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एकता के सूत्र में बांधता है 'वंदे मातरम्'

मंत्री ने किया 'वंदे मातरम्' पुस्तक का विमोचन

भारत के राष्ट्रवादी लोकाचार का प्रतीक

स्वतंत्र आवाज़ डॉट कॉम

Friday 11 August 2017 05:55:40 AM

dr. jitendra singh releasing a book titled vande mataram

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री कार्यालय, कार्मिक, जन शिकायत, पेंशन, परमाणु ऊर्जा एवं अंतरिक्ष राज्यमंत्री डॉ जितेंद्र सिंह ने ‘वंदे मातरम्’ पुस्तक का विमोचन किया। पुस्तक में वंदे मातरम् के सृजन से लेकर विभिन्न चरणों में इसकी विकास यात्रा का पता लगाया गया है। डॉ जितेंद्र सिंह ने इस अवसर पर कहा कि ‘वंदे मातरम्’ भारत के राष्ट्रवादी लोकाचार का प्रतीक है और इसे किसी एक धर्म अथवा पंथ के साथ जोड़ना पूरी तरह से गलत है। उन्होंने कहा कि वंदे मातरम् को सबसे पहले 1870 के दशक में बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय की कविता के रूप में जाना जाता था, जिसे बाद में 1881 में उनके उपन्यास ‘आनंदमठ’ में शामिल किया गया।
राज्यमंत्री डॉ जितेंद्र सिंह ने कहा कि सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि 20वीं शताब्दी की शुरुआत में इस गीत के कई छंदों को राष्ट्रीय गीत के रूपमें अपनाया गया और बाद में भारत के स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़े राजनीतिक कार्यकर्ताओं के लिए यह गीत अत्यंत लोकप्रिय बन गया। उन्होंने कहा कि वंदे मातरम् को एक प्रतीक के रूप में व्याख्यायित किया जा सकता है, जो भारत के विभिन्न राज्यों, धर्मों और विश्वासों को मानने वाले लोगों को एकता के सूत्र में बांधता है और उन्हें एकसाथ आकर मां भारती की सेवा एवं रक्षा करने के लिए प्रेरित करता है। पुस्तक को अखिलेश झा और रश्मिता झा ने लिखा है। यह पुस्तक विशेष रूपसे संविधानसभा और भारतीय संसद की कार्यवाही के दौरान वंदे मातरम् के संदर्भों पर केंद्रित है, और पिछले 150 साल के दौरान विभिन्न ध्वनियों एवं ग्रामोफोन में रिकॉर्ड किए गए वंदे मातरम् के विभिन्न संगीत संस्करणों का पता लगाती है।

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