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कामन
वेल्थ में जारी नहीं होंगे 'फ्री पास'
नई दिल्ली। तीन अक्टूबर से आरंभ होने वाले राष्ट्रमण्डल
खेलों में अतिविशिष्ट व्यक्तियों को 'वीवीआईपी नि:शुल्क
प्रवेश' करना आसान नहीं होगा। आयोजन समिति ने इसके लिए कड़ा रुख
अख्तियार किया है। आयोजन समिति पर लगने वाले आरोप कि वह आयोजन
के शुभारंभ और समापन अवसर पर पांच हज़ार से अधिक नि:शुल्क पास
की व्यवस्था कर रही है, की खबरों के बाद आयोजन समिति ने यह
फैसला लिया है कि बाकायदा टिकट पर ही प्रवेश सुनिश्चित किया
जाएगा।
कामन वेल्थ गेम्स की आयोजन समिति से जुड़े अधिकारियों का
कहना है कि आयोजन समिति ने उद्घाटन, समापन के साथ ही साथ समस्त
खेल गतिविधियों के लिए 17 लाख टिकटें बेचने का लक्ष्य
निर्धारित किया है। इस वृहद आयोजन में किसी भी तरह के पास जारी
करने का कोई प्रावधान ही नहीं रखा गया है। खेलों को कवर करने
के लिए मीडिया और खेल में सहायक होने वाले वालंटियर्स के
मान्यता कार्ड के अतिरिक्त और कोई भी पास प्रवेश के लिए वैध
नहीं होगा।
उधर केंद्रीय खेल एवं युवा मामलों के मंत्रालय के उच्च
पदस्थ सूत्रों का कहना है कि सरकार को इन खेलों में पास जारी
करने का कोई अनुरोध अब तक प्राप्त नहीं हुआ है और अगर ऐसा
प्रस्ताव प्राप्त भी हो तो सरकार उस पर विचार नहीं करेगी।
आयोजन समिति को यह भय सता रहा है कि अगर खेलों के लिए पास जारी
कर दिए गए तो मंहगी टिकटों को कौन खरीदकर खेल देखना पसंद
करेगा? आयोजन समिति से जुड़े लोगों ने संकेत दिए हैं कि इस
विशाल आयोजन में टिकटों की कीमत पचास रुपए से पचास हज़ार रुपए
मूल्य तक रखी गई है। उद्घाटन समारोह की टिकट की कीमत साढ़े सात
सौ रूपए से पचास हजार रूपए रखी गई है। पचास रुपए सममूल्य के
टिकट उन खेलों के लिए रखे गए हैं, जिन खेलों को देखने में खेल
प्रेमी कम दिलचस्पी दिखाते हैं।
दावा किया गया है कि शुभारंभ कार्यक्रम की एक हज़ार
रूपए सममूल्य की सारी की सारी टिकटें बिक चुकी हैं और आयोजन
समिति एक हज़ार रुपए वाली टिकटों की और संख्या बढ़ाने पर विचार
कर रही है। उधर सरकार और जनता को भटकाने के लिए आयोजन समिति का
कहना है कि महज तेरह दिनों के इस आयोजन में आयोजन समिति को
सत्रह सौ अस्सी करोड़ रुपए की आय होना अनुमानित है। नियंत्रक
एवं महालेखा परीक्षक सीएजी आयोजन समिति की इस राय से इत्तेफाक
नहीं रख रहे हैं। सीएजी का कहना है कि यह आंकड़ा बढ़ा चढ़ाकर
बताया गया है। बहरहाल जो भी हो अगर कामन वेल्थ गेम्स में पास
की व्यवस्था नहीं हो पाई तो रसूखदार लोगों के परिवारजन निराश
अवश्य ही हो जाएंगे।
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