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'मीडिया की ओर देखती स्त्री' पुस्तक

पुस्तक स्‍त्री पर 39 ओजपूर्ण लेखों का संकलन

संजय द्विवेदी संपादित पुस्तक का लोकार्पण

स्वतंत्र आवाज़ डॉट कॉम

Friday 10 March 2017 03:51:36 AM

media kee or dekhatee stree book launch

भोपाल। माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय भोपाल की 'मीडिया विमर्श' पत्रिका की पुस्तक 'मीडिया की ओर देखती स्त्री' का गांधी भवन में आयोजित पंडित बृजलाल द्विवेदी स्मृति अखिल भारतीय साहित्यिक पत्रकारिता सम्मान समारोह में लोकार्पण किया गया। माखनलाल चतुर्वेदी विश्वविद्यालय के जनसंचार विभाग के अध्यक्ष और वरिष्ठ पत्रकार संजय द्विवेदी इस पुस्तक के संपादक हैं, जिसे यश पब्लिकेशंस दिल्ली ने प्रकाशित किया है।
मीडिया की ओर देखती स्त्री पुस्तक में देश के जाने-माने साहित्यकारों, पत्रकारों और बुद्धिजीवियों के 39 लेख हैं। भास्कर डॉट कॉम की निशा राय, बिग एफएम के आरजे अनादि, कोएनजिसिस दिल्ली के कौशल वर्मा, महिला बाल विकास अधिकारी बिलासपुर अनुराधा आर्य, इंसार्ट्स शिखा शर्मा, दिल्ली प्रेस की अन्नी अंकिता, मीडिया प्राध्यापक ऋचा चांदी, फारच्यूना पीआर मुंबई शीबा परवेज़ और मीडिया विमर्श की प्रकाशक भूमिका द्विवेदी ने संयुक्तरूप से इस पुस्तक का लोकार्पण किया।
मीडिया की ओर देखती स्त्री पुस्तक में कमल कुमार, विजय बहादुर सिंह, जया जादवानी, अष्टभुजा शुक्ल, उर्मिला शिरीष, मंगला अनुजा, अल्पना मिश्र, सच्चिदानंद जोशी, इरा झा, वर्तिका नंदा, रूपचंद गौतम, गोपा बाग़ची, सुभद्रा राठौर, संजय कुमार, हिमांशु शेखर, जाहिद खान, रूमी नारायण, अमित त्यागी, स्मृति आदित्य, कीर्ति सिंह, मधु चौरसिया, लीना, संदीप भट्ट, सोमप्रभा सिंह, निशांत कौशिक, पंकज झा, सुशांत झा, माधवीश्री, अनिका अरोड़ा, फरीन इरशाद हसन, मधुमिता पाल, उमाशंकर मिश्र, महावीर सिंह, विनीत उत्पल, यशस्विनी पांडेय, आदित्य कुमार मिश्र के लेख शामिल हैं।
लोकार्पित पुस्तक में देश के जाने-माने साहित्यकारों, पत्रकारों और बुद्धिजीवियों के 39 विशिष्ट लेख हैं, जिनमें आज के मीडिया में स्त्री की बहुआयामी छवि का मूल्यांकन किया गया है। अमेजान और फ्लिपकार्ड पर भी उपलब्ध 184 पृष्ठों में फैले इस संकलन का मूल्य 495 रुपए है। पुस्तक के कंटेंट और उसके समृद्ध स्वरूप को देखकर लगता है कि संपादक ने इस संक‌लन पर कड़ी मेहनत की है। पुस्तक में शामिल लेख पाठक को एक स्‍त्री संघर्ष को समझने, उसका सम्मान करने और परिवार एवं समाज की प्रगति में उसके अनवरत अनुकरणीय योगदान को शिद्दत से स्वीकार करने की प्रेरणा देते हैं।

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