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शासनकर्ताओं के भ्रष्ट आचरण पर तीखा प्रहार

युवा शक्ति भारत की ताकत-रतन टाटा

उत्तराखंड में और निवेश करेगा टाटा समूह

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सुभाष-टाटा-अल्वा-निशंक/subhash-tata-alwa-nishank

देहरादून। देश के प्रसिद्ध उद्योगपति रतन नवल टाटा ने देश के प्रमुख राजनेताओं और नौकरशाहों के भ्रष्ट आचरण पर अपरोक्ष रूप से सावधानीपूर्वक तीखी टिप्पणी करते हुए कहा है कि मूल्य एवं नैतिकता समाज के सभी क्षेत्रों के लिए बेहद आवश्यक है, दुर्भाग्यवश भारत की पहचान ऐसे देश के रूप में बनती जा रही है, जहां के लोग कोई काम करने या अपना काम करवाने के लिए गलत तरीके से पैसे का लेन देन करते हैं। देश में उद्योगों के साथ ही किसी भी क्षेत्र में काम करने के लिए एक स्वच्छ माहौल होना चाहिए, जो मेरिट पर आधारित हो। रतन टाटा उत्तराखण्ड राज्य की दसवीं वर्षगांठ पर सोमवार को ओएनजीसी के एएमएन घोष सभागार में आयोजित राज्य व्याख्यान माला 2010 के आठवें राज्य स्थापना दिवस व्याख्यान में '21वीं सदी का भारत, अवसर एवं चुनौतियां' विषय पर बोल रहे थे।
रतन टाटा ने खुलासा किया कि वे एयरलाइंस बिजनेस में आज इसलिए नहीं हैं क्योंकि उन्होंने एक मंत्री को 15 करोड़ रूपये घूस देने से इनकार कर दिया था। टाटा समूह ने करीब 12 साल पहले अपनी घरेलू विमानन कंपनी की तैयारी की थी और सिंगापुर की एक एअरलाइंस के अधिग्रहण की योजना भी बन चुकी थी। तीन-तीन प्रधानमंत्री बदले और सरकारों के बदलने के साथ ही हर बार मंत्रियों का उनकी परियोजना को लेकर नजरिया बदल जाता था। एक बार उनसे कहा गया कि मंत्री को 15 करोड़ देकर तुम अपना काम क्यों नहीं करवा लेते हो तो उन्होंने कहा था कि रूपये तो वे दे देते, फिर रात को ढंग से सो नहीं पाते, इसलिए टाटा समूह को एअरलाइन मिल नहीं पाई। रतन टाटा ने कहा कि वे मंत्री या किसी के नाम का कयास लगाने के लिए यह बात नहीं बता रहे हैं बल्कि उनका सिर्फ इतना कहना है कि 15 करोड़ रूपये देकर एअरलाइन हासिल कर लेना उनके लिए बहुत शर्मनाक होता। रतन टाटा ने कहा कि हम सभी एक फिश बाउल में हैं और यह हम पर निर्भर करता है कि हम उसमें क्या देखते हैं।
रतन टाटा ने उत्तराखंड की विकास यात्रा पर प्रसन्नता जाहिर करते हुए कहा कि भारत की युवा जनसंख्या उसकी सबसे बड़ी ताकत है। भारत आज दक्षिण एशिया सहित पूरे विश्व में एक महत्वपूर्ण शक्ति के रूप में देखा जा रहा है, प्रगति के आधुनिक मानकों पर भारत के लोग दुनिया में किसी से कम नहीं हैं, परंतु इन सभी अवसरों के साथ रोजगार एवं शिक्षा के मौके सृजित करना, पर्यावरण को संरक्षित रखते हुए सतत विकास करना, नक्सलवाद और आतंकवाद का सामना करना जैसी भारत के समक्ष बड़ी चुनौतियां भी हैं। उन्होंने कहा कि भारत विश्व की महाशक्ति बन सकता है, लेकिन इसके लिए हम सभी को अपना योगदान देना होगा।
अपने संक्षिप्त सम्बोधन के बाद प्रश्नों का उत्तर देते हुए रतन टाटा ने कहा कि सफल व्यवसाय का कोई मूल मंत्र उनके पास नही है, लेकिन ईमानदार मूल्यों का पालन करते हुए कोई भी असफल नहीं हो सकता। मुंबई में ताज होटल पर हुए आतंकवादी हमलों से जुड़े प्रश्न पर टाटा ने कहा कि इन हमलों ने दिखा दिया कि उस समय प्रशासनिक मशीनरी ऐसे हमलों का सामना करने के लिए तैयार नहीं थी। एक गहरी चिंता के साथ उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि सुरक्षाबलों की तैनाती में विलम्ब हुआ था और सक्षम कमांडो दस्ता सुबह से पहले नहीं आ पाया था। एक अन्य प्रश्न के जवाब में रतन टाटा ने कहा कि समस्याओं का पूर्वानुमान करना बहुत आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड में औद्योगिक पैकेज समाप्त हो जाने के बाद भी टाटा समूह राज्य में अपने उद्यम का विस्तार करेगा, मुख्यमंत्री रमेश पोखरियाल निशंक को आश्वस्त भी किया कि नैनो का निर्माण पंतनगर कारखाने में जारी रहेगा। एक अन्य प्रश्न के जवाब में रतन टाटा ने कहा कि यहां से वापस जाने के बाद वे अपने उच्चाधिकारियों का एक दल उत्तराखण्ड भेजेंगे, जो यहां पूंजीनिवेश की संभावनाओं पर विचार करेगा। उन्होंने माना कि उत्तराखण्ड में कृषि और औद्यानिकी पर आधारित खेती की बेहतर संभावनाएं हैं। अपने रिटायरमेंट से जुड़े एक प्रश्न के जवाब में रतन टाटा ने कहा कि कोई भी व्यक्ति अपरिहार्य नहीं होता। उन्होंने आशा व्यक्त की कि उनका उत्तराधिकारी भी मूलभूत नैतिक मूल्यों का पालन करते हुए टाटा समूह और देश के लिए अच्छा काम करेगा। वह बोले कि उनकी रिटायरमेंट की पूर्व घोषित योजना में कोई बदलाव नहीं है।
इस अवसर पर राज्यपाल मार्ग्रेट आल्वा ने कहा कि उत्तराखण्ड के लोगों की जीवनशैली और शिक्षा स्तर देश के किसी भी राज्य की तुलना में कम नही है, यहां के लोगों को भविष्य की चुनौतियों के लिए हर समय तैयार रहना होगा। उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड में 9 प्रतिशत से अधिक की विकास दर का लाभ समाज के आखिरी छोर के व्यक्ति तक पहुंचाना होगा। राज्य के समक्ष व्याप्त चुनौतियों की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि गांवों से पलायन रोकना होगा, अस्पतालों में डॉक्टरों की कमी को दूर करना होगा और जनता से जुड़ी सेवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करनी होगी।
मुख्यमंत्री रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ ने रतन टाटा को प्रगति एवं विकास का प्रतीक बताते हुए कहा कि राज्य गठन के प्रथम दस वर्ष में उत्तराखण्ड ने अपनी पहचान देश के अग्रणी राज्यों में बनाई है। उन्होंने उल्लेख किया कि राज्य की आर्थिक विकास दर, प्रति व्यक्ति आय, स्वयं के कर राजस्व अर्जन जैसे मानकों पर उत्तराखण्ड ने तेजी से प्रगति की है। देश-दुनिया के नामी उद्योग घरानों ने उत्तराखण्ड में अपने उद्योग स्थापित किये हैं। पर्यटन की दृष्टि से उत्तराखण्ड हिमालयी राज्यों में प्रथम स्थान पर है। प्रदेश को देश का आदर्श राज्य बनाने के लिए सरकार ने विजन 2020 के अन्तर्गत ठोस पहल शुरू की है।
इससे पूर्व प्रदेश के मुख्य सचिव सुभाष कुमार ने रतन टाटा का स्वागत करते हुए उनके जीवन वृत्त से उपस्थित लोगों को अवगत कराया और उन्हें एक प्रेरणा स्रोत कहा। राज्य के ऊर्जा सचिव उमाकांत पंवार ने धन्यवाद ज्ञापित किया। अपर सचिव दीपम सेठ ने व्याख्यान माला का संचालन किया। इस अवसर पर पूर्व मुख्यमंत्री एनडी तिवारी, प्रदेश सरकार के सिंचाई मंत्री मातबर सिंह कंडारी सहित बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि, दायित्वधारी, उद्योगपति उपस्थित थे।
निशंक की टाटा से मैनेजमेंट गुरू की पेशकश
टाटा-निशंक/tata-nishankमुख्यमंत्री रमेश पोखरियाल निशंक ने अपने आवास पर रतन नवल टाटा से मुलाकात कर राज्य में टाटा समूह के संभावित निवेश के विभिन्न अवसरों पर विचार विमर्श भी किया। मुख्यमंत्री ने रतन टाटा से कहा कि वे उत्तराखण्ड को ऑटो मोबाइल हब के रूप में विकसित करने में सहयोग प्रदान करें। मुख्यमंत्री ने टाटा से चीफ मेंटर और मैनेजमेंट गुरू के रूप में उत्तराखण्ड को मार्गदर्शन प्रदान करने का अनुरोध किया। मुख्यमंत्री ने उन्हें बताया कि उत्तराखण्ड में सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र के लिए बड़ी संख्या में अच्छी गुणवत्ता का मानव संसाधन उपलब्ध है। राज्य सरकार गैस पर आधारित पावर प्लांट को प्रोत्साहित कर रही है। सरकार स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के अवसर सृजित कर पलायन रोकने के लिए प्रतिबद्ध है।
रतन टाटा ने मुख्यमंत्री का अनुरोध स्वीकार करते हुए कहा कि उत्तराखण्ड से आगे और जुड़कर उन्हें अत्यंत प्रसन्नता होगी। यहां ताज ग्रुप के होटल शुरू करने में रतन टाटा का रूख सकारात्मक दिखा। टाटा ने उत्तराखण्ड में सूचना प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में भी काम करने में विशेष रूचि दिखायी। उन्होंने देहरादून के आईटी पार्क के बारे में अधिकारियों से बातचीत की। दिल्ली से निकटता को उत्तराखण्ड के लिए लाभदायक बताते हुए कृषि और औद्यानिकी क्षेत्र में भी कार्य करने की संभावनाओं पर विचार-विमर्श किया। विचार विमर्श के अवसर पर मुख्य सचिव सुभाष कुमार, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव डीके कोटिया, प्रमुख सचिव पर्यटन एवं सूचना प्रौद्योगिकी राकेश शर्मा, प्रबन्ध निदेशक सिडकुल एस रामास्वामी, सचिव ऊर्जा उमाकांत पंवार और सचिव कृषि ओम प्रकाश भी उपस्थित थे।

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