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भारत से व्यापारिक संबंध चाहता है आस्ट्रेलिया

आस्ट्रेलिया की उच्चायुक्त ने की यूपी के राज्यपाल से भेंट

मगर निवेश करने आने को कोई तैयार क्यों नहीं है?

स्वतंत्र आवाज़ डॉट कॉम

Tuesday 31 January 2017 01:33:01 AM

australia's high commissioner harinder sidhu and governor ram naik

लखनऊ। भारत में आस्ट्रेलिया की उच्चायुक्त हरिंदर सिद्धू ने उत्तर प्रदेश के राज्यपाल राम नाईक से राजभवन में शिष्टाचारिक भेंट की। दोनोंके बीच उत्तर प्रदेश के विकास में सहयोग पर चर्चा हुई। हरिंदर सिद्धू फरवरी 2016 से भारत में आस्ट्रेलिया के उच्चायुक्त पद पर हैं। राज्यपाल ने इस मौके पर कहा कि निवेश के क्षेत्र में आस्ट्रेलिया और भारत के बीच अच्छे वातावरण का निर्माण हो सकता है, जो दोनों देश की जनता की प्रगति में सहायक होगा। उन्होंने कहा कि आस्ट्रेलिया एवं भारत के बीच सूचना प्रौद्योगिकी, अवस्थापना विकास, निर्माण, सौर ऊर्जा, शिक्षा, कौशल विकास और अन्य क्षेत्रों में निवेश की अच्छी संभावनाएं हैं।
राज्यपाल राम नाईक ने कहा कि भारत और आस्ट्रेलिया में अनेक विख्यात उच्चस्तरीय शिक्षण संस्थान हैं, आस्ट्रेलिया के विभिन्न शैक्षिक संस्थानों में बड़ी संख्या में भारतीय छात्र शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में अनेक सरकारी एवं निजी क्षेत्र के शैक्षिक संस्थान हैं और विश्वविद्यालयों के बीच समझौता ज्ञापन से उच्च शिक्षा के क्षेत्र में लाभ मिल सकता है। उन्होंने विश्वास जताया कि आपसी सहयोग के माध्यम से दोनों देशों के बीच मैत्रीपूर्ण संबंध और ज्यादा मज़बूत होंगे। राम नाईक ने उच्चायुक्त को बताया कि उत्तर प्रदेश देश का सबसे बड़ा राज्य है, यहां की जमीन उपजाऊ है तथा सिंचाई के प्रचुर साधन उपलब्‍ध हैं, कृषि यहां का मुख्य व्यवसाय है। उन्होंने कहा कि खाद्य प्रसंस्करण, दुग्ध एवं दुग्ध उत्पादन के क्षेत्र में उत्तर प्रदेश में विकास की असीम संभावनाएं हैं, उत्तर प्रदेश में फल एवं सब्जियों का उत्पादन भी अच्छी मात्रा में होता है, इस दृष्टि से खाद्य प्रसंस्करण के क्षेत्र में भी बहुत कुछ किया जा सकता है।
राम नाईक ने कहा कि उत्तर प्रदेश में ज्यादातर लघु एवं सीमांत किसान हैं, जिनके हित को ध्यान में रखते हुए एक नई कार्य योजना तैयार की जा सकती है, इसी प्रकार उत्तर प्रदेश में पर्यटन के अनेक स्थल हैं, जिससे अंतर्राष्ट्रीय पर्यटन को बढ़ावा मिल सकता है। उन्होंने कहा कि जो भी विदेशी मेहमान भारत आता है, वह पर्यटन की दृष्टि से आगरा का ताजमहल, बनारस के घाट, लखनऊ की ऐतिहासिक इमारतें व इलाहाबाद का संगम देखने अवश्य जाता है। राज्यपाल ने प्रदेश की शिक्षा, स्वास्थ, डेयरी, जल प्रबंधन एवं कृषि के क्षेत्र से संबंधित विषयों पर विशेष रूप से चर्चा की। राज्यपाल ने उन्हें अपने बारे में भी जानकारी दी और बताया कि वे उत्तर प्रदेश का राज्यपाल होने से पहले तीन बार महाराष्ट्र विधानसभा के सदस्य तथा पांच बार संसद सदस्य रहे हैं। वर्ष 1999 से 2004 तक उन्होंने पेट्रोलियम मंत्री के तौर पर प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में काम किया है।
आस्ट्रेलिया की उच्चायुक्त हरिंदर सिद्धू ने कहा कि आस्ट्रेलिया भारत से आर्थिक एवं व्यापारिक संबंध बढ़ाना चाहता है, भारत में शिक्षा, कृषि, जल प्रबंधन के क्षेत्र में भी आस्ट्रेलिया सहयोग करेगा। उन्होंने बताया कि उनकी पारिवारिक पृष्ठभूमि भारतीय रही है, इसलिए उन्हें भारत से विशेष लगाव भी है। उन्होंने कहा कि आस्ट्रेलिया उत्तर प्रदेश के विकास में सहभाग करना चाहता है। राज्यपाल ने हरिंदर सिद्धू को उत्तर प्रदेश राजभवन के पक्षी तथा ट्रीज ऑफ उत्तर प्रदेश पर पुस्तक की प्रतियां भी भेंट कीं। उच्चायुक्त हरिंदर सिद्धू काफी देर तक राजभवन में रहीं और यहां की गतिविधियों में बड़ी दिलचस्पी ली। राज्यपाल राम नाईक ने भी अतिथि सत्कार में कोई कमी नहीं छोड़ी, वे इसके लिए विख्यात भी हैं। इस अवसर पर राज्यपाल की प्रमुख सचिव जूथिका पाटणकर उपस्थित थीं।
गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश के विकास में निवेश करने की कई देशों में भारी दिलचस्पी रहती आई है, लेकिन केंद्र और राज्यों के टकरावपूर्ण संबंधों की राजनीतिक दुश्वारियों के कारण विकास के मामले में यूपी बहुत पीछे जा चुका है। उत्तर प्रदेश में सपा और बसपा की सरकारों ने राज्य की भलाई के लिए विकास के दृष्टिकोण को नहीं अपनाया और तत्कालीन मुख्यमंत्री मायावती तो कभी भारत सरकार में राज्यों की सर्वाधिक महत्वपूर्ण राज्य विकास परिषद की बैठक में गईं ही नहीं, उन्होंने हमेशा टकराव का रुख अख्तियार किए रखा। ऐसा ही समाजवादी पार्टी ने भी किया। तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव और इस समय मुख्यमंत्री अखिलेश यादव भारत सरकार की ऐसी बैठकों में तो गए, लेकिन उन्होंने विकास क‌ी रणनीतियां बनाईं भी तो राजनीतिक और क्षेत्रीय या जातीय दृष्टिकोण से बनाईं, जिनका परिणाम यह रहा कि प्रदेश को कई तरह से खामियाजा भुगतना पड़ा।
यूपी के विकास के संदर्भ में यह उल्‍लेख करना भी प्रासंगिक है कि कोई भी देशी या विदेशी निवेशकर्ता राज्य में तभी निवेश करने को तैयार होगा, जब सर्वप्रथम केंद्र और राज्य के संबंध अच्छे होंगे, निवेशकर्ता को सुरक्षा, प्रशासनिक एवं बुनियादी सुविधाओं की उपलब्‍धता में कोई गतिरोध नहीं होगा और राजनीतिक एवं प्रशासनिक स्‍थायित्व होगा। दुर्भाग्य से उत्तर प्रदेश में ऐसा वातावरण ना मायावती सरकार दे पाई और न समाजवादी पार्टी सरकार दे पाई। मुलायम सिंह यादव, मायावती और अखिलेश यादव तीनों ही इस मामले में विफल माने जाते हैं। कहा तो यहां तक जाता है कि निवेशकर्ता इनकी अवैध वसूलियों के कारण अपने प्रोजेक्ट आधे-अधूरे छोड़कर चले गए। सच तो यह है कि इन राजनेताओं ने अपनी सरकारों के दौरान भ्रष्टाचार का तांडव किया है, जिसे देखकर अब यहां कोई आने को तैयार नहीं होता, इसलिए कुछ अपवादों को छोड़कर राज्य में विदेशी निवेश केवल गोष्ठियों, पिकनिकों और कागज़ों पर ही दौड़ता दिखाई देता है।

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