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कपटपूर्ण बोली में फंसी देश की दिग्गज कंपनियां

प्रतिस्पर्धा आयोग ने फर्जीवाड़ा करने पर लगाया बड़ा जुर्माना

पॉली एल्यूमीनियम क्लोराइड के लिए मुखौटा टेंडर डाले

स्वतंत्र आवाज़ डॉट कॉम

Friday 6 October 2017 03:59:58 AM

indian competing commission

नई दिल्ली। भारत के दिग्गज कारपोरेट घराने मुखौटा लगाकर देश में किस प्रकार अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचा रहे हैं, यह फ्रॉड भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग यानी सीसीआई ने टेंडरों में पकड़ा है। सीसीआई ने अपनी जांच में पाया है कि ग्रासिम इंडस्ट्रीज लिमिटेड (जीआईएल), आदित्य बिरला कैमिकल्स इंडिया लिमिटेड (एबीसीआईएल) और गुजरात ऐल्कलीज एंड कैमिकल्स लिमिटेड (जीएसीएल) ने दिल्ली जल बोर्ड के टेंडरों के भाव बढ़ाने के लिए प्रतिस्पर्धा कानून 2002 के अनुच्छेद (1) और अनुच्छेद 3 (3) (डी) के प्रावधानों का उल्लंघन किया है, जिन्हें पॉली एल्यूमीनियम क्लोराइड (पीएसी) की खरीद के लिए जारी किया गया था। पॉली एल्यूमीनियम क्लोराइड का इस्तेमाल पानी के शुद्धिकरण के लिए किया जाता है।
दिल्ली जल बोर्ड ने दायर संदर्भ पर अंतिम आदेश पारित किया है। जीआईएल और एबीसीआईएल की इस दलील को अस्वीकार करते हुए कि वे एकल आर्थिक कंपनियां हैं, सीसीआई ने अपने आदेश में कहा है कि ये दोनों कंपनियां न केवल कानूनी तौरपर अलग-अलग कंपनियां हैं, बल्कि इन्होंने इन टेंडरों में व्यक्तिगत हैसियत और अलग-अलग रूपसे भाग लिया है। सीसीआई ने कहा कि कानून के अनुच्छेद 3 (3) के अंतर्गत शुरू की गई कार्रवाई के संदर्भ में एकल आर्थिक कंपनी की अवधारणा का इससे कोई संबंध नहीं है, खासतौर से बोली के भाव बढ़ाने या कपटपूर्ण बोली के मामले में। इन कंपनियों को बंद करने का आदेश देने के अलावा सीसीआई ने प्रतिस्पर्धा रोधी आचरण करने के लिए जीआईएल, एबीसीआईएल और जीएसीएल पर 2.30 करोड़ रुपये, 2.09 करोड़ रुपये और 1.88 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया है। दिग्गज कंपनियों पर जुर्माने की राशि जीआईएल और एबीसीआईएल के पिछले तीन वर्ष के औसत महत्वपूर्ण कारोबार की 6 प्रतिशत की दर से लगाई गई है।
भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग ने जीआईएल और एबीसीआईएल के आचरण पर नज़र रखी थी, क्योंकि इन कंपनियों ने स्पष्ट रूपसे अलग-अलग बोली जमा करते समय प्रतिस्पर्धा का मुखौटा बनाकर एक साझा चैनल के जरिए इसे तैयार किया और अंतिम रूप दिया था। तरल क्लोराइड के लिए टेंडर में बोली के कथित भाव बढ़ाने के संबंध में दिल्ली जल बोर्ड ने दायर एक अन्य संदर्भ में पारित आदेश में तरल क्लोराइड एक अन्य रसायन है, जिसका इस्तेमाल पानी के शुद्धिकरण के लिए किया जाता है, सीसीआई ने इसमें कोई उल्लंघन नहीं पाया है, क्योंकि महानिदेशक द्वारा आधारभूत मूल्य, परिवहन लागत, करों और पक्षों की लाभ सीमा के संबंध में कोई विश्लेषण नहीं किया गया, जैसा कि पिछले संदर्भ में किया गया था। सीसीआई के आदेश की एक प्रति सीसीआई की वेबसाइट www.cci.gov.in पर अपलोड कर दी गई है। इन कंपनियों ने भारत के व्यापार जगत के विश्वास को भारी नुकसान पहुंचाया है और इससे व्यापार जगत शर्मशार हुआ है।

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