|
|
|
|
डेविड फ्राली यानि वामदेव शास्त्री से मिलिए!
डेविड फ्राली (वामदेव शास्त्री)
पश्चिम
के कुछ उन चुने हुए वेदाचार्यों में हैं जिनकी वेदों के
महापंडित के रूप में मान्यता एवं प्रतिष्ठा है। उनके ज्ञान की
विस्तृत परिधि में आयुर्वेद, वैदिक-ज्योतिष, तंत्र, योग तथा
वैदिक दर्शन समाहित है। उनके अध्ययन का मुख्य आधार वेद है और
उसमें अधुनातन पुरातात्विक अन्वेषणों के आलोक में भारत के
प्राचीन इतिहास एवं वेदों का आलोचनात्मक अध्ययन भी जुड़ा हुआ
है। पिछले पंद्रह वर्षों में उन्होंने दस से भी अधिक ग्रंथों
का लेखन किया है। भारत एवं अमरीका की अनेक पत्र-पत्रिकाओं में
विभिन्न विषयों पर उनके लेख प्रकाशित हुए हैं। भारत में वेदों
पर उनके भाष्य एवं अनुवादों की आध्यात्मिक और विद्वत् समुदाय
में यथोचित मान्यता हुई है। आजकल वे सांटा फे, न्यू मेक्सिको
87504-8356 (यूएसए) में अमेरिकन इंस्टीट्यूट ऑफ वैदिक स्टडीज
के निदेशक हैं।
प्रस्तुत पुस्तकद्वय के विषय से संबंधित उनके अन्य
ग्रंथ हैं-हिंदूइज्म, द एटर्नल टे्रेडिशन (सनातन धर्म), सनातन
धर्म (व्हायस ऑफ नॉलेज फॉर द मॉडर्न एज), विज़डम ऑफ द एसिंयेंट
सीयर्स सेलेक्टेड मंत्रास फ्राम द ऋग्वेद, वैदिक आर्यंस एंड द
ओरिजिन ऑफ सिविलिजेशन (नवरत्न एस राजाराम के साथ सह
लेखन-इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ इंडियन स्टडीज 1994) अवेकेन
भारत ए कॉल फॉर इंडियाज़ रीबर्थ (व्हायस ऑफ इंडिया 1997)।
डेविड फ्राली भारतीय आध्यात्म, संस्कृति और हिंदू-धर्म
के एक अद्यतन उत्कृष्ट चिंतक हैं। विभिन्न धर्मों और
आध्यात्मिक मूल्यों का जितना मार्मिक और निर्भीक तुलनात्मक
अध्ययन प्रस्तुत किया है, उससे आपके गहन अध्ययन और गंभीर चिंतन
पर प्रकाश डालता है। अभारतीय होते हुए भी हिंदू धर्म के उदात्त
तत्वों को महत्ता प्रदान करने की जो आकुलता इनमें दिखाई देती
है, वह किसी बिरले भारतीय में ही विद्यमान हो सकती है।
|
|
|