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सेना की सेवा इकाइयां भी लड़ाकू इकाई-सेना

'सेना में सभी सैनिकबलों और सेवाओं पर है पूरा ध्यान'

एएससी की युद्ध में तैनाती नहीं होने का मामला

स्वतंत्र आवाज़ डॉट कॉम

Thursday 12 October 2017 07:06:11 AM

indian army

नई दिल्ली। भारतीय सेना कमांडर्स सम्मेलन के दौरान सेना की गैर लड़ाकू सेवाओं के विषय पर विचार-विमर्श किया गया, जिसमें आर्मी सर्विस कोर यानी एएससी के कुछ कर्मियों ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि गैर लड़ाकू श्रेणी होने के कारण उनकी युद्धक्षेत्र में तैनाती के लिए विचार नहीं किया जाता है। सेना ने इस विषय पर प्रकाश डाला है और कहा है ‌कि सेना की सेवा इकाइयों को कभी भी गैरलड़ाकू इकाई नहीं माना गया है, बल्कि सेना की सेवा इकाइयां भी लड़ाकू इकाई हैं। सेना प्रमुख ने इसके अलावा पदभार ग्रहण करने पर उल्लेख किया था कि वह सभी सैन्यबलों और सेवाओं का ध्यान रखेंगे और उन्हें यथायोग्य लाभ मिलेगा। सैन्यप्रमुख ने कहा है कि इस सम्मेलन में किसी सैन्य शाखा या सेवाओं द्वारा उठाए गए मुद्दों का समाधान किया जाएगा, कुछ सैन्यकर्मियों के बीच अंतर को लेकर व्यथा को समाप्त किया जाएगा। सेना प्रमुख ने आश्वासन दिया है कि इस संबंध में सभी आवश्यक सुधार किए जाएंगे।
भारतीय सेना ने कहा है कि सेना ने सर्वोच्च न्यायालय में सेवा से संबंधित दिए गए हलफनामे में भी यह उल्लेख किया है कि नियंत्रण रेखा, कम तीव्रता संघर्ष, उग्रवाद निरोधी और आतंकवाद निरोधी कार्रवाई में मजबूती के लिए प्रोत्साहन हेतु सहयोगी शाखाओं और संचालन इकाई के बहुत से अधिकारी, जेसीओ और अन्य कर्मियों को पैदल सेना की उग्रवाद और आतंकवाद निरोधी इकाईयों में तैनात किया गया है। यह इन अधिकारियों, जेसीओ और अन्य कर्मियों को संचालन संबंधी आवश्यक अनुभव प्रदान करता है। इन भूमिकाओं में सैन्यकर्मियों का प्रदर्शन उल्लेखनीय रहा है। भारतीय सेना युद्ध और शांति परिस्थितियों में अपना दायित्व समान रूपसे निभाती है, सेना की प्रत्येक शाखा की निर्धारित भूमिका और कार्य हैं।
भारतीय सेना की लड़ाकू शाखा या लड़ाकू सहयोगी शाखा और सेवा शाखा संचालन इकाईयां हैं, जिनके कर्तव्य एवं कार्यों की भूमिका निर्धारित है। सैन्य संचालन के दौरान लड़ाकू इकाईयों को सेवा इकाई द्वारा दिए जा रहे संचालन सहयोग का महत्व कम किए बिना, सेना का लगातार ये पक्ष रहा है कि एएससी, आयुध और इलेक्ट्रोनिक्स एवं तकनीकी अभियंताओं यानी इएमई के प्रमुखों को अग्रिमबलों के संपर्क में रहने की आवश्यकता बड़े स्तर पर नहीं है। शारीरिक क्षमता प्रांसगिक होने के कारण सेवाओं की आयु लड़ाकूबलों से अधिक हो सकती है। सभी सैन्यबल एवं सेवाओं के लड़ाकू होने के कारण यह कभी भी विवाद का विषय नहीं रहा, इसलिए सेना ने सेवा इकाइयों को कभी भी गैरलड़ाकू इकाई नहीं कहा है।

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