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भारत की वैदिक पहचान हैं अशोक सिंघल-भागवत

नई दिल्ली में सिंघल फाउंडेशन का भारतात्मा पुरस्कार समारोह

काशी में वैदिक शोध संस्थान के लिए धन आवंटित-योगी

स्वतंत्र आवाज़ डॉट कॉम

Friday 6 October 2017 12:38:31 AM

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नई दिल्ली। सिंघल फाउंडेशन उदयपुर का भारतात्मा पुरस्कार समारोह यहां सिविक सेंटर में गणमान्य नागरिकों और वैदिक विद्वानों की उपस्थिति में हुआ, जिसमें भारतात्मा अशोक सिंघल की स्मृति में वैदिक पुरस्कार-2017 प्रदान किए गए। यह समारोह विशिष्ट था, जिसमें वेदों और सनातन धर्म पर विद्वानों और राजनेताओं के उल्लेखनीय व्याख्यान हुए। इस अवसर पर सरसंघ संचालक मोहन भागवत ने विश्व हिंदू परिषद के अंतर्राष्ट्रीय अध्यक्ष रहे और राम जन्मभूमि आंदोलन के अग्रणी नेता रहे अशोक सिंघल के लिए उद्गार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि अशोक सिंघल तो भारत की वैदिक पहचान हैं, राम जन्मभूमि आंदोलन और भारत में सनातन धर्म के प्रचार-प्रसार के लिए उन्होंने, जो किया है, वह अविस्मरणीय और प्रेरणादायक है। मोहन भागवत ने अशोक सिंघल के संबंध में अनेक यादगार बातें कहीं।
सरसंघ संचालक मोहन भागवत ने बड़ी गहराई से वेदों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि हमने वेदों का अध्ययन कर उपनिषदों की रचना की है, परमाणुविक और वैज्ञानिक शोध करने वाले कई महान वैज्ञानिकों ने भी कहा है कि इस कार्य को करने की प्रेरणा उन्हें गीता और वेदों से प्राप्त हुई है। सरसंघ संचालक ने कहा कि वेद उपनिषिद अन्य धार्मिक ग्रंथों के बारे में संपूर्ण जानकारी न होने के कारण जो विरोध देखने में आता था, वह धीरे-धीरे कम हो रहा है। उन्होंने कहा कि वेद तो सनातन हैं, लोग आधुनिक जगत की भाषा में वेदों को समझ सकें, इसके लिए हमें वेदों को सरल भाषा में प्रस्तुत करना होगा और वेदों का प्रचार-प्रसार करने वालों तथा वेदों में श्रद्धा रखने वालों को इस क्षेत्र में अभी और अधिक गति से कार्य करने की आवश्यकता है। मोहन भागवत ने कहा कि हजारों वर्ष पूर्व से ही देश के सर्वहित सर्व कल्याण का रास्ता वेदों में निहित है, यह लोगों को समझना पड़ेगा, हम सभी को वेदों का अध्ययन करना चाहिए। उन्होंने कहा कि नदी के बहाव को नदी में उतर कर ही महसूस किया जा सकता है, किनारे पर खड़े रहकर नहीं। उन्होंने आम जनमानस का आह्वान किया कि सेतु बंधन में गिलहरी की भांति ही सही, वेदों के प्रचार-प्रसार एवं ज्ञानार्जन के लिए कुछ न कुछ अवश्य ही योगदान करे।
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी इस अवसर पर मौजूद थे। उन्होंने कहा कि अशोक सिंघल का पूरा जीवन सनातन घर्म के लिए समर्पित रहा है, उन्होंने देश के विभिन्न मत और सम्प्रदाय से जुड़े संतों को एक मंच पर लाकर राम जन्मभूमि आंदोलन को जिस प्रकार का नेतृत्व दिया था, वह अविस्मरणीय है, वह आज़ादी के बाद का सबसे बड़ा सांस्कृतिक आंदोलन था। उन्होंने कहा कि सिंघल ट्रस्ट की वैदिक पुरस्कारों की घोषणा भविष्य में अवश्य ही देश को नई दिशा और आयाम प्रदान करेगी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि उत्तर प्रदेश सरकार ने अशोक सिंघल के नाम पर काशी में एक वैदिक शोध संस्थान की स्थापना के लिए धनराशि उपलब्ध कराई है। उन्होंने कहा कि वेदों में संपूर्ण भारत की आत्मा निवास करती है, भारत की वास्तविक पहचान भारत के वैदिक साहित्य में छिपी हुई है, जाने-अनजाने में जिसको हम लोगों ने विस्मृत सा कर दिया है। उन्होंने कहा कि देश में जगह-जगह वेद विद्यालयों की स्थापना करके भारत की सनातन संस्कृति की मजबूती के लिए किस स्तर पर क्या हो सकता है, अशोक सिंघल यह जीवन पर्यंत करते रहे। उन्होंने कहा कि वेदों के प्रति भारत तथा वैदिक परंपरा के लिए अशोक सिंघल के योगदान को भुलाया नहीं जा सकता है।
योगी आदित्यनाथ ने वेदों के लिए समर्पित विशेष ट्रस्ट की किसी विशिष्ट संस्था का आचार्यों एवं शोधार्थियों को पुरस्कृत किया जाना तथा पुरस्कार में भी काफी अच्छी धनराशि देना, अत्यंत ही प्रशंसनीय और अभिनंदनीय कार्य है। उन्होंने कहा कि सनातन हिंदू धर्म और राष्ट्र की परम्परा को अक्षुण बनाए रखने के लिए स्वामी गोविंद गिरि महाराज और सरसंघ संचालक मोहन भागवत की प्रेरणा जो कार्य इस ट्रस्ट ने प्रारंभ किया है, इसके लिए मै ट्रस्ट को हृदय से साधुवाद देता हूं। स्वामी देवगिरि महाराज ने कहा कि शरद पूर्णिमा पर इतना भव्य आयोजन सभी के अन्तःकरण को प्रफुल्लित करने वाला है। उन्होंने कहा कि विश्वभर के वेद विद्यालय, वेदाचार्य, संस्थाएं एवं छात्र हमारे हैं, हमारा समर्पण सदैव ही वेदों के प्रति रहा है, हम सभी भारतीय संस्कृति के उपासक हैं। उन्होंने कहा कि वेद की कल्पना विश्व मानुष की कल्पना है, वेद विश्वव्यापी हैं, वेदों की सेवा और सुरक्षा करना हम सभी की जिम्मेदारी एवं कर्तव्य है। देवगिरि महाराज ने कहा कि वेदों की सुरक्षा करते हुए उनके सिद्धांतों को लोगों तक पहुंचाना हमारा परम ध्येय है, इसके लिए उनकी शब्द रक्षा करना आवश्यक है। समारोह में बीड नागपुर महाराष्ट्र के उत्कृष्ट वैदिक छात्र सागर शर्मा, आदर्श वेदाध्यापक वी राजगोपाल धनपाठी चेन्नई तथा सर्वश्रेष्ठ वेद विद्यालय समर्थ वेदविद्यालय ढालेगांव जिला परभणी को पुरस्कृत किया गया।

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