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नौकरशाही की गुणवत्ता पर सवाल-राष्ट्रपति

प्रशासनिक अकादमी मसूरी में प्रवेश प्रशिक्षण कार्यक्रम

'नीति व निष्पक्ष सलाह देने के लिए ही सिविल सेवक'

स्वतंत्र आवाज़ डॉट कॉम

Saturday 5 August 2017 06:26:43 AM

ram nath kovind addressing the state civil service officers, promoted to the ias

नई दिल्ली। राष्ट्रपति रामनाथ कोविद ने कहा है कि हमारी शासन प्रणालियों और नौकरशाही व्यवस्था की गुणवत्ता के बारे में अकसर किए जाने वाले जायज प्रश्नों को हम अनदेखा नहीं कर सकते, कुछ बार ये धारणाएं वास्तविकता से उलट हो सकती हैं, परंतु इन धारणाओं में सच्चाई है। राष्ट्रपति ने कहा कि एक धारणा यह भी है कि कुछ अधिकारी बाद में किसी न किसी राजनीतिक व्यवस्था या व्यक्ति के साथ जुड़ जाते हैं, जिससे नौकरशाहों को बचना होगा। लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासन अकादमी मसूरी के 119वें प्रवेश प्रशिक्षण कार्यक्रम के प्रतिभागियों को भारतीय प्रशासनिक सेवा में चुने जाने पर बधाई देते हुए राष्ट्रपति ने ये बात कही। राष्ट्रपति नौकरशाही पर लोकापवाद के कारण खिन्न नज़र आए। उनकी टिप्पणी नए और पुराने नौकरशाहों पर कितना असर डालेगी यह तो नहीं कहा जा सकता, अलबत्ता राष्ट्रपति ने जो कहा है वह सवा सौ करोड़ लोगों के मन की बात है।
राष्ट्रपति रामनाथ कोविद ने राष्ट्रपति भवन में राज्य प्रशासनिक सेवाओं के भारतीय प्रशासनिक सेवा में प्रोन्नत हुए अधिकारियों को उनके करियर की सफलता और उनसे उच्च प्रशासनिक दक्षता के साथ जनाकांक्षाओं का समाधान करने की निष्ठापूर्वक अपेक्षा व्यक्त करते हुए कहा कि मुझे उनके बीच उपस्थित होकर प्रसन्नता हो रही है और मैं उनका इसी आशा के साथ राष्ट्रपति भवन में स्वागत करता हूं। राष्ट्रपति रामनाथ कोविद ने कहा कि स्वतंत्रता के समय देश के प्रथम गृहमंत्री सरदार वल्लभभाई पटेल ने अनुभव किया था कि जबतक एक योग्य और कुशल अखिल भारतीय सिविल सेवा नहीं होगी, तबतक भारत संगठित और सुशासित नहीं हो सकता। उन्होंने कहा कि आवश्यक नौकरी सुरक्षा होने और राजनीतिक कार्यपालिका को निष्पक्ष सलाह देने के लिए ही इस सिविल सेवा की आवश्यकता थी।
रामनाथ कोविद ने कहा कि अखिल भारतीय सेवाओं ने देश के विकास और अर्थव्यवस्था की प्रगति में एक अहम भूमिका निभाई है, इसके बावजूद हमें अपनी युवा आबादी और समाज के गरीब और पिछड़े तबकों की उम्मीदों पर ध्यान देना होगा। उन्होंने कहा कि हमारी शासन प्रणालियों और नौकरशाही व्यवस्था की गुणवत्ता के बारे में अकसर किए जाने वाले जायज प्रश्नों को हम अनदेखा नहीं कर सकते। उन्होंने कहा कि नौकरशाही के सामने सबसे बड़ी चुनौती भारत के लोगों को, जिनकी सेवा करने का दायित्व उनको सौंपा गया है, यह भरोसा दिलाना है कि सिविल सेवक निष्पक्ष, ईमानदार, कुशल और योग्य होते हैं। उन्होंने कहा कि जन सेवक के रूप में उनका व्यक्तिगत आचरण अनुकरणीय होना चाहिए, उनके कार्य संबंधी आचरण में ईमानदारी और निष्ठा, विनम्रता और भारत और हमारे समाज की अनेकता के प्रति संवेदनशीलता का होना बहुत जरूरी है।
राष्ट्रपति ने कहा कि नौकरशाहों को अपने आप से यह प्रश्न पूछना चाहिए कि वे वास्तव में किसके लिए कार्य करते हैं? इसका सीधा सा उत्तर होगा कि आप भारत के लोगों के लिए कार्य करते हैं। उन्होंने कहा कि परंतु ऐसे लोग भी हैं, जिन्हें सरकार की जरूरत है और दूसरों से ज्यादा आपके सहयोग और सेवा की जरूरत है, ये हमारे वे देशवासी हैं, जो आर्थिक रूपसे कमजोर, सामाजिक रूपसे पिछड़े हुए और राजनीतिक रूपसे शक्तिहीन हैं और उनमें महिलाएं भी शामिल हैं, जिनके साथ महिला होने के कारण भेदभावपूर्ण बरताव किया जाता है, नौकरशाहों को इन वर्गों की ओर विशेष ध्यान देना होगा। उन्होंने कहा कि यहां महात्मा गांधी के इस सूत्र को ध्यान में रखना उपयोगी होगा कि जब भी शंका हो, ऐसे सबसे ग़रीब और सबसे कमज़ोर व्यक्ति का चेहरा याद करें जिसे आपने देखा हो और खुद से ये सवाल करें कि आप जिस कदम को उठाने का विचार कर रहे हैं, उससे उसे कितना फायदा होगा। उन्होंने कहा कि यह सूत्र नौकरशाहों के लिए मार्गदर्शक होना चाहिए।
राष्ट्रपति रामनाथ कोविद ने कहा कि सिविल सेवाओं को राजनीतिक शासन की विशाल प्रणाली के दायरे में कार्य करना होगा। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में नेताओं को जनता की इच्छाओं का प्रतिनिधित्व करने और सरकार का एजेंडा तैयार करने के लिए चुना जाता है, सिविल सेवकों को नीति तैयार करने और उसे अमल में लाने के लिए राजनीतिक कार्यपालिका की मदद करनी होती है। उन्होंने कहा कि नौकरशाहों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि सरकारी नीतियां कानून और संविधान की भावना के अनुरूप तैयार की जाएं। वे बोले कि सिविल सेवकों में उस राजनीतिक कार्यपालिका को स्वतंत्र और निष्पक्ष सलाह देने का साहस होना चाहिए, जिसकी वे मदद करते हैं, इसके लिए अधिकारियों को न केवल अपने कामकाज में बल्कि अपने संगठन में कार्यकुशलता को बढ़ावा देना चाहिए, उन्हें अपने ज्ञान और कौशल को बढ़ाने और अपने अधीन काम करने वाले लोगों की क्षमता इस्तेमाल करने और उसको बढ़ाने का पूरा प्रयास करना चाहिए।
राष्ट्रपति ने सामने उपस्थित नौकरशाहों से कहा कि वे अपने करियर के नए दौर में प्रवेश कर रहे हैं, इसलिए प्रवेश प्रशिक्षण कार्यक्रम एक अहम पड़ाव है, भारत के शासन और प्रशासन में अब वे जो भूमिका निभाएंगे, उसके लिए अपने रवैये को बदलने, कौशल को निखारने और नजरिए का विस्तार करने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि जाति, समुदाय और क्षेत्रीय पहचान से ऊपर उठने के लिए और अधिक प्रतिबद्धता का होना जरूरी है, वे जिले या राज्य, मंत्रालय या विभाग कहीं भी काम करें, राष्ट्र निर्माण में योगदान दें। उन्होंने कहा कि लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासन अकादमी के पाठ्यक्रम का लक्ष्य एक अखिल भारतीय दृष्टिकोण प्रदान करना है, राज्य और केंद्र सरकार के अगले स्तर पर, जिन बातों के जरिए कामकाज की जानकारी और दायित्व की भावना पैदा करने के लिए इसे बनाया गया है, वे हैं-प्रशासक के तौर पर प्रभावी तरीके से काम करने के लिए अनेक क्षेत्रों का ज्ञान और कौशल प्रदान करना, राष्ट्र निर्माण की संस्थाओं के विकास में भारतीय प्रशासनिक सेवा की भूमिका समझने के लिए सही प्रवृत्ति और दृष्टिकोण पैदा करना और मेल-जोल की भावना पैदा करना और देश के दूसरे भागों के अपने समकक्षों के साथ जुड़ना।

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