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भारत में सबसे अधिक शीत भंडारण क्षमता

खाद्य सुरक्षा में मोटे अनाज, गन्ना, जूट, कपास शामिल

बागवानी अब कृषि उपार्जन का बड़ा माध्यम-कृषिमंत्री

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Saturday 21 May 2016 06:06:25 AM

radha mohan singh

नई दिल्ली। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री राधामोहन सिंह ने आज विज्ञान भवन नई दिल्ली में खाद्य, सिविल आपूर्ति और उपभोक्ता कार्य प्रभारी राज्यमंत्रियों एवं संबंधित केंद्रीय मंत्रियों की बैठक में कहा है कि सरकार जल्दी खराब हो जाने वाले कृषि उत्पादों के भंडारण के लिए तेजी से काम कर रही है, ताकि किसान अपने फसलों की बेहतर मार्केटिंग कर अपनी आय बढ़ा सकें। कृषिमंत्री ने कहा कि भारत में विश्‍व में सबसे अधिक शीत भंडारण क्षमता स्‍थापित की गई है, जो लगभग 32 मिलियन टन है। उन्होंने कहा कि इन 2 वर्ष के दौरान 1 मिलियन क्षमता से भी अधिक लगभग 250 परियोजनाएं शामिल की गई हैं, बागवानी क्षेत्र अब कृषि संबंधी उपार्जन का सबसे बड़ा माध्यम बन गया है। उन्होंने कहा कि अब हमें यह सुनिश्‍चित करना है कि खराब हो जाने वाली फसलों से संबंधित किसान अब अपने विपणन दायरे को विस्‍तारित कर सकें, इसके लिए शीत भंडार गृह और अन्‍य संबंधित अवसरंचनाओं पर ध्‍यान दिया जाएगा।
कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 8 राज्‍यों की 21 मंडियों में 14 अप्रैल 2016 को राष्‍ट्रीय कृषि मंडी पोर्टल को औपचारिक रूप से शुरू कर दिया है, कुल मिलाकर 25 कृषिगत जिंसों, जिनके लिए व्‍यापारिक मानदंड बनाए गए हैं, उन्‍हें योजना के तहत ऑनलाइन व्‍यापार करने की अनुमति दे दी गई है। राधामोहन सिंह ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में पर्याप्‍त क्षमता वाले अनेक भंडारों को बनाने और इन भंडारों में तकनीकी सुविधाएं उपलब्‍ध कराने के प्रयोजनार्थ विभाग देशभर में कृषि विपणन के लिए कृषि विपणन अवसंरचना समेकित स्‍कीम की उपस्‍कीम का कार्यांवयन कर रहा है। उन्होंने कहा कि करीब 619.49 लाख मीट्रिक टन क्षमता वाली 37795 भंडार परियोजनाएं मंजूर की गई हैं, जिनके लिए 31.03.2016 की स्‍थिति के अनुसार 2199.07 करोड़ रूपए की राजसहायता का प्रावधान किया गया है, राज्‍य के मौजूदा मानदंडों के अनुसार भंडारण क्षमता को बढ़ाने के लिए आरकेवीवाई प्रस्ताव भी दे सकता है।
राधामोहन सिंह ने कहा कि राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन के तहत 2013-14 तक चावल, गेहूं एवं दलहन फसल ही शामिल थी, अब मोटे अनाज, गन्ना, जूट, कपास भी शामिल हो गए हैं। पहले 19 राज्य शामिल थे, जो अब बढ़कर 29 हो गए हैं। 482 जिले शामिल थे, अब 638 हो गए हैं। कृषिमंत्री ने कहा कि दालों की बढ़ रही मांग को पूरा करने के लिए प्रमुख 475 कृषि विज्ञान केंद्रों को शामिल करते हुए बड़ी संख्या में अग्रिम पंक्ति प्रदर्शन प्रांरभ किए गए, वर्ष 2015-16 के दौरान कुल मिलाकर 22,000 हैक्टेयर क्षेत्रफल पर 60,000 से भी अधिक प्रदर्शन आयोजित किए गए। उन्होंने कहा कि दलहन हब की स्थापना भागीदारी विधि से आईसीएआर संस्थानों, कृषि विश्वविद्यालयों एवं कृषि विज्ञान केंद्रों के सहयोग से की जाएगी, प्रत्येक दलहन केंद्र मूल गुणवत्ता युक्त बीज मुहैया करायेगा तथा इन्हें पड़ोसी किसानों के लिए उपलब्ध कराएगा, प्रत्येक केंद्र से 1000 क्विंटल दलहन का उत्पादन होगा। प्रारंभ में वर्ष 2016-17 के दौरान 100 दलहन हबों की स्थापना की जाएगी, जिनकी संख्या वर्ष 2017-18 के दौरान बढ़ाकर 150 की जाएगी। कृषिमंत्री ने राज्यों से आग्रह किया वे केंद्र की कृषि योजनाओं के प्रभावी कार्यांवयन के लिए मिलकर काम करें, ताकि खाद्य उत्‍पादन में और अधिक इजाफा हो सके।
कृषिमंत्री ने कहा कि राष्ट्रीय तिलहन एवं तेल ताड़ मिशन 2013-14 में 14 राज्य थे, अब 24 राज्य शामिल हो गए हैं, जलवायु सहिष्ण किस्में (सूखा प्रतिरोधी एवं बाढ़ सहनशील) वर्ष 2014 से 2016 तक अनाज की 19, दलहन की 20 एवं तिलहन की 24 किस्में जारी की गई हैं। उन्होंने कहा कि 12वीं योजना के अंत तक वनस्‍पति तेल उत्‍पादन 2.45 मिलियन टन तक बढ़ाने का लक्ष्‍य रखा गया है, इस लक्ष्‍य को प्राप्‍त करने के प्रयोजनार्थ देश में राष्‍ट्रीय तिलहन और ऑयल पाम मिशन को कार्यांवित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि तिलहन फसलों की बढ़ रही मांग को पूरा करने के लिए प्रमुख तिलहनी फसलों पर 300 कृषि विज्ञान केंद्रों को शामिल करते हुए बढ़ी संख्या में अग्रिम पंक्ति प्रदर्शन प्रारंभ किए गए। वर्ष 2015-16 के दौरान कुल मिलाकर 11,000 हेक्टेयर क्षेत्रफल को शामिल करके 28,000 से भी अधिक अग्रिम पंक्ति प्रदर्शन आयोजित किए गए। वर्ष 2016-17 तक इस योजना में लगभग 400 युवाओं को जोड़ा जाएगा। उन्होंने कहा कि किसानों के उत्‍पादों के पारिश्रमिक मूल्‍य सुनिश्‍चित करने के लिए राष्‍ट्रीय कृषि बाजार का कार्यांवयन भी आवश्‍यक है। इस संबंध में राज्‍यों को ऐसे प्रयास भी करने चाहिएं कि वे स्‍थानीय स्‍तर पर खाद्यान्‍नों के जमाखोरों द्वारा खाद्यान्‍नों की कमी न होने दें।

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