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हिंदी सेवियों का सम्मान
रायपुर। संस्कृति मंत्री बृजमोहन
अग्रवाल ने छत्तीसगढ़ राष्ट्रभाषा प्रचार समिति के
हिंदी
उत्सव कार्यक्रम
में हिंदी भाषा के निरंतर विकास
में सहयोग के
लिए आठ हिंदी सेवियों को राष्ट्रभाषा अलंकरण से सम्मानित
किया। समारोह की अध्यक्षता छत्तीसगढ़
हिंदी ग्रंथ अकादमी के
संचालक रमेश नैय्यर ने की। कार्यक्रम
में केवीआर शर्मा, डॉ
बलराम, डीडी महंत, डॉ निरुपमा शर्मा, डॉ शोभा निगम, डॉ
त्रिथेशवर सिंह, राजा चाटचावरे और एसके जैन को राष्ट्रभाषा
अलंकरण से सम्मानित किया गया।
इस अवसर पर संस्कृति मंत्री बृजमोहन अग्रवाल ने कहा कि
हिंदी हमारी संस्कृति और संस्कार की भाषा है परंतु कहीं न
कहीं से हम अपनी संस्कृति भूलते जा रहे हैं, इसलिए
हिंदी के
विकास के लिए उत्सव और दिवस मनाने की ज़रूरत पड़ती है। अग्रवाल
कहते हैं कि राष्ट्रभाषा
हिंदी के विकास के लिए इसे आम आदमी
की भाषा बनाने के ज़रूरत है और इसके लिए
हिंदी के प्रति हमारी
सोच में बदलाव लाना होगा। अग्रवाल के अनुसार यदि हम
हिंदी को
विश्व पटल पर सम्मान दिलाना चाहते हैं तो इस भाषा के प्रति
हमें दृढ़ता दिखानी होगी।
उन्होंने कहा कि अन्य देश के नागरिक जैसे जापानी अथवा
फ्रांसीसी किसी दूसरे देश
में जाते हैं तो भी अपने देश की भाषा
का इस्तेमाल करते हैं परंतु हिंदुस्तानियों
में इस तरह की भावना
कम ही देखने को मिलती है। वे कहते हैं कि
हिंदी जैसी समृद्ध
भाषा की खराब स्थिति का एक कारण हमारी इस भाषा को नकारने की
बढ़ती प्रवृत्ति भी है और इसके लिए देश
में बढ़ते हुए
क्षेत्रवाद की भावना को
उन्होंने ज़िम्मेदार ठहराया।
उन्होंने
कहा कि हिंदी ही हमारी एकता की भाषा है और समस्त देशवासियों
के मन में राष्ट्रवाद की भावना को दृढ़ करने के लिए यह भाषा
सशक्त मध्यम है।
इस
अवसर पर रमेश नैय्यर ने कहा कि
हिंदी भारत देश की आत्मा की
भाषा है और इससे ही देश के लोग एक-दूसरे के साथ संवाद और
संपर्क स्थापित करते हैं। परंतु पिछले कुछ समय से इस भाषा के
प्रति लोगों की अनदेखी पर
उन्होंने अपनी चिंता भी जताई। इसके
बावजूद नैय्यर ने आशा की कि भाषाई अस्तित्व के लिए चल रहे
द्वंद्व में अंतत: आम जनता के सहयोग से
हिंदी भाषा की ही विजय
होगी। कार्यक्रम के वरिष्ठ साहित्यकार डॉ सुशील त्रिवेदी,
पद्मश्री डॉ महादेव प्रसाद पाण्डेय, स्वतंत्रता संग्राम सेनानी
तथा साहित्यकार केयूर भूषण, डॉ चित्तरंजन कर, डॉ सुधीर शर्मा
एवं गिरीश पंकज सहित अनेक वरिष्ठ साहित्यकार और लेखक उपस्थित
थे। कार्यक्रम के अंत
में आभार प्रदर्शन जेपी रथ ने किया।
आदिवासी सांसद को बेघर करके
सरकार कहती है, गलती हो गई
रायपुर ।
छत्तीसगढ़ के जनजाति आदिवासी नेता और भाजपा के राज्यसभा सांसद
नंद कुमार साय को उनके नई दिल्ली निवास से बेदखल कर दिया गया
है। सीपीडब्ल्यूडी के अधिकारी-कर्मचारियों के एक अमले ने
गुरूवार को उनकी गैरमौजूदगी
में उनके घर का सारा सामान बाहर कर
दिया। इस मामले से आहत साय ने शुक्रवार की रात अपने साजो-सामान
सहित सड़क पर सोकर केंद्र सरकार के खिलाफ अपनी नाराज़गी ज़ाहिर
की। इसी बीच सीपीडब्ल्यूडी के इस ग़ैरज़िम्मेदाराना रवैये पर
भाजपा ने भी कड़ी आपत्ति दर्ज की और मनमोहन सरकार पर आरोप
लगाते हुए कहा कि वह आदिवासी विरोधी है।
उधर जब केंद्रीय शहरी विकास मंत्रालय को जब इस बात की
भनक लगी तब उसके अफ़सर तुरंत हरकत
में आ गये और आनन-फानन
में यह
वक्तव्य जारी किया गया कि साय के घर कार्रवाई अनजाने
में की गई
है और संबंधित विभाग इस बात से अनभिज्ञ था कि साय अब राज्यसभा
के निर्वाचित सदस्य हैं। मंत्रालय ने यह भी जानकारी दी कि
समस्त कार्रवाई लोकसभा समिति के निर्देशों के अनुसार ही की गई
है। जब सीपीडब्ल्यूडी का अमला राज्यसभा सांसद को बिना इत्तला
किए उनके घर का ताला तोड़कर उनके सभी सामान को एक-एक करके बाहर
फेंक रहा था तब वे छत्तीसगढ़
में थे। परंतु जैसे ही उन्हें अपने
सरकारी निवास
में सीपीडब्ल्यूडी की बेदखली की कार्रवाई के बारे
में खबर मिली, तो वे तुरंत शुक्रवार को नई दिल्ली पहुंच गए।
उल्लेखनीय है कि नंद कुमार साय को नई दिल्ली के साउथ
एवेन्यू इलाक़े
में 176 नंबर का फ्लैट सन् 2004 के आम चुनाव
में
लोकसभा के सदस्य निर्वाचित होने के नाते
आवंटित किया गया था।
इस फ्लैट में रहते हुए साय को पांच वर्ष से भी अधिक हो गया है।
अभी कुछ ही समय पूर्व साय राज्यसभा के सदस्य निर्वाचित हुए।
उन्होनें यह इच्छा जरूर जाहिर की थी कि अब राज्यसभा सदस्य होने
के नाते उन्हें यही फ्लैट दोबारा आवंटित कर दिया जाए। इस संबंध
में उन्हें राज्यसभा सचिवालय के उपनिदेशक एसी मल्लिक का पत्र भी
प्राप्त हुआ जिसमे यह साफ-साफ लिखा गया था कि साउथ एवेन्यू
इलाक़े का 176 नंबर का फ्लैट साय के नाम 3 अगस्त, 2009 से
नियमित कर दिया गया है।
इस घटनाक्रम से राज्यसभा सदस्य नंद कुमार साय गहरे सदमे
में हैं। उन्होनें चिंता जाहिर करते हुए कहा कि यह लापरवाही की
हद है और जब लोकतांत्रिक तरीके से चुने गये जनप्रतिनिधियों के
साथ केंद्र सरकार ऐसा बर्ताव कर रही है तो अंदाजा लगाया जा
सकता है कि आम आदमी का क्या होगा। साय ने केंद्र सरकार पर आरोप
लगाते हुए कहा कि उनके विरुद्ध यह कार्रवाई इसीलिए की गई है
क्योंकि वे अनुसूचित जनजाति वर्ग के लोगों का प्रतिनिधित्व
करते हैं। उन्होंने कहा कि सरकार अनुसूचित जाति तथा जनजाति के
लोगों के प्रति दुर्भावना से ग्रस्त है।
उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि शुक्रवार को
सीपीडब्ल्यूडी ने अनुसूचित जाति वर्ग के रामदास अठावले को भी
उनके सरकारी निवास से इसी तरह बेरहमी से बेदखल कर दिया। अठावले
आरपीआई के अध्यक्ष और पूर्व सांसद हैं। वे इस बार के आम चुनाव
में महाराष्ट्र के शिर्डी लोकसभा क्षेत्र से हार गए थे।
कार्रवाई करने वाले अफसरों का कहना है कि कार्यकाल समाप्त होने
के बाद अठावले को कई बार सरकारी निवास खाली करने संबंधित नोटिस
भेजा गया था परंतु
उन्होंने इस बात की अनदेखी कर दी। इधर साय का
कहना है कि अठावले को भी जानबूझकर बेइज्जत किया गया है, वे भी
अनुसूचित जाति के हैं। साय का मानना है क़ि अगर सरकार को
अठावले से उनका सरकारी निवास वापस ही लेना था तो उन्हें पहले
से इस बात की सूचना देनी थी और ससम्मान घर खाली करने को कहना
था।
उधर नई दिल्ली
में साय ने इस पूरे मामले को अपनी
प्रतिष्ठा के साथ जोड़ते हुए केंद्र के खिलाफ मोर्चा खोल दिया
है। इधर प्रदेश
में भाजपाइयों ने उनके समर्थन
में आंदोलन तेज़ कर
दिया है। प्रदेश भाजपा के युवा ब्रिगेड कहना है कि यदि इस
मामले में केंद्र सरकार ने साय से माफी नही मांगी तो वे भविष्य
में उग्र आंदोलन करेंगे।
मुठभेड़ में 24 नक्सली
मरे, 6 पुलिसकर्मी शहीद
रायपुर। छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा
जिले में शुक्रवार को पुलिस बल और
नक्सलियों के बीच जबरदस्त मुठभेड़ में दो दर्जन से अधिक नक्सलियों के मारे जाने, एक
असिस्टेंट कमांडेंट सहित छह जवानों के शहीद होने और
पांच
पुलिसकर्मियों के लापता होने की खबर है। छत्तीसगढ़ पुलिस ने
लापता जवानों की खोजबीन के लिए करीब 150 से अधिक जवानों को
दंतेवाड़ा के घने जंगलों
में भेजा है तथा उनकी मदद के लिए
वायुसेना का एक हेलिकॉप्टर भी वहां पहुँच गया है। इसी दौरान
जवानों ने 10 नक्सलियों की लाशें बरामद की हैं और भारी मात्रा
में आधुनिक हथियार तथा अन्य सामान बरामद किया है।
पिछले दो दिनों से प्रदेश
में कोबरा कमांडो, सीआरपीएफ
तथा कोया कमांडो के सुरक्षा बलों ने संयुक्त रूप से दंतेवाड़ा
जिले के धुर नक्सल इलाक़ों किस्टाराम और चिंतगुफा
में ऑपरेशन
ग्रीन हंट अभियान के तहत नक्सलियों को भारी क्षति
पहुंचाई है।
इस ऑपरेशन
में न केवल सुरक्षा बलों ने नक्सलियों की एक अवैध
हथियार फैक्ट्री को ध्वस्त कर दिया बल्कि किस्टाराम के निकट
पालाचलमा के बीहड़ जंगलों
में स्थित एक गुप्त नक्सल कैंप को भी
पूरी तरह से तहस-नहस कर दिया। किस्टाराम और चिंतगुफा आंध्र
प्रदेश की सीमा से सटे हुए हैं, यह माना जा रहा है कि
छत्तीसगढ़ के सुरक्षा बलों को इन क्षेत्रों
में नक्सलियों के
ख़ुफ़िया अड्डों के होने की जानकारी आंध्र प्रदेश पुलिस से
प्राप्त हुई है।
खबरों के अनुसार गुरुवार को सिंगनमडगू
में नक्सलियों के
अवैध हथियार फैक्ट्री पर कब्जा करने के बाद पुलिस के संयुक्त
बल ने रात भर वहीं रुकने का फ़ैसला किया। परंतु जब शुक्रवार को
पुलिसकर्मी वापस लौट रहे थे तब कोबरा बटालियन के जवानों पर
नक्सलियों ने घात लगाकर जबरदस्त आक्रमण कर दिया। कोबरा बटालियन
ने तुरंत सेटेलाइट फोने और वायरलेस सेट से मदद की
मांग की और
कुछ ही समय
में सैकड़ों जवान मुठभेड़ स्थल की ओर कूच कर गए। इस
ऑपरेशन में दो हेलिकॉप्टरों का भी इस्तेमाल किया गया। परंतु इस
अभियान में कोबरा बटालियन के असिस्टेंट कमांडेंट एम मनोरंजन
सिंह सहित छह पुलिसकर्मी भी शहीद हो गए।
उल्लेखनीय है कि पिछले दो दशकों
में छत्तीसगढ़ में
नक्सली वारदातों
में हज़ारों की संख्या
में निर्दोष लोगों को
अपनी जान से हाथ धोना पड़ा है परंतु ना तो राज्य सरकार और ना
ही केंद्र सरकार नक्सलवाद को जड़ से उखाड़ने
में सफल हो पाई है।
देश के बहुत से राज्यों
में बढ़ते हुए नक्सलवाद को ध्यान
में
रखते हुए अभी कुछ ही समय पहले केंद्र सरकार ने नक्सलियों को
आतंकवादियों की श्रेणी
में शामिल कर दिया था और राज्य सरकारों
को इनसे निपटने के लिए संयुक उपाय करने के लिए कहा था।
प्रधानमंत्री डॉ मनमोहन सिंह ने भी नक्सलवादियों के तेज़ी से
फैलते नेटवर्क को देश की आंतरिक सुरक्षा के लिए सबसे बड़ा
ख़तरा कहा है। उन्होंने यह भी कहा कि राज्य सरकारों के नक्सल
विरोधी अभियान अपेक्षित परिणाम लाने
में असफल रहे हैं और कई
राज्यों में नक्सली वारदातों
में इज़ाफा हुआ है।
अभी हाल ही
में नक्सल प्रभावित राज्यों के पुलिस
महानिदेशकों ने एक महत्वपूर्ण बैठक की जिसमे यह फ़ैसला लिया
गया कि आने वाले समय
में वे संयुक्त रूप से नक्सलियों के
विरुद्ध चौतरफ़ा अभियान चलाएंगे ताकि परिणाम
बेहतर आ सकें।
खबरों के अनुसार नवंबर
में नक्सलियों के खिलाफ पहला संयुक्त
अभियान छेड़ा जा सकता है।
'पर्यटन को नक्सलवाद का कोई
ख़तरा नही'
छत्तीसगढ़ के वरिष्ठ मंत्री बृजमोहन अग्रवाल से बात-चीत
छत्तीसगढ़
के वरिष्ठ
मंत्री बृजमोहन
अग्रवाल, राज्य
के
लोकप्रिय राजनेताओं में माने
जाते हैं।
पिछले तीस वर्षों से
सक्रिय राजनीति में विभिन्न
जिम्मेदारियों का सफलतापूर्वक निर्वहन कर रहे हैं।
पचास वर्षीय
बृजमोहन अग्रवाल,
रायपुर शहर से पांच बार विधायक चुने जा
चुके हैं। पांचवी
बार उन्होंने रायपुर दक्षिण विधान सभा क्षेत्र से चुनाव जीता
है। अपना राजनीतिक सफ़र
छात्रनेता के रूप में शुरू
करने वाले
अग्रवाल, अखिल
भारतीय विद्यार्थी परिषद में शामिल
हुए और
उस समय
भारतीय जनता युवा मोर्चा के उपाध्यक्ष बने।
पहली बार वे सन् 1990 से
1992 तक
अविभाजित मध्य प्रदेश में सुंदर लाल पटवा सरकार के
राज्य मंत्री बने। सन्
1997
में मध्य प्रदेश विधानसभा के सर्वश्रेष्ठ
विधायक के
सम्मान से नवाज़े गए।
इसके बाद सन्
2003 में डॉ रमन
सिंह की सरकार
में गृह,
जेल, राजस्व,
विधि-विधायी,
वन, पर्यटन एवं
संस्कृति और खेल
एवं युवक कल्याण मंत्री
बने। इस
समय भी वे डॉ रमन
सिंह की सरकार में लोकनिर्माण,
स्कूल शिक्षा,
संस्कृति, धार्मिक न्यास
एवं धर्मस्व,
संसदीय कार्य और
पर्यटन मंत्री हैं।
उनसे एक
मुलाकात।
आपका
राजनीति जीवन काफी
अनुभव वाला
है,
हां!
मेरी राजनीति की शुरुआत स्टूडेंट लाइफ से हुई।
उस दौर में मैने छात्रों से जुड़ी बहुत सी समस्याओं को
देखा और उनके निराकरण के
लिए संघर्ष किया। बहुत
जल्द मैं अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से जुड़ गया।
मेरी विचारधारा बीजेपी से मिलती थी। मुझे सदैव यह
प्रतीत होता था की अगर देश के लिए और
जनमानस के लिए कोई संगठन अथवा पार्टी सोचती है तो वह है
बीजेपी है।
अटल बिहारी वाजपेयी
जी का देश के प्रति समर्पण भाव और
उनकी सोच का मैं शुरू से ही कायल था।
वाजपेयी जी और
राजमाता विजया राजे सिंधिया से भी ख़ासा प्रभावित रहा।
यही वजह थी कि मैने बीजेपी की सदस्यता ग्रहण की।
आप रायपुर शहर से लगातार पांचवी बार विधायक
चुने गये है,
लोग जब अपनी कोई समस्या लेकर आते
हैं तो मैं हमेशा प्रयत्न करता हूं कि उसका समाधान कर सकूं,
परंतु जिस समस्या का समाधान संभव नही होता उसके लिए
संघर्ष करने को भी हमेशा तत्पर रहता हूं
इसलिए कि
लोगों के दुख-दर्द का
भागीदार बन सकूं। इससे
लोगों से अपनापन बढ़ता है।
मेरा यह मानना है कि जनप्रतिनिधि और जनता के बीच कोई
दूरी नही होना चाहिए और इस सिद्धांत का मैं हमेशा ही पालन करता
हूं, शायद इसलिए।
इसीलिए विपक्षी नेताओं में भी आप,
उतने ही लोकप्रिय हैं?
तीस सालों से राजनीति में हूं,
मेरा विपक्ष के सदस्यों से प्रारंभ से ही जीवंत संपर्क
रहा है राजनीति को मैने
व्यवसाय न बनाकर सेवा का माध्यम बनाया
है क्योंकि मैने
कभी व्यक्तिगत मुद्दों को लेकर राजनीति नही की बल्कि हमेशा से
ही जनहित के मसलों पर लेकर ही संघर्ष छेड़ा है। मेरे राजनैतिक
प्रतिस्पर्धी हो सकते हैं,
परंतु व्यक्तिगत दुश्मन कोई नही हैं
और इसी वजह से लोगों का सहयोग मुझे लगातार मिलता रहा
है। मेरे पिता भी सामाजिक
क्षेत्र मे हमेशा से ही सक्रिय भूमिका निभाते रहे हैं जिससे
मुझे लगातार प्रेरणा
मिलती रही है।
छत्तीसगढ़
में पर्यटन के लिए
क्या योजनाएं हैं?
आठ साल पहले इस राज्य में पर्यटन
शून्य के बराबर था। दरअसल
ज़ीरो से दस तक पहुंचने में बहुत समय लगता है परंतु दस से सौ
तक आप तेज़ी से पहुंच
सकते हैं। पर्यटन के
क्षेत्र में पहले हमारा लक्ष्य था दस के स्तर को छूने का जिसे
हमने सफलतापूर्वक छू लिया है।
अब हमें लंबी छलांग लगानी है।
हमने पर्यटन के
विकास पर
करीब 150-200
करोड़ रुपए इनवेस्ट किए
हैं जिससे लोगों को आने वाले छह महीनों में पर्यटन से संबंधित
सुविधाएं मिलनी शुरू हो
जाएंगी। हमारा राज्य
अंतर्राराष्ट्रीय पर्यटन मेलों में अपनी उल्लेखनीय
उपस्थिति दर्ज करा रहा है।
हम मानते हैं कि आने वाले समय में ईको टूरिज़्म का
बोलबाला होगा और देश में छत्तीसगढ़ ऐसा राज्य है जहां ईको
टूरिज़्म के विकास की सबसे अधिक संभावनाएं हैं।
पिछले पांच सालों में पर्यटन के प्रति लोगों में
जागरूकता पैदा करने के लिए पूरे छत्तीसगढ़ में भरपूर प्रचार-प्रसार
किया गया है फिर भी
छत्तीसगढ़ को टूरिज़्म के रूप में विकसित करने में थोड़ा वक्त
और लगेगा।
नक्सलवाद का पर्यटन पर प्रभाव पड़ सकता है,
देखिए,
वस्तुस्थिति यह है कि छत्तीसगढ़ के पर्यटन स्थलों
में नक्सलवाद का कोई ख़तरा नही है।
परंतु जब राज्य के किसी हिस्से में कोई नक्सली घटना
होती है तो लोगों के मन में यह अज्ञात भय जरूर समा जाता है कि
पूरा प्रदेश नक्सलवाद से ग्रसित है।
दरअसल इस तरह के भय से लोगों को मुक्त कराना ज़रूरी है।
इसमे मीडिया को भी सार्थक भूमिका अदा करनी चाहिए ताकि पर्यटक
निर्भय होकर छत्तीसगढ़ के
पर्यटन स्थलों का आनंद ले सकें।
आप स्कूल शिक्षा मंत्री भी हैं,
आपके स्कूलों
में शिक्षा
का क्या
हाल है?
हमने समतुल्यता कार्यक्रम भी
प्रारंभ किया है जिसके अंतर्गत जिन लोगों ने पहली,
दूसरी या तीसरी कक्षा के बाद पढ़ाई छोड़ दी है वे सीधे
पांचवी की परीक्षा में शामिल हो सकते हैं।
इसी तरह जिन्होंने पांचवी कक्षा के बाद पढ़ाई नही किया
वे सीधे आठवीं की परीक्षा में शामिल हो सकते हैं।
इस कार्यक्रम की ख़ासियत यह है कि परीक्षार्थीयों को एक
परीक्षा उत्तीर्ण करने के लिए छह मौके मिलेंगे जिससे कि लोगों
में जागरूकता पैदा हो सके और इसके लिए हम व्यापक रूप से प्रचार
प्रसार भी कर रहे हैं।
साक्षरता के अभियान में तेज़ी लाने के लिए हमने हर एक किलोमीटर
पर प्राथमिक शाला खोलने का भी
निर्णय लिया है।
बच्चों को मुफ़्त में कॉपी-किताब
उपलब्ध कराने के अलावा मुफ़्त भोजन और
स्कूल ड्रेस का भी प्रावधान किया गया है।
राज्य सरकार ने ग़रीबों को एक रुपए और दो रुपए किलो में
चावल भी वितरित करना शुरू कर दिया है ताकि वे बच्चों को कमाने
के लिए ले जाने के बजाए पढ़ने के लिए स्कूल भेजें।
लोकनिर्माण विभाग
में कोई ख़ास कार्य
योजना ?
वर्तमान में प्रदेश में जो बड़ी
सड़कें हैं, वे भारतीय
राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के अधीन हैं,
परंतु प्राधिकरण से फंडिंग नही होने के कारण बहुत से
कार्य पूर्ण नही हो पाए हैं।
इसीलिए हमने केंद्र सरकार से आग्रह किया है कि यदि वह
प्रदेश में राष्ट्रीय राजमार्गों का निर्माण नही करा पा रही है
तो राज्य सरकार को इसका अधिकार दे और हम इन निर्माण कार्यों को
बीओटी (बिल्ट-ऑपरेट-ट्रांसफर)
के तहत सम्पन कराएंगे।
इस संबंध में हमने केंद्र सरकार को अनुमति के लिए पत्र
भी भेजा है और हमें एक-दो सड़कों
के निर्माण के लिए सैद्धांतिक स्वीकृति भी मिल गई है।
इसी प्रकार हमने वर्ल्ड बैंक से भी लोन लेकर प्रदेश में
सड़कों का पर्याप्त नेटवर्क फैलाने का निर्णय लिया है।
राजधानी से एक चार लेन सड़क गोल्डन
क्वाड्रिलेटरल से जुड़नी चाहिए,
देखिए,
गोल्डन क्वाड्रिलेटरल जैसी महत्वाकांक्षी परियोजना
केंद्र में अटल बिहारी वाजपेयीजी की
सरकार की देन है।
परंतु केंद्र में यूपीए सरकार के आने के बाद से
यह परियोजना गति नही पकड़ पा रही है।
आलम यह है कि केंद्र सरकार राष्ट्रीय राजमार्गों का
बराबर रख-रखाव भी नही कर
पा रही है जिसकी वजह से सड़कों का निर्माण बीओटी
के तहत करना पड़ रहा है।
कलाकारों और साहित्यकारों के
लिए क्या
सोचते हैं?
हम बहुआयामी सांस्कृतिक संस्थान का
निर्माण करेंगे जहां पर प्रदेश के उभरते कलाकारों को प्रशिक्षण
दिया जाएगा और स्थापित कलाकारों को अभ्यास करने का मौका
मिलेगा। यह संस्थान एक
ऐसा मंच होगा जहां पर राष्ट्रीय और
अंतर्राराष्ट्रीय स्तर के सांस्कृतिक आयोजन
आसानी से कराए जा सकेंगे।
इस संस्थान में प्रदेश के सभी कलाओं को बराबर महत्व
मिलेगा। हम चाहते हैं कि
हमारे प्रदेश के कलाकार आर्थिक रूप से सक्षम हों जिसके लिए
उन्हें इस संस्थान के रूप में एक ऐसा मंच मिलेगा जिससे उनकी
प्रतिभा को व्यापक पहचान मिलेगी।
हम प्रतिभावान स्थानीय कलाकारों को समय समय पर देश और
विदेश में आयोजित सांस्कृतिक महोत्सवों में अपनी कला का
प्रदर्शन करने के लिए भी भेजते हैं।
हमने कुछ ही समय पूर्व छत्तीसगढ़ के कलाकारों को
न्यूयॉर्क में भारत दिवस के अवसर पर कला प्रदर्शन के लिए भेजा
था।
विभिन्न कलाओं से संबंधित कोई कोर्स भी
प्रारंभ करेंगे?
अभी हम उस स्थिति में नही हैं।
पहले तो हमारे कलाकार अपग्रेड हो जाएं और उन्हें अपनी
कला के प्रदर्शन का अवसर मिले उसके बाद हम किसी प्रकार का
कोर्स प्रारंभ करने की सोच सकते हैं।
चलते चलते,
आपकी राजनीतिक
महत्वाकांक्षा ?
राजनीति में महत्वाकांक्षा नही होती,
निर्णय होते हैं। हमारे
बारे में निर्णय हम नही लेते बल्कि,
संगठन लेता है और
पार्टी लेती है।
मैं कर्मवादी हूं और जो काम मुझे मिला है उसे मैं समर्पित भाव
से करता हूं।
नक्सली
हिंसा 'राष्ट्रीय आपदा'
मानी जाए : रमन सिंह
रायपुर। छत्तीसगढ़ के
मुख्यमंत्री डॉ रमन सिंह ने केंद्र सरकार से मांग की है कि
नक्सल हिंसा की व्यापकता को ध्यान
में रखते हुए उसे राष्ट्रीय
आपदा की श्रेणी
में रखा जाए और इससे प्रभावित लोगों को
राष्ट्रीय आपदा कोष से मदद मिलनी चाहिए। डॉ रमन ने
प्रधानमंत्री डॉ मनमोहन सिंह की अध्यक्षता
में आंतरिक सुरक्षा
पर हुए मुख्यमंत्रियों के सम्मेलन
में कहा कि नक्सलवाद के
ख़ात्मे के लिए मुख्यतः तीन बिंदुओं पर ध्यान केंद्रित करने की
आवश्यकता है-नक्सलियों के विरुद्ध सुरक्षा बलों की सीधी
कार्रवाई, नक्सल प्रभावित क्षेत्रों
में सामाजिक, आर्थिक और
बुनियादी संरचना का विकास और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर नक्सली
दुष्प्रचार का सामना। डॉ रमन ने कहा कि यह लड़ाई लोकतंत्र को
बचाने के लिए अत्यंत आवश्यक है।
सम्मेलन में डॉ रमन ने कहा कि नक्सलवाद और आतंकवाद एक ही
सिक्के के दो पहलू हैं। इस समस्या से निपटने के लिए छत्तीसगढ़
सरकार लंबे समय से केंद्र और अन्य नक्सल प्रभावित राज्यों के
साथ मिलकर साझा रणनीति तैयार करने पर ज़ोर दे रही है। उन्होंने
प्रधानमंत्री और गृह मंत्री को यह जानकारी दी कि राज्य सरकार
ने कमांडो बटालियन के गठन का भी निर्णय लिया है और राजधानी
रायपुर सहित अन्य जिलों
में एंटी टेररिस्ट स्क्वाड (एटीएस) का
गठन किया गया है। राज्य
में एटीएस का गठन 26 नवंबर 2008
में
मुंबई में हुए आतंकी हमलों के पश्चात किया गया। सूचनाओं के आदान
प्रदान और विश्लेषण के लिए एंटी टेररिस्ट कंट्रोल रूम और
एनालिसिस ग्रुप की भी स्थापना की गई है। मुख्यमंत्री ने कहा कि
नक्सलवाद से निपटने के लिए छत्तीसगढ़
में काउंटर टेररिज़म एंड
वारफेयर कालेज की स्थापना की गई है। इसके अतिरिक्त निपुण
कमांडो को स्पेशल एडवांस ट्रेनिंग भी दी जा रही है। उन्होंने
कहा कि नक्सलियों के वर्तमान प्रभाव क्षेत्रों को समाप्त करने
और नए क्षेत्रों
में उनके प्रवेश को रोकने के लिए राज्य के पास
वर्तमान में संसाधनों और आधुनिक तकनीक की कमी है जिसे केंद्र
सरकार आसानी से उपलब्ध करा सकती है।
मुख्यमंत्री ने केंद्र सरकार को देश के सभी नागरिकों के
लिए विशेष पहचान पत्र जारी करने की घोषणा का स्वागत करते हुए
कहा कि इससे आंतरिक सुरक्षा के अन्य उपायों के साथ-साथ
बांग्लादेशियों के घुसपैठ पर भी रोक लगेगी।
उन्होंने कहा कि
वर्तमान परिप्रेक्ष्य
में पुलिस के ढांचे और उनके प्रशिक्षण
सुविधाओं में आमूलचूल परिवर्तन करने की आवश्यकता है। पुलिस का
गठन सामान्य क़ानून और व्यवस्था की चुनौतियों के मद्देनजर किया
गया था लेकिन आतंकवाद और नक्सलवाद की हिंसक गतिविधियों से
निपटने के लिए सामान्य पुलिस से काम नही चल सकता बल्कि इसके
लिए गुरिल्ला वार और आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल
में दक्ष पुलिस
बल की आवश्कता है। नक्सलवाद पर डॉ रमन ने कहा कि यह किसी
विचारधारा से प्रेरित नही है बल्कि अपराधी तत्वों का हिंसा के
माध्यम से देश के सुदूर वन क्षेत्रों पर धन वसूली के लिए कब्जा
करने का अभियान है। उन्होंने कहा कि नक्सलवाद अब आतंकवाद का
पर्याय बन चुका है और इससे प्रभावित लोग अब अपना घर छोड़कर
विस्थापितों की तरह रहने के लिए मजबूर हो गए हैं। डॉ रमन ने
कहा कि उनके अनुभव के अनुसार जब तक नक्सली उत्पात और विध्वंस
पर अंकुश नही लगता, तब तक सरकार के किए गए सभी विकास कार्य
बीकर ही साबित होते रहेंगे। उन्होंने कहा कि नक्सली ग़रीबी
उन्मूलन, रोज़गार परक कार्यक्रम और सार्वजनिक वितरण प्रणाली
नही चाहते कि जिससे आदिवासी क्षेत्रों का सामाजिक और आर्थिक
विकास हो बल्कि वे तो निरीह लोगों को हमेशा के लिए अपना गुलाम
बनाकर रखना चाहते हैं।
उन्होंने आगे बताया कि तमाम विपरीत परिस्थितियों के
बावजूद राज्य सरकार ने नक्सल प्रभावित क्षेत्रों
में सामाजिक,
आर्थिक और आधारभूत विकास कार्यक्रमों को अंजाम देने के लिए
विशेष रणनीति बनाई है जिसके फलस्वरूप स्थानीय पुलिस अधिकारियों
और कर्मचारियों ने धुर नक्सली क्षेत्र
में 22 किलोमीटर लंबी
कॉंक्रीट सड़क बनाई है। इस दौरान नक्सल हमलों
में 12 जवान शहीद
हुए। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह उपलब्धि इसलिए भी उल्लेखनीय
है
क्योंकि बार्डर रोड आर्गनाईजेशन (बीआरओ) जैसे संगठन को भी
राष्ट्रीय राजमार्ग
संख्या 16 के 72 किलोमीटर हिस्से को बनाने
में आठ
साल लगे थे। डॉ रमन ने कहा कि राज्य सरकार को सड़क, पुल-पुलिया
आदि निर्माण कार्यों के लिए भी पुलिस बल उपलब्ध करना होगा
क्योंकि रणनीति
में यह सकारात्मक परिवर्तन वर्तमान परिस्थितियों
में आवश्यक हो गया है।
डॉ रमन ने नक्सलियों के बढ़ते अंतर्राष्ट्रीय प्रचार
प्रसार पर भी चिंता जाहिर की और महसूस किया कि इससे निपटने के
लिए केंद्रीय स्तर पर अचूक फ़ॉर्मूला बनाए जाने की आवश्यकता
है। उन्होंने आश्चर्य व्यक्त किया कि नक्सलियों के क्रूरतम
हिंसा के शिकार वनवासियों के प्रति देश
में वैसी संवेदना नही
उपजती जसी अन्य घटनाओं के दौरान होती है। इसके विपरीत जब
नक्सलियों पर अंकुश लगाने की बात आती है तो देश से ही नही
बल्कि विदेशों से भी कुछ लोग आकर छत्तीसगढ़
में प्रदर्शन करने
लगते हैं। उन्होंने कहा कि इस दुष्प्रचार से मुकाबला करने के
लिए ऐसी कारगर रणनीति बनाना आवश्यक है जो न तो लोकतंत्र की राह
में और न ही अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता
में किसी तरह की बाधा बने।
इस महत्वपूर्ण बैठक
में राज्य के गृह मंत्री ननकिराम कंवर,
मुख्य सचिव पी जॉय उम्मेन, पुलिस महानिदेशक विश्वरंजन, प्रमुख
सचिव-गृह विभाग एनके असवाल और प्रमुख सचिव?मुख्यमंत्री एन
बैजेंद्र कुमार भी उपस्थित थे।
छत्तीसगढ़
में स्वाइन फ़्लू से पहली मौत
रायपुर। स्वाइन फ़्लू नाम का दैत्य अब छत्तीसगढ़
में
भी तबाही मचा रहा है और इसका पहला शिकार बना एक 18-वर्षीय युवक
जिसने 13 अगस्त को राजधानी रायपुर के अंबेडकर अस्पताल
में दम
तोड़ दिया। हालाँकि अंबेडकर अस्पताल के अधीक्षक डॉ. विवेक
चौधरी का कहना है कि जब तक मृतक के सेंपल की जाँच रिपोर्ट नही
आ जाती, यह कहना जल्दबाज़ी होगी कि युवक की मृत्यु स्वाइन
फ़्लू की वजह से ही हुई है।
उन्होंने बताया कि मृतक के सेंपल को
जाँच के लिए दिल्ली स्थित नेशनल इन्स्टिट्यूट ऑफ कम्युनीकेबल
डिसिसेस भेज दिया गया है। इधर राज्य शासन ने स्वाइन फ़्लू के
ख़तरे को भाँपकर प्रद्रेश
में हाइ-अलर्ट घोषित कर दिया है परंतु
इसके बावजूद रेलवे स्टेशन, विमानतल तथा बस अड्डों पर बाहर से
आने वालों की प्राथमिक चिकित्सकीय जाँच की कोई व्यवस्था नही की
गई है। अकेले रायपुर शहर से ही पुणे जाकर पढ़ने और काम करने
वालों की संख्या बहुतायत
में है और स्वाइन फ़्लू की वजह से इनमे
से अधिकांश लोग धीरे-धीरे वापसी की तैयारी
में हैं।
रायपुर में स्वाइन फ़्लू का डर कुछ इस तरह फैल गया है कि
लोग एहतियात के तौर पर मास्क अथवा मुँह
में कपड़ा बाँधकर घूम
रहे हैं। परंतु 13 अगस्त को नौजवान सीताराम वर्मा की स्वाइन
फ़्लू की वजह से मौत की खबर से लोगों के होश उड़ गए हैं। मृतक
सीताराम वर्मा रायपुर से करीब 75 किलोमीटर दूर स्थित बेमेतरा
का निवासी था और करीब एक महीने पहले मज़दूरी करने के लिए पुणे
गया था। परंतु वह वहाँ एक सप्ताह भी नही रह पाया और बुखार और
शरीर में जबरदस्त दर्द की वजह से वह वापस आ गया। उसके परिजनों
ने उसे तुरंत भिलाई स्थित जवाहरलाल नेहरू अस्पताल तथा अनुसंधान
केंद्र में भर्ती कराया लेकिन जैसे ही उसकी स्थिति बिगड़ी, उसको
रायपुर के अंबेडकर अस्पताल ले जाया गया परंतु वहाँ भी डॉक्टरों
की टीम उसे बचाने
में नाकामयाब रही।
स्वाइन फ़्लू ने जिस तरह से देश के कई शहरों को अपने
चपेट में ले लिया है उससे यह अंदाज़ा लगाना आसान था कि
छत्तीसगढ़ भी इस बुखार से ज़्यादा दिनों तक अछूता नही रह सकता।
रायपुर में इस बुखार के लक्षण तब उभरे जब साप्ताह भर पहले
राजधानी निवासी तीन युवक, जो पुणे
में अध्ययनरत हैं, वापस लौटे।
उनकी प्राथमिक जाँच अंबेडकर अस्पताल
में कराई गई जिसके पश्चात
डॉक्टरों ने संदेह जताया कि शायद उन तीनो युवक को स्वाइन फ़्लू
के लक्षण मौजूद हैं और यह सुनिश्चित करने के लिए उनके सेंपलों
को दिल्ली भेज दिया गया। अभी तक करीब 40 लोगों के सेंपल जाँच
के लिए दिल्ली भेजे गए है। वहीं स्वाइन फ़्लू के डर से वापसी
करने वालों की संख्या बढ़ती जा रही है। अकेले रायपुर शहर
में
पुणे सहित अन्य महानगरों से करीब 30 वापस आ चुके हैं।
राज्य शासन यह अच्छी तरह से जानती है कि स्वाइन फ़्लू
के जीवाणु वायु से फैलते हैं परंतु अभी तक आम जनजीवन को इस
बुखार के लक्षणों से सावधान करने के लिए कोई विशेष प्रयास नही
किया गया है। जागरूक लोग भीड़-भाड़ वाले सार्वजनिक स्थानों
में
जाते समय मास्क तो पहन रहे हैं परंतु फिर भी बिना मास्क के
घूमने वालों की संख्या कहीं ज़्यादा है जिनके लिए शासन ने
आवश्यक सूचना अथवा चेतावनी चस्पा नही किया है। डॉक्टरों के
अनुसार स्वाइन फ़्लू के जीवाणु वैसे तो किसी भी आयु-वर्ग के
लोगों में प्रवेश कर सकते हैं परंतु खास सावधानी स्कूलों
में
बरतना आवश्यक है और यदि हो सके तो कुछ समय के लिए स्कूल तथा
कालेजों को बंद कर देना ही समझदारी होगी।
प्रदेश में अभी तक लोगों को यह भी नही पता कि स्वाइन
फ़्लू के अगर थोड़े भी लक्षण उन्हें स्वयं
में दिखाई पड़ें तो
वे कौन से अस्पताल
में इलाज के लिए जाएं। वैसे तो रायपुर के
अंबेडकर अस्पताल
में इस बुखार से पीड़ित लोगों के इलाज के लिए
एक विशेष टीम का गठन किया गया है परंतु यह व्यवस्था
प्रदेशव्यापी नही है जिसकी वजह से दूरदराज
में रहने वाले लोगों
को ख़ासी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। वहीं दूसरी ओर इस
बुखार के रोकथाम के उपायों का भी शासन ने कोई खुलासा नही किया
है। स्वाइन फ़्लू की दहशत का आलम यह है कि लोग इससे बचने के
लिए भाँति-भाँति की अचानक निकल आई दवाओं का सेवन कर रहे हैं।
इसमे सबसे ज़्यादा चाँदी काट रहे हैं होम्योपैथी के डॉक्टर जो
पांच रुपए की दवा को पच्चीस रुपए
में लोगों को यह कहकर दे रहे
हैं कि इसकी
पांच दिनों तक तीन खुराक प्रतिदिन लेने पर शरीर
में
स्वाइन फ़्लू के जीवाणुओं का असर नही होता।
छत्तीसगढ़ में धान खरीद में बड़ा घोटाला-विपक्ष
रायपुर। छत्तीसगढ़ विधान सभा
में धान खरीदने का मामला
जोर शोर से उठा। विपक्ष ने राज्य सरकार की कार्यशैली पर
प्रश्नचिन्ह लगाते हुए कहा कि प्रदेश
में धान की खरीद
में अरबों
रुपए का हेरफेर हुआ है परंतु सरकार को इसकी भनक तक नही है।
विपक्ष ने आरोप लगाया गया कि इस घोटाले
में सत्ता पक्ष के
शीर्षस्थ लोग शामिल हैं जिसकी वजह से सरकार घोटाले की सीबीआई
जांच कराने से कतरा रही है। इसके जवाब
में खाद्य मंत्री
पुन्नूलाल मोहिले ने विपक्ष के सभी आरोप खारिज कर दिए। विधान
सभा अध्यक्ष धरमलाल कौशिक ने इस मुद्दे पर विपक्ष के लाए गये
स्थगन प्रस्ताव की सूचना के आधार पर चर्चा कराई परंतु दोनों
पक्ष की दलीलें सुनने के पश्चात इस प्रस्ताव को अग्राह्य कर
दिया। इस पर खिन्न विपक्ष ने सदन से बहिर्गमन किया।
विपक्ष ने इस मामले पर स्थगन प्रस्ताव पर चर्चा कराने की
इजाज़त मांगी। यह चर्चा करीब तीन घंटे चली जिसमे विपक्षी
सदस्यों ने सरकार से जवाब मांगा कि धान खरीद
में इतना बड़ा
घोटाला कैसे हुआ। अध्यक्ष धरमलाल कौशिक ने तथ्यों के मद्देनजर
मोहम्मद अकबर की सूचना मंजूर की। अकबर की सूचना
में कहा गया
वर्ष 2008-09 में प्रदेश
में खरीफ की फसल अच्छी नही हुई। राजस्व
विभाग के अनावारी के आंकड़ों के मुताबिक 18
में कम से कम दस
जिलों में सूखे की मार पड़ने का अंदेशा था परंतु इसके बावजूद
राज्य सरकार ने रेकॉर्ड तोड़ धान की खरीद की। ख़ासकर प्रदेश के
सीमावर्ती जिलों
में धान की बंपर खरीदी की गई जबकि वहां के
किसानों के खेत
में धान का फसल संतोषजनक नही था। वास्तविकता यह
है कि सरकार के उच्च पदों पर आसीन अधिकारियों और सत्ता पक्ष के
पदाधिकारियों के लिऐ षड्यंत्रपूर्वक दस्तावेज़ों की कूटरचना कर
अरबों रुपए का फर्जीवाड़ा किया गया।
विपक्ष ने आरोप लगाया कि किसानों के फर्जी नाम दिखा कर
उन्हें लाखों रुपए का भुगतान दिखाया गया है। उदाहरण के तौर पर
किसान का नाम बाज़ार व पिता का नाम शनिवार दर्शा कर धान खरीदा
गया है। आश्चर्य की बात है कि कुछ किसानों के पास तो ढाई
डिसमिल या उससे कम ज़मीन है परंतु उनसे हज़ारों क्विंटल धान
खरीद लिया गया।
कांग्रेस विधायक नंदकुमार पटेल ने कहा कि धान
खरीदी में मृत व्यक्तियों के नाम भी दर्ज हैं और उन्हें सरकार
ने बोनस राशि का भी भुगतान किया है।
उन्होंने कहा कि जिन वाहनों
से सैकड़ों टन धान का परिवहन दर्शाया गया है या तो वे दोपहिया
वाहन हैं अथवा परिवहन विभाग ने उन वाहनो के दर्शाए गये
रजिस्ट्रेशन नंबर जारी ही नही किए गए हैं।
नेता प्रतिपक्ष रवीन्द्र चौबे ने कहा कि धान खरीदी
में 15
लाख टन से ज़्यादा का घोटाला हुआ है और करोड़ों रुपए की हेरफेर
की गई है। वहीं
कांग्रेस के वरिष्ठ विधायक अजीत जोगी ने
मांगकरते हुए कहा कि धान खरीदी घोटाला काफ़ी बड़े पैमाने पर
हुआ है और इसकी सीबीआई जांच होनी चाहिए।
जवाब में खाद्य मंत्री पुन्नूलाल मोहिले ने विपक्ष के सभी
आरोपों को एक सिरे से खारिज करते हुए कहा कि धान खरीदी
में बड़े
पैमाने पर भ्रष्टाचार और बोगस खरीदी के आरोप सही नही हैं।
उन्होंने आंकड़ों के ज़रिए बताया कि प्रदेश
में 37,59,439
मीट्रिक टन धान खरीदा गया जिसमे से 8.58 लाख मीट्रिक टन धान
भारतीय खाद्य निगम को दिया गया और शेष धान की कस्टम मिलिंग
कराई गई है।कस्टम मिलिंग का पूरा चावल राज्य आपूर्ति निगम और
भारतीय खाद्य निगम में प्राप्त किया गया है। अतः बोगस खरीदी का
प्रश्न ही नही उठता। किसी भी जिले
में बोगस चेक जारी करने का एक
भी मामला प्रकाश
में नही आया है। राज्य सरकार की अच्छी बोनस
राशि घोषणा करने की वजह से किसानों ने स्वयं की खपत के लिए कम
धान रखते हुए अधिकाधिक मात्रा
में धान विक्रय किया।
मोहिले ने कहा कि बस्तर क्षेत्र
में छोटे छोटे किसान धान की
उपज बिना ऋण पुस्तिका व बिना बैंक खातों के लाते हैं। इन्हें
अपनी उपज का वाजिब मूल्य दिलाने के लिए राज्य सरकार ने चिल्हर
खरीद की सुविधा उपलब्ध कराई ताकि उन्हें अपनी उपज का वाजिब
मूल्य प्राप्त हो सके। इसी वजह से सोसाइटी के कंप्यूटर
में
किसानों के नाम की जगह 'बाज़ार दिवस चिल्हर धान खरीदी' अथवा
'बाज़ार दिवस' या फिर शुक्रवार, शनिवार जैसे बाज़ार का दिन हो,
लिखा जाता है। यह चर्चा तीन घंटे तक जारी रही परंतु अंत
में
दोनों पक्षों के बयान के बाद जब अध्यक्ष ने स्थगन प्रस्ताव की
सूचना को अग्राह्य करने की घोषणा तो विपक्ष ने सदन का बहिर्गमन
कर दिया।
हज़ारों आदिवासी लड़कियां गायब हुईं
रायपुर। छत्तीसगढ़ सरकार ने
स्वीकार किया है कि प्रदेश
में हज़ारों की तादाद
में आदिवासी
लड़कियां गायब हुईं हैं। सरकार ने यह स्वीकारोक्ति विधान सभा
में प्रश्नकाल के दौरान उस वक्त की जब विपक्ष ने प्रदेश के
आदिवासी क्षेत्रों रायगढ़ और जसपुर
में हो रहे मानव तस्करी के
मामले को सदन
में ज़ोरशोर से उठाया। इस मामले
में विपक्ष सदस्यों
ने ऐसे ऐसे प्रश्न की बौछार कर दी जिसका सरकार के पास कोई
संतोषजनक जवाब नही था और इसके विरोध
में विपक्ष ने सदन से
बहिर्गमन कर दिया।
यह
मुद्दा
कांग्रेस विधायक नंदकुमार पटेल ने
उठाया। उन्होंने कहा कि दोनो जिलों की नाबालिग आदिवासी लड़कियों
को तस्करी के ज़रिए न केवल देश के महानगरों बल्कि विदेशों
में
भी भेजा जा रहा है। नेता प्रतिपक्ष रवीन्द्र चौबे ने कहा कि
दोनों ही जिलों
में मानव तस्करी से संबद्ध पूरा रैकेट सक्रिय है
और इस कार्य
में उनकी मदद करने वालों
में बहुत से एनजीओ भी शामिल
हैं। इसके जवाब
में गृह मंत्री से संबद्ध संसदीय सचिव विजय बघेल
ने कहा कि यह मुद्दा मानव तस्करी का नही बल्कि मानव व्यापार का
है जिसपर विपक्ष ने ऐतराज करते हुए पूछा कि सरकार मानव तस्करी
को व्यापार कैसे कह सकती है? बघेल ने बताया कि प्रदेश से 46860
लड़कियां गायब हुईं परंतु उनमें से 39000 से ज़्यादा को सरकार
उनके परिजनों तक पहुंचाने
में सफल रही।
पटेल ने गृह मंत्री से पूछा कि सरकार ने फ़रवरी 2008 से अब
तक मानव तस्करी रोकने के लिए क्या-क्या उपाए किए हैं? इसके
जवाब में गृह मंत्री ननकिराम कंवर ने बताया कि इस इस अपराध
में
संलग्न लोगों को बेनकाब करने के लिए राज्य स्तर पर एक एआईजी व
जिले स्तर पर राजपत्रित अफसरों को नोडल आफिसर बनाया गया है।
इसके अलावा इस संबंध
में पुलिस मुख्यालय से दो बार परिपत्र भी
जारी किया गया है। इस पर पटेल ने कहा कि गृह मंत्री के दावे
खोखले हैं।
उन्होंने बताया कि उनके पास गायब हुई 3200 लड़कियों
की सूची है और अध्यक्ष धरमलाल कौशिक से इस सूची को पटल पर रखने
की अनुमति मांगी परंतु उसे अस्वीकार कर दिया गया। तब
कांग्रेस
विधायक अजीत जोगी ने पूछा कि सरकार इस मामले
में विशेष सेल गठित
करने वाली थी उसका क्या हुआ?
उन्होंने पूछा कि सरकार ने अब तक
मानव तस्करी
में लिप्त अपराधियों के खिलाफ क्या कार्रवाई की तथा
कितनों के विरद्ध क़ानूनी कार्रवाई प्रारंभ हुई है? गृह मंत्री
कंवर ने बताया कि इस मामले
में 16 लोगों को गिरफ्तार किया गया
है जिनके प्रकरण अदालत के विचाराधीन हैं तथा दो अभी तक फरार
हैं।
इधर कांग्रेस विधायक अमरजीत भगत ने आरोप लगाया कि मानव
तस्कर आदिवासी लड़कियों को झांसा देकर ग़लत धंधों
में धकेल रहे
हैं। उन्होंने जानना चाहा कि इस संबंध
में किस-किस थाने
में कितने
मामले दर्ज हुए हैं। नेता प्रतिपक्ष रवीन्द्र चौबे ने जानना
चाहा कि रायगढ़ तथा जसपुर जिलों
में सक्रिय जिस एनजीओ व
प्लेसमेंट
एजेंसी को चार लड़कियों के साथ नारायणपुर पुलिस ने
पकड़ा उसपर सरकार ने क्या कार्रवाई की? इस पर गृह मंत्री ने
कुछ आँकड़ों के साथ जवाब दिया परंतु विपक्ष ने कहा कि सरकार इस
मामले में गंभीरता से जवाब देने
में असफल रही है जिसकी वजह से वे
सदन का बहिर्गमन कर गए।
पीएमटी उतीर्ण छात्र
का मामला विधान सभा में उठा
रायपुर। विपक्ष ने पीएमटी (प्री मेडिकल टेस्ट)
में शामिल
हुए बिना 110वां स्थान हासिल करने वाले सुनील बरिहा के मामले
को विधान सभा
में उछालते हुए सरकार को आड़े हाथों लिया और कहा
कि जिस महत्वपूर्ण परीक्षा के माध्यम से छात्र डॉक्टर बनने का
सफ़र तय करते है उसे उत्तीर्ण कराने के लिए प्रदेश
में बहुत
बड़ा गिरोह सक्रिय है और उसका नेटवर्क दूर-दूर तक फैला हुआ है
जिसकी वजह से धीरे-धीरे छात्रों का व्यावसायिक परीक्षा मंडल
(व्यापम) से विश्वास उठता जा रहा है। इसके जवाब
में तकनीकी
शिक्षा मंत्री हेमचंद यादव ने कहा कि विपक्ष का आरोप पूर्णतया
ग़लत है क्योंकि सुनील बरिहा नामक छात्र पीएमटी परीक्षा
में
बाक़ायदा शामिल हुआ था।
विधान सभा सत्र के अंतिम दिन डा हरिदास भारद्वाज, डा
शक्राजीत नायक और
नंदकुमार पटेल ने अपने ध्यानकर्षण सूचना
में
कहा कि महासमुंद जिले के गॉड़बहाल निवासी सुनील बरिहा इस वर्ष
पीएमटी परीक्षा के लिए आवेदन दिया गया था। व्यापम के प्रवेश
पत्र के अनुसार उसे महासमुंद के मचेवा क्षेत्र के शासकीय
वल्लभाचार्य महाविद्यालय परीक्षा केंद्र से पीएमटी परीक्षा
में
शामिल होना था। परंतु प्रवेश पत्र नही मिलने के कारण वह
परीक्षा में सम्मिलित नही हो सका। इसके बावजूद व्यापम ने सुनील
को परीक्षा
में न केवल उत्तीर्ण घोषित करते हुए 110वां रेंक
दिया बल्कि अनुसूचित जनजाति (अजजा) वर्ग
में दूसरा स्थान भी
प्रदान किया और 21 जुलाई की काउन्सलिंग
में शामिल होने के लिए
उसे पत्र भी भेजा।
काउंसलिंग
के लिए पत्र पाने के बाद सुनील ने परीक्षा
में सम्मिलित नही
होने का शपथ पत्र भी प्रस्तुत किया जिसके बाद व्यापम अध्यक्ष
ने इस मामले की जांच के लिए 22 जुलाई को रायपुर तथा महासमुंद
के पुलिस अधीक्षक के पास पत्र प्रेषित कर रिपोर्ट दर्ज करायी
गई। घटना उजागर होने के बाद से अभ्यर्थी के पूरे परिवार को
गायब कर दिया गया है। विपक्ष ने कहा कि इस बार के पीएमटी
परीक्षा में बहुत गड़बड़ी हुई है जिसके तहत ग़लत प्रश्न पूछे गए
और उसका निराकरण परीक्षार्थीयों को बोनस अंक देकर किया गया और
इसी वजह से न केवल यह परीक्षा बल्कि इसके परिणाम भी संदेह के
घेरे में हैं।
विपक्षी सदस्यों ने कहा कि प्रदेश
में विभिन्न विभागों
में नौकरियों के लिए व्यापम परीक्षा लेती है और उसके परिणाम के
आधार पर चयन किया जाता है। इस घटना के बाद व्यापम की परीक्षा
और उसके परिणामों की विश्वसनीयता नही रह जाती है। इसी वजह से
प्रदेश के बेरोज़गार, छात्र और आम जनता
में व्यापम में व्याप्त
अनियमितता के प्रति रोष और आक्रोश है।
इस आरोप को नकारते हुए तकनीकी शिक्षा मंत्री हेमचंद
यादव ने दावा किया कि सुनील बरिहा परीक्षा
में शामिल हुआ था और
उसे व्यापम ने प्रवेश पत्र भी जारी किया था जो तभी संभव होता
है जब कोई आवेदक और उसके पिता ओएमआर आवेदन पत्र पर अपने
हस्ताक्षर करते हैं। यादव ने बताया कि सुनील 8 अप्रैल को
पीएमटी परीक्षा की दोनो पाली
में उपस्थित था जिसका सबूत,
परीक्षा कक्ष
में उसके द्वारा अपने रंगीन फोटोयुक्त पत्रक
में
किया गया हस्ताक्षर और लगाया गया अंगूठे का निशान है।
उन्होंने
कहा कि प्राप्त जानकारी के अनुसार काउन्सलिंग की प्रक्रिया
समाप्त हो चुकी है और अभ्यर्थी सुनील बरिहा ने उसमे भाग नही
लिया। यादव ने यह भी बताया कि सुनील बरिहा के उत्तर शीट के
आधार पर ही व्यापम ने उसका परीक्षा परिणाम घोषित किया जिसमे
किसी प्रकार की त्रुटि की संभावना नही है।
हालांकि तकनीकी शिक्षा मंत्री ने माना कि इस मामले
में
अपना संदेह जाहिर करते हुए जब छत्तीसगढ़ प्रदेश
कांग्रेस कमेटी
(चिकित्सा प्रकोष्ठ) ने शिकायत दर्ज की तब प्रकरण को पुलिस को
आवश्यक कार्यवाही के लिए सौंप दिया गया है और इसीलिए इस पर
फिलहाल कोई भी टिप्पणी किया जाना उचित नही होगा। यादव ने कहा
कि व्यापम ने सदैव ही सभी परीक्षाओं के संचालन तथा उनके
परिणामों को घोषणाओं
में पारदर्शिता बरती है जिसकी वजह से
प्रदेश के छात्रों
में उस
पर पूर्ण
विश्वास है।
सरकार नक्सलियों के सफ़ाए के लिए प्रतिबद्ध: गृह मंत्री
रायपुर। छत्तीसगढ़ सरकार प्रदेश के बड़े हिस्से से
नक्सलवाद की जड़ों को समाप्त करने
में सफल हुई है। एक समय
नक्सलियों का गढ़ समझे जाने वाले क्षेत्रों - सरगुजा, कोरिया,
जसपुर, कोरबा व बलरामपुर पुलिस जिले
में वर्तमान में नक्सलियों
का पूर्ण रूप से सफ़ाया हो गया है। विधान सभा
में यह बयान था
गृह मंत्री ननकीराम कंवर का जब विपक्ष ने राज्य सरकार पर आरोप
लगाया कि वह प्रदेश
में बढ़ते हुए नक्सलवाद को रोक पाने
में
असमर्थ रही है। कंवर ने कहा कि विपक्ष के सभी आरोप बेबुनियाद
हैं और राज्य सरकार नक्सलियों से निपटने के लिए प्रभावी उपाए
कर रही है।
विधान सभा
में नक्सल मुद्दा फिर गरमाया जब नियम 139
विपक्ष ने सत्ता पक्ष के उपर इस मसले पर आरोपों की झड़ी लगा
दी। करीब छह घंटे चले इस चर्चा की शुरुआत
कांग्रेस के पूर्व
मुख्यमंत्री अजीत जोगी ने की।
उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर गहन
चर्चा इसलिए भी ज़रूरी थी क्योंकि यह समस्या लंबे समय से चली आ
रही है और यह न केवल छत्तीसगढ़ की बल्कि पूरे देश की समस्या बन
गई है। जोगी कहते हैं कि प्रदेश
में नक्सल हिंसा की वजह से
लोगों का इतना खून बह चुका है और इतनी हत्याएँ हो गईं हैं कि
बहुतों की तो संवेदनशीलता समाप्त हो गई है।
उन्होंने कहा कि 12
जुलाई, 2009 में हुए नक्सल वारदात ने पूरे प्रदेश को झकझोर दिया
है। जोगी ने भाजपा सरकार पर प्रहार करते हुए कहा कि इनके पिछले
छह वर्षों के राज
में नक्सल नारदातों
में भारी वृद्धि हुई है।
अगर आँकड़ों पर गौर किया जाए तो
प्रदेश में कांग्रेस के
तीन साल कार्यकाल के दौरान सन 2001 से 2003 के बीच नक्सल हिंसा
में 736 मौतें हुईं। वहीं भाजपा के शासनकाल
में सन 2004 से 2006
के मध्य तीन सालों
में 1824 लोग नक्सलियों का शिकार बने। इसी
तरह सन 206 के बाद पिछले ढाई सालों
में मृतकों आँकड़ा 1651
पंहुँच चुका है।
उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्रालय के हाल ही के
एक रिपोर्ट का भी उल्लेख किया जिसमे कहा गया है कि नक्सलवाद के
मामले में वर्तमान
में छत्तीसगढ़ अन्य राज्यों की तुलना
में सबसे
अग्रणी राज्य बन गया है। जोगी कहते हैं कि आज सबसे ज़्यादा
ज़रूरत है नक्सलियों से निपटने के लिए तैनात सुरक्षा बलों का
मनोबल बढ़ने की जिसमे राज्य सरकार पूर्ण रूप से नाकाम रही है।
जोगी ने कहा कि सरकार ने डॉक्टर बिनायक सेन जैसे विद्वानों को
भी ज़बरदस्ती जेल
में बंद कर दिया था हालाँकि उन्हें सर्वोच्च
न्यायालय से जमानत मिल गयी।
इसके जवाब
में कंवर ने कहा कि जवानों ने प्रजातंत्र की
रक्षा के लिए अपनी शहादत दी दी है।
उन्होंने कहा कि विपक्ष
नक्सल मुद्दे को ज़बरदस्ती आर्थिक व सामाजिक समस्या बता रही
जबकि यह आतंकवाद का रूप अख्तियार कर चुका है।
उन्होंने जोगी के
डॉक्टर बिनायक सेन के पक्ष
में दिए गए बयान पर पूछा कि सेन
विद्वान हो सकते है परंतु क्या विद्वान अपराधी नही हो सकते?
कंवर ने प्रश्न किया कि अगर कोई नक्सलियों का पक्ष लेगा तो
पुलिस का मनोबल कैसे उँचा रह सकता है?
उन्होंने कहा कि
नक्सलियों का समर्थन करने वाले तो स्वयं ही देश के साथ
विश्वासघात कर रहे हैं और अगर ऐसे लोगों को जेल
में बंद कर दिया
जाता है तो क्या ग़लत है। कंवर ने विपक्ष पर कटाक्ष करते हुए
कहा कि विपक्ष के आरोपों से तो यह प्रतीत होता है जैसे वह
चाहता है कि सरकार नक्सलियों के सामने घुटने टेक दे।
गृह मंत्री ने कहा कि यह आश्चर्य की बात है कि सरकार जब
नक्सलियों को खुलकर सामने की लड़ाई न लड़ने पर कायर कहती है तो
विपक्ष उन्हें प्रशस्ती-पत्र देता है। कंवर कहते हैं विपक्ष को
नक्सल मुद्दे पर राजनीति करने
में कोई लाभ नही मिलेगा। सरकार
नक्सलियों के ख़ात्मे के लिए गंभीरता से प्रयास कर रही है और
विपक्ष को इसमे सहयोग करना चाहिए। एक अन्य आरोप के जवाब
में
कंवर ने कहा कि सरकार हमेशा से ही नक्सल प्रभावित क्षेत्रों
में
तैनात सुरक्षा बलों के रोटेशन पॉलिसी के पक्ष
में रही है और उन क्षेत्रों में
जिन
पुलिस अफसरों और जवानों की पोस्टिंग हुई है उन्हें जाना ही
पड़ेगा तथा जिनकी दोबारा पोस्टिंग हुई है उसे रद्द किया जाएगा।

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