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उत्‍कृष्‍ट शिल्‍प और कड़े परिश्रम का सम्मान

महिला हथकरघा बुनकरों के लिए नई श्रेणी के पुरस्‍कार

महिला दिवस पर स्‍मृति इरानी ने दिया सम्मान

स्वतंत्र आवाज़ डॉट कॉम

Thursday 9 March 2017 03:10:35 AM

smriti irani distributed the buniyaad reeling machines

नई दिल्ली। केंद्रीय वस्‍त्र मंत्री स्‍मृति जुबिन इरानी ने अंतर्राष्‍ट्रीय महिला दिवस पर विशेषकर, महिला हथकरघा बुनकरों और हस्‍तशिल्‍प कारीगरों के लिए नई श्रेणी के पुरस्‍कार-‘कमलादेवी चट्टोपाध्‍याय राष्‍ट्रीय पुरस्‍कारों’ की घोषणा की। अब तक केवल एक महिला ने संत कबीर पुरस्‍कार ग्रहण किया है, जिसपर स्‍मृति जुबिन इरानी ने कहा कि ये पुरस्‍कार इस वर्ष से प्रदान किए जा रहे हैं, ताकि महिला बुनकरों और कारीगरों को उचित पहचान और पुरस्‍कारों से जुड़े आर्थिक लाभ मिल सकें। स्‍मृति जुबिन इरानी ने कहा कि ये पुरस्कार अपने घरों से काम करने वाली उन लाखों महिलाओं के उत्‍कृष्‍ट शिल्‍प और कड़े परिश्रम के प्रति सम्मान और प्रोत्साहन है, जो भारत के गौरवशाली हथकरघा और हस्‍तशिल्‍प की धरोहर की मशाल को आगे ले जा रही हैं।
स्‍मृति जुबिन इरानी ने देशभर की महिला हथकरघा बुनकरों को मुद्रा ऋण मुहैया कराने के लिए एक विशेष अभियान भी शुरू किया। उन्‍होंने कहा कि इस अभियान को शुरू करने के लिए 1,700 से अधिक महिला बुनकरों को ऐसे ऋण दिए जा रहे हैं। स्‍मृति जुबिन इरानी ने इस अवसर पर पांच बुनकरों को मुद्रा ऋण प्रदान किए। स्‍मृति इरानी ने कार्यक्रम में भारत में शोषक और अस्वास्थ्यकर थाइ रीलिंग की प्रथा को खत्म करने के एक राष्ट्रीय अभियान की भी शुरूआत की। गौरतलब है कि टसर सिल्‍क की थाइ रीलिंग आमतौर पर सीमांत महिला उद्यमियों द्वारा की जाती है, जो प्रतिदिन अपने घर में खाली समय के दौरान काम करती हैं। स्‍मृति इरानी ने कहा कि भारत में बनाया जाने वाला 30 प्रतिशत टसर सिल्‍क थाइ रीलिंग के जरिये बनाया जाता है और इस अस्‍वास्‍थ्‍यकर और अमानवीय प्रथा पर रोक लगाने के लिए उनके मंत्रालय ने महिला सिल्‍क रीलर्स के लिए महिलाओं के अनुकूल बुनियाद रीलिंग मशीनों का वितरण शुरू किया है।
वस्‍त्र मंत्रालय भारत सरकार के अंतर्गत आने वाले केंद्रीय रेशम प्रौद्योगिक अनुसंधान संस्‍थान में विकसित बुनियाद मशीन थाइ रीलिंग के कठिन परिश्रम में ही कमी नहीं लाती, बल्कि उत्‍पादकता और आमदनी में भी सुधार लाती है। इस मशीन के विकास के लिए केंद्रीय रेशम बोर्ड की सराहना करते हुए स्मृति इरानी ने आशा व्यक्त की कि थाइ रीलिंग से रेशम बनाने वाली 100 प्रतिशत महिलाओं को यह मशीन प्राप्त हो जाएगी और इस प्रकार धीरे-धीरे यह अमानवीय प्रथा समाप्‍त हो जाएगी। उन्होंने आशा व्यक्त की कि भारत सरकार की ओर से प्रदान की गई 75 प्रतिशत सब्सिडी के कारण, सीमांत उद्यमियों को यह मशीन किफायती दाम पर मिल सकेगी। स्मृति इरानी ने इस पहल का शुभारंभ करने के प्रतीक के रूप में तीन लाभार्थियों को बुनियाद रीलिंग मशीन की प्रतिकृतियां वितरित कीं। उन्होंने पंजाब नेशनल बैंक के सहयोग से ऑनलाइन हैंडलूम वीवर मुद्रा पोर्टल का भी शुभारंभ किया।
स्मृति ज़ुबिन इरानी ने कहा कि अक्सर हथकरघा बुनकर मुद्रा ऋण के लिए आवेदन करने के बाद अपने आवेदन की स्थिति का पता लगाने में सक्षम नहीं होते, यह पोर्टल इस खामी को दूर करेगा, इस पोर्टल से बुनकर और अधिकारी ऋण आवेदन की स्थिति की रीयल टाइम ट्रैकिंग कर सकेंगे। बुनकर इस पोर्टल के माध्यम से बैंकों के क्षेत्रीय कार्यालय दावे जमा करने और निधियों को इलेक्ट्रॉनिक रूप से बुनकर के ऋण खाते में सीधे अंतरित करने में सक्षम होंगे। नई प्रणाली से दावों के भुगतान और हथकरघा बुनकरों को वित्तीय सहायता प्रदान करने में होने वाली देरी में कमी आएगी। उन्‍होंने घोषणा की कि नई प्रणाली नए वित्तीय वर्ष की शुरुआत यानी 1 अप्रैल 2017 से लागू होगी। इस अवसर पर वस्त्र मंत्रालय और सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय के अंतर्गत राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग वित्त एवं विकास निगम के बीच दो समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए, जिनका मुख्‍य उद्देश्य हथकरघा और हस्तशिल्प क्षेत्रों में काम करने वाली पिछड़े वर्गों से संबंधित लाखों महिला हथकरघा बुनकरों और कारीगरों की आय में वृद्धि करना है। यह बड़ी संख्या में क्लस्टर विकास परियोजनाओं के द्वारा किया जाएगा। वस्‍त्र मंत्री ने वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से देशभर के नौ विभिन्न स्थानों पर वस्‍त्र मंत्रालय की विभिन्न योजनाओं के लाभार्थियों के साथ संवाद किया।
केंद्रीय वस्‍त्र मंत्री ने राष्ट्रीय अनुसूचित जाति विकास निगम के साथ समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर के बाद कई जगहों पर मधुबनी पेंटिंग, कढ़ाई शिल्प और शीशे का काम युक्‍त कढ़ाई को बढ़ावा देने के लिए अनुसूचित जाति से संबंधित महिला कारीगरों के लाभ के लिए सरकार की हस्तशिल्प विकास की परियोजनाएं शुरू कीं। उन्‍होंने कहा कि इससे अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों से संबंधित महिला लाभार्थियों को लक्षित लाभ के संवितरण को सक्षम बनाया जा सकता है। स्मृति इरानी ने महिला लाभार्थियों के लिए तीन अनुसूचित जाति कारीगर क्लस्टर परियोजनाओं और दो अनुसूचित जनजाति कारीगर क्लस्टर परियोजनाओं की स्‍वीकृतियों का संवितरण किया। उन्‍होंने कहा कि महिलाओं ने लंबा फासला तय किया है और अभी बहुत कुछ किया जाना बाकी है। उन्‍होंने कहा कि उनके मंत्रालय का विजन महिला बुनकरों और कारीगरों को लक्षित लाभ दिलाना है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के शासन दर्शन ‘सबका साथ सबका विकास’ की तर्ज पर महिलाओं से संबंधित इन पहलों को 'महिला विकास महिला के साथ’ के विषय के अंतर्गत समर्पित किया। इस अवसर पर भारत के विभिन्न हिस्सों से अनेक महिला कारीगरों, महिला हथकरघा बुनकरों और महिला सिल्‍क रीलर्स के अलावा केंद्रीय रेशम बोर्ड के अध्यक्ष केएम हनुमंतरायप्पा, सचिव वस्‍त्र रश्‍मि वर्मा, सचिव सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय जी लताकृष्ण राव और गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।

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