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ख़बरों में विचारों का मिश्रण ना करें-नायडू

सभी भारतीय भाषाओं में हो पत्रकारिता पाठ्यक्रम

आईआईएमसी की कम्युनिकेटर फिर शुरू

स्वतंत्र आवाज़ डॉट कॉम

Wednesday 18 January 2017 12:24:45 AM

m. venkaiah naidu in iimc

नई दिल्ली। केंद्रीय सूचना और प्रसारण मंत्री एम वेंकैया नायडू ने कहा है कि जो छात्र भविष्य में पत्रकार बनने की महत्वाकांक्षा रखते हैं, उन्हें यह सुनिश्चित करना चाहिए कि ख़बरों के प्रस्तुतिकरण में विचारों का मिश्रण ना हो। उन्होंने कहा कि पत्रकारिता का लक्ष्य हासिल करने के लिए प्रत्येक नवोदित पत्रकार को खुले दिमाग़ से अधिकतम ज्ञान प्राप्त कर घटना को सही तरीके से पेश करना चाहिए। उन्होंने पत्रकारिता के छात्रों से नवीनतम घटनाओं, नई प्रौद्योगिकी और संचार के नए तरीकों के साथ बराबर अपडेट रहने का आग्रह करते हुए कहा कि छात्रों को प्रासंगिक और प्रभावी विषयों को पढ़ने की आदत विकसित करनी चाहिए। उन्होंने दूसरी तरफ आईआईएमसी का भी सभी भारतीय भाषाओं में पत्रकारिता पाठ्यक्रम शुरू करने का प्रयास करने का आह्वान किया, ताकि देशभर में सभी नागरिकों की संचार जरूरतों को पूरा किया जा सके। सूचना प्रसारण मंत्री ने ये बातें शास्त्री भवन में उर्दू पत्रकारिता में प्रथम पीजी डिप्लोमा पाठ्यक्रम और विकास पत्रकारिता में 67वें डिप्लोमा पाठ्यक्रम का शुभारंभ करने एवं आईआईएमसी पत्रिका 'कम्युनिकेटर' के विमोचन पर कहीं।
एम वेंकैया नायडू ने संचार के बदलते स्वरूपों के बारे में कहा कि सोशल मीडिया ने संचार में समय और स्थान की बाधाओं को तोड़ दिया है, नवोदित पत्रकारों से अपेक्षा की जाती है कि वे सोशल मीडिया पर स्थानीय और अंतरराष्ट्रीय महत्व के मुद्दों पर जनता की राय पर ध्यानपूर्वक नज़र रखें। प्रशिक्षण पद्धति पर ज़ोर देते हुए वेंकैया नायडू ने कहा कि वर्तमान परिदृश्य में यह महत्वपूर्ण है कि सीखने, अभ्यास करने तथा नई अवधारणाओं को लागू करने के लिए पाठ्यक्रम के एक भाग के रूप में मामले के अध्ययन और व्यावहारिक अनुभव को शामिल करना जरूरी है। उर्दू पत्रकारिता में नए पीजी डिप्लोमा पाठ्यक्रम शुरू करने पर आईआईएमसी की सराहना करते हुए वेंकैया नायडू ने कहा कि उर्दू पत्रकारिता मीडिया और हमारे देश की संचार व्यवस्था का एक महत्वपूर्ण अंग है, जिसने स्वतंत्रता संग्राम आंदोलन में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने मौलाना अबुल कलाम आजाद के अख़बार अल-हिलाल की प्रशंसा करते हुए कहा कि इसने स्वतंत्रता संग्राम आंदोलन के दौरान भारतीय राष्ट्रवाद के समावेशी आदर्शों को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने समाचार पत्र नकीब-ए-हमदर्द, प्रताप, मिलाप, कौमी आवाज़, जमींदार, हिंदुस्तान जैसे अख़बारों में राष्ट्रवाद के आदर्शों के प्रसार की महत्वपूर्ण भूमिका पर भी प्रकाश डाला।
आईआईएमसी की पत्रिका 'कम्युनिकेटर' को फिर से शुरू करने के बारे में उन्होंने कहा कि पत्रिका शिक्षाविदों, अनुसंधान विद्वानों और मीडिया विश्लेषकों को अपने लेख प्रकाशित करने के लिए एक मंच प्रदान करती है। 'कम्युनिकेटर' पत्रिका जन संचार की सबसे पुरानी पत्रिकाओं में से एक है, जिसका प्रकाशन 1965 में किया गया था। इसे 1965 में त्रैमासिक पत्रिका के रूप में शुरू किया गया था और बाद में एक वार्षिक प्रकाशन बना दिया गया था। वेंकैया नायडू ने 67वें विकास पत्रकारिता पाठ्यक्रम का उद्घाटन करते हुए कहा कि भारत आज दुनिया में ज्ञान केंद्र का पुराना गौरव फिर से हासिल कर रहा है, विकास पत्रकारिता पाठ्यक्रम एक-दूसरे की संस्कृति को समझने का अवसर प्रदान करेगा और आपसी मित्रता को और गहरा करेगा।

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