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क्या सफाई दे रहे हैं वित्तमंत्री अरुण जेटली?

वित्तमंत्री गलती मानने के बजाए आलोचकों पर हमलावर

नरेंद्र मोदी सरकार व भाजपा की सारी साख दांव पर लगी

Saturday 30 September 2017 03:33:07 AM

दिनेश शर्मा

दिनेश शर्मा

finance minister arun jaitley

नई दिल्ली। केंद्रीय वित्तमंत्री अरुण जेटली जीएसटी लागू करने में अपनी विफलताओं को स्वीकार करने के बजाए उन आलोचकों पर हमलावर हो रहे हैं, जो उनकी गंभीर गलतियों और नीतियों से पर्दा उठा रहे हैं। भाजपा में भी कहा जा रहा है कि सचमुच तीस साल से एक भी चुनाव नहीं जीतने वाले अरुण जेटली सरकार में काम करने के बजाए सरकार को 'एंजॉए' कर रहे हैं, उन्हें इस बात की कोई चिंता दिखाई नहीं देती कि ऐसे ही चलता रहा तो दो हजार उन्नीस का रिजल्ट क्या होगा। कहने वाले कहते हैं कि उनके पास केवल वाकपटुता है और वित्त मंत्रालय चलाना उनके वश की बात नहीं है। जीएसटी मोदी सरकार की उच्च प्रतिष्ठा एवं सरकार की लोकप्रियता बढ़ाने का मामला है, लेकिन अरुण जेटली के बड़बोलेपन और रणनीतिक विफलताओं से सरकार की सारी साख दांव पर लग गई है। देश में जीएसटी का पूरा समर्थन है, लेकिन अरुण जेटली और उनके रणनीतिकारों ने हर किसी को जीएसटी के खिलाफ खड़ा कर दिया है। अरुण जेटली पर भाजपा और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को चाहे जितना विश्वास हो, लेकिन नोटबंदी से ज्यादा जीएसटी की रणनीतियों ने देश के व्यापारी और जनसमुदाय को भारी परेशान किया हुआ है और सरकार जनसामान्य के विरोध का भी सामना कर रही है।
जीएसटी और नोटबंदी पर वित्तमंत्री अरुण जेटली की रणनीतियों का दोषपूर्ण सच एनडीए सरकार में ही देश के वित्तमंत्री रहे यशवंत सिन्हा ने इंडियन एक्सप्रेस में एक लेख के जरिए उजागर किया है और देश की जीडीपी खिसक जाने के ‌पीछे पूरी तरह अरुण जेटली को जिम्मेदार ठहराया है। यद्यपि यशवंत सिन्हा अपने राजनीतिक फ्रस्टेशन में कभी-कभी अंडबंड बोलते रहे हैं, ले‌किन उन्होंने अरुण जेटली को जो आइना दिखाया है, उससे हर कोई सहमत है। नोटबंदी के दौरान बैंकों के चपरासी से लेकर बाबू और मैनेजर रातोंरात करोड़पति हो गए। नोट बदलने में पचास प्रतिशत कमीशन तक चला और अरुण जेटली कुछ नहीं कर पाए। उन्होंने नोटबंदी का पूरा होमवर्क किए बिना विमुद्रीकरण लागू कर दिया और उस दौरान जो हुआ, उसकी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सफाई देनी पड़ी और जनता से धैर्य रखने की अपील करनी पड़ी। हर कोई जानता है कि आज जितना कालाधन बैंकों के चपरासियों, बाबुओं और मैनेजरों के पास है, उतना अच्छे-अच्छे धन्नासेठ के पास नहीं होगा। कहते थे कि नोटबदली में कमीशन खाने वालों पर कार्रवाई होगी, किंतु अरुण जेटली ने अनेक कमीशनखोरों को और भी ताकतवर बना दिया है, वे न सरकार की परवाह कर रहे हैं और न ही उस जनता की जो रोज़ बैंकों के काउंटरों पर लंबी कतार लगाती है। जीएसटी को भी ऐसे ही लागू कर दिया गया है। जीएसटी का तकनीकी प्रबंधन पूरी तरह दोषपूर्ण साबित हुआ है और वित्तमंत्री अरुण जेटली अपनी विफलताओं पर दूसरों को उपदेश दे रहे हैं।
देश में अब एक रुपए दो रुपए के सिक्कों पर भी हल्लाबोल हो गया है। बैंक अनेक जगहों पर ग्राहकों से रेज़गारी नहीं ले रहे हैं, अफवाह फैल रही है कि सिक्के बंद हो गए हैं। इस कारण बाज़ार में हाहाकार भी मचा हुआ है। अनेक जगह एटीएम भी नहीं चल रहे हैं। इस सबके पीछे यदि बैंक नहीं है तो फिर कौन है? और अरुण जेटली इन बैंकों पर क्या कार्रवाई कर रहे हैं? जो लोग अपने बच्चों की पढ़ाई, जेब खर्च, सॉफ्टवेयर या सर्वर आदि के लिए प्रति माह दो ढाई सौ डॉलर विदेश भेजते हैं, वे यह पैसा भेजने के दोनों तरफ के खर्च का एक बार में ही भुगतान करते हैं, इसके बावजूद उनके डॉलर, पॉउंड्स, येन, यूरो आदि विदेशी मुद्रा से बीस तीस पचास डॉलर तक कहां और कैसे कट जाते हैं? यह पैसा किसकी जेब में जाता है? जानकारी के अनुसार यह रकम करोड़ों रुपए प्रतिमाह बनती है, जो बैंकों के एजेंटों की सांठगांठ से काटी जाती है, जिसका बैंक कोई भी उत्तर नहीं देते हैं और ग्राहक का कम पैसा पहुंचने से उसे उसके अनेक दुष्परिणाम भुगतने होते हैं। वित्तमंत्री अरुण जेटली की विफलताओं का पर्दाफाश शुरू हो गया है, जिसकी शुरूआत यशवंत सिन्हा ने कर दी है। यशवंत सिन्हा पर अरुण जेटली ने अनेक आरोप भी लगाए हैं। यशवंत सिन्हा यदि अस्सी साल की उम्र में सरकार में नौकरी खोज भी रहे हैं तो अरुण जेटली ने भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नोटबंदी और जीएसटी के फैसले को तबाह करने में कोई कसर नहीं छोड़ी है। क्या अरुण जेटली बताएंगे कि यदि वे बड़े विलक्षण रणनीतिकार हैं तो अपना चुनाव क्यों नहीं जीत पाते हैं? जाहिर है कि अरुण जेटली ने हमेशा वाकपटुता की कमाई खाई है, जिसकी चपेट में हर कोई आ जाता है। कहना न होगा कि अरुण जेटली का कई बार इस रूप में भी नाम सामने आया है कि उन्होंने मोदी सरकार की आंतरिक जानकारियों को मीडिया को लीक किया है। उनके घर और दरबार में ऐसे मीडिया वालों का आना-जाना है, जो मुखबिरी की पत्रकारिता करते हैं और प्लांटेड ख़बरें लिखते-चलाते हैं।
अरुण जेटली इस समय यशवंत सिन्हा के आरोपों से जबरदस्त तिलमिलाए हुए हैं। वे बहुत कुछ बोल रहे हैं, मगर उनके पास इसका कोई उत्तर नहीं है कि जब जीएसटी लागू करने की योजना बनाई जा रही थी, तब यह सब क्यों नहीं देख लिया गया कि किन मुद्दों पर गतिरोध हो सकता है, उनके सारे कम्‍प्यूटर नेटवर्क और संबंधित अधिकारी कर्मचारी चुस्तदुरूस्त हैं एवं जीएसटी लागू होते ही यह व्यवस्‍था सुचारू रूप से रन कर जाएगी। आज अधिकांश मध्यम वर्ग से लेकर निम्न वर्ग तक ने बैंकों में पैसा जमा करना ही बंद कर दिया है, बैंक में पैसा जमा करो तो टैक्स और पैसा निकालो तो टैक्स? यह देश की तेज़गति की अर्थव्यवस्‍था पर एक ग्रहण है, जिससे हर कोई परेशान है। स्टेट बैंक ऑफ इंडिया बड़े गर्व से कह रहा है कि उसने करीब साढ़े तीन सौ करोड़ रुपए खातों में मिनिमम बैलेंस न होने से कमाए हैं। यह किनका पैसा है? अरुण जेटली नहीं जानते कि ये उनका पैसा है जो अपनी आर्थिक मजबूरियों के कारण बैंक में मिनिमम बैलेंस नहीं रख पाने को मजबूर हैं और ये वही लोग हैं, जिन्होंने भाजपा को केंद्र और यूपी में प्रचंड बहुमत दिया है। जनता में अपनी विफलताएं खुलने के बाद केंद्रीय वित्‍तमंत्री अरुण जेटली की छवि और लोकप्रियता का ग्राफ बड़ी तेजी से गिरा है, वे जनता की सहानुभूति खोते जा रहे हैं। कल उन्होंने दिल्ली में एक बैठक में कहा है कि वित्‍त मंत्रालय के आयकर विभाग ने कर प्रशासन में दक्षता, पारदर्शिता एवं निष्‍पक्षता सुनिश्चित करने के लिए इन दो-तीन वर्ष में अनेक कदम उठाए हैं। वित्‍तमंत्री ने इन पहलों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि 50 लाख रुपए तक की आमदनी वाले करदाताओं के लिए सिर्फ एक पेज वाला आईटीआर-1 (सहज) फॉर्म पेश किया गया है।
केंद्रीय वित्तमंत्री बता रहे हैं कि 2.5 लाख रुपए से लेकर 5 लाख रुपए तक की आमदनी वाले करदाताओं के लिए टैक्‍स दर 10 फीसदी से घटाकर 5 फीसदी कर दी गई है, जो दुनिया की न्‍यूनतम कर दरों में से एक है। उन्होंने यह भी कहा कि 5 लाख रुपए तक की आमदनी वाले ऐसे गैर-बिज़नेस करदाताओं के लिए ‘कोई जांच नहीं’ अवधारणा शुरू की गई है, जिन्‍होंने पहली बार टैक्‍स रिटर्न भरा था, इसके पीछे मुख्‍य उद्देश्‍य यह था कि ज्‍यादा से ज्‍यादा लोग कर दायरे में आएं, अपने-अपने आईटी रिटर्न भरें और निर्धारित टैक्‍स भरें। यह बैठक ‘आईटी विभाग की पहलों’ विषय पर वित्‍त मंत्रालय से संबंद्ध सलाहकार समिति की दूसरी बैठक थी। अरुण जेटली ने आयकर विभाग की अन्‍य पहलों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि 50 करोड़ रुपये तक के कारोबार वाली कंपनियों के लिए कॉरपोरेट टैक्‍स की दर घटाकर 25 प्रतिशत के स्‍तर पर ला दी गई, जिससे लगभग 96 फीसदी कंपनियों को कवर कर लिया गया है। उन्होंने कहा कि 1 मार्च 2016 को अथवा उसके बाद गठित नई विनिर्माण कंपनियों को बगैर किसी छूट के 25 फीसदी की दर से टैक्‍स लगाए जाने का विकल्‍प दिया गया है। वित्‍तमंत्री ने कहा कि प्रक्रियागत सुधारों के तहत न्‍यूनतम वैकल्पिक कर यानी मैट से संबंधित क्रेडिट को 10 वर्ष के बजाय 15 वर्ष तक आगे ले जाने की अनुमति दी गई है। ई-गवर्नेंस के क्षेत्र में विभाग की पहलों पर वित्‍तमंत्री ने कहा कि इस साल 97 फीसदी आयकर रिटर्न इलेक्‍ट्रॉनिक ढंग से दाखिल किए गए ‌हैं, जिनमें से 92 फीसदी रिटर्न की प्रोसेसिंग 60 दिन के भीतर कर दी गई और 90 फीसदी रिफंड 60 दिन के भीतर जारी कर दिए गए।
वित्‍तमंत्री अरुण जेटली ने कहा कि आयकर विभाग ने शिकायत निवारण प्रणाली ‘ई-निवारण’ शुरू की है, जिसके तहत ऑनलाइन एवं कागज़ पर लिखकर दी गई सभी शिकायतों को एकीकृत कर दिया गया है और इनका निवारण होने तक इनपर करीबी नज़र रखी जाती है, प्रत्‍येक शिकायत को स्‍वीकार किया जाता है और उसके समाधान के बारे में सूचना ईमेल और एसएमएस के जरिए दी जाती है। वित्‍तमंत्री ने कहा कि 4.65 लाख ई-निवारण शिकायतों में से 84 फीसदी शिकायतों का निपटारा अब तक किया जा चुका है। अरुण जेटली ने कहा कि ‘ई-सहयोग’ के जरिए सूचनाओं में अंतर वाले सभी मामलों को गैर-दखल तरीके से निपटाया जाता है, जिससे कि पूर्ण जांच को टाला जा सके। वित्‍तमंत्री ने कहा कि आयकर विभाग द्वारा हर तिमाही लगभग 1.9 करोड़ वेतनभोगी करदाताओं को यह सूचना दी जाती है कि उनके नियोक्‍ताओं द्वारा कितना टीडीएस यानी स्रोत पर कर कटौती जमा कराया गया है। उन्होंने कहा कि विभाग की इन सभी ई-गवर्नेंस पहलों से कर निर्धारण अधिकारियों और करदाताओं के बीच प्रत्‍यक्ष संपर्क न्‍यूनतम हो गया है, जिससे करदाताओं का उत्‍पीड़न कम करने, भ्रष्‍टाचार पर अंकुश लगाने और समय की बचत करने में मदद मिली है। वित्‍तमंत्री ने कारोबार में सुगमता और वित्‍तीय बाजारों को बढ़ावा देने के लिए आयकर विभाग के कदमों पर प्रकाश डाला है और इस संबंध में 50 लाख रुपये तक की आमदनी वाले प्रोफेशनलों के लिए प्रकल्पित कराधान योजना शुरू किए जाने का उल्‍लेख किया है।
केंद्रीय वित्तमंत्री ने कहा कि इसी तरह कारोबारी आमदनी हेतु प्रकल्पित कराधान योजना के लिए सीमा को 1 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 2 करोड़ रुपये कर दिया गया है, वहीं अंतरराष्‍ट्रीय वित्‍तीय सेवा केंद्र में अवस्थित कंपनियों को लाभांश वितरण कर से मुक्‍त कर दिया गया है और उन्‍हें केवल 9 फीसदी की दर से मैट अदा करना होगा। उन्होंने कहा कि जहां तक कालेधन के खिलाफ छेड़े गए अभियान का सवाल है तो आयकर विभाग ने भाजपा सरकार के सत्‍ता में आने के बाद अनेक तरह के कदम उठाए हैं, इस संबंध में उन्होंने कालाधन अधिनियम 2015, बेनामी अधिनियम 1988 में किए गए व्‍यापक संशोधनों और ऑपरेशन क्लीन मनी इत्‍यादि का उल्‍लेख किया। अरुण जेटली ने कहा कि 9 नवंबर 2016 से लेकर 10 जनवरी 2017 तक के विमुद्रीकरण संबंधी आंकड़ों के गहन अध्‍ययन के बाद लगभग 1100 तलाशियां ली गईं और इसके परिणामस्‍वरूप 513 करोड़ रुपए की नकदी सहित 610 करोड़ रुपए की राशि जब्‍त की गई, करीब 5400 करोड़ रुपये की अघोषित आय के बारे में पता लगा और समुचित कार्रवाई के लिए लगभग 400 मामले ईडी और सीबीआई को सौंपे गए हैं। ‘लेस कैश’ अर्थव्‍यवस्‍था और डिजिटल लेनदेन को बढ़ावा देने के लिए वित्‍तमंत्री ने कहा कि आयकर विभाग ने अनेक कदम उठाए हैं, जिनमें 2 लाख रुपए अथवा उससे ज्‍यादा की नकदी की प्राप्ति पर जुर्माना लगाना, धर्मार्थ ट्रस्टों को नकद दान की सीमा को 10,000 रुपये से घटाकर 2,000 रुपये करना और राजनीतिक दलों को 2000 रुपये या इससे अधिक का नकद दान नहीं किया जाना इत्‍यादि शामिल है।
विमुद्रीकरण के असर और आयकर विभाग के विभिन्‍न सक्रिय कदमों पर वित्‍तमंत्री ने कहा कि प्रत्‍यक्ष करों के मामले में राजस्‍व संग्रह वित्‍तवर्ष 2016-17 के दौरान 14.5 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 8,49, 818करोड़ रुपये के स्‍तर पर पहुंच गया। उन्होंने कहा कि चालू वित्‍तवर्ष में 18 सितंबर 2017 तक प्रत्‍यक्ष करों का शुद्ध संग्रह 15.7 प्रतिशत बढ़कर 3.7 लाख करोड़ रुपये के स्‍तर पर पहुंच गया। उन्‍होंने कहा कि करदाताओं की कुल संख्‍या वित्‍त वर्ष 2012-13 के 4.72 करोड़ से काफी बढ़कर वित्‍तवर्ष 2016-17 में 6.26 करोड़ हो गई। सीबीडीटी के अध्‍यक्ष सुशील चंद्रा ने समिति के समक्ष आयकर विभाग की पहलों पर एक प्रस्‍तुति दी। बैठक में वित्‍त राज्‍यमंत्री एसपी शुक्‍ला, वित्‍त सचिव अशोक लवासा, राजस्‍व सचिव डॉ हसमुख अधिया, निवेश एवं सार्वजनिक परिसंपत्ति प्रबंधन विभाग में सचिव नीरज कुमार गुप्‍ता, आर्थिक मामलों के विभाग में सचिव एससी गर्ग, मुख्‍य आर्थिक सलाहकार डॉ अरविंद सुब्रमण्‍यन, सीबीडीटी के अध्‍यक्ष सुशील चंद्रा और वित्‍त मंत्रालय के वरिष्‍ठ अधिकारी उपस्थित थे। अरुण जेटली ने इस बैठक के बहाने देश को बताने की कोशिश की है कि वे क्या कर रहे हैं, लेकिन वास्तव में क्या हो रहा है, यह वे छिपा गए हैं या उनके रणनीतिकारों ने छिपा लिया है। अरुण जेटली पर फेलियर का दाग लग चुका है और लोग यहां तक कह रहे हैं कि वे वित्त मंत्रालय पर मात्र बोझ हैं।

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