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कॉमनवेल्थ
के डाक टिकटों में भारी दिलचस्पी
पोर्ट
ब्लेयर। राष्ट्रमंडल खेलों, कॉमनवेल्थ खेल-2010 को अधिक से
अधिक आकर्षक और यादगार बनाने के लिए भारतीय डाक विभाग ने जो दो
स्मारक डाक टिकट जारी किए हैं उनके प्रति लोगों में काफी
दिलचस्पी देखी जा रही है। डाक टिकट संग्रहकर्ताओं के अलावा
स्कूली बच्चे और नौजवान भी इन डाक टिकटों और मिनिएचर शीट को
खरीदने में काफी रूचि दिखा रहे हैं। अंडमान-निकोबार द्वीप समूह
के डाक निदेशक कृष्ण कुमार यादव ने बताया कि इन डाक टिकटों पर
क्वीन्स बैटन एवं दूसरे डाक टिकट में दिल्ली के इंडिया गेट की
पृष्ठभूमि में गौरवान्वित शेरा को बैटन पकड़े हुए चित्रित किया
गया है। बीस और पांच रूपए में जारी ये डाक टिकट इंडिया
सिक्योरिटी प्रेस नासिक में फोटोग्रेव्यॉर तकनीक से मुद्रित
हैं और कुल आठ लाख डाक टिकट जारी किए गए हैं। उन्होंने बताया
कि डाक टिकटों के साथ-साथ मिनिएचर शीट भी जारी की गई है, जिसकी
कीमत पच्चीस रुपये है। ये डाक टिकट 25 जून 2010 को जारी किए गए
थे, जिस दिन क्वीन्स बैटन सभी राष्ट्रमंडल देशों में भ्रमण के
बाद भारत पहुंची।
डाक टिकट के साथ ही प्रथम दिवस आवरण और विवरणिका भी
जारी की गई है। विवरणिका में क्वीन्स बैटन रिले के बारे में
विस्तृत जानकारी दी गई है। कृष्ण कुमार यादव ने इसे उद्धृत
करते हुए बताया कि क्वीन्स बैटन के साथ रत्नजड़ित बक्से में
ब्रिटेन की महारानी के संदेश को रखा गया है और इस संदेश को
प्राचीन भारतीय पत्रों के प्रतीक 18 कैरट सोने की पत्ती में
लेजर से मीनिएचर के रूप में उकेरा गया है ताकि इसे आसानी से
प्रयोग किया जा सके। यह बैटन तिकोने आकार का अल्युमिनियम से
बना हुआ है, जिसे मोड़ कर कुण्डली का आकार दिया गया है। इसे
भारत के सभी क्षेत्रों से एकत्र विभिन्न रंगों की मिट्टी के
रंगों से रंगा गया है। क्वीन्स बैटन को रूप प्रदान करने में
विभिन्न रंगों की मिट्टी का इस्तेमाल पहली बार किया गया है। इस
बैटन को माइकल फॉली ने डिजाइन किया है, जो नेशनल इंस्टिट्यूट
ऑफ डिजाइन के स्नातक हैं। इसकी उंचाई 664 मिलीमीटर है, निचले
हिस्से में इसकी चौड़ाई 34 मिलीमीटर है और ऊपरी हिस्से में इसकी
चौड़ाई 86 मिलीमीटर है। इसका वजन 1,900 ग्राम है।
डाक निदेशक ने बताया कि ये डाक टिकट और अन्य सामग्री
फिलेटलिक ब्यूरो, प्रधान डाकघर पोर्टब्लेयर में उपलब्ध है,
जहां से इन्हें खरीदा जा सकता है। इसके अलावा अन्य डाकघरों में
भी इसे उपलब्ध कराया गया है। कृष्ण कुमार यादव ने यह भी कहा कि
जो लोग डाक-टिकटों के संग्रह से नियमित रूप से जुड़ना चाहते
हैं, वे न्यून्तम दो सौ रुपये से फिलेटलिक डिपाजिट खाता
फिलेटेलिक ब्यूरो प्रधान डाकघर में खोल सकते हैं, जहां से हर
माह नए डाक टिकट इत्यादि संग्रहकर्ताओं के पास पंजीकृत डाक
द्वारा भेजे जाते हैं।
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