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कानून व्यवस्‍था में जनता भी जवाबदेह!

पुलिस की गुणवत्ता के लिए विश्वविद्यालय भी खुलें

कानून व्यवस्था और पुलिस सुधार पर हुई संगोष्ठी

स्वतंत्र आवाज़ डॉट कॉम

Wednesday 13 September 2017 04:11:34 AM

discourse on resurrection of police reforms in india organized under the ageis of lokadhikarmanch

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में कानून व्यवस्था हेतु पुलिस सुधार की आवश्यकता विषय पर लोक अधिकार मंच के तत्वावधान में एसआर ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशन बख्शी का तालाब लखनऊ में एक दिवसीय संगोष्ठी का आयोजन हुआ, जिसमें विभिन्न विषय विशेषज्ञों ने विचार विनिमय किया। विषय जितना गंभीर है, उसे कुछने तो लच्छेदार भाषणों में ही समेटने की कोशिश की। संगोष्ठी में जिन लोगों की भागीदारी देखी गई, उनमें अनेक ऐसे थे, जो टाइमपास के लिए और चर्चा में बने रहने के लिए सक्रिय रहते हैं, चाहे वो नीति नियंता रहे हों, चाहे मीडिया के लोग हों और चाहे जिनकी समाज के प्रबुद्ध वर्ग में गिनती होती हो। उत्तर प्रदेश की कानून व्यवस्‍था जिनके हाथ में है और जो उसके हितधारक हैं, संगोष्ठी में सबकी स्थिति एक-दूसरे के मुंह को देखकर बात करने से ज्यादा नहीं देखी गई। जिन्होंने पुलिस सुधार के उपदेश दिए स्वयं वे पुलिस व्यवस्‍था में रहते हुए पुलिस सुधार के लिए कुछ अनुकरणीय नहीं कर पाए, आज वे कह रहे हैं कि सरकार को क्या करना चाहिए। मीडिया के लोगों का संबोधन भी ऐसा रहा कि आप फजीहत और दूसरों को नसीहत। हां एक विचार अच्छा आया कि क्यों न पुलिस विश्वविद्यालय खोले जाएं, जिनमें वे पढ़ाए जाएं, जो शुरू से पुलिस सेवा में जाने के इच्छुक हों।
बहरहाल संगोष्ठी में वक्ताओं ने संगोष्ठी की अच्छी रस्म अदायगी की। उत्तर प्रदेश के पुलिस महानिदेशक रहे और लोक अधिकार मंच के संस्थापक पद्मश्री प्रकाश सिंह ने कहा कि देश की पुलिस व्यवस्था का संचालन एक सदी से भी अधिक पुराने इंडियन पुलिस एक्ट 1861 से होता आया है, इस एक्ट की मूलभावना लोककल्याण की न होकर, एक ब्रिटिश उपनिवेशक शासकों के हितों की रक्षा हेतु थी। उन्होंने कहा कि देश के बदलते हुए राजनैतिक और सामाजिक परिदृश्य में यह व्यवस्था अनुपयोगी हो चली है। प्रकाश सिंह ने बताया कि इस संबंध में सर्वोच्च न्यायालय ने 22 सितंबर 2006 के अपने आदेश में प्रदेश सरकारों को तीन स्वतंत्र संस्थाओं के गठन हेतु निर्देश जारी किए हुए हैं, जिनमें राज्य सुरक्षा आयोग, पुलिस स्थापना बोर्ड और पुलिस शिकायत प्राधिकरण बनाने और उनकी जनता के प्रति जवाबदेही भी सुनिश्चित करने की बात कही गई है, मगर दुर्भाग्यवश इस विषय पर अब तक कोई उल्लेखनीय प्रगति नहीं हुई, कोई सरकार इसपर ध्यान नहीं दे रही है। प्रकाश सिंह ने आशा व्यक्त की कि शासन, न्यायपालिका, बुद्धिजीवियों एवं प्रेस के बीच गहन विमर्श से निकले निष्कर्षों से ऐसे पुलिस सुधार की अपेक्षा की जा सकती है, जो जनता की कसौटी पर खरी उतर सकें।
लोक अधिकार मंच के अध्यक्ष अनिल सिंह ने कहा कि प्रदेश में योगी सरकार के गठन से प्रदेशवासियों में विगत 15 वर्ष से चले आ रहे जंगलराज से छुटकारा मिलने की आशा जागृत हुई है। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में भ्रष्ट राजनेताओं, अपराधियों और पुलिसकर्मियों के बीच बन रहे गठजोड़ ने न केवल सभ्यसमाज की धारणाओं को दूषित किया है, अपितु देश की आर्थिक प्रगति को भी नुकसानदायक प्रभावित किया है। एडीशनल एडवोकेट विनोद कुमार शाही ने टेक्नीकल सेशन में कहा कि पुलिस एक सुरक्षा है, जो लोगों को सुरक्षा प्रदान करती है। उन्होंने कहा कि भारत में 86 प्रतिशत कॉंस्टेबल, 10 प्रतिशत सबइंस्पेक्टर और 4 प्रतिशत आईपीएस अधिकारी पुलिस विभाग में हैं, सन् 1965 का जो समय था, वह देश का बहुत मजबूत समय था। उनका कहना था कि कानून व्यवस्था में सुधार होना चाहिए। उन्होंने कहा कि हम चाहते हैं कि देश में एक पुलिस विश्वविद्यालय स्थापित किया जाए और जो छात्र पुलिस विभाग में जाने के लिए रुचि रखते हैं, उनको उसमें शामिल किया जाए।
लखनऊ विश्वविद्यालय के कुलसचिव रहे प्रोफेसर एके सेन गुप्ता ने कहा कि हमें शासकवाली मानसिकता को बदलना होगा और उसके स्थान पर समाजउन्मुख और उसके निकट व्याप्त वातावरण को समझते हुए सुरक्षा व्यवस्था को उच्च प्राथमिकता देनी होगी। एके सेन गुप्ता ने कहा कि हमारे समाज में भी कमजोरी है, हम लड़ने जा रहे हैं भ्रष्टाचार के खिलाफ, लेकिन हम अपने घर में ही सच्चाई की बात नहीं कर पाते हैं। उन्होंने कहा कि हमें लोगों को ईमानदार सिस्टम देना है तो सबसे पहले भ्रष्ट अधिकारी को ही ठीक करना होगा, अगर हमें कानून व्यवस्था में सुधार करना है तो सबसे पहले पुलिस ट्रेनिंग में सुधार करना होगा, समाज से दहेज प्रथा को हटाना होगा। उन्होंने कहा कि जीरो स्टेट का मतलब ही है, पुलिस स्टेट को मेंटेन करना, लॉ एंड ऑर्डर को सुधारना, चाहे किसी की भी सरकार हो उसे पुलिस व्यवस्था में सुधार अवश्य करना चाहिए। उन्होंने कहा कि हम यह भूल जाते हैं कि पहले हम कभी आम आदमी थे, लेकिन आज हम पावर में आए हैं, उस पावर का सदुपयोग करें। उन्होंने कहा कि कानून व्यवस्था में बहुत जरुरी है-कंट्रोल करना, मैनेजमेंट और प्लानिंग।
प्रोफेसर बलराज चौहान ने कहा कि पुलिस इनरिफार्म एक महत्वपूर्ण विषय है, लोगों के अंदर पुलिस के प्रति जो अविश्वास है, उसे दूर करना होगा, तभी लोग पुलिस के होंगे और पुलिस लोगों की होगी। उन्होंने कहा कि थाने में एफआईआर समय पर लिखी जाए, राजनीतिक हस्तक्षेप को कम किया जाए, घटना के इंवेस्टीगेशन पार्ट एवं लैनपार्ट को अलग रखा जाए, जिससे पीड़ित को इंसाफ मिल सकेगा। जेएनयू के प्रोफेसर डॉ शेखर सिंह ने कहा कि हम जो टेक्नोलॉजी यानी मोबाइल का प्रयोग कर रहे हैं, उसे एक सही दिशा में प्रयोग करें। अवध बार एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ एलपी मिश्रा ने पुलिस और मीडिया पर आधारित सम्मेलन के द्वितीय तकनीकी सत्र में कहा कि जितना यह आवश्यक है कि पुलिस को अपने कर्तव्यों के प्रति जागरुक होने की आवश्यकता है, उतना ही जनता का भी यह दायित्व बनता है कि वह पुलिस के प्रति अपने दायित्वों का निर्वहन करे। उत्तर प्रदेश शासन के महाधिवक्ता राघवेंद्र सिंह ने मुख्य अतिथि के रूपमें संगोष्ठी को संबोधित किया।
उत्तर प्रदेश के लोकायुक्त रहे न्यायाधीश एससी वर्मा ने कहा कि देश में भ्रष्टाचार को खत्म करना मुश्किल है, लेकिन कुशासन को हम खत्म कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार को बड़ी ही गंभीरता से लिया जाना चाहिए, इसकी शुरुआत हमको स्वयं से ही करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि पुलिस को सही जानकारी देनी चाहिए, जिससे कि वह हमारी पूरी तरह से मदद कर सके। उन्होंने कहा कि ऑनलाइन कार्यशैली को सही तरीके तथा सही प्रारुप में व्यवस्थित करना चाहिए। डॉ राममनोहर लोहिया अवध के कुलपति प्रोफेसर मनोज दीक्षित ने कहा कि सफलता को प्राप्त करने के लिए धैर्य की जरुरत होती है, जनता को अपनी जिम्मेदारियां समझनी चाहिएं, गैर जिम्मेदाराना फैसले नहीं लेने चाहिएं। उन्होंने कहा कि इसे अपने राजनैतिक राजतंत्र का हिस्सा बनाना चाहिए। कार्यक्रम में पुलिस सुधार अधिनियम 1861 और आईपीसी अधिनियम 1863 के आधार पर महत्वपूर्ण जानकारियां दी गईं। कार्यक्रम को एसआर ग्रुप के चेयरमैन पवन सिहं चौहान ने भी संबोधित किया। संगोष्ठी में महाधिवक्ता, अतिरिक्त महाधिवक्ता, उत्तर प्रदेश शासन में प्रमुख सचिव गृह अरविंद कुमार सिंह, विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर एसपी सिंह, समाचार पत्रों के सम्पादकों और वरिष्ठ पत्रकारों ने भाग लिया।

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