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जीडीपी में खनन का 2.6 फीसदी योगदान

उत्पादन और उत्पादकता में सराहनीय प्रगति-कोविद

सुरक्षा को हमेशा प्राथमिकता-बंडारू दत्तात्रेय

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Friday 18 August 2017 02:02:20 AM

ram nath kovind presented the national safety awards (mines)

नई दिल्ली। राष्ट्रपति रामनाथ कोविद ने नई दिल्ली में विज्ञान भवन में आयोजित एक कार्यक्रम में वर्ष 2013 एवं 2014 के लिए राष्ट्रीय खनन सुरक्षा पुरस्कार प्रदान किए। राष्ट्रपति ने इस अवसर पर कहा कि भारत खनिज संसाधनों से संपन्न देश है, इस समय खनन क्षेत्र हमारे देश की कुल जीडीपी में करीब 2.6 फीसदी का योगदान देता है, इतना ही नहीं यह क्षेत्र दस लाख से अधिक लोगों को दैनिक आधार पर प्रत्यक्ष रूपसे रोज़गार मुहैया कराता है और उनके परिवार के जीवनयापन में मदद करता है। राष्ट्रपति ने कहा कि हाल के दशक में खनन उद्योग ने गहन तंत्र और नई प्रौद्योगिकी को अपनाकर उत्पादन और उत्पादकता के क्षेत्र में सराहनीय प्रगति की है, इतिहास में इससे पहले कभी भी भारतीय खनन उद्योग ने इस तरह से क्रांतिकारी बदलावों का अनुभव नहीं किया।
राष्ट्रपति रामनाथ कोविद ने कहा कि अधिक उत्पादकता और मुनाफे का अंतर एवं कर्मचारियों की सुरक्षा के बीच संतुलन काफी महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि मानव सुरक्षा को प्राथमिकता देना हर एक व्यक्ति एवं संगठन का दायित्व है। उन्होंने कहा कि खनन क्षेत्र में राष्ट्रीय सुरक्षा पुरस्कार हमारे देश के खनन उद्योग में सुरक्षा और कल्याण मानकों को कायम रखने के लिए उत्कृष्ट प्रेरक के तौर पर जारी रहेंगे। राष्ट्रपति ने कहा कि खनिज क्षेत्र के पुरस्कार विजेताओं की व्यवस्था एवं प्रणाली खनन इंजीनियरिंग और प्रबंधन के छात्रों के लिए एक उदाहरण बनना चाहिए, छात्रों को भी अपने परिचय एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम के अंतर्गत खनन क्षेत्रों का दौरा करना चाहिए। उन्होंने कहा कि पुरस्कार विजेता खनन उद्योगों की विशेष सुरक्षा सुविधाओं को संबंधित प्राधिकरणों और सार्वभौमिक रूपसे स्वीकार्य संस्थाओं, जोभी लागू हो, द्वारा विशेष रूपसे प्रदर्शित किया जाना चाहिए।
रामनाथ कोविद ने खनन कंपनियों से आग्रह किया कि वह कर्मचारियों, उनके परिजनों, स्थानीय समुदायों और व्यापक जनसमूह को कारगर सहायता प्रदान करने के लिए प्रबुद्ध नीतियों का निर्माण करें। केंद्रीय श्रम एवं रोज़गार राज्यमंत्री बंडारू दत्तात्रेय ने पुरस्कार विजेताओं को बधाई देते हुए कहा कि खनन क्षेत्र के विकास को अन्य क्षेत्रों में तेज़ी से हो रहे औद्योगिकीकरण के साथ-साथ आगे बढ़ना चाहिए और विकास के पहिये के तौरपर लगातार महत्वपूर्ण भूमिका निभानी चाहिए। उन्होंने कहा कि कर्मचारियों के जीवन को नुकसान पहुंचाकर खनन का उत्पादन किसी भी कीमत पर स्वीकार्य नहीं है, खनन उद्योग को सुरक्षित खनन के सिद्धांत का पालन करना चाहिए, जोकि परिणामस्वरूप संपूर्ण समाज को फायदा पहुंचाता है।
बंडारू दत्तात्रेय ने कहा कि श्रम एवं रोज़गार मंत्रालय उचित कानून एवं निर्धारित मानकों का प्रारूप तैयारकर विभिन्न प्रचार पहल एवं जागरूकता कार्यक्रमों के ज़रिए खनन क्षेत्र में कार्यरत व्यक्तियों के लिए व्यावसायिक रोगों और आपातकालीन स्थिति के जोखिमों में कमी सुनिश्चित करने के प्रति काफी उत्सुक है। उन्होंने कहा कि उनका मंत्रालय ऐसा वातावरण तैयार करना चाहता है, जहां सुरक्षा को हमेशा प्राथमिकता दी जाए। बंडारू दत्तात्रेय ने सूचित किया कि खनन संबंधी कानूनों में उपयुक्त संशोधन पहले ही किए जा चुके हैं और कोयला खान विनियम और तेल खान विनियम संशोधन अंतिम चरण में हैं।
श्रम एवं रोज़गार मंत्री ने कहा कि खान सुरक्षा महानिदेशालय यानी डायरेक्टरेट जनरल ऑफ माइंस सेफ्टी, सिलिकॉसिस बहुल राज्यों में जागरूकता कैम्पों की मदद से मज़दूरों, असंगठित क्षेत्र में लघु खान मालिकों और संपूर्ण समुदायों के बीच जागरूकता लाने के लिए कई महत्वपूर्ण पहल कर चुका है। श्रम एवं रोज़गार मंत्रालय की सचिव एम सथियावथी ने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा पुरस्कार न सिर्फ विजेताओं को खान क्षेत्र में उच्चमानक और बेहतर स्वास्थ्य प्राप्त करने के लिए उत्साहित करेगा, बल्कि खान क्षेत्र में कार्यरत सभी कर्मचारियों को इन उपलब्धियों को हासिल करने के लिए प्रेरित भी करेगा।

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