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राष्ट्रपति भवन की गरिमा पर कोविद संवेदनशील

रामनाथ कोविद ने की अपने सभी अधिकारियों से परिचय भेंट

हमारा कृत्य देश के लिए अनुकरणीय होता है-राष्ट्रपति

स्वतंत्र आवाज़ डॉट कॉम

Sunday 6 August 2017 03:52:55 AM

president ram nath kovind meeting the president's military wing officers and staff

नई दिल्ली। राष्ट्रपति रामनाथ कोविद ने राष्ट्रपति भवन में मिलिट्री विंग के अधिकारियों और स्टाफ से लीक से हटकर मुलाकात की और एहसास कराया कि राष्ट्रपति भवन की गरिमा और यहां कार्यरत प्रत्येक व्यक्ति का कोई भी कृत्य देश के लिए अनुकरणीय होता है। राष्ट्रपति पद संभालने के कुछ ही दिन के बाद पहली बार राष्ट्रपति रामनाथ कोविद ने परिचय के लिए मिलिट्री स्टाफ से अलग से बैठक की। राष्ट्रपति के मिलिट्री सचिव ने राष्ट्रपति भवन की मिलिट्री इकाई से परिचित कराया, जिनमें डीएमएसपी, एडीसी, रस्मी इकाई, निमंत्रण इकाई, टूर सेक्शन यात्री प्रबंध सेल, हाउस होल्ड इकाई, स्वच्छता सेक्शन, राष्ट्रपति के अंगरक्षक एवं रस्मी गारद बटालियन शामिल थे। इस अवसर पर राष्ट्रपति ने कहा कि पूरा देश राष्ट्रपति भवन की ओर बहुत आशा से देखता है। उन्होंने अधिकारियों और स्टाफ से अनुरोध किया कि वह भारतवासियों की आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए अपनी जिम्मेदारियां पूर्ण रूपसे निभाए।
राष्ट्रपति रामनाथ कोविद ने कहा कि वे अधिकारों के स्थान पर कर्तव्यों पर अधिक ध्यान दें और त्याग तथा अनुशासन के मूल्यों को विकसित करें। उन्होंने कहा कि वह देश की उन्नति के लिए जुट जाएं और ईमानदारी और कर्तव्यनिष्ठा से एकजुट होकर कार्य करें। उन्होंने अधिकारियों और स्टाफ से कहा कि वे सभी एक ऐसी व्यवस्‍था के अंग हैं, जिनपर पूरा भारत गर्व करता है, पूरा देश राष्ट्रपति भवन की ओर बहुत आशा और विश्वास के साथ देखता है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति भवन केवल पत्‍थर व स्टील से निर्मित एक भवन नहीं है, इसका अस्तित्व इस भवन में काम करने वाले लोगों पर टिका हुआ है। उन्होंने कहा कि भारत के हर नागरिक को हम सबसे बहुत उम्मीदें हैं, इसलिए हम सबकी जिम्मेदारी और बढ़ जाती है, भारत का हर एक व्यक्ति अपनी जिम्मेदारियों को पूरा करके देश को मजबूत बनाता है, इसलिए अपने-अपने हिस्से की जिम्मेदारी निभाकर हमें भारत की उम्मीदों पर खरा उतरने की कोशिश करनी चाहिए। रामनाथ कोविद ने कहा कि अकसर हम अपने अधिकारों को ज्यादा महत्व देते हैं, मगर हम यह भूल जाते हैं कि हमारे कर्तव्य क्या हैं? हमें अपने अधिकारों से ज्यादा अपने कर्तव्यों पर जोर देना चाहिए, ताकि हम देश को एक नए आयाम पर ले जाने में कामयाब हो सकें।
रामनाथ कोविद ने कहा कि हमें अपने जीवन में त्याग, संयम और अनुशासन पैदा करने की जरुरत है, देश के जिन महापुरुषों ने इतिहास बनाया है, यदि हम उनके जीवन पर गौर करें तो यह पता चलेगा कि उन्होंने अपने अधिकारों पर नहीं, बल्कि अपने कर्तव्यों पर ज्यादा ध्यान दिया, हमें उनके जीवन और कार्यों से सीखना चाहिए, हम सबको और अधिक निष्ठावान, ईमानदार और मेहनती बनना होगा। उन्होंने कहा कि देश की उन्नति के कार्य में सभी का योगदान होना चा‌हिए, इसलिए हमें सभी को साथ लेकर चलना होगा। उन्होंने उम्मीद जताई कि हम सभी, ईमानदारी और कर्तव्यनिष्ठा के साथ काम करते हुए राष्ट्रपति भवन की गरिमा बनाए रखने में और देशवासियों की उम्मीदों पर खरा उतरने का सतत प्रयास करते रहेंगे, हम सबके ‌लिए यही राष्ट्रसेवा है और यही राष्ट्र निर्माण है।

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