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ट्रिपल तलाक के खिलाफ‌ योगी आदित्यनाथ

चंद्रशेखर पर पुस्तक विमोचन में खुलकर बोले मुख्यमंत्री

कॉमन सिविल कोड के हमेशा पक्षधर थे चंद्रशेखर-योगी

स्वतंत्र आवाज़ डॉट कॉम

Monday 17 April 2017 04:46:32 AM

book release on chandrasekhar

लखनऊ। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने देश में कॉमन सिविल कोड की वकालत की है और साथ ही ट्रिपल तलाक को चिंताजनक बताते हुए मुस्लिम महिलाओं को उससे मुक्ति दिलाने का भरपूर पक्ष लिया है। योगी आदित्यनाथ ने तीन तलाक से महिलाओं के साथ अन्याय की चर्चा करते हुए कहा कि जो लोग इस प्रकरण पर मौन हैं, उन्हें समाज कभी माफ नहीं करेगा। उन्होंने कॉमन सिविल कोड को अत्यंत जरूरी बताते हुए कहा कि समाज और देश के हित में यह जरूरी है कि कानून सभी के लिए बराबर हो, चंद्रशेखर भी हमेशा देश में कॉमन सिविल कोड के हिमायती रहे हैं। उन्होंने कहा कि अगर सभी संस्थाएं देशहित में काम करें तो टकराव की गुंजाइश नहीं रहेगी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ देश में अपनी युवाअवस्‍था में कांग्रेस के युवा तुर्क कहलाए गए और एक समय बाद देश के प्रधानमंत्री बने चंद्रशेखर पर लिखी गई पुस्तक 'राष्ट्रपुरुष चंद्रशेखर-संसद में दो टूक' के विमोचन कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि चंद्रशेखर सही मायने में समाजवादी नेता थे और संसद एवं संसद के बाहर व्यक्त किए गए उनके विचार और उनका व्यक्तित्व आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं। उन्होंने कहा कि चंद्रशेखर ने हमेशा देश एवं समाज की एकजुटता के लिए प्रयास किया, उन्होंने कोई भी कार्य वोट बैंक की राजनीति से प्रभावित होकर नहीं किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्हें उनके साथ संसद में कार्य करने का अवसर मिला है, संसद में बहस के दौरान विभिन्न विषयों पर उनके विचार दलगत राजनीति से हटकर मौलिक एवं भारतीय परिप्रेक्ष्य में प्रयुक्त होने वाले होते थे। योगी आदित्यनाथ ने कहा कि कश्मीर समस्या के संबंध में चंद्रशेखर ने स्पष्ट तौर पर कहा था कि ‘कश्मीर जाएगा तो एक भूखंड नहीं जाएगा, हमारी धर्मनिर्पेक्षता चली जाएगी, हमारी एकता चली जाएगी, हमारी वे मान्यताएं चली जाएंगी, जिनके आधार पर भारत ने आजादी की लड़ाई लड़ी थी, जिन मान्यताओं के आधार पर महात्मा गांधी ने कहा था कि हम ग़रीब हो सकते हैं, लेकिन दुनिया को हम आध्यात्मिक नेतृत्व देने की शक्ति रखते हैं, चंद्रशेखर ने इसी प्रकार पंजाब, श्रीलंका आदि समस्याओं पर भी मौलिक एवं परम्परा से हटकर विचार व्यक्त किए हैं।
योगी आदित्यनाथ ने कहा कि पद एवं प्रतिष्ठा को लेकर चंद्रशेखर में कोई अहम नहीं था, वे हमेशा भारतीय परम्परा और राष्ट्र की मर्यादा के प्रबल समर्थक रहे, कोई व्यक्ति हमेशा स्थायी नहीं रहता, लेकिन उसके विचार शाश्वत होते हैं, चंद्रशेखर वैचारिक क्रांति के शाश्वत प्रतीक थे, वे लोकनायक जयप्रकाश नारायण, डॉ लोहिया एवं आचार्य नरेंद्रदेव की समाजवादी विचारधारा के संवाहक थे, जब वे संसद में बोलते थे, तब पूरी संसद उन्हें सुना करती थी, वे वास्तविक समाजवादी थे। उन्होंने कहा कि विचारधारा का अंतिम उद्देश्य लोक कल्याण एवं राष्ट्र कल्याण ही होना चाहिए, चाहे वह समाजवादी विचारधारा हो या राष्ट्रवादी विचारधारा। उन्होंने कहा कि सत्य कभी-कभी काफी कड़वा होता है, लेकिन चंद्रशेखर हमेशा बिना लाग-लपेट के संसद में अपनी बात कहते थे। उन्होंने कहा कि निश्चित रूप से कुछ लोगों को उनके विचार कठोर लगते रहे होंगे, लेकिन वे देशहित में ही बोलते थे, वे अकेले थे, लेकिन अनेक विचारधाराओं का प्रतिनिधित्व करते थे, वे हमेशा संविधान के दायरे में रहकर लोकतांत्रिक ढंग से राजनीति करने के हिमायती रहे, इसीलिए वर्ष 1975 में जब देश में आपातकाल लगाया गया तो उस समय उन्होंने कांग्रेस पार्टी को छोड़ दिया।
राष्ट्रपुरुष चन्द्रशेखर संसद में दो टूक पुस्तक को अत्यंत उपयोगी बताते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि इस पुस्तक में चंद्रशेखर के भाषणों को जगह दी गई है, जिनमें वे देश की तमाम समस्याओं एवं पड़ोसी देशों से भारत के सम्बंध जैसे विषयों पर बेबाकी से अपने राय रखते हैं। योगी आदित्यना‌थ ने कहा कि स्वदेशी अभियान को चंद्रशेखर ने पूरा समर्थन किया, कई लोगों को यह भ्रम होता है कि चंद्रशेखर नास्तिक थे, लेकिन उन्होंने स्वयं महंत अवैद्यनाथ गुरूजी से कहा था कि वे नास्तिक नहीं हैं, वे अपने आश्रम में भारत की सनातन परम्परा एवं धार्मिक मूल्यों का पूरा ध्यान रखते हैं। मुख्यमंत्री ने मीडिया की भूमिका को भी रेखांकित किया और कहा कि हमेशा नकारात्मक पक्षों पर ही ध्यान न देते हुए अगर सोच सकारात्मक हो तो समाज में रचनात्मक कार्यों को बढ़ावा दिया जा सकता है और यह काम मीडिया बखूबी कर सकता है। उन्होंने पुस्तक के सम्पादक धीरेंद्र नाथ श्रीवास्तव के प्रयासों की सराहना की।
विधानसभा अध्यक्ष हृदयनारायण दीक्षित ने कार्यक्रम की अध्यक्षता की। उन्होंने चंद्रशेखर की सहजता एवं लोकतांत्रिक मूल्यों में उनकी आस्था का उल्लेख करते हुए कहा कि वे जमीन से जुड़े नेता थे और संविधान तथा लोकतंत्र के विरुद्ध कोई भी बात स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं होते थे। हृदयनारायण दीक्षित ने चंद्रशेखर से अपने संबंधों और संस्मरणों का जिक्र किया। उन्होंने राष्ट्रीय मुद्दों पर चंद्रशेखर को एक गंभीर राजनेता बताया। कार्यक्रम में कुंडा (प्रतापगढ़) के विधायक रघुराज प्रताप सिंह राजा भईया एवं पुस्तक के विचार संपादक एवं विधानपरिषद सदस्य यशवंत सिंह ने भी पुस्तक और चंद्रशेखर पर अपने विचार व्यक्त किए। यशवंत सिंह अपने छात्र जीवन से ही चंद्रशेखर के साथ रहे हैं और वे तभी से चंद्रशेखर से संबंधित कार्यक्रम आयोजित करते आ रहे हैं। इस मौके पर राजद के प्रदेश अध्यक्ष अशोक सिंह, उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव रहे डॉ अखंड प्रताप सिंह, बीजेपी के मयंकेश्वर सिंह, कुलदीप सिंह सैंगर आदि जनप्रतिनिधि बड़ी संख्या में उपस्थित थे।

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