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कर्तव्य पालन ही सबसे बड़ा धर्म-राज्यपाल

लखनऊ में आशियाना परिवार का सर्वधर्म सम्मेलन

राज्यपाल का अधिकतम मतदान का आह्वान

स्वतंत्र आवाज़ डॉट कॉम

Monday 6 February 2017 04:07:28 AM

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लखनऊ। उत्तर प्रदेश के राज्यपाल राम नाईक ने आशियाना परिवार के सर्वधर्म सम्मेलन में भाग लिया और कहा कि कार्यक्रम का सामाजिक महत्व है, जोकि सराहनीय कार्य है। उन्होंने कहा कि सर्वधर्म सम्मेलन को एक दिन का आयोजन न मानकर सबको साथ लेकर चलने के व्यवहार में लाएं। उन्होंने कहा कि सभी की परंपराएं अलग हो सकती हैं, लेकिन सबका सार एक ही है। उन्होंने कहा कि लोग आमतौर पर धर्म का अर्थ हिंदू, मुस्लिम, सिख, इसाई समझते हैं, जबकि अपने कर्तव्यों एवं दायित्वों का पालन करना ही सबसे बड़ा धर्म है। राज्यपाल ने कहा कि देश के संविधान के अनुसार सभी धर्मों को मानने वाले लोग समान हैं, किंतु हमें कानून के राज का पालन करना चाहिए।
राज्यपाल राम नाईक ने कहा कि जब भी देश पर कोई संकट आया है, सभी धर्मों के लोगों ने मिलकर बिना धर्म के भेदभाव के लड़ाई लड़ी है, चाहे वह झांसी की रानी हों, तात्याटोपे या बहादुर शाह जफर हों, देश में अनेक धर्म, खानपान, वेशभूषा, भाषा के बावजूद राष्ट्र के नाम पर सब एक हैं, सभी धर्मों और विचारों के लोगों के एक साथ आने से सौहार्द का रिश्ता बनता है। उन्होंने कहा कि सभी धर्मों का लक्ष्य एक है, रास्ते भले ही अलग-अलग हों। राज्यपाल ने विधानसभा चुनाव में मतदाता के महत्व का भी जिक्र किया और कहा कि विधानसभा का चुनाव वास्तव में जनतंत्र का महाकुंभ है, संविधान ने मतदान का अधिकार दिया है, इसलिए सभी मतदान करके अपने दायित्व का निर्वहन करें।
राम नाईक ने उल्लेख किया कि 2012 के विधानसभा तथा 2014 के लोकसभा चुनाव में यह पाया गया है कि लगभग 40 प्रतिशत लोगों ने मतदान नहीं किया था, मतदाता अपनी इच्छा से योग्य प्रतिनिधि चुनने के लिए स्वतंत्र है। उन्होंने कहा कि आचार संहिता का पालन करते हुए शांतिपूर्ण मतदान होना चाहिए। उन्होंने कहा कि पंजाब और गोवा के मतदान आंकड़ों से पता चलता है कि लोगों में मतदान की रूचि बढ़ी है, उत्तर प्रदेश का मतदान प्रतिशत इससे भी आगे बढ़ना चाहिए।
मुस्लिम धर्मगुरु मौलाना खालिद रशीद फरंगी महली ने कहा कि आशियाना परिवार के कार्यक्रम के माध्यम से सभी धर्मों के बीच एकता का पैग़ाम पूरे मुल्क में जाएगा। उन्होंने कहा कि सभी धर्मों का पैग़ाम प्यार और इंसानियत है, सभी अपने-अपने धर्मों को मानते हुए देश को गुलदस्ता बनाएं। उन्होंने कहा कि दिलों की दूरियां कम हों। राज्यपाल ने इस अवसर पर विभिन्न धर्मों के लोगों मौलाना खालिद रशीद फरंगी महली, आचार्य डॉ कृष्ण मोहन, फादर रोनाल्ड डिसूजा, महेंद्र सिंह बुद्धपुत्र, कैलाशचंद्र जैन, गुरमीत सिंह, मुरलीधर आहूजा आदि को शाल, स्मृति चिन्ह और गुलदस्ते से सम्मानित किया। उन्होंने विशिष्ट सेवा प्रदान करने के लिए डॉ एस मुंशी, नियाज अहमद, दीप्ती मिश्रा, सुनीता गौड़ को भी सम्मानित किया।

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