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अतीत के झरोखे-एक जाम
तुम्हारे नाम
अतीत
के
झरोखे और वर्तमान का सामना जीवन चक्र के अनवरत उतार-चढ़ाव की
जीवंत सच्चाइयां हैं। बहुत पुराना दौर सामने उमड़ा हुआ है।
मरुस्थल में बिखर रही गर्मजोशी भरी रोशनी और संगीत तथा हंसी की
आवाजें एक शताब्दी से थके मांदे राहगीरों को अपनी ओर खींचती
चली आई हैं और हम भी रेलिंग लगे दालान और लकड़ी के खंभों पर
खड़े उस चौड़े बरामदे को पार कर पत्थरों और लोहे के लहरिया
जंगले वाली उस इमारत में खिचे चले जाते हैं। दिन भर की मोटर
यात्रा से झुलसे हम लोग डेली वाटर्स नामक पब की ऊंची स्टूलों
पर कृतज्ञतापूर्वक बैठ जाते हैं। ‘गुड ईवनिंग,’ बारटेंडर ने
बीयर के दो मग लहराते हुए हमारा स्वागत किया। ‘क्या लेना
चाहेंगे?’
ठंडी लेजर
बीयर की चुस्कियां लेते हुए हम लोग आस्ट्रेलिया की नॉर्दन
टेरिटरी के इस बेहद पुराने मदिरालयों में से एक में सजी पुरानी
पुरानी वस्तुओं के संग्रह पर दृष्टिपात करते हैं। इस संग्रह
में लोहार के औजार, घोड़ों के नाल एवं एक पुराने तारघर के
मोर्स संकेत के पटल व इंसुलेटर तक शामिल हैं। एक ओर काउंटर के
पीछे डाकघर है, जो मात्र बीस निवासियों वाले इस कस्बे की सेवा
करता है। दूसरे कोने पर सैनिकों का एक समूह दिन भर की भागदौड़
के बाद अब इस समय बिलियर्ड के खेल में उत्साहपूर्वक जुटा है।
‘भुना गोश्त
बढि़या है।’ एक कद्दावर ट्रक ड्राइवर ब्लैक बोर्ड पर लिखे
मैन्यू पर नजर डाल सिर हिलाते हुए कहता है, ‘आप ट्रैक पर आगे
जा रहे हैं या वापस लौट रहे हैं?’ हम लोग उसे बताते हैं कि हम
आगे ही उत्तर में डारविन की तरफ जा रहे हैं। हम लोग अब अपनी
खाने की प्लेटों के किनारे धरे भुने हुए चापों से निबटते हैं
और इस बीच वह हमें स्थानीय स्थितियों से अवगत कराता चलता है।
आस्ट्रेलिया के दूर दराज इलाकों में भी उपग्रह टेलीविजन, सौर
ऊर्जा चालित टेलीफोनों और फैक्स मशीनों का प्रवेश तो हो ही
चुका है, मवेशियों के दामों से लेकर सोने की खान मिलने तक की
ताजा खबरों की जानकारी के लिए इंटरनेट भी आ गया है।
आस्ट्रेलिया
के उत्तप्त बियाबानी विस्तारों के पशुपालकों, खदान मजदूरों,
ट्रक चालकों और इन में रहने वाले तमाम लोगों के लिए इस तरह के
मदिरालय विश्राम और सामाजिक संपर्क के नखलिस्तान का काम करते
हैं। इन मदिरालयों का रूप भर जहां तहां बदलता रहता है। एक तरफ
क्वींसलैंड होटल हैं तो दूसरी ओर वीरानों के बीच अचानक मिल
जाने वाले टीन की छत के जर्जर या फिर सामान्य से सड़क के
किनारे के मदिरालय हैं। लेकिन दूर दराज तक फैले इन मदिरालयों
में जुड़ने वाले लोगों की वजह से ही ये पब आस्ट्रेलिया के अपने
ही अद्वितीय संस्थान बन गए हैं। चालीस डिग्री सैल्सियस से ऊपर
की गर्मी में टेन टीनेंट क्रीक के एक मदिरालय में आराम के
दौरान हमने वहां एक एक बुजुर्ग से पूछा कि उस तरफ बारिश कितने
समय से नहीं हुई? उसने पहले अपने सामने की मक्खियों को भगाया
फिर गरमी से पस्त क्षितिज की ओर, अब अपने हाथ की ठंडी बीयर को
देखते हुए कहा, ‘दो सालों में एक बूंद पानी भी नहीं गिरा है,’
फिर उसने कहा, ‘लेकिन असली सूखा तो तभी मानेंगे न जब शराब के
पीपे भी सूख जाएं।’
यूरोपीय
बस्तियों के बसते चलने के प्रारंभिक युग से ही इन मदिरालयों ने
इन उदीयमान देश को गढ़ने में योग दिया। समृद्ध बाशिंदों ने
शहरों के महत्वपूर्ण ठिकानों पर बने मदिरालयों के पड़ोस में
अपना कारोबार शुरू किया। आबादी का विस्तार जैसे-जैसे निर्जनों
में होता चला गया, वैसे-वैसे मुख्य मार्गों के किनारे-किनारे
दिन भर की घोड़ागाड़ी की यात्रा लायक दूरियों पर सराय खड़े
होते चले गए। इन मदिरालयों को बनाने में अगल-बगल से मिलने वाली
सामग्री अथवा छकड़ों पर लादी जा सकने वाली सामग्री का ही
इस्तेमाल हुआ, मसलन किरमिच के तंबू, पेड़ और यहां तक कि दीमक
के दूहों का भी इस्तेमाल कर लिया गया। चूंकि दूर-दराज की
बस्तियों में सबसे पहले मदिरालयों का ही निर्माण होता था,
इसलिए इन झाड़खंडी मदिरालयों में ही अकसर सामुदायिक सभा कक्ष,
किनारे की दुकान और न्याय कक्ष भी चलते रहे। कई बार रविवार की
प्रार्थना सभाओं को भी इन्हीं के मंच से संबोधित किया जाता था
और 1900 में सिंगलटन के कैलेडोनियन होटल में ही इन वीरानों की
शरण लेने वाले डकैत, जो गवर्नर की मौत की न्यायिक जांच की
कार्रवाई भी यहीं हुई थी। शव की जांच के लिए अकाल मृत्यु
परीक्षक भी यहीं आया।
इन निर्जन
प्रांतरों के आत्मसम्मान रखने वाले हर निवासी के पास इन अंचलों
के कैप्टन थंडरबोल्ट, बावले डैन मॉर्गन अथवा कैप्टन मूनलाइट
जैसे बागियों की अपनी ही दास्तां हैं। स्थानीय आख्यानों के
अनुसार आयरी मूल का डकैत मूनलाइट तो दक्षिण आस्ट्रेलिया के
बारमेरा के ओवरलैंड कॉनर होटल में घोड़े पर सवार होकर आता था
और घोड़े पर बैठे-बैठे ही बीयर गटकता रहता था। उसे 1889 में
पकड़कर फांसी पर लटका दिया गया।
इन खूंख्वार
बाशिंदों को आज भी इन मदिरालयों में वही पुराना जाना-पहचाना
माहौल मिल जाएगा जो कि अब भी अपने बीहड़ और अव्यवस्थित स्वरूप
को बनाए हैं। हां, अब इन मदिरालयों को पाने के लिए इस महाद्वीप
के अंदरूनी क्षेत्रों में पैठना पड़ता है। इसी इरादे से हमने
1989 की सर्दियों में एडिलेड बंदर से डार्विन बंदरगाह नगर के
बीच के इस महाद्वीप के ललछौहें मध्य भाग की 3,000 किलोमीटर की
आठ हफ्ते की यात्रा का कार्यक्रम बनाया। स्टुअर्ट राजमार्ग की
कोलतारयुक्त सड़क की जीवन रेखा पर पड़ने वाली मात्र मदिरालय या
पेट्रोलपंपनुमा चौकियों के बाशिंदों के बीच यों दक्षिणी तट से
उत्तरी तट तक की यह राह ‘पगडंडी’ भी कही जाती है।
फिलेंडर्स
रेंजेज के ऊबड़-खाबड़ और धूल भरे रास्तों पर भटकने के बाद हम
आस्ट्रेलिया की सबसे कम आबादी वाली बस्तियों (कुल 14 लोग) में
से एक यानी विलियम क्रीक के मदिरालय में अपना पहला पड़ाव डालते
हैं। विलियम क्रीक होटल ऐयर झील के किनारे खड़ा है। इस विशाल
झील के दमकते हुए खारे पेटे में पिछले दो सौ सालों में केवल
कुछ बार ही पानी भरा होगा। मदिरालय का बाहरी भाग लहरिया लोहे
से बना है। इसकी रसोई में मिट्टी के तेल के कनस्तरों को फैलाकर
जो दीवार खड़ी की गई थी, उससे दिन की रोशनी छन-छनकर भीतर आ रही
थी।
हम 400
किलोमीटर की यात्रा की अपनी थकान को बीयर से उतार ही रहे थे कि
बाहरी दरवाजे पर एकल इंजन वाला एक विमान उतरकर चला आया। पाइलट
ने इंजन बंद किया और फिर टहलते हुए बार में आ गया। वह एलिस
स्प्रिंग्स तक की अपनी यात्रा के बीच कोई शीतल पेय लेने की गरज
से उतर गया था। थोड़ी देर बाद वहां पड़ोस के वूमेरा रॉकेट
प्रक्षेपण स्थल का एक इंजीनियर आया। वह यहां से अभी एक घंटा
पहले ही अपनी खटारा पिकअप ट्रक लेकर निकला था। लौटने पर उसके
ट्रक के पीछे विक्टोरिया में रहने वाले एक परिवार की स्टेशन
बैगन बंधी थी, जो 30 किलोमीटर दूर एक जगह पर रेडिएटर के पानी
के पंप के फट जाने की वजह से खड़ी हो गई थी। ‘मुझे यह जगह बहुत
पसंद है,’ दक्षिण आस्ट्रेलिया के किंग्सटन के एक पूर्व कृषक और
इस मदिरालय के लाइसेंस के साझीदार रीस वेस्टओवर कहते हैं।
‘यहां लोग एक दूसरे की मदद भी तो करते हैं।’
सूर्यास्त के
समय तक पड़ोस के एना क्रीक पशुपालन केंद्र से दर्जन भर कार्मिक
इकट्ठा हो जाते हैं। वे संसार में मवेशियों के इस सबसे बड़े
केंद्र, जो लगभग बेल्जियम के बराबर ही है, पर अपने 15,000
पशुओं को चराते हैं। ये अपनी घुड़सवारी वाले जूतों और पसीने से
मैले अपने हैटों के साथ हाथ में बीयर लेकर इस गंवई मदिरालय में
बैठते हैं तो लगता है कि इस पुराने होटल में 1888 के बाद के
बाद से पेश आ रही किसी भी शनिवार की रात लौट आई है।
अगले दिन,
तीसरे पहर हम लोग धूल की एक आंधी को चीरकर स्टुअर्ट राजमार्ग
पर वापस पहुंच जाते हैं। चार घंटे की यात्रा के बाद हमें तांबई
रंग की फीकी रोशनी में दूधिया पत्थर (ओपल) की खुदाई से लगे धूल
के ढूह दिखाई देते हैं और यह संकेत है कि हम संसार की दूधिया
पत्थरों के खनन की राजधानी कूबर पेडी पहुंच गए हैं। यह अभी भी
सीमांती कस्बा है, जहां दूधिया पत्थर की वजह से दुनिया भर के
लोग अपनी किस्मत आजमाने आते रहते हैं। बार में बैठने से पहले
हम अपने कपड़ों से पाउडर की सी महीन लाल धूल झाड़ रहे होते
हैं, इस ओपल इन के लाइसेंसधारी स्टीव रोड हमें बताते हैं,
‘कभी-कभी मैं रात में बीस तरह की भाषाएं सुनता हूं।’ पीछे के
कमरों से मां जोंग के पासों के खड़कने और खनिकों के माल काटकर
लौटने की प्रतीक्षा में बैठे हांगकांग के व्यापारियों की
कैंटनी भाषा में बतकही की आवाजें आती हैं। ‘यह कस्बा अब पहले
जैसा बीहड़ तो नहीं रहा, लेकिन अब भी कभी-कभी वे क्षण आ ही
जाते हैं,’ रोडा कहते हैं। अभी थोड़ी देर पहले ही दूधिया पत्थर
का तगड़ा माल काट लाने वाला एक खनिक जोश में आकर मदिरालय की छत
पर अपनी पिस्तौल से गोली दाग चुका है।
इन झाड़खंडी
इलाकों में ऐसी-ऐसी विचित्र घटनाएं होती हैं कि अकसर सत्य और
कोरी गप्प में फर्क करना मुश्किल पड़ जाता है। फिर बेपर की
हांकना झाड़खंड की एक गौरवशाली परंपरा भी रही है। यहां के
गपोड़े सीधे सादे बाहरी लोगों की टांग खींचने में काफी अभद्र
किस्म का आनंद अनुभव करते हैं। पश्चिमी आस्ट्रेलिया के यूक्ला
के एंबर होटल के गंभीर मुखमुद्रा वाले अड्डेबाजों ने नलआरबर की
स्वर्णकेशी सुंदरी की नग्न होकर नलआरबर के मैदानी क्षेत्र में
घूमने के किस्से को इतने विश्वसनीय तरीके से सुनाया कि
अंतरराष्ट्रीय पत्र जगत तक में उसकी चर्चा हुई। लेकिन झाड़खंडी
गाथाओं में सबसे प्रसिद्ध गाथा क्रोकोडाइल डंडी नामक फिल्म से
संबंधित है, क्योंकि इसके मदिरालय के दृश्यों की शूटिंग
क्वींसलैंड के भेड़ों और मवेशियों के छोटे से शहर मेकिनले के
फेडरल होटल में हुई थी। फिल्म की शानदार सफलता का अंदाजा लगा
कर मदिरालय के मालिक ने फिल्म के मदिरालय के नाम पर अपने
मदिरालय का नाम बदलकर वाकअबाउट क्रीक होटल ही रख दिया।
अभी कुछ वर्ष
पहले तक आस्ट्रेलिया के इन वीरानों का सर्वाधिक विख्यात पब
मदिरा को जरा न छूने वाले केन मेनार्ड के दिमाग भर में रचा बसा
था। पिछले 31 वर्षों से यह सुविख्यात कार्टूनिस्ट महोदय
साप्ताहिक आस्ट्रेलियन पोस्ट में तरह-तरह के झाड़खंडी चरित्रों
से भरे एक ऊबड़खाबड़ मदिरालय यानी एटमोगा पब के किस्से
रेखांकित करते रहे। अंततः 1987 में एल्वरी के निकट हृयूम
राजमार्ग पर सिडनी के दक्षिण में सचमुच का एटमोगा यानी
आस्ट्रेलिया के आदिम लोगों की भाषा में बढि़या दारू का अड्डा
के नाम वाला पब खुल गया तो यह अपनी टेढ़ी तनी दीवारों सहित
पूरी तरह मेन्यर्ड कार्टूनी दास्तां का रूप लिए था, और तो और
उसकी हिलती डुलती ढलवां छत पर 1929 के मॉडल वाला वह शैवरलेट
ट्रक भी उपस्थित था जो कथा के अनुसार 1946 की भयंकर बाढ़ में
बहकर वहां पहुंच गया था।
कूबर पेडी के
उत्तर से हम दक्षिणी आस्ट्रेलिया पार करके आस्ट्रेलिया के
नॉर्दन टेरिटरी में आ पहुंचे। अन्वेषक जॉन मैक्डुऑल स्टूआर्ट
ने 1860 में हिसाब करके बताया था कि आस्ट्रेलियाई महाद्वीप का
यह केंद्र सीमा से 500 किलोमीटर दूर टी-ट्री रोडहाउस के पास
है। यह रोडहाउस अपने को ‘आस्ट्रेलिया के सर्वाधिक मध्यवर्ती
पब’ के रूप में गिनता है। यहां की ‘बीयर बगिया’ की मेजों के
बीच पालतू कंगारू कूदते रहते हैं जबकि बार के मालिक वहां रखे
उस ताबूत के बारे में बताते हैं जिस पर खुदा हैः ‘ग्रेगोरी
फ्रांसिस डिक समाधिस्थ 1945-2045।’ यह मदिरालय के इसी मालिक का
अपना ही ताबूत है। ‘मैं हमेशा कहता रहता हूं कि मैं 100 साल
जिंदा रहने वाला हूं।’ वह बहुत प्रफुल्ल होकर कहते हैं। फिलहाल
उनके ताबूत का इस्तेमाल शराब रखने के लिए किया जा रहा है।
‘पिल्टन
हिल्टन में आप का स्वागत है,’ मदिरालय के मालिक हम से मुसकरा
कर कहते हैं। हम टी-ट्री से 90 किलोमीटर आगे की यात्रा करके
ईंटों की जर्जर प्राचीन इमारत यानी बैरो क्रीक मदिरालय में
पहुंचते हैं। 1872 में बैरो क्रीक उन 11 पुनर्प्रेषण केंद्रों
में एक था, जिसके जरिए एडिलेड से डार्विन एक तार की लाइन बिछा
कर आस्ट्रेलिया के शहरों को पहली बार बाहरी दुनिया से जोड़ा
गया था। मदिरालय की बाहरी दीवार पर नोट चिपके हुए हैं, ‘यह
बैरो क्रीक बैंक है,’ पिल्टन कहते हैं। ‘जब आप को पैसा मिले,
आप उस पर अपना नाम लिखकर अपने खाते में जमा कर दें। अगली बार
कभी आप के पास मदिरा के लिए पैसे नहीं होंगे, आप ठाठ से पैसे
उठा सकते हैं।’ पिल्टन के बैंक में 3,000 आस्ट्रेलियाई डॉलर
‘जमा’ हो चुके हैं और अब उसने दूसरी दीवार पर अपने बैंक की
उत्तरी शाखा भी खोल ली है।
आगे कुल सात
लोगों की आबादी वाली वाचोप बस्ती के मदिरालय में धंधा इस समय
जरा मंदा चल रहा है जहां सिर्फ एक महिला कर्मचारी और एकमात्र
ग्राहक टोनी कैंपबेल हैं। कैंपबेल इस बियावान में सोने की
खुदाई में लगातार महीनों महीनों तक लगा रहता है और इस समय वह
सामान भर लेने के लिए ट्रक से बस्ती में आया हुआ है- वह यहां
तरमाल और ठंडी बीयर के मध्य कुछ दिन गुजारेगा। इन बीहड़ों में,
और खास तौर पर सोने की खदान वाली बस्तियों मसलन तटवर्ती पर्थ
से 500 किलोमीटर दूर पश्चिम आस्ट्रेलिया में ही स्थित
केलगुर्ली में स्वर्ण और मदिरालय का बड़ा अभिन्न रिश्ता है।
यहां बार के काउंटर की चौड़ाई एक मीटर से भी ज्यादा है ताकि
1890 के दशक में सोने की मौजूदगी की खबर सुनकर यहां दौड़े आने
वाले उजड्ड लोगों के हाथ बार में काम करने वाले कर्मचारी तक
आसानी से न पड़ने पाएं।
‘पगडंडी’ पर
हजार किलोमीटर चल कर टीनेंट क्रीक और डेली वाटर्स की पार करके
हम एडिलेड रिवर की बस्ती में पहुंचे। यहां झाड़खंड पिकनिक दौड़
के सालाना जलसे की तैयारी हो रही थी। यह जलसा पिछली शताब्दी
में शुरू हुआ था और इसमें पशुपालनक लोग आपस में मिलते जुलते थे
और अपने घोड़ों के बीच दौड़ की प्रतियोगिता करते थे। आज के दौर
में बियावान इलाके की सभी बस्तियों के बीच भोजों की भारी
गहमागहमी रहती है इस जलसे में। इस झाड़खंड का सर्वाधिक
महत्वपूर्ण आयोजन होता है बर्ड्सविल पिकनिक दौड़ जो क्वींसलैंड
के दुर्गम दक्षिण पश्चिमी छोर पर हर साल सितंबर के महीने में
आयोजित होती है। इसी जगह पर विशाल सिंपसन रेगिस्तान और
स्टर्ट्स स्टोनी रेगिस्तान का मिलन होता है। सप्ताहांत की दौड़
के लिए बर्ड्सविल के 100 लोगों की आबादी वाले कस्बे में
आस्ट्रेलिया भर से कुल मिलाकर 6,000 लोग इकट्ठे हो जाते हैं।
ये अतिथिगण दौड़ के रास्ते के इर्द-गिर्द तंबू लगाकर रहते हैं
और शनिवार की रात को बस्ती के प्रशासन कक्ष में औचारिक गाउन और
डिनर जैकेट पहनकर इकट्ठा होते हैं। यहां रात भर नृत्य का
कार्यक्रम चलता है। कार्यक्रम में इकट्ठा किया गया धन रॉयल
फ्लाइंग डॉक्टरी सर्विस को दिया जाता है, जो कि इन अलग-थलग
पड़ी दूर-दूर की बस्तियों के लोगों को विमान द्वारा आपातकालीन
डॉक्टरी सहायता प्रदान करती है। कुछ धन स्थानीय धर्मादा
संस्थाओं को भी दिया जाता है।
स्वाभाविक
रूप से बर्ड्सविल होटल ही इन तमाम गतिविधियों का केंद्र होता
है। वैसे भी मारी से 540 किलोमीटर लंबी बर्ड्सविल पंगडंडी की
कष्टप्रद यात्रा के बाद इस जगह को देखकर सैलानियों को संतोष
मिलता है। ‘हम इस मौके के लिए बीयर के एक लाख कैन अलग से
मंगवाते हैं,’ मदिरालय के मालिक डेव स्टोडार्ट बतलाते हैं।
पिछली सदी से आज तक होटल के दोनों बारों में पूर्वी दीवार के
अलावा कुछ भी नहीं बदला है। यह दीवार उस समय गिर गई थी, जब
ऊंटों ने मिट्टी के ईंटों के बीच से तिनके निकाल-निकाल कर चल
लिए थे। इसे 1986 में ही फिर से बनाया गया था। सूखे रेगिस्तान
को पीछे छोड़कर हम उत्तरी आस्ट्रेलिया के समशीतोष्ण क्षेत्र
में पहुंचते हैं। जहां एशियाई भैंसे ताड़ों और दीपक के छह मीटर
ऊंचे ढूहों के बीच विचरती हैं। नार्दन टेरिटरी की राजधानी
डार्विन के रास्ते के रेतीले तटों का आसमानी पानी हमें पुलकित
कर देता है। फिर हम डार्विन पहुंचते हैं, जो इतना प्यासा शहर
है कि वहां प्रति व्यक्ति 250 लीटर बीयर की वार्षिक खपत होती
है।
अब हम
विक्टोरिया होटल पहुंचते हैं जो एक सदी से उस शहर के सामाजिक
जीवन का केंद्र रहा है। संभवतः यह ओल्ड विक पब किसी भी दूसरे
पब से कहीं अधिक पूर्णता में झाड़खंड क्षेत्र की दुर्दम्यता की
भावना को प्रतिबिंबित करता है। 1942 और 1943 में जापानियों की
बमबारी से यहां सैकड़ों लोग मारे गए और शहर का बड़ा हिस्सा
भूमिसात हो गया था। उस हाल में भी विक्टोरिया होटल
पुनर्निर्माण का जायजा लेने के लिए खड़ा रहा। डार्विन युद्ध की
राख से निकलकर फिर उभरा, लेकिन 1974 में बड़े दिन की
पूर्वसंध्या पर एक भयानक समुद्री चक्रवात टै्रसी ने उसे फिर
तबाह कर दिया। शहर की दो तिहाई आबादी को विमान से उठाकर बाहर
ले जाया गया और शहर फिर से बनाया गया।
पुनर्निर्माण
के समय होटल की पुरानी बलुही पत्थर की दीवार के कुछ हिस्सों को
मलबे में से उबारा गया और आज हम पुनर्निर्माण् पब के बाहर लगे
इन पत्थरों पर प्रसिद्ध उड़ाकों के पेंसिल से किए हुए
हस्ताक्षरों की लुप्त हो रही इबारत को पढ़ सकते हैं। इन
उड़ाकों में रॉस स्मिथ और उन के भाई कीथ भी हैं, जिन्होंने
1919 में पहली बार लंदन से आस्ट्रेलिया तक की उड़ान भरी थी।
उन्हीं की तरह हम भी ओल्ड बिक में एक लंबी यात्रा के बाद ठंडी
बीयर का पात्र उठाते हैं और बियावान की इन मधुशालाओं के नाम एक
जाम पी डालते हैं।
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