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कवियों ने श्रोताओं को हंसाया-गुदगुदाया

भारतीय गन्ना अनुसंधान संस्थान में कवि सम्मेलन

कविताओं से निकले सुरों की तरह अनेक गहरे संदेश

स्वतंत्र आवाज़ डॉट कॉम

Tuesday 3 October 2017 12:37:03 AM

bhaarateey ganna anusandhaan sansthaan mein kavi sammelan

लखनऊ। उत्तर प्रदेश के कवियों ने अपनी रचनाओं से भारतीय गन्ना अनुसंधान संस्थान लखनऊ के वैज्ञानिकों और कर्मचारियों को न सिर्फ हंसाया-गुदगुदाया, बल्कि समाज में विद्यमान अनेक समस्याओं से रू-ब-रू कराते हुए उनपर गंभीर चिंतन के लिए मजबूर भी कर दिया। संस्थान के निदेशक डॉ अश्विनी दत्त पाठक ने माँ सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण और दीप प्रज्वलितकर कवि सम्मेलन का शुभारंभ किया। संस्थान के प्रधान वैज्ञानिक एवं राजभाषा प्रभारी डॉ अजय कुमार साह ने कवियों का स्वागत करते हुए कवि सम्मेलन से सकारात्मक पहलुओं पर चिंतन करते हुए विचार करने का आह्वान किया।
भारतीय गन्ना अनुसंधान संस्थान के प्रेक्षागृह में हुए आह से वाह तक विषय पर कवि सम्मेलन में प्रतिष्ठित कवि रामकिशोर तिवारी बाराबंकी हास्य व्यंग, बलराम श्रीवास्तव मैनपुरी गीत, केडी शर्मा हाहाकारी उन्नाव हास्य, गजेंद्र प्रियांशु बाराबंकी गीत, अनिल सिंह बौझड़ रामनगर बाराबंकी अवधी हास्य, श्यामल मजूमदार लखनऊ हास्य, मानसी द्विवेदी लखनऊ श्रृंगार, ओज एवं लखनऊ के डॉ सुधीर कुमार शुक्ल ने एक के बाद एक अपनी रचनाएं प्रस्तुत कर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। कविताओं से सुरों की तरह अनेक संदेश निकले। श्रोताओं ने विभिन्न विधा की इन रचनाओं को आनंदपूर्वक सुना।

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