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रबी की रिकॉर्ड फसल होने की संभावना

रबी अभियान 2013 विषय पर राष्‍ट्रीय कृषि सम्‍मेलन

स्वतंत्र आवाज़ डॉट कॉम

Friday 27 September 2013 08:25:55 AM

rabi

नई दिल्‍ली। भारत में इस बार पर्याप्‍त मृदा की नमी तथा नीतिगत निर्णय से रबी की रिकॉर्ड फसल होने की संभावना है। आज दो दिवसीय रबी अभियान 2013 विषय पर राष्‍ट्रीय कृषि सम्‍मेलन इस सुखद उम्‍मीद के साथ शुरू हुआ कि आगामी फसली मौसम अर्थात रबी से रिकॉर्ड खाद्यान उत्‍पादन होगा। सम्‍मेलन का उद्घाटन कृषि एवं खाद्य प्रसंस्‍करण उद्योग मंत्री शरद पवार ने किया और देशभर के नीति निर्धारकों एवं वैज्ञानिकों का आह्वान किया कि वे उपलब्‍ध मृदा नमी का सर्वोत्‍तम उपयोग करें और अधिकतम फसल उत्‍पादन के लिए बीज एवं उर्वरकों जैसे घटकों की उपलब्‍धता सुनिश्चित करें।
इस तथ्‍य
पर टिप्‍पणी करते हुए कि गत वर्षों में प्रमुख फसलों का उत्‍पादन काफी बढ़ा है, शरद पवार ने खाद्यान्‍न, तिलहन, फल एवं सब्जियों की बढ़ती हुई मांग की ओर ध्‍यान दिलाया। उन्‍होंने कहा 'खाद्य सुरक्षा अधिनियम देश के 82 करोड़ लोगों को सस्‍ती दर पर खाद्यान्‍न उपलब्‍ध कराने के लिए लाया गया है, क्‍योंकि भूख से लड़ने की दिशा में यह विश्‍व भर का सबसे बड़ा कार्यक्रम है, आज आवश्‍यकताओं को पूरा करने के लिए वर्तमान उत्‍पादन स्‍तर न्‍यूनाधिक रूप में पर्याप्‍त है, फिर भी सूखे और बाढ़ की आपदा के बावजूद विकास के इस स्‍तर को कायम रखना एक वास्‍तविक चुनौती है। उन्‍होंने कहा कि हमें कृषि विकास की गति को सतत आधार पर तेज रखना होगा, ताकि खाद्य सुरक्षा अधिनियम के समुचित कार्यान्‍वयन के लिए खाद्यान्‍न की अतिरिक्‍त आवश्‍यकता को पूरा किया जा सके।
शरद पंवार
ने कहा कि मेरी दृष्टि में यह एक ऐसी चुनौती है, विशेषकर तब जबकि हमारा कृषि बुआई क्षेत्र बढ़ने की कोई संभावना नहीं है, हमारे प्राकृतिक संसाधन अर्थात भूमि और जल क्षेत्र पर्याप्‍त दबाव के अंतर्गत हैं, क्‍योंकि विश्‍व के भौगोलिक क्षेत्र का केवल 2.4 प्रतिशत भू-भाग है तथा 4 प्रतिशत इसके जल संसाधन हैं, किंतु ये विश्‍व की 17 प्रतिशत मानव जनसंख्‍या तथा 15 प्रतिशत पशुधन की जरूरतों को पूरा करता है। पर्यावरणीय विविधता का कारण विविधमुखी मृदा अवस्थितियां तथा मौसमी घटक हैं, जो राजस्‍थान के कुछ जिलों में 50 मिलीमीटर से भी कम वर्षा देते हैं तथा मेघालय के कुछ हिस्‍सों में यह 12 हजार मिलीमीटर तक की बारिश प्रदान करते हैं। ऐसी विषम अवस्‍थाओं के चलते काम काफी मुश्किल हो जाता है। खेतों में मुख्‍य रूप से उत्‍पादन की वृद्धि के फलस्‍वरूप ही कृषि उत्‍पादन में बढ़ोतरी होती है।
तेजी से
बढ़ती हुई जरूरतों को पूरा करने के लिए अधिक खाद्यान्‍न उत्‍पादन की चुनौती की पूर्ति के लिए आदानों के वैज्ञानिक प्रबंधन, गुणवत्‍तापूर्ण बीजों के अधिकाधिक उपयोग, उर्वरकों के संतुलित प्रयोग तथा जल संसाधनों के मितव्ययी, सक्षम उपयोग से उत्‍पादकता में वृद्धि करनी होगी। कृषि मंत्री ने बताया कि कृषि क्षेत्र में आरकेवीवाई, एनएफएसएम तथा एनएचएम में शुरू किए गए अति महत्‍वाकांक्षी कार्यक्रमों के फलस्‍वरूप शानदार परिणाम सामने आ रहे हैं और बारहवीं योजना के दौरान 25 मिलियन टन अतिरिक्‍त उत्‍पादन का लक्ष्‍य हासिल कर लिया जायेगा। आनुवांशिक पद्धति (जीएम) फसलों के बारे में बोलते हुए उन्‍होंने कहा कि जहां कहीं आवश्‍यक होगा, खेत में परीक्षणों के आधार पर अन्‍यथा इस क्षेत्र में वैज्ञानिक अनुसंधान के लाभों को हासिल करने के लिए जीएम फसल पद्धति लागू करने में संकोच नहीं करना चाहिए।
कृषि मंत्री
ने खरीफ फसलों के प्रथम अग्रिम आंकड़े भी जारी किए। इसके अनुसार गत वर्ष 128.2 मिलियन टन खरीफ खाद्यान उत्‍पादन की तुलना में चालू फसली मौसम में 129.32 मिलियन टन खाद्यान उत्‍पादन होने की संभावना है। सम्‍मेलन को कृषि एवं खाद्यान्‍न प्रसंस्‍करण राज्‍य मंत्री तारिक अनवर, कृषि विभाग में सचिव आशीष बहुगुणा तथा महानिदेशक आईसीएआर डॉ एस अयप्‍पन ने भी संबोधित किया। सम्‍मेलन के दौरान गुणवत्‍ता से परिपूर्ण बीजों की उपलबधता, उत्‍पादकता, बेहतर आदान, उपयोग, दक्षता तथा तिलहन और दाल उत्‍पादन जैसे विषयों पर चार समूहों में विचार-विमर्श किया जायेगा। दो‍ दिन तक विस्‍तृत विचार-विमर्श के उपरांत यह सम्‍मेलन रबी मौसम में अधिकतम फसल उत्‍पादन के लिए राष्‍ट्रव्‍यापी नीति का निर्धारण करेगा।

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