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भारत-ईरान में प्रगाढ़ ऐतिहासिक संबंध-गडकरी

ईरानी राष्ट्रपति हसन रूहानी ने दूसरी बार कार्यभार संभाला

चाबहार बंदरगाह पर वर्ष 2018 तक परिचालन आरंभ

स्वतंत्र आवाज़ डॉट कॉम

Sunday 6 August 2017 04:29:49 AM

chabahar port

नई दिल्ली। केंद्रीय सड़क परिवहन, राजमार्ग एवं नौवहन मंत्री नितिन गडकरी ने कहा है कि भारत सरकार ईरान में चाबहार बंदरगाह के विकास के लिए कृत संकल्प है और आशा है कि 2018 में इसपर परिचालन आरम्भ हो जाएगा। नितिन गडकरी तेहरान में राष्ट्रपति हसन रूहानी के दूसरी बार कार्यभार संभालने पर भारत का प्रतिनिधित्व करने के तौर पर वहां गए हैं। उन्होंने कहा कि भारत और ईरान के बीच प्रगाढ़ ऐतिहासिक संबंध है। नितिन गडकरी ने जानकारी दी कि चाबहार बंदरगाह पर निर्माण कार्य पहले ही आरम्भ हो चुका है और केंद्र सरकार ने बंदरगाह के विकास के लिए छह बिलियन रुपए आवंटित भी कर दिए हैं, जिनमें से उपकरणों के लिए 380 करोड़ रुपए की निविदा की धनराशि को पहले ही अंतिम रूप दे दिया गया है।
नितिन गडकरी ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि इस परियोजना के कार्य को शीघ्रता से पूरा करने के लिए ईरान सरकार शीघ्र ही आवश्यक अनुमोदनों को स्वीकृति प्रदान कर देगी। नितिन गडकरी ने कहा कि चाबहार बंदरगाह दोनों राष्ट्रों के संबंधों एवं इस क्षेत्र में व्यापार एवं कारोबार को बढ़ावा देगा। चाबहार बंदरगाह दक्षिणपूर्वी तट पर सिस्तान-बलूचिस्तान प्रांत में है। यह बंदरगाह भारत के लिए रणनीतिक दृष्टि से बहुत उपयोगी है। पिछले साल मई में भारत और ईरान के बीच हुए समझौते के अनुसार भारत चाबहार बंदरगाह के पहले चरण के लिए उपकरणों से लैस दो बर्थ शुरू करेगा। दस वर्ष की लीज पर 85.21 मिलियन का पूंजी निवेश किया जाएगा और वार्षिक राजस्व 22.95 मिलियन होगा।
गौरतलब है कि ईरान में प्रस्तावित चाबहार बंदरगाह परियोजना को लेकर पाकिस्तान सबसे ज्यादा बेचैन है। पाकिस्तान को चाबहार परियोजना से गहरा झटका लगने वाला है। भारत के ईरान और अफगानिस्तान से विभिन्न क्षेत्रों में बढ़ते दोस्ताना संबंध पाकिस्तान को रास नहीं आ रहे हैं। चाबहार बंदरगाह परियोजना तेजी से आगे बढ़ रही है, जिससे पाकिस्तान बौखलाया हुआ है। हाल ही में केंद्रीय जहाजरानी मंत्री नितिन गडकरी के निमंत्रण पर अफगानिस्तान के परिवहन मंत्री डॉ मोहम्दुल्लाह बताश और ईरान के सड़क एवं शहरी विकास मंत्री डॉ अब्बास अहमद भारत आए थे, जहां त्रिपक्षीय समीक्षा बैठक करके चाबहार परियोजना के क्रियांवयन को तेजी से आगे बढ़ाने पर सहमति बनाई गई। बैठक में अंतर्राष्ट्रीय परिवहन और ट्रांजिट कॉरिडोर की स्थापना के लिए त्रिपक्षीय समझौते के अमल पर भी चर्चा हुई। चाबहार बंदरगाह पर जागरुकता के लिए इसी साल एक कनेक्टिविटी समारोह का आयोजन भी होने वाला है। शीघ्र ही परिवहन पारगमन, बंदरगाह, सीमा शुल्क प्रक्रियाओं और कौंसुलर मामलों से संबंधित प्रोटोकॉल विकसित किया जाएगा, एक महीने के भीतर चाबहार में तीनों देशों के वरिष्ठ अधिकारियों की एक विशेषज्ञ स्तरीय बैठक भी होगी, जिसमें तीनो देशों की आर्थिक वृद्धि और विकास से व्यापार का पुर्नगठन होगा।
चाबहार परियोजना के पूरा होते ही ईरानी बंदरगाह के जरिए अफगानिस्तान तक सीधे पहुंच शुरू हो जाएगी। इस परियोजना के जरिए भारत मध्य एशिया और अफगानिस्तान तक पहुंचेगा। भारतीय सामान सेंट्रल एशिया और पूर्वी यूरोप तक भेजा जा सकेगा। पाकिस्तान के साथ चीन भी बेचैन है और चाबहार बंदरगाह परियोजना से अपने लिए खतरा महसूस कर रहा है, हालाकि चीन प्रतिद्वंद्वता के साथ पाकिस्तान का ग्वादर पोर्ट बना रहा है। चीन ग्वादर के सहारे अरब सागर तक अपनी पहुंच बनाने का प्रयास कर रहा है। भारत की योजना है कि मध्य एशिया से पाइप लाइन के जरिए तेल और गैस भी भारत तक आए, लेकिन पाकिस्तान के अविश्वास के कारण पाइपलाइन शुल्क और उसकी सुरक्षा को लेकर खतरा है। ऐसे में चाबहार से जहाजों के जरिए र्इंधन पहुंचाने के लिए यह परियोजना अत्यंत महत्वपूर्ण साबित होगी।

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