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मुंह लगा मीडिया उड़ा रहा भाजपा की धज्जियां

भाजपा में गुणवत्तायुक्त डिजिटल मीडिया की भारी उपेक्षा

शाह पर वायर के हमले पर पीयूष गोयल ने दी सफाई

स्वतंत्र आवाज़ डॉट कॉम

Monday 9 October 2017 04:23:43 AM

jay amit shah

नई दिल्ली। भारत सरकार या राजनीतिक नेतृत्व और नेताओं में टीवी समाचार चैनलों के पीछे भागने और गुणवत्तायुक्त डिजिटल मीडिया की उपेक्षा करने के दुष्परिणाम अब साक्षात दिखने लगे हैं। भारत सरकार और राज्य सरकारों एवं भाजपा के डिजिटल मीडिया प्रबंधन की नाक के नीचे न्यूज़ पोर्टल के नाम पर ऐसी अनेक साइटें धन धान्य से फलफूल रही हैं, जिनका गुणवत्तायुक्त कंटेंट से कोई वास्ता नहीं है और जिनकी नामी डिजिटल वेबसाइट प्रमोशन कंपनियां पॉर्न कीवर्ड्स और अनैतिक शब्दों से रैंक बढ़ाती हैं। ऐसी डिजिटल मीडिया साइटें सरकार के विभागों, मंत्रियों, राजनीतिक दलों और उनके नेताओं से उच्च रैंक के नाम पर खूब धन लूट रही हैं, सरकार से भारी धन अर्जित करने वाली ऐसी अनेक साइटें मोदी सरकार और भारतीय जनता पार्टी के बहुत करीब हैं, जो अनेक प्रपंची सामग्रियां लोड करती आ रही हैं। द वायर भी इनमें से एक है, जिसने भाजपा अध्यक्ष पर हमला बोला है, जिससे भाजपा नेतृत्व तिलमिलाया हुआ है। केंद्रीय रेलमंत्री पीयूष गोयल ने दावा किया है कि न्यूज़ पोर्टल ‘द वायर' ने भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह एवं उनके पुत्र जय अमित शाह के खिलाफ दुर्भावनापूर्ण तरीके से बिल्कुल झूंठे, आधारहीन, अपमानजनक एवं मानहानिकारक आरोप लगाए हैं, जो जय अमित शाह के निजी व्यवसाय में किसी भी प्रकार की अनैतिकता को रेखांकित नहीं करते हैं। पीयूष गोयल ने कहा कि हम सभी तरह के आरोपों को सिरे से खारिज करते हैं, यह जान बूझकर झूंठी रिपोर्ट के आधार पर भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह एवं उनके परिवार की छवि को धूमिल करने की घृणित कोशिश की गई है, जिसमें ज़रा सी भी सत्यता नहीं है।
पीयूष गोयल ने कहा है कि चूंकि वेबसाइट ने अपनी अपमानजनक रिपोर्ट में पूर्णतया भ्रामक और झूंठे आरोप लगाए हैं, इसलिए जय अमित शाह ने रिपोर्ट की लेखिका और न्यूज़ पब्लिकेशन के संपादक एवं मालिक के खिलाफ अहमदाबाद में 100 करोड़ रुपये का दीवानी एवं आपराधिक मानहानि का केस दायर करने का निर्णय लिया है। पीयूष गोयल ने एक प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए न्यूज़ वेबसाइट की आधारहीन एवं झूंठी रिपोर्ट के आधार पर कांग्रेस पार्टी के तथ्यविहीन आरोपों पर जमकर पलटवार किया है। पीयूष गोयल ने कहा है कि द वायर की तरफ से भेजे गए प्रश्नों का जय अमित शाह के वकील ने ईमेल में सिलसिलेवार तरीके से स्पष्ट जवाब दिया है। उन्होंने कहा कि भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह एवं उनके परिवार का पूरा जीवन ईमानदारी एवं शुचिता का प्रतीक है। पीयूष गोयल ने कहा है कि जय अमित शाह ने यह स्पष्ट कर दिया है कि उनका व्यवसाय पूरी तरह से वैध एवं पारदर्शी है, जो वाणिज्यिक मापदंडों पर पूर्ण रूप से वैध तरीके से नियोजित है, यह उनके कर रिकॉर्ड और बैंकिंग लेन-देन में भी परिलक्षित होता है। उन्होंने कहा कि जय अमित शाह ने एनबीएफसी और सहकारी बैंक से पूरी तरह से वाणिज्यिक शर्तों पर कानून के अनुसार लोन लिया है। उन्होंने कहा कि जय अमित शाह ने ब्याज की वाणिज्यिक दर पर निर्धारित समय के भीतर चेक से ऋण का भुगतान भी किया है और इतना ही नहीं, उन्होंने क्रेडिट की सुविधा पाने के लिए सहकारी बैंक में अपनी पारिवारिक संपत्ति भी गिरवी रखी थी। उन्होंने कहा कि इसके बारे में किसी भी तथ्य को कभी छिपाया नहीं गया है और हमारी सत्यता का सबूत यह है कि हम इन बेबुनियाद आरोपों के खिलाफ कोर्ट में जा रहे हैं।
पीयूष गोयल ने कहा कि कांग्रेस एवं आम आदमी पार्टी को इन तथ्यहीन आरोपों से कुछ भी नहीं मिलेगा, झूंठे आरोप लगाना और फिर आरोप लगाकर भाग जाना कांग्रेस और आम आदमी पार्टी की पुरानी आदत है। उन्होंने कहा कि आलम यह है कि खुद कांग्रेस का पूरा शीर्ष नेतृत्व 5000 करोड़ के फ्रॉड में जमानत पर है और आम आदमी पार्टी का नेतृत्व कई मानहानि के केसों में खुद अदालत का सामना कर रहा है। गौरतलब है कि गुजरात हिमाचल प्रदेश कर्नाटक में विधानसभा चुनाव होने हैं और उत्तर प्रदेश में स्‍थानीय निकाय चुनाव भी होने जा रहे हैं, जिन्हें देखते हुए द वायर की यह स्टोरी प्लांट स्टोरी समझी जा रही है, जिसमें भाजपा अध्यक्ष अमित शाह और उनके पुत्र को घेरने की कोशिश की गई है, गुजरात के चुनाव को देखते हुए तो यह आशंका और भी ज्यादा प्रबल हो गई है। कांग्रेस और आम आदमी पार्टी ने द वायर की रिपोर्ट लपककर जो अमित शाह और भाजपा पर हमला बोला है, उससे भाजपा गुजरात में डैमेज हो पाएगी कि नहीं, यह तो नहीं कहा जा सकता इस मुद्दे का कांग्रेस और आम आदमी पार्टी को कोई चुनावी फायदा मिलने वाला नहीं लगता है। इससे लगता है कि कांग्रेस गुजरात में भाजपा से भयभीत है और इसबार भी उसे सफलता नहीं मिल रही है, जिससे वह भाजपा के खिलाफ कुछ भी कह और कर सकती है।
जय अमित शाह की आड़ में भाजपा पर हमले की शुरूआत हो गई है और विपक्ष को भी मसाला मिल गया है। हालांकि इस तरह के आरोपों और साजिशों के लिए भाजपा नेतृत्व खुद भी कम जिम्मेदार नहीं है। गुजरात में हुए राज्यसभा के चुनाव में भाजपा के अतिउत्साह का बंटाधार और भाजपा के खिलाफ साजिशों की सफलता को किसने नहीं देखा? गुजरात से कांग्रेस के राज्यसभा उम्मीदवार अहमद पटेल को जिताने का काम भाजपाईयों का ही रहा है और यह बात सामने भी आ गई है। द वायर के पीछे भी निश्चित रूपसे भाजपा के ही बड़े नेता दिखाई देंगे, जो भाजपा के भीतर की ख़बरें मीडिया को लीक करने और टीवी समाचार चैनलों पर अपना गला साफ करने को लालायित रहते हैं। यह भी गौरतलब है कि भाजपा के कई दिग्ग़ज भाजपा नेतृत्व से खुश नहीं हैं, यह अलग बात है कि इनमें से एक भी भाजपा को चुनाव में जिताने की हैसियत नहीं रखता है। जीएसटी और उसका सर्वर ठप रहने के केंद्र सरकार को बड़ी फजीहत का सामना करना ही पड़ा है, ऊपर से भाजपा के नेता कहीं लेख लिख रहे हैं, कहीं कानाफूसी कर रहे हैं और कहीं आगामी लोकसभा चुनाव में टिकट कटने के भय से ग्रस्त होकर या मंत्री नहीं बनने से मनमानी पर उतर आए हैं। उत्तर प्रदेश में ही हालात अच्छे नहीं हैं। यहां भी योगी सरकार में कई मुख्यमंत्रियों का उदय हो चुका है।
भाजपा में हालात ऐसे बन गए हैं कि आज अमित शाह के पुत्र जय अमित शाह पर निशाना लगा है, कल कोई और निशाने पर होगा। जहां तक भाजपा के सोशल मीडिया और वेबमीडिया के प्रबंधन का सवाल है ‌तो भाजपा उसमें पूरी तरह फेल मानी जाती है। भाजपा ने अपने यहां डिजिटल मीडिया का एक बेड़ा स्‍थापित कर रखा है, जो केवल अपने प्रचार में लगा है, भाजपा के प्रचार से उसका कोई मतलब नहीं है। सोशल मीडिया पर दोस्तों की संख्या बढ़ाने और उनसे अपना प्रचार कराने के अलावा भाजपा का डिजिटल मीडिया कुछ नहीं कर रहा है। डिजिटल मीडिया में अधिकांश नेता ऐसे हैं, जिनके सोशल अकाउंट भी दूसरे ही लोग चलाते हैं, जिन्हें यही पता नहीं होता कि उनके सोशल अकाउंट पर क्या चल रहा है। ऑनलाइन युवाओं में भाजपा की इस कार्यप्रणाली को लेकर अक्सर निराशा देखने को मिली है। भाजपा के नेताओं की दिलचस्पी टीवी चैनलों में होती है, वे यह कभी नहीं देखते कि ऑनलाइन मीडिया में भी कोई आग धधक रही है। अपवाद को छोड़कर उत्तर प्रदेश सहित भाजपा सरकारों की कोई डिजिटल मीडिया नीति नहीं है, जिससे मीडिया के बड़े घराने कंटेंट में अपनी मनमानी करने में सफल हो रहे हैं, जैसे द वायर न्यूज़ पोर्टल ने किया है। भाजपा सरकारों और भाजपा के लिए ये अच्छे संकेत नहीं हैं।

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