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ग्लोबल टाइम्स ने चीन के होश उड़ाए!

भारत के पांच राज्यों के चुनाव नतीजों का असर

भारत व मोदी की बढ़ती ताकत से ड्रेगन चिंतित

Sunday 19 March 2017 12:08:26 PM

दिनेश शर्मा

दिनेश शर्मा

narendra modi

नई दिल्ली। चीन का सरकारी समाचार पत्र ग्लोबल टाइम्स कह रहा है कि भारत में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भी ज्यादा ताकतवर बनकर उभरे हैं, लेकिन जहां तक दुनिया का सवाल है तो उनके सामने मुश्किलें बढ़ सकती हैं। नरेंद्र मोदी और भी ज्यादा ताकतवर बनकर उभरे हैं यहां तक तो दुनिया भी जान रही है, लेकिन ग्लोबल टाइम्स का बाकी कहना किस बिना पर है, यह किसी के पल्ले नहीं पड़ रहा। नरेंद्र मोदी को क्या मुश्किलें आएंगी, इसके पीछे ग्लोबल टाइम्स के पास ठोस एवं विश्वसनीय कारण नहीं हैं, क्योंकि नरेंद्र मोदी भारत में सत्तारोहण के दिन से ही दुनिया के देशों में अपनी लोकप्रियता और भारत की ताकत की बढ़त बनाए हुए हैं, जिससे चीन भारत के साथ कभी भी सहज नहीं रहा और चीनी नेतृत्व ने हमेशा भारत की बढ़ती लोकप्रियता और उसकी ताकत पर छींटाकशी और सवाल ही सवाल खड़े किए हैं। ग्लोबल टाइम्स की भारत की मुश्किलें वाली टिप्पणी का उसकी एक नई सनसनी से ज्यादा वजूद नहीं लगता है। चीन को खुद तिब्बत की भूभल यानी ऐसी राख का भान नहीं रहा है, जिसके नीचे प्रचंड आग धधक रही होती है, इसलिए चीन भारत के ताकतवर नेता नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता पर एवं देश की किसी भी उपलब्धि पर ऐसी टिप्पणियां करता रहता है।
भारत में चीन की जरूरत से ज्यादा दिलचस्पी है, जिसके पीछे भारत में उसका घर-घर फैला बाजार है, जिसे बचाए रखने के लिए चीन छटपटा रहा है और उसके सरकारी अख़बार भारत विरोधी बयानबाज़ी कर चीन की चिंता बढ़ा रहे हैं। चीन के भारत विरोधी रुख के कारण भारतीयों में चीन के प्रति कोई भी सद्भावना नहीं बची है, बल्कि भारत की नई पीढ़ी एक समय चीन के भारत पर हुए हमले को पढ़ रही है, सुन रही है और समझ रही है। युवा पीढ़ी के जेहन में यह एहसास बैठ रहा है कि चीन की नीतियां भारत के खिलाफ हैं और पाकिस्तान में उसका हर तरह से समर्थन भारतीय युवा पीढ़ी को कतई पसंद नहीं है। हाल के महीनों में पाकिस्तानी आतंकवादी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के चीफ मसूद अजहर को चीन का खुला संरक्षण मिलने से भारतीय युवाओं में चीन के प्रति कोई भी विश्वास नहीं रहा है, अब तो भारत में यहां तक माना जाने लगा है कि भारत में जो विमान हाइजेक करके कंधार ले जाया गया था, उसके पीछे भी चीन ही था। मसूद अजहर को समर्थन देने की चीन की नीति उसका कितना भला कर रही है, यह चीन भी जानता है, लेकिन उसकी नीति हर मामले में भारत का विरोध करने की है, सो वह ऐसा कर रहा है। चीन जानता है कि पाकिस्तान या पाकिस्तानियों पर भी कोई भी भरोसा नहीं किया जा सकता, किंतु चीन को भारत के हर एक विरोधी का समर्थन करना है।
चीन को मालूम है कि भारत की शक्ति में इजाफा हो रहा है और भारत की जनता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का दिल खोलकर समर्थन कर रही है। चीन अपने ग्लोबल टाइम्स में इस प्रकार के लेख प्रायोजित करता रहता है, जिससे भारत को दबाव या तनाव में रखा जा सके। चीन इस तथ्य से जानबूझकर अनभिज्ञ है कि भारत की स्थिति पहले जैसी कमजोर या ढुलमुल नहीं रही है। चीन जानता है कि भारत में लोकतांत्रिक तरीके से बड़े ही सकारात्मक परिवर्तन सामने आ रहे हैं और भारत में वे राजनीतिक दल और उनके प्रमुख नेता हाशिये पर जा रहे हैं, जो सत्तारूढ़ भाजपा के खिलाफ विभिन्न तरीकों से अभियान चलाए हुए हैं। हाल ही के पांच राज्यों में हुए विधानसभा चुनावों में सपा, बसपा और कांग्रेस को भारी शिकस्त मिली है और ये वो राजनीतिक दल हैं, जो उत्तर भारत की राजनीति पर अपना वर्चस्व रखते आए हैं, जिनमें सपा और बसपा प्रमुख हैं। भारत में कम्युनिस्ट आंदोलन दम तोड़ चुका है, कम्युनिस्टों के गढ़ पश्चिम बंगाल में वाम आंदोलन के पैर उखड़ चुके हैं, वहां कांग्रेस खत्म होती जा रही है, जिसकी जगह तृणमूल कांग्रेस ने ली हुई है, लेकिन तृणमूल कांग्रेस का भी लंबा भविष्य नज़र नहीं आता है, यहां भी भाजपा ने दस्तक दे दी है। विधानसभा चुनावों में चौंकाने वाली घटना घटी है, वह यह है कि इन चुनावों में तीन तलाक और हलाला के मुद्दे पर मुसलमान महिलाओं ने भाजपा का समर्थन कर दिया है, जिसमें उत्तरप्रदेश में भाजपा को अप्रत्याशित रूपसे 325 विधानसभा सीटों का प्रचंड बहुमत हांसिल हुआ है। इसमें मुस्लिम महिलाओं ने भाजपा को जमकर वोट किया है, जिससे देश की मुस्लिम राजनीति पूरी तरह लड़खड़ा गई है। चीन का ग्लोबल टाइम्स इसी घटनाक्रम से भाजपा एवं नरेंद्र मोदी की बढ़ती ताकत का जिक्र कर रहा है।
भारत के सबसे बड़े राज्य उत्तरप्रदेश में मुस्लिम महिलाओं के भाजपा को वोट देने से उत्तरप्रदेश की सर्वाधिक शक्तिशाली पार्टियां बहुजन समाज पार्टी और समाजवादी पार्टी का अस्तित्व ही मिटने के कगार पर पहुंच गया है, क्योंकि ये दोनों पार्टियां मुसलमानों की हितैषी बनकर राजनीति करती हैं और उनके वोटों का दोहन करती हैं। मुसलमान महिलाओं के भाजपा का समर्थन करने से भारत में राजनीति में एक बड़ा गोल हो गया है। भाजपा ने इन चुनावों में तीन तलाक पर अपनी नीति स्पष्ट की थी कि वह मुस्लिम महिलाओं को इससे मुक्ति दिलाएगी। इसीका विधानसभा चुनावों में ज़बरदस्त असर दिखा है। भाजपा गठबंधन सरकार मुस्लिम महिलाओं को तलाक और हलाला से मुक्ति दिलाने को तैयार है, जिससे भाजपा आगे लोकसभा चुनाव में और भी प्रचंड ताकत अर्जित कर सकती है, इसी पर सोचकर ग्लोबल टाइम्स बोल रहा है कि नरेंद्र मोदी भारत में और ज्यादा ताकतवर होते जा रहे हैं। भारतीय जनता पार्टी देश में कांग्रेस मुक्त भारत अभियान पर है। तीन तलाक के मुद्दे पर उसे जो समर्थन मिला है, उससे देशभर के गैर भाजपाई दलों में काफी अफरा-तफरी दिख रही है, क्योंकि उन्हें लग रहा है कि आने वाले समय में मुस्लिम महिला मतदाताओं में भाजपा को वोट करने से कोई भी नहीं रोक सकता, ये अलग बात है कि महिलाओं को वोट डालने के लिए घर से नहीं निकलने दिया जाए। देश के केरल राज्य में वाम गठबंधन सरकार है। तीन तलाक का असर यहां भी दिखने लगा है। जम्मू और कश्मीर में भी इसकी खासी हवा है। यही कारण है, जो ग्लोबल टाइम्स ने भारत और नरेंद्र मोदी के बारे में टिप्पणियां की हैं, कि वह बहुत ताकतवर होते जा रहे हैं।
भारत के इस राजनीतिक घटनाक्रम पर चीन का बौखलाना स्वाभाविक है। भारत में अस्थिर सरकारें चीन के लिए काफी अनुकूल रही हैं, क्योंकि उस स्थिति में संसद में कोई भी राजनीतिक या कूटनीतिक फैसला सभी के समर्थन के बिना संभव नहीं था। इन सभी में कोई इसकी और कोई उसकी भाषा बोलता और सरकार को समर्थन के बदले मनमानी डील करता रहा है, इस कारण वैश्विक मामलों पर भारत दबाव में रहता आया है, लेकिन भारत में भाजपा की पूर्ण बहुमत की सरकार ने इन सारी स्थितियों को उलट दिया है। यूपीए की सरकार तो चीन के लिए बहुत ही अनुकूल रही है, लेकिन मोदी सरकार में अब वह अनुकूलता जाती रही है। भारत में चीन का बाजार दरकने लगा है। भारत में राष्ट्रवाद और स्वदेशी का रंग चढ़ता जा रहा है। नए भारत के संदर्भ में बहुराष्ट्रीय कंपनियां अपनी बाज़ार रणनीतियां बदल रही हैं और बदलने को मजबूर हैं। चीन को चुनौती मिल रही है कि वह भारत में अपने बाज़ार को कैसे बचाए। चीन के लिए अब यह संभव नहीं है कि वह अंतराष्ट्रीय मंचों पर भारत का विरोध करे और भारत में अपने बाज़ार को भी सुरक्षित रखे। भारत में युवा पीढ़ी चीन की भारत विरोधी चालों से सतर्क हो रही है, वह भारत में चीनी बाज़ार का विरोध भी करने लगी है। दुनिया के लिए भारत एक ऐसा बाज़ार बन चुका है, जहां विश्व के दूसरे देश निवेश करने आना चाहते हैं, क्योंकि भारत में राजनीति अस्थिरता का लगभग अंत हो चुका है।
भारत के उत्तरप्रदेश, उत्तराखंड राज्य में भाजपा को प्रचंड बहुमत और मुसलमानों की आधी आबादी का समर्थन चीन या पाकिस्तान के होश फाक्ता करने के लिए काफी है। यही वो हवा है, जो भारत में भाजपा विरोधी तंबुओं को उखाड़ ले जा रही है। चीन को यह समझ लेना होगा कि उसकी भारत विरोध संबंधी नीतियां अब कारगर नहीं रह गई हैं। चीन ने पाकिस्तान को जिस रूप में समर्थन दिया हुआ है, वह देश-दुनिया की नज़र में आतंकवाद का समर्थन है। चीन इस मामले में बेनकाब हो गया है। एक महाशक्ति के रूप में चीन ने भारत को रोकने की जो कोशिशें की हुई हैं, वे कामयाब होने वाली नहीं हैं। भारत अब वो भारत नहीं रहा है, विश्व समुदाय उसके पीछे है। भारत तेजी से बढ़ रहा है और चीन की सैन्यश‌क्ति चाहे जितनी ही प्रबल क्यों न हो जाए, जनशक्ति के सामने उसका कहीं भी कोई भी वजूद नहीं है। चीन को हज़ार बार सोचना होगा कि अब वह भारत-चीन रिश्तों पर क्या करे और क्या न करे।  

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