|
सहारा वन
पर अब 'एक चुटकी आसमान'
मुंबई।
अपने दर्शकों के बदलते चाव और पसंद को ध्यान में रखते हुए
सहारा वन मई से अपनी समूची छवि में बदलाव करता आ रहा है। यह
बदलाव इसके रूप और अनुभूति में हो रहा है। चैनल का नया ‘लोगो’
और इसके कार्यक्रमों में होने वाला बदलाव 'नयी कहानियां, नयी
सहेलियां, नया सहारा वन' की सोच को चरितार्थ करेगा।
सहारा इंडिया कॉर्पोरेट कम्युनिकेशंस के अनुसार इस बदलाव की
शुरूआत देश की महिलाओं और लड़कियों के वास्तविक जीवन के संघर्ष
और स्वतंत्रता के 63 वर्षों बाद भी उनके सामने खड़ी समस्याओं पर
आधारित नये कार्यक्रमों ‘बिट्टो’ और ‘शोर’ के साथ की गयी थी।
अपने ज्वलंत साहस और प्रत्येक नये कार्यक्रम में भारतीय
संस्कृति की एक नयी उप-संस्कृति को रेखांकित करने के वादे को
निभाते हुए सहारा वन एक बार फिर कुछ नया प्रस्तुत करने के लिए
तैयार है। नये कार्यक्रमों की श्रृंखला में सोमवार 23 अगस्त से
एक नया कार्यक्रम जुड़ गया है-‘एक चुटकी आसमान’। सहारा वन पर
शुरू होने वाला यह तीसरा नया कार्यक्रम है, जिसका प्रसारण
सोमवार से गुरूवार रात 8.30 बजे किया जाएगा।
सहारा वन के क्रियेटिव डायरेक्टर मुश्ताक शेख ने बताया कि
'अपनी राह में भटके बिना, अनूठी अवधारणाओं को पेश करने के
प्रयास की प्रक्रिया को आगे बढ़ाते हुए हम ‘एक चुटकी आसमान’ का
प्रसारण कर रहे हैं। यह एक छोटी सी लड़की 'चुटकी' की
मर्मस्पर्शी कहानी है। भाग्य के साथ उसकी आजमाइश मुम्बई के नाम
से मशहूर सीमेंट और कंक्रीट के बड़े से जंगल की निर्दयता को
सामने लाती है। यह ऐसा कार्यक्रम है, जिसमें सपनों, आकांक्षाओं
और जीवन के उतार-चढ़ावों को मासूम 'चुटकी' की आंखों से दिखाया
गया है।
‘एक चुटकी आसमान’ एक 7 वर्षीय लड़की 'चुटकी' (रोशनी पारेख) की
कहानी है, जो कोल्हापुर, महाराष्ट्र के समीप एक छोटे से गांव
में रहती है। चुटकी एक खुशदिल लड़की है, जो जहां भी जाती है,
लोगों के चेहरों पर मुस्कराहट लाती है। चुटकी, नरेश और हेमांगी
(छवि मित्तल) की बेटी है। उसका जीवन खुशहाल है, लेकिन जब एक
भयावह दुर्घटना में उसके पिता की मृत्यु हो जाती है, तब सब कुछ
बदल जाता है और चुटकी के दादा-दादी अपनी बहू और पोती को घर से
बाहर निकाल देते हैं। हेमांगी के पास अपने भाई रमाकांत (मानव
सोहल) के पास जाकर रहने के अलावा कोई चारा नहीं रहता है।
रमाकांत एक किसान है, जिसके पास थोड़ी सी जमीन है। उसके जीवन
में एक दुखद मोड़ आता है, जो उसे तोड़कर रख देता है और उसे अपनी
आजीविका के एक मात्र साधन अपने खेत को बेचने की नौबत तक आ जाती
है। हेमांगी और चुटकी को अपने साथ रखने से रमाकांत की पत्नी
संध्या (हर्षदा खानविलकर) नाराज है, लेकिन रमाकांत का बेटा
बबलिया (प्रीतीश रॉय) चुटकी को अपने घर में पाकर बहुत खुश है।
वह चुटकी का सबसे अच्छा दोस्त है। संध्या इस बात पर जोर देना
शुरू कर देती है कि या तो हेमांगी कोई काम करे, या फिर रहने के
लिए कोई दूसरी जगह ढूंढे। मजबूर हेमांगी अपनी बेटी के भविष्य
को लेकर चिंतित है। उसके पास अपनी बेटी के बेहतर भविष्य के लिए
उसे रमाकांत के पास छोड़कर खुद मुम्बई जाने के सिवाय कोई विकल्प
नहीं रहता है। चुटकी को पहली बार रोना आ जाता है। हेमांगी के
जाने के बाद चुटकी अपनी मां के प्यार के लिए तरसती है और
आखिरकार भाग्य ऐसा मोड़ लेता है कि चुटकी खुद को एक अकेले सफर
में पाती है, जो शायद उसे उसकी मां से मिलाने के बाद खत्म
होगा।
सहारा वन टेलीविजन की प्रोग्रामिंग प्रमुख शीतल लाढ़ा ने कहा कि
यदि कोई देखना चाहे, तो हर किसी में अच्छाई है और हर दिल में
भगवान है। यही मंत्र ‘एक चुटकी आसमान’ में चुटकी के किरदार को
व्यक्त करता है। यह कार्यक्रम चुटकी के जीवन की सुन्दर यात्रा
है, जिसमें चमत्कारों के साथ-साथ बाधाएं भी हैं, लेकिन
सकारात्मकता और प्रसन्नता की प्रतिमा चुटकी हर बार उठकर खड़ी हो
जाती है, खुद को संभालती है और आगे बढ़ जाती है। यह अपनी बेटी
के लिए एक मां के त्याग और अमिट प्रेम की कहानी है। यह कहानी
हमारे दिलों को प्रेम और सच्ची भावनाओं से सराबोर कर देगी।
निर्माता संजय वाधवा ने कहा कि, 'विशिष्ट प्रकार के शोज के साथ
हम अव्यवस्थित और फैले हुए बाजार में एक अनूठे दर्शन अनुभव,
जिसका नाम ‘एक चुटकी आसमान’ है, लेकर आये हैं। ‘एक चुटकी
आसमान’ एक विशिष्ट जुड़ाव की कहानी है, जिसे एक छोटी बच्ची
चुटकी अपनी मां के साथ साझा करती है। यह उनके विघटन की कहानी
है और उनकी एक मात्र इच्छा सदैव के लिए साथ रहने की है। इसमें
प्रत्येक परिस्थिति और प्रत्येक चरित्र अद्वितीय स्थिति
उत्पन्न करते हैं। चुटकी का असाधारण सकारात्मक आचरण अति
प्रसन्नतादायक एवं दर्शनीय अनुभव है, क्योंकि वह दैनिक जीवन की
सारी जद्दोजहद के बावजूद प्रसन्न रहती है। कहानी में वास्तविक
जीवन के सदृश स्थितियों का समावेश इसे जीवंत स्वरूप प्रदान
करता है, इससे यह कहानी विश्वसनीय, जीवन से जुड़ी हुई लगती है,
यह एक अद्भुत दृश्य अनुभव के समान भी प्रतीत होती है। इस कहानी
में जैसे-जैसे नये मोड़ आते जाएंगे, वह दर्शकों को सोचने पर
विवश करेंगे कि क्या चुटकी इस निर्मम संसार से लड़ते हुए अपनी
मां से मिलने के लिए अपनी यात्रा को जारी रख पाएगी?

|