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पड़ोसी का विनाश खुद का विनाश-दलाई लामा

'भारत-चीन में बातचीत से हो डोकलाम का समाधान'

दलाई लामा को सैन्य संघर्ष नहीं होने की आशा

स्वतंत्र आवाज़ डॉट कॉम

Thursday 10 August 2017 12:59:35 AM

dalai lama

नई दिल्ली। भारत और चीन को एक दूरदराज के हिमालय क्षेत्र में अपने लंबे समय से चल रहे सैन्य गतिरोध को वार्ता के माध्यम से ही हल करना होगा, तिब्बति धर्मगुरु दलाई लामा ने बुधवार को नई दिल्ली में यह बात कही है। उन्होंने कहा कि युद्ध की संभावना को देखते हुए यह दोनों ही पक्षों के लिए विनाशकारी होगा। भारत के छोटे दोस्त भूटान के लिए भारतीय और चीनी सैनिकों ने डोकलाम पठार को सात सप्ताह से सैन्य टकराव में उलझा दिया है। तिब्बत में चीनी शासन के खिलाफ विद्रोह के बाद भारत में निर्वासन में रहने वाले धर्मगुरु दलाई लामा ने कहा कि युद्ध में कोई वैंकर नहीं होता और वार्ता ही केवल एकमात्र विकल्प होती है।
नोबेल शांति अभिनीत दलाई लामा ने नई दिल्ली में कहा कि एक तरफ जीत, एक पक्ष की हार पुरानी सोच है, अपने पड़ोसी का विनाश खुद का विनाश है, इसलिए वार्ता ही समाधान का एक मात्र रास्ता है। भारतीय सैनिकों ने जून के मध्य में डोकलाम में एक चीनी निर्माण दल को एक सड़क का विस्तार करने से रोक दिया था, जिसके बाद भारत और चीन में युद्ध तक की नौबत आ गई है। भारत की सेना ने कहा है कि चीन की सेना पूर्वोत्तर में सड़क निर्माण कर अपने लिए रास्ता बनाना चाहती है, जो भारत की सुरक्षा और संप्रभुता पर अतिक्रमण है। इस सड़क निर्माण से भारतीय सीमा पर चीन का अधिपत्य हो जाएगा, जो भारत को मंजूर नहीं है।
बीजिंग ने भारत से डोकलाम क्षेत्र को छोड़ने की मांग की है और पड़ोसी देशों के बीच कम महत्वपूर्ण वार्तालापों से कोई हल नहीं निकला है, इस वजह से डर है कि दोनों देश एक संघर्ष में ठोकर खा सकते हैं। भारत और चीन के पास 3,500 किलोमीटर यानी 2,175 मील लंबी पर्वत सीमा है, जिस पर 1962 में लड़ाई लड़ी गई थी। तब से दोनों देश सीमा तय करने में नाकाम रहे हैं, जिससे एक-दूसरे के क्षेत्रों में घुसपैठ के अक्सर दावों की ओर बढ़ते रहे हैं। दलाई लामा ने विश्वास व्यक्त किया कि दोनों देशों में कठोर शब्दों के आदान-प्रदान के बावजूद, सैन्य संघर्ष की संभावना कम है, दो बड़े देशों में एक-दूसरे को खत्म करने या दूसरे को पराजित करने की क्षमता नहीं है, इसलिए आपको अंततः एक-दूसरे के साथ रहना होगा।
भारत और चीन के बीच तनाव कई मुद्दों पर बढ़ रहा है। भारत अपने चरम प्रतिद्वंद्वी पाकिस्तान के साथ बीजिंग के सैन्य सहयोग और दक्षिण एशिया में बुनियादी ढांचे के विकास में विस्तार की भागीदारी से चिंतित है। चीन ने तिब्बती बौद्ध आध्यात्मिक नेता के भारत सरकार के सार्वजनिक आलिंगन के खिलाफ आवाज़ उठाई हुई है, जिसे वह खतरनाक विभाजनकारी मानता है। दलाई लामा ने कहा है कि एक मौक़े की बातचीत चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के प्रतिनिधियों के साथ फिर से शुरू हो सकती है। उल्लेखनीय है कि 2010 से बीजिंग और दलाई लामा के प्रतिनिधियों के बीच कोई औपचारिक बातचीत नहीं हुई है।

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