों की स्थापना करके महिलाओं के लिए सूक्ष्म उद्यमियों के रूपमें उभरने की व्‍यापक संभावनाएं हैं।
रामनाथ कोविद ने कहा कि भारत सरकार तेजी से फल-फूल रहे खाद्य पदार्थ उद्योग के सामाजिक और आर्थिक लाभों से पूरी तरह अवगत है, यह घरेलू और विदेशी निवेश आकर्षित करने की दृष्टि से एक प्रमुख क्षेत्र है। उन्होंने कहा कि खाद्य उत्पादन बढ़ाने के लिए देश के सभी भागों में 41 मेगा फूड पार्कों और कोल्‍ड चेन की स्थापना की जा रही है। रामनाथ कोविद ने स्टार्ट-अप पुरस्‍कारों और हैकथॉन पुरस्‍कारों के विजेताओं से आशा व्यक्त की कि वे भारत के खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र को नया स्‍वरूप प्रदान करेंगे और गुणवत्ता एवं सुरक्षा मानकों को बेहतर बनाएंगे। उन्होंने रेखांकित किया कि एक चयनित स्टार्ट-अप ने भारत के अपने नोबेल पुरस्कार विजेता वैज्ञानिक डॉ सीवी रमन की खोज ‘रमन स्पेक्ट्रोस्कोपी’ को एक किफायती हैंडहेल्‍ड डिवाइस के रूपमें अनुकूलित किया, जो भोजन में मिलावट का तुरंत पता लगा सकता है। उन्होंने कहा कि यह तकनीक खाद्य पदार्थ संबंधी धोखाधड़ियों में अरबों रुपये बचा सकती है।
राष्ट्रपति रामनाथ कोविद ने कहा कि भारत की प्रतिस्पर्धी लागत संरचना को देखते हुए वह इस बात को लेकर आश्‍वस्‍त हैं कि भारतीय किसान एवं भारतीय खाद्य प्रसंस्करण उद्योग भारत के साथ-साथ पूरी दुनिया के लिए भी खाद्य उत्पादों का उत्पादन कर सकते हैं, इससे किसानों एवं उपभोक्ताओं दोनों को ही मूल्‍य संबंधी झटकों से सफलतापूर्वक बचा लिया जाएगा और इसके साथ ही यह कृषि समुदाय के लिए वाजिब आमदनी सुनिश्चित करने में भी काफी हद तक मददगार साबित होगा। सम्मेलन में 60 से भी अधिक देशों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया, जिनमें 60 वैश्विक कंपनियों के मुख्य कार्यकारी अधिकारी भी शामिल थे। इसका आयोजन भारत सरकार के खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय ने किया था। गौरतलब है कि ऐसा सम्मेलन भारत में पहलीबार हुआ है। विश्व खाद्य सम्मेलन की मेजबान केंद्रीय खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्री हरसिमरत कौर बादल ने भी सम्मेलन के कई सत्रों को संबोधित किया।

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