स्वतंत्र आवाज़
word map

शाइस्ता ने मोदी को सुनाई महिलाओं की पीड़ा

शाइस्ता अम्बर ने की मुस्लिम महिला मुद्दों पर गंभीर चर्चा

मुस्लिम महिलाओं के साथ होगा न्याय-नरेंद्र मोदी

स्वतंत्र आवाज़ डॉट कॉम

Saturday 12 August 2017 06:59:01 AM

all india muslim women personal law board press conference

लखनऊ। आल इंडिया मुस्लिम महिला पर्सनल ला बोर्ड की अध्यक्ष शाइस्ता अम्बर ने प्रेस क्लब लखनऊ में एक प्रेसवार्ता का आयोजन किया, जिसमें उन्होंने नई दिल्ली में प्रधानमंत्री आवास पर 8 अगस्त 2017 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से हुई मुलाकात में उनके समक्ष उठाए गए मुद्दों की मीडिया को जानकारियां दीं। शाइस्ता अम्बर ने प्रधानमंत्री से कहा कि वक्फ की ज़मीन पर लूट, घसोट और नाजायज़ कब्ज़ा हो रहा है, इस्लाम में वक्फ का मकसद है कि ज़मीन-जायदाद को समाज के कमज़ोर तबके, बेसहारा, ज़रूरतमंद, यतीमों, तलाकशुदा, बेवा और वह लोग जिनका परिवार उनके साथ नहीं है, जो तनहा ज़िंदगी गुज़ार रहे हैं, वक्फ की संपत्ति से उनको भरण-पोषण के लिए सहारा मिले, उनको शिक्षा, रोज़गार मिले और उनके साथ न्याय हो। शाइस्ता अम्बर ने प्रधानमंत्री से आग्रह किया है कि पूरे भारत में वक्फ की ज़मीनों को चिन्हित करके वक्फ ज़मीनों से नाजायज़ कब्ज़े हटाए जाएं और तलाकशुदा महिलाओं और बुज़ुर्गों के लिए आश्रय, ओल्ड होम, एजुकेशनल सेंटर, रोज़गार से जुड़े ट्रेनिंग सेंटर खोले जाएं, जो केंद्र सरकार से संचालित हों।
शाइस्ता अम्बर ने कहा कि तलाकशुदा महिलाओं के बच्चों को रोज़गारपरक ट्रेनिंग दिलाई जाए, ताकि महिला और बच्चे आत्मनिर्भर हों, ताकि वह देश की तरक्की और खुशहाली में भागीदार बने। शाइस्ता अम्बर ने कहा कि मेंटीनेंस एवं गुज़ाराभत्ता एक्ट 1986 के तहत तलाकशुदा मुस्लिम महिलाओं एवं उनकी संतानों को वक्फ से प्रतिमाह गुज़ारा भत्ता देने का क़ानून है, भ्रष्टाचार और धांधली के चलते इस एक्ट के बारे में लोगों को, खासकर मुस्लिम महिलाओं को किसी भी प्रकार की जानकारी और राहत ही नहीं दी गई है। शाइस्ता अम्बर ने निकाहनामे पर कहा है कि शौहर के निधन के बाद उसकी विधवा, बेटे बहु के साथ आसानी से रह लेती है, परंतु बीवी के निधन के बाद उसका शौहर बहु के साथ रहने में असहज महसूस करता है, अतः आल इंडिया मुस्लिम महिला पर्सनल बोर्ड यह मांग करता है कि वक्फ की ज़मीन पर अवैध रूपसे काबिज़ सभी कब्जेदारों को हटाया जाए, उन ज़मीनों पर शेल्टर होम का निर्माण कराया जाए, ऐसे मुस्लिम पुरुष जो बीवी के देहांत के बाद घर में अपमानित जीवन जीने को मजबूर हैं, को इन शेल्टर होम में रहने, खाने और रोज़गार की समुचित व्यवस्था की जाए, सरकार इस व्यवस्था को लागू करने के लिए आवश्यक कदम उठाए।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी शाइस्ता अम्बर के माध्यम से देशभर की मुस्लिम महिलाओं को संदेश दिया कि वह अपने को अकेला और कमज़ोर न समझें, केंद्र सरकार उनकी स्थिति पर पूरी नज़र रखे हुए है, कहीं से भी उनके साथ अन्याय नहीं होने दिया जाएगा। प्रधानमंत्री ने मुस्लिम महिलाओं से कहा कि वह अधिक से अधिक शिक्षा प्राप्त करने का प्रयत्न करें, क्योंकि शिक्षित होने के बाद उन्हें अपने अधिकारों के बारे में ज्यादा और सही ज्ञान होगा। शाइस्ता अम्बर ने प्रधानमंत्री को मुस्लिम महिलाओं की और भी समस्याएं बताईं, जिनपर प्रधानमंत्री ने उचित कदम उठाए जाने का आश्वासन दिया। शाइस्ता अम्बर ने कहा कि प्रधानमंत्री ने उनकी पेशकश से रज़ामंदी जाहिर करते हुए कहा है कि वह जल्द ही इस दिशा में प्रयास शुरू करेंगे। प्रधानमंत्री ने मुस्लिम पर्सनल ला बोर्ड से आग्रह किया कि वे मुस्लिम महिलाओं को अपने शरई और संवैधानिक अधिकारों के बारे में जागरूक करे, ताकि वे तीन तलाक जैसी गैर शरई बुराई के खिलाफ आवाज़ बुलंद कर उसका मुकाबला कर सकें। शाइस्ता अम्बर ने प्रधानमंत्री को प्रस्तुत बोर्ड के प्रस्ताव में कहा कि देश में मुस्लिम महिलाओं की स्थिति बेहद दयनीय है, उन्हें न तो अपने फैसले लेने का अधिकार है और न ही अपनी राय जाहिर करने का अधिकार, मुस्लिम ख्वातीनों ने तथाकथित मुस्लिम धर्मगुरुओं की बनाई व्यवस्था को अपनी नियति मान लिया है। उन्होंने कहा कि शिक्षा से महरूम किए जाने की वजह से मुस्लिम महिलाएं कुरान और हदीस में अपने लिए लिखित प्रावधानों और अधिकारों के बारे में सही से नहीं जानती हैं।
शाइस्ता अम्बर ने कहा कि तीन तलाक को लेकर उच्चतम न्यायालय में चल रहे मुकद्मे में ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड एक प्रमुख पक्षकार है, वह तीन तलाक की व्यवस्था को बरकरार रखने की पुर्ज़ोर वकालत कर रहा है, हालांकि उसने अदालत में दाखिल एक हलफनामे में स्वीकार किया है कि कुरानशरीफ में तीन तलाक की कोई व्यवस्था नहीं है, ऐसे में यह सवाल उठना लाज़मी है कि जो इस्लामी व्यवस्था कुरान और हदीस की बुनियाद पर बनी है, उसमें तीन तलाक जैसी गैर इस्लामी व्यवस्था को जगह क्यों मिली हुई है, बोर्ड की जो महिला सदस्य तीन तलाक की वकालत कर रही हैं, वे ब्रेनवॉश की जीती-जागती मिसाल हैं। उन्होंने आल इंडिया मुस्लिम महिला पर्सनल ला बोर्ड के 2005 में तैयार किए गए आदर्श निकाहनामे की एक प्रति प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भेंट की। उन्होंने प्रधानमंत्री को आदर्श निकाहनामे की विशेषताओं के बारे में बताया तो वह इससे काफी प्रभावित हुए और प्रशंसा की। नरेंद्र मोदी ने आदर्श निकाहनामे को देशभर में लागू करने के बारे में सकारात्मक नज़रिया अपनाने का संकेत दिया। निकाहनामे का मूल तत्व है-दोनों पक्षों को बराबर का अधिकार देना।
शाइस्ता अम्बर ने कहा कि प्रस्तावित निकाहनामा न सिर्फ मुस्लिमों के लिए है, बल्कि भारत में निवास करने वाले समस्त भारतीयों के लिए आदर्श है, वर और वधु पक्ष का फोटो सहित पूरा पता इस निकाहनामे में दर्ज किया जाएगा, वर वधु का आधार कार्ड निकाहनामे से जोड़ा जाएगा, जिससे आधुनिक विवाह की आड़ में किया जाने वाले फर्जीवाड़े पर अंकुश लगाकर वधु पक्ष को शोषण और धोखाधड़ी से बचाया जा सकेगा। उन्होंने कहा कि यह निकाहनामा तलाके इद्द्दत, जोकि इस्लामी सिद्धांतों के खिलाफ है, का विरोध करता है। शाइस्ता अम्बर ने कहा कि विवाह पंजीकरण आज समय की आवश्यकता है, 2005 में आदर्श निकाहनामा तैयार करते समय ही आल इंडिया मुस्लिम महिला पर्सनल बोर्ड ने इस दिशा में आवश्यक प्रावधान किए थे, आदर्श निकाहनामा देश की प्रमुख तीन भाषाओं हिंदी, उर्दू तथा अंग्रेज़ी में तैयार किया गया है, ताकि किसी को विवाह पंजीकरण के समय भाषा संबंधित कठिनाइयों का सामना न करना पड़े। आदर्श निकाहनामा तीन प्रत्रियों में होगा, पहली प्रति दुल्हन के परिवार को सबूत के तौरपर दी जाएगी, दूसरी प्रति सरकारी विवाह पंजीकरण केंद्र को तथा तीसरी प्रति दुल्हे को मिलेगी।
शाइस्ता अम्बर ने कहा कि यह निकाहनामा भारत सहित विदेशी मुल्कों में भी बहुत तेज़ी से प्रसिद्ध हो रहा है, निकाहनामा के बाद दोनों पक्षों के लिए शादी छुपाना असंभव हो जाएगा। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार के शादी पंजीकरण अनिवार्य किए जाने के फैसले को मैं पूरा समर्थन देती हूं। उन्होंने प्रधानमंत्री से आग्रह किया कि इस निकाहनामे की प्रतियां सभी राज्यों को भेजी जाएं, ताकि सभी मुस्लिम महिलाओं को इससे फायदा मिल सके। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार भारतीय विधिआयोग को भी आदर्श निकाहनामे की प्रतियां उपलब्‍ध कराए, ताकि वह विवाह के बाद होने वाली धोखाधड़ी की घटनाओं पर अंकुश लगाने के लिए आवश्यक कानूनी प्रावधानों की व्यवस्था करे। उन्होंने कहा कि भारतीय मुस्लिम महिलाएं पूरी तरह से घर के पुरुष सदस्यों के रहमोकरम पर आश्रित रहती हैं, उन्हें छोटे-मोटे निर्णय लेने का भी अधिकार नहीं है, उन्हें यहां तक जानकारी नहीं कि कुरआन ने महिला और पुरुष दोनों को सामान अधिकार दिए हैं।
मुस्लिम महिला पर्सनल लॉ बोर्ड की अध्यक्ष शाइस्ता अम्बर ने कहा कि सदियों से पुरुषों के आधिपत्य में रहती आईं मुस्लिम महिलाओं के लिए यह सबसे बड़ी त्रासदी है, महिलाओं ने अपने अंदर एक भ्रांति पाल ली है कि उसे पुरुष की दासी बनाकर धरती पर भेजा गया है, विडम्बना देखिए कुछ शिक्षित मुस्लिम महिलाएं मुस्लिम पर्सनल ला बोर्ड में वर्णित तीन तलाक का समर्थन कर रही हैं। वास्तव में मुस्लिम पर्सनल ला बोर्ड ऐसी कुछ महिलाओं को आगे करके उनके हक़ मारने के लिए इस्तेमाल कर रहा है। शाइस्ता अम्बर ने कहा कि पूरे देश में मुस्लिम वक्फ के पास हज़ारों करोड़ की संपत्ति से अर्जित आय से एक निश्चित हिस्से का इस्तेमाल मुस्लिम तलाकशुदा महिलाओं को प्रतिमाह भरण-पोषण देने के लिए इस्तेमाल किया जाए। प्रेसवार्ता में आल इंडिया मुस्लिम महिला पर्सनल बोर्ड की उपाध्यक्ष आलिमा, आसिया खानम, मौलाना हाजी सलीस साहब, अज़रा खान अधिवक्ता, कुरेशा खातून, सबा बानो, फरज़ाना बेगम और वक्फ का प्रोजेक्ट तैयार कर रहे सीए सौरभ गौड़ मुख्य रूपसे उपस्थित थे।

हिन्दी या अंग्रेजी [भाषा बदलने के लिए प्रेस F12]