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दुनिया के भगोड़ों का अड्डा बना ब्रिटेन!

माल्या के प्रत्यर्पण पर ब्रिटेन में गिरफ्तारी का नाटक

दूसरे देशों के भगोड़ों को शरण देना ब्रिटेन में बड़ा धंधा?

Wednesday 19 April 2017 03:46:49 AM

दिनेश शर्मा

दिनेश शर्मा

vijay mallya

नई दिल्ली/ लंदन। ब्रिटेन में किसी दूसरे देश के भगोड़े को शरण देना वास्तव में ब्रिटेन के राजपरिवार से लेकर ब्रिटेन के अधिकार संपन्न लोगों का बड़ा फलता-फूलता कारोबार बना हुआ है। अमरीका जैसे कुछ ही देशों को छोड़कर बाकी देशों से ब्रिटेन की प्रत्यर्पण संधि मात्र एक दिखावा है और ब्रिटेन में शरण पाए भगोड़े जानते हैं कि वहां के अधिकार संपन्न लोगों के मुंह पर पैसा मारिए और शरण पाईए। ब्रिटेन में राजपरिवार की सहमति के बाद ही शरण दी जाती है, उसके बाद गंभीरतम आरोपों को दरकिनार कर ब्रिटेन की सरकार भगोड़े का प्रत्यर्पण नहीं होने देती है। ब्रिटेन के अधिकार संपन्न लोगों की अर्थव्यवस्‍था का एक बड़ा आधार ब्रिटेन में शरण पाए वे भगोड़े हैं, जिनकी ख्याति हार्डकोर हत्यारे, बैंक जालसाज, माफिया सरगना और सत्ता से अपदस्थ किए गए बेईमान राजनेता की है, जिन्होंने अनैतिक रूपसे अकूत दौलत अर्जित की हुई है और जो ब्रिटेन या ऐसे देशों में जमा की हुई है, जहां वे खुद सहित उसे पूर्ण सुरक्षित मानते हैं। यह अलग बात है कि उनके पैसे से ब्रिटेन के अधिकार संपन्न लोग जरूर फलफूल रहे हैं, मगर ब्रिटेन भी इन भगोड़ों की खतरनाक कारगुज़ारियों, आतंकवाद, अपराध और साइबर भ्रष्टाचार की भेंट चढ़कर सुरक्षित देश नहीं रहा है। भगोड़ों को यहां गारंटीशुदा संरक्षण प्राप्त है। भारतीयों की नज़र में ब्रिटेन की कलई खुल रही है और आज नहीं तो कल ब्रिटेन जैसे देश दुनिया के लिए किसी मतलब के नहीं रह जाएंगे।
भारत के बैंकों का पैसा लेकर ब्रिटेन भागे शराब के ठेकेदार विजय माल्या की भारत के अनुरोध पर कल तेरह महीने बाद गिरफ्तारी और तीन घंटे में ही उसकी वेस्टमिंस्टर कोर्ट से ज़मानत ने भारतवासियों की आंखे खोल दी हैं। सचमुच पैसा सर चढ़कर बोला है, क्योंकि विजय माल्या में अकूत दौलत की सुरखाब के पर जो लगे हैं। ब्रिटेन को यह समझ लेना चाहिए कि भारत में अब आजादी की पीढ़ी नहीं है, बल्कि इंटरनेट युग की, सोशल मीडिया युग की वह युवा पीढ़ी है, जिसके सामने ब्रिटेन में भगोड़ों को संरक्षण देने का कारोबार लंबा नहीं चल पाएगा। भारत अच्छी तरह जानता है कि ब्रिटेन दुनिया के भगोड़ों का अड्डा बन चुका है और वहां के अधिकार संपन्न लोग उनके पैसों पर अपनी अर्थव्यवस्‍था बघारते हैं। विजय माल्या को जमानत देने के बाद भारतवासियों के ‌दिल में ब्रिटेन के लिए कोई जगह नहीं बची है। ब्रिटेन के प्रति भारत के विश्वास को गहरा आघात लगा है। तीन घंटे में ही प्रत्यर्पण संधि चकनाचूर हो गई। नए भारत को महसूस हो गया है कि ब्रिटेन भारत के लिए न भरोसेमंद था, न है और न कभी रहेगा। आखिर भारत का शक्तिशाली बनना ही इन देशों को घुटने टेकने के लिए मजबूर करेगा।
विजय माल्या ब्रिटेन के लिए कोई देवदूत या गांधी नहीं है, बल्कि ब्रिटेन में जमा किया गया उसका वह पैसा है, जो उसने भारतीय बैंकों से धोखाधड़ी करके ब्रिटेन पहुंचाया है, वह ब्रिटेन के ‌दिग्गज लोगों को खरीदने की ताकत रखता है, यही कारण है कि ब्रिटेन के कई शक्तिशाली और अधिकार संपन्न लोग उसे भारत को नहीं सौंपने देने के लिए उसके समर्थन में वेस्टमिंस्टर कोर्ट के बाहर खड़े दिखाई दिए और जब उसे जमानत मिली तो वह इठलाता हुआ कोर्ट से बाहर निकला, जहां उसका गर्मजोशी से स्वागत किया गया। जैसा कि पूरी दुनिया ने देखा और सुना कि विजय माल्या को गिरफ्तारी के तीन घंटे के अंदर ही कोर्ट से जमानत मिल गई, जिसके बाद उसने भारतीय सरकार और भारतीय मीडिया को अपने ठेंगे पर रखे हुए कोर्ट से बाहर बयानबाजी की, लेकिन भारत सरकार और भारतीय मीडिया ने भी कहा कि बकरे की माँ कब तक खैर मनाएगी? भारत के भगोड़ों को ब्रिटेन कबतक शरण देगा? ब्रिटेन दुनिया के भ्रष्ट भगोड़ों को शरण देने के धंधे में झुलसना शुरू हो चुका है और उसका यह खेल आत्मघाती चरम की ओर बढ़ रहा है।
भारत की आजादी के बाद से आजतक ब्रिटेन की वही नीति जारी है, जो भारत में ब्रिटिश शासनकाल में थी, जिसमें अंग्रेजों ने भारतीयों पर यातनापूर्वक अत्याचार किए, भारत में फूट डालकर राज किया और जो आज भी भारत में केवल अपने हितों को देखता है और भारतीय हितों की उसे कोई भी परवाह नहीं है। यह इसलिए क्योंकि उसे अभी सही से महसूस नहीं हुआ है कि भारत में शासन व्यवस्‍था बदल गई है और भारत की युवा पीढ़ी के तेवर भी बदल गए हैं, जो ब्रिटेन की गलतफहमी दूर करने के लिए काफी हैं। ब्रिटेन ने भारत को कल एहसास कराया है कि उसके लिए भारत-ब्रिटेन प्रत्यर्पण संधि कोई मायने नहीं रखती है। जी हां, यह संधि वास्तव में केवल दिखावाभर है, क्योंकि ब्रिटेन में भारत के करीब साठ-सत्तर ऐसे भगोड़े शरण पाए हुए हैं, जो सर्वाधिक वांछित हैं, अपराधी हैं, खरबपति हैं और ब्रिटेन के अनेक शीर्ष राजनेता और अधिकार संपन्न लोग उनके पैसों से फलफूल रहे हैं। दरअसल ब्रिटेन में शरण पाने का कारोबार बहुत बड़ा है, जो ब्रिटेन के अनेक बड़े लोगों की निजी अर्थव्यवस्‍था का एक बड़ा आधार है। ब्रिटेन में केवल भारतीय भगोड़े ही नहीं, बल्कि दुनिया के कई देशों के भगोड़े अपने अनैतिक धन की कीमत पर शरण पाए हुए हैं और यदि ब्रिटेन उनका प्रत्यर्पण करने लग जाएगा तो उसके यहां कोई शरण नहीं लेगा और ब्रिटेन के बड़े लोगों के भूखों मरने की नौबत आ जाएगी।
घटनाक्रम के अनुसार भारत में कांग्रेस गठबंधन सरकार के दौरान कांग्रेसियों और बैंकरों की सांठगांठ से धोखाधड़ी करके भारतीय बैंकों का करीब नौ हजार करोड़ रुपए लेकर तेरह माह पहले इंग्लैंड भाग गए भारत सरकार, भारतीय पुलिस के सर्वाधिक वांछित भगोड़े शराब के कारोबारी उद्योगपति विजय माल्या को कल जब लंदन में गिरफ्तार किया गया तो भारत में खुशी और ब्रिटेन के प्रति विश्वास का वातावरण बना। भारत सरकार ने दृढ़ विश्वास व्यक्त किया कि ऐसे लोगों को न्याय के कठघरे में खड़ा किया जा सकेगा। ब्रिटेन में बताया गया कि भगोड़े विजय माल्या की गिरफ्तारी भारत-ब्रिटेन के बीच प्रत्यर्पण संधि के तहत हुई है, जिसमें भारत सरकार ने कहा था कि विजय माल्या भारत में बैंकों और जनता के पैसे की धोखाधड़ी करके भागा है और झूंठे झांसे देकर लंदन में रह रहा है। विजय माल्या के कारण भारत और ब्रिटेन के संबंधों पर बहुत खराब असर भी पड़ रहा था, जिसे देखते हुए ब्रिटेन सरकार ने विजय माल्या को गिरफ्तार किया। लंदन में स्कॉटलैंड यार्ड पुलिस ने भी बताया कि भारत सरकार के अनुरोध पर विजय माल्या को भारत-ब्रिटेन प्रत्यर्पण संधि के तहत गिरफ्तार किया गया है। भारत में नरेंद्र मोदी सरकार का यह मास्टर स्ट्रोक कहा जा रहा था। विजय माल्या जैसे शक्तिशाली उद्योगपति की ब्रिटेन में गिरफ्तारी से उस जैसे अनेक भगोड़ों में भी खलबली मच गई थी, लेकिन यह सब क्षणभंगुर निकला।
वेस्टमिंस्टर कोर्ट से विजय माल्या को गिरफ्तारी के तीन घंटे बाद ही जमानत मिल गई और भारत की यह उम्मीद काफूर हो गई कि ‌ब्रिटेन भारत के साथ कंधा मिलाकर चल रहा है। हाल ही में भारत आईं ब्रिटेन की प्रधानमंत्री थेरेसा मे ने भारत से मित्रता में बड़े-बड़े सहयोग के दावे किए थे, वे झूंठे साबित हुए। गौरतलब है कि विजय माल्या का प्रत्यर्पण ब्रिटेन में मौजमस्ती कर रहे उन जैसे और भी हत्यारों, जालसाजों और बदमाशों के लिए सबक होता, यदि विजय माल्या को वे‌स्टमिंस्टर कोर्ट से जमानत नहीं मिलती और उसे भारत सौंपा जाता। भारत में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की शक्तिशाली सरकार का ब्रिटेन पर इतना असर दिखाई दिया कि उसने विजय माल्या को गिरफ्तार किया। ब्रिटेन सरकार से किसी का प्रत्यर्पण कराना बेहद मुश्किल काम है, क्योंकि ब्रिटेन में शरण मिलना वहां की सरकार के शक्तिशाली अधिकार संपन्न लोगों का धंधा माना जाता है। विजय माल्या ने भारत में कांग्रेस गठबंधन की मनमोहन सिंह सरकार में बैंकों के बहुत मजे लूटे हैं। कह सकते हैं कि सत्रह बैंकों के समूह को उसने अपने बाप का बैंक बना लिया था। उस समय के कई कांग्रेसी नेता और बैंकर एवं जाने-माने कारोबारी विजय माल्या के आगे-पीछे नाचते थे।
विजय माल्या ने किंग फिशर एयरलाइंस के नाम पर फर्जी दस्तावेजों के आधार पर सत्रह बैंकों से लोन लिया, जिसे किंग फिशर को घाटे से उबारने के लिए नहीं, बल्कि लंदन में अपने बैंक खातों में जमा किया गया। यह ब्रिटेन सरकार और विजय माल्या के बीच की सांठगांठ निकली, जिसकी पुष्टि विजय माल्या की वेस्टमिंस्टर कोर्ट में जमानत से हो जाती है। विजय माल्या की धोखाधड़ी पर भाजपा गठबंधन की नरेंद्र मोदी सरकार के तेवर सख्त देखकर वह लंदन भागा। उसके लंदन भागने पर नरेंद्र मोदी सरकार को आलोचनाओं का भी सामना करना पड़ा। विजय माल्या को भारत लाने के लिए नरेंद्र मोदी सरकार पर न केवल भारी दबाव है, अपितु भ्रष्टाचार के खिलाफ भारत सरकार के अभियान की सफलता पर भी विजय माल्या एक बड़ा प्रश्न बन गया है। नरेंद्र मोदी सरकार से हर जगह पूछा जाने लगा है कि विजय माल्या को कब लाएंगे और विजय माल्या के खिलाफ क्या कार्रवाई हुई। केंद्रीय जांच ब्यूरो के अधिकारियों, देश की वित्तीय प्रवर्तन एजेंसियों एवं विदेश मंत्रालय ने विजय माल्या के प्रत्यर्पण के लिए दिनरात एक किए हुए हैं। भारत में भी एक शक्तिशाली वर्ग उसकी पैरोकारी कर रहा है, ये वो लोग हैं, जो भारत में बैंकरों, उद्योगपतियों और वकीलों के समूह के नाम पर विजय माल्या के टुकड़ों पर पलते हैं। इन्हीं के कारण विजय माल्या जनता के नौ हजार करोड़ रुपए की धोखाधड़ी करने में कामयाब हुआ और इन्हीं की सांठगांठ से विदेश भागने में सफल हुआ।
भगोड़े विजय माल्या के भारत लाए जाने पर वे चेहरे बेनकाब हो सकेंगे, जो इसके पाप में शामिल रहे हैं और जो मानते थे कि विजय माल्या को नरेंद्र मोदी सरकार वापस नहीं ला सकती, क्योंकि विजय माल्या बहुत ताकतवर है। विजय माल्या ब्रिटेन में रहकर ऐसे बयान दे रहा है, जिससे लगता है कि भारत सरकार उसके ठेंगे पर है, किंतु भारत सरकार और कानून अपना काम कर रहा है, ब्रिटेन को भी आज नहीं तो कल भारत की जरूरत पड़ेगी। विजय माल्या का मामला भारत-ब्रिटेन के संबंधों को अब नुकसान पहुंचा रहा है। ब्रिटिश सरकार भी इस मामले में अपना नफा-नुकसान नापतोल रही है। नरेंद्र मोदी सरकार की बढ़ती ताकत को ब्रिटिश सरकार देख रही है। भारत के विदेश संबंधों और खासतौर से ब्रिटेन से संबंधों के जानकार कहते हैं ‌कि एक विजय माल्या और कुछ अन्य भगोड़ों के लिए ब्रिटेन के भारत सरकार से संबंध तल्ख करना कोई बुद्धिमानी नहीं है, तब जब भारत में एक शक्तिशाली सरकार है, जिसकी विश्व समुदाय में ताकत बढ़ती जा रही है, जिसके पीछे विश्व समुदाय खड़ा होता जा रहा है, जिसकी उसको भी बहुत आवश्यकता है और जो किसी के दबाव में आने वाली नहीं है।
गौरतलब है कि भारत सरकार चाहती है कि विजय माल्या भारत आए और अपने ऊपर आरोपों का जवाब दे एवं बैंकों का कर्ज लौटाए। भगोड़े विजय माल्या ने कांग्रेस गठबंधन सरकार के समय ब्रिटेन भागकर नरेंद्र मोदी सरकार को बहुत ठेंगा दिखाया है। विजय माल्या पर भारत में इतने मुकद्में दर्ज हो चु‌के हैं, जिससे उसे भी लगता है कि उसका बाकी जीवन ही भारत की जेल में कटेगा। विजय माल्या शराब कंपनी यूनाइटेड स्‍प्रिट्स का मालिक है और उसकी एक आईपीएल क्रिकेट टीम भी है। विजय माल्या की जमानत ने भारत ब्रिटेन संबंधों को प्रभावित किया है, क्योंकि इस नाम से भारतीयों को नफरत हो गई है और वे इसे भारत की हवालात में देखना चाहते हैं। भारतीय समुदाय में विजय माल्या की जमानत पर तरह-तरह की चर्चाओं का बाजार गर्म है। भारत के समाचार पत्रों ने विजय माल्या की जमानत की खबर को हेडलाइन दी है और समाचार चैनलों पर यह बहस छिड़ी है कि प्रत्यर्पण संधि की ब्रिटेन ने उपेक्षा की है और जिन कारणों से उपेक्षा की है, वह सब जान रहे हैं। भारत सरकार में कूटनीतिक मिशन में इन कारणों की खास चर्चा है, जिसमें ब्रिटेन की विश्वसनीयता प्रभावित हुई है।

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