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धर्मनिरपेक्षता भारत का बेहद जरूरी गुण-अंसारी

नेशनल लॉ स्कूल ऑफ इंडिया का वार्षिक दीक्षांत समारोह

उपराष्ट्रपति ने समानता व सहिष्णुता का मुद्दा भी उठाया

स्वतंत्र आवाज़ डॉट कॉम

Sunday 6 August 2017 10:18:36 AM

vice president hamid ansari

बंगलूरू। भारत के उपराष्ट्रपति मोहम्मद हामिद अंसारी ने भी जाते-जाते देश में समानता और सहिष्णुता का मुद्दा उठा दिया और कहा है कि देश के लोकतंत्र के बहुलतावाद और धर्मनिरपेक्षता बेहद जरूरी गुण हैं। उन्होंने कहा कि इस विविध और बहुलता के धनी देश में इन्हीं मूल्यों को आधार बनाकर एक दूसरे के प्रति स्वीकृति बनाई गई है और इन्हीं को नींव बनाकर ये लोकतंत्र अपनी स्थिरता को कायम रखेगा। हामिद अंसारी आज बंगलूरू में नेशनल लॉ स्कूल ऑफ इंडिया यूनिवर्सिटी के 25वें वार्षिक दीक्षांत समारोह को संबोधित कर रहे थे। उपराष्ट्रपति ने कहा कि देश के सबसे प्रतिष्ठित लॉ स्कूल से आमंत्रण उनके लिए गर्व की बात है, खासकर तब जब मेरी तालीम कानून विषय में नहीं रही है। उपराष्ट्रपति ने समानता और सहिष्णुता का ज़िक्र करके इस मुद्दे को हवा देदी। दीक्षांत समारोह के बाद इसकी काफी चर्चा भी हुई। उल्लेखनीय है कि इसी दस अगस्त को उपराष्ट्रपति मोहम्मद हामिद अंसारी का कार्यकाल भी समाप्त हो रहा है।
मोहम्मद हामिद अंसारी ने कहा कि भारत के संविधान और इसकी प्रस्तावना में निहित मूल्यों की रक्षा हमारी जिम्मेदारी है, भारत का प्रत्येक नागरिक जिसकी आस्था इस संप्रभु, साम्यवादी और धर्मनिरपेक्ष गणतंत्र पर है, उम्मीद करता है कि उसे न्याय, समानता और भाईचारे का माहौल मिले। उन्होंने कहा कि देश का संविधान यह सुनिश्चित करता है कि हर नागरिक इस लोकतांत्रिक ढांचे में तमाम विविधताओं और बहुलताओं के साथ रहे, यही इस लोकतंत्र की मजबूती और खूबसूरती है। उन्होंने कहा कि आज हमारे सामने देश के आधारभूत स्वरूप, जो पूर्णत: धर्मनिरपेक्ष है, के मूल्यों पर एक बार फिर से जोर देने की जरूरत है, ये मूल्य हैं-समानता, धर्मनिरपेक्षता और सहिष्णुता।
उप राष्ट्रपति हामिद अंसारी ने कहा कि नागरिक होने का मतलब कई कर्तव्यों का निर्वहन भी है, देश की तमाम विविधताओं और अनेकताओं से प्यार और लगाव भी उन कर्तव्यों में से एक है, यही राष्ट्रवाद का मतलब है और वैश्विक स्तर पर भी यही मतलब होना चाहिए। उन्होंने कहा कि देश के संविधान, उसकी सांस्कृतिक विरासत और मूल्यों के प्रति हर नागरिक की प्रतिबद्धता जरूरी है, तभी संविधान की प्रस्तावना में निहित वो मूल्य असल में हर व्यक्ति के जीवन में जाति, धर्म, रंग और समुदाय से ऊपर उठकर भारतीयता को मजबूत करेंगे।
दीक्षांत समारोह में कर्नाटक के राज्यपाल वजूभाई वाला, भारत के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति जगदीश सिंह खेहर, कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्दारमैय्या, सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश जस्टिस दीपक मिश्रा, कर्नाटक राज्य के उच्चशिक्षा मंत्री बसावाराज रायरेड्डी, राज्य के कानून और न्याय मंत्री टीबी जयचंद्रा, भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश डॉ जस्टिस राजेंद्र बाबू, बार काउंसिल ऑफ इंडिया के अध्यक्ष मनन कुमार मिश्रा, एनएलएसआईयू के कुलपति प्रोफेसर आर वेंकट राव एवं और भी कई महानुभाव मौजूद थे।

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