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केंद्रीय कार्मिक और पेंशनभोगी लाभांवित

महंगाई भत्‍ता व महंगाई राहत को मंत्रिमंडल की मंजूरी

निजीक्षेत्र व सरकारी कामगारों के लिए भी अच्छी ख़बर

स्वतंत्र आवाज़ डॉट कॉम

Tuesday 12 September 2017 06:50:38 AM

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नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्‍यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने केंद्रीय कर्मचारियों के लिए अतिरिक्‍त 1 प्रतिशत महंगाई भत्‍ता और पेंशनभोगियों के लिए महंगाई राहत जारी करने को अपनी मंजूरी दे दी है। यह दोनों 1 जुलाई 2017 से लागू माने जाएंगे। महंगाई भत्‍ते की अतिरिक्‍त किस्‍त का अर्थ मूल वेतन या पेंशन की 4 प्रतिशत मौजूदा दर के अतिरिक्‍त 1 प्रतिशत वृद्धि करना है, ताकि मूल्‍यवृद्धि के लिए क्षतिपूर्ति की जा सके। सातवें केंद्रीय वेतन आयोग की संस्‍तुतियों के आधार पर स्‍वीकृत फॉर्मूले के अनुसार यह वृद्धि की गई है।
महंगाई भत्‍ते और महंगाई राहत के कारण सरकारी खजाने पर कुल मिलाकर प्रतिवर्ष 3068.26 करोड़ रूपये और वित्‍त वर्ष 2017-18 यानी जुलाई 2017 से फरवरी 2018 तक 8 माह की अवधि में 2045.50 करोड़ रूपये का भार आएगा। इससे 49.26 लाख केंद्रीय कर्मचारी और 61.17 लाख पेंशनभोगी लाभांवित होंगे। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने संसद में उपादान भुगतान (संशोधन) विधेयक 2107 को पेश करने को भी अपनी मंजूरी दे दी है। इस संशोधन से निजी क्षेत्र और सरकार के अधीन सार्वजनिक उपक्रम या स्‍वायत्‍त संगठनों के कर्मचारियों के उपादान की अधिकतम सीमा में वृद्धि होगी, जो केंद्र सरकार के कर्मचारियों के अनुसार सीसीएस (पेंशन) नियमावली के अधीन शामिल नहीं हैं।
दस अथवा अधिक लोगों को नियोजित करने वाली स्‍थापनाओं के लिए उपादान भुगतान अधिनियम 1972 लागू है। इस अधिनियम को लागू करने का मुख्‍य उद्देश्‍य है-सेवानिवृत्ति के बाद कामगारों की सामाजिक सुरक्षा, चाहे सेवानिवृत्ति की नियमावली के परिणामस्‍वरूप सेवानिवृत्ति हुई हो अथवा शरीर के महत्‍वपूर्ण अंग के नाकाम होने से शारीरिक विकलांगता के कारण सेवानिवृत्ति हुई हो, इसलिए उपादान भुगतान अधिनियम 1972, उद्योगों, कारखानों और स्‍थापनाओं में मजदूरी अर्जित करने वाली जनसंख्‍या के लिए यह एक महत्‍वपूर्ण सामाजिक सुरक्षा का विधान है। अधिनियम के तहत उपादान राशि पर मौजूदा अधिकतम सीमा 10 लाख रूपये है।
उपादान के संबंध में सीसीएस (पेंशन) नियमावली 1972 के अधीन केंद्रीय कर्मचारियों के लिए भी समान प्रावधान हैं। सातवां केंद्रीय वेतन आयोग लागू होने से पहले सीसीएस (पेंशन) नियमावली 1972 के अधीन अधिकतम सीमा 10 लाख रूपये थी, हालांकि सातवां केंद्रीय वेतन आयोग लागू होने से सरकारी कर्मचारियों के मामले में 1 जनवरी 2016 से अधिकतम सीमा अब 20 लाख रूपये है, इसलिए निजी क्षेत्र में काम करने वाले कर्मचारियों के मामले में भी महंगाई और वेतन वृद्धि पर विचार करते हुए सरकार का अब यह विचार है कि उपादान भुगतान अधिनियम 1972 के अधीन शामिल कर्मचारियों के लिए उपादान की पात्रता में संशोधन किया जाना चाहिए। तद्नुसार, सरकार ने उपादान भुगतान अधिनयिम 1972 में संशोधन की प्रक्रिया शुरू की है।

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