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कोंटा
मे नक्सलियों के डर से 69 स्कूल बंद
रायपुर। छत्तीसगढ़ मे विपक्ष ने आरोप लगाया है कि
राज्य सरकार आदिवासियों की शिक्षा के प्रति गंभीर नही है। इनके
इलाको में स्कूलों को इसीलिए बंद करना पड़ा क्योंकि ये सभी
सुदूर नक्सल प्रभावित क्षेत्रों मे स्थित हैं और इनमें से
ज़्यादातर स्कूल भवनों को नक्सलियों ने तोड़ दिया है। ग्रामीण
क्षेत्रों मे नक्सलियों का ख़ौफ़ कायम है जिसकी वजह से
निरीक्षण करने वाले भी वहां के स्कूलों मे जाने मे असुरक्षित
महसूस करते है। इसी वजह से बच्चों को बेस कैंपों मे शिक्षा दी
जा रही है। विधान सभा मे विपक्ष ने सदन मे नक्सल प्रभावित
क्षेत्र कोंटा मे 69 स्कूलों के बंद होने तथा शिक्षकों के
स्वीकृत पदों मे से करीब दो तिहाई पद रिक्त होने के मामले पर
सरकार को आड़े हाथों लेते हुए न केवल विभागीय मंत्री बल्कि
मुख्यमंत्री से भी जवाब मांगा, परंतु दोनो के ही जवाब को
असंतोषजनक करार देते हुए विपक्षी सदस्यों ने सदन से बहिर्गमन
कर दिया। एक अन्य मुद्दे पर विपक्ष ने प्रकाश इंडस्ट्रीज़
लिमिटेड को कोरबा जिले मे दो कोल ब्लॉक आवंटित करने के मामले
मे राज्य सरकार की भूमिका पर सवाल उठाते हुए मुख्यमंत्री से
जवाब मांगा परंतु उनके जवाब से असंतुष्ट होकर सदन से दोबारा
बहिर्गमन किया।
सरकार को कॉंग्रेस विधायक कवासी लखमा ने उस प्रश्न पर घेरा
जिसमे उन्होने जानकारी मांगी कि दक्षिण बस्तर दंतेवाड़ा जिले
के कोंटा विकासखंड के स्कूलों मे शिक्षकों के स्वीकृत पदों की
संख्या कितनी है एवं इन पदों के विरुद्ध कितने पद रिक्त हैं।
इसके जवाब मे आदिम जाति कल्याण मंत्री केदार कश्यप ने बताया कि
कोंटा मे शिक्षकों के कुल 1332 पद स्वीकृत हैं और 838 पद रिक्त
हैं। लखमा ने कश्यप से पूछा कि जब उस क्षेत्र मे शिक्षकों के
इतने अधिक पद रिक्त हैं तो वहां शिक्षण कार्य कैसे चल रहा है?
जवाब मे कश्यप ने बताया कि शिक्षकों के इतने पद इसीलिए रिक्त
हैं क्योंकि उनके कुल 1332 स्वीकृत पदों मे से 570 पद सितंबर
मे स्वीकृत किए गए हैं और वर्तमान मे वहां 494 शिक्षक बच्चों
को पढ़ा रहे हैं। इस पर लखमा ने पूछा कि फिर क्या वजह है कि
इतनी मात्रा मे रिक्त पद होने के बावजूद 120 शिक्षकों को हटा
दिया गया? जवाब मे कश्यप ने कहा कि दरअसल उन शिक्षकों को हटाया
नही गया बल्कि उन्हें राहत शिविरों मे बच्चों को पढ़ाने के लिए
कहा गया है।
इसके बाद लखमा ने कश्यप से कोंटा क्षेत्र मे 69 स्कूलों के
बंद होने का कारण जानना चाहा। कश्यप ने कहा कि इन स्कूलों को
इसीलिए बंद करना पड़ा क्योंकि ये सभी सुदूर नक्सल प्रभावित
क्षेत्रों मे स्थित हैं और इनमें से ज़्यादातर स्कूल भवनों को
नक्सलियों ने तोड़ दिया है। ग्रामीण क्षेत्रों मे नक्सलियों का
ख़ौफ़ कायम है जिसकी वजह से निरीक्षण करने वाले भी वहां के
स्कूलों मे जाने मे असुरक्षित महसूस करते है। इसी वजह से
बच्चों को बेस कैंपों मे शिक्षा दी जा रही है। कश्यप ने दावा
किया कि बेस कैंपों मे शिक्षण कार्य जारी रखने के बावजूद
शिक्षा के स्तर मे कोई गिरावट नही आई है बल्कि इसमे सुधार ही
हुआ है। साथ ही उन्होनें कहा कि शिक्षकों के रिक्त पद भी बहुत
जल्द ही भर लिए जाएंगे।
कॉंग्रेस के वरिष्ठ विधायक और पूर्व मुख्यमंत्री अजीत
जोगी ने सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि दरअसल शिक्षकों से यह
लिखवाया गया है कि वे कोंटा के सुदूर क्षेत्रों के स्कूलों मे
जाने मे असमर्थ है। उन्होने पूछा कि जब वहां जाना इतना मुश्किल
है तो उन्हीं शिक्षकों से उन क्षेत्रों मे चुनावी कार्य कैसे
करवा लिए गए। जोगी ने कहा कि ऐसा प्रतीत होता है जैसे सरकार की
नीति आदिवासियों को अशिक्षित रखने की है। आदिम जाति
कल्याण मंत्री केदार कश्यप ने बताया कि कोंटा विकासखंड मे
शिक्षकों के 1332 पद स्वीकृत हैं। इनमें से 838 पद रिक्त हैं।
लखमा ने इस पर पूछा कि अगर शिक्षकों के इतने पद रिक्त हैं तो
वहां पर पढ़ कौन रहा है? इसके जवाब मे कश्यप ने बताया कि
शिक्षकों के 570 पद सितंबर मे ही स्वीकृत किए गए हैं, 494
शिक्षक वहां पर अध्यापन कर रहे हैं। लखमा ने पूछा कि पद रिक्त
होने के बावजूद 120 शिक्षकों को क्यों हटाया गया? कश्यप ने कहा
कि शिक्षकों को हटाया नही गया बल्कि उनका युक्तियुक्तकरण किया
गया है। वे राहत शिविरों मे पढ़ा रहे हैं। पूर्व मुख्यमंत्री
अजीत जोगी ने कहा कि जिसके आधार पर स्कूल बंद किया गया है उसकी
उन्होने नोटशीट देखी है। निरीक्षकों से यह लिखवाया गया है कि
वहां जाना मुश्किल है। उन्होने कहा जब वहां जाना मुश्किल है तो
उन्हीं शिक्षकों से चुनाव कार्य कैसे लिया गया।
जब शिक्षकों के सैकड़ों पद खाली हैं तो 120 शिक्षकों को
क्यों हटाया गया। इनमें से 50 शिक्षक राजधानी मे ही भटक रहे
हैं। उन्होने कहा कि शिक्षक गांवों मे नही जाना चाहते यह कहना
ग़लत है। जोगी ने पूछा कि क्या सरकार ने कोई गोपनीय नीति बनाई
है? कि आदिवासियों को अशिक्षित रखना है। जोगी ने कहा कि सलवा
जुड़ूम चलने के कारण वहां के बच्चे बेस कैंपों मे आ गए हैं। और
गांवों मे शिक्षक नही जाना चाहते इसीलिए कैंपों मे ही शिक्षा
दी जा रही है। जोगी ने कहा कि अगर शिक्षक नही जाना चाहते तो
सभी स्कूलों को बंद कर दीजिए। धरमजीत सिंह के एक प्रश्न के
जवाब मे मंत्री ने कहा कि सात रहट शिविरों मे 390 शिक्षक
कार्यरत हैं। 40 और संस्थाएं कैंप से हटकर अध्यापन कर रही हैं।
इस मामले मे मुख्यमंत्री डॉक्टर रमन सिंह ने भी कहा है कि
राहत शिविरों मे बच्चों को शिक्षा देने की अस्थाई व्यवस्था की
गई और जैसे ही वहां पहले की तरह शांति कायम होगी वैसे ही स्कूल
फिर से उन्हीं गांवों मे खोल दिए जाएंगे। इस पर नेता प्रतिपक्ष
रवीन्द्र चौबे ने कहा राज्य सरकार इस मुद्दे पर गंभीर नही है
और भ्रामक विभागीय मंत्री के साथ-साथ मुख्यमंत्री का जवाब भी
भ्रामक है। उन्होनें आरोप लगाया कि जिस तरह से कोंटा क्षेत्र
के 69 स्कूलों को बंद कर दिया गया है उससे लगता है कि सरकार
वहां के आदिवासियों की पूरी की पूरी एक पीढ़ी को शिक्षा से
वंचित करना चाहती है। चौबे ने कहा कि विपक्ष इस मुद्दे पर
सरकार के जवाब से संतुष्ट नही और सदन से बहिर्गमन करती है।
इसके बाद कॉंग्रेस विधायक मोहम्मद अकबर ने कोरबा जिले मे
स्थित प्रकाश इंडस्ट्रीज़ लिमिटेड को दो कोल ब्लॉक आवंटित करने
का मामला उठाया। अकबर ने मुख्यमंत्री से पूछा कि जब इस उद्योग
की उत्पादन क्षमता दो लाख टन से भी कम है तब उस स्थिति मे उसे
दो कोल ब्लॉक कैसे आवंटित कर दिए गये? जवाब मे मुख्यमंत्री ने
उल्टे विपक्ष पर ही प्रश्न दागते हुए पूछा कि जो उद्योग
छत्तीसगढ़ मे निवेश करेंगे उन्हें कोल ब्लॉक आवंटन मे
प्राथमिकता मिलनी चाहिए अथवा दूसरे राज्यों मे निवेश करने वाले
उद्योगों को? फिर उन्होने कहा कि वैसे भी इस कोल ब्लॉक की
अनुशंसा पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी ने अपने शासनकाल के दौरान
की थी और इसमे कुछ भी ग़लत नही हुआ है।
अकबर ने कहा कि केंद्रीय कोयला मंत्रालय के नियमानुसार 4
लाख टन क्षमता वाले उद्योग को एक कोल ब्लॉक तथा 8 लाख क्षमता
वाले उद्योग को दो कोल ब्लॉक आवंटित किया जा सकता है परंतु
प्रकाश इंडस्ट्रीज़ लिमिटेड की क्षमता तो 4 लाख टन से भी कम है
फिर उसे दो कोल ब्लॉक किस आधार पर आवंटित किए गए हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रकाश इंडस्ट्रीज़ लिमिटेड को उनके
चांपा स्थित विस्तारित 4 लाख टन वाले क्षमता के स्पंज आयरन
प्लांट हेतु 1 मिलियन टन कोयले की वार्षिक आवश्यकता की पूर्ति
के लिए कोयला मंत्रालय द्वारा 4 सितंबर 2003 को चोटिया कोल
ब्लॉक सशर्त आवंटित किया गया है। मुख्यमंत्री ने बताया कि इस
उद्योग ने अपनी क्षमता विस्तार करने के लिए एमओयू किया है।
उन्होने कहा कि राज्य शासन उद्योगों की केवल अनुशंसा करता
है परंतु भारत सरकार कोल आवंटन के पहले आवेदक उद्योग की चार
बार स्क्रीनिंग करती है। मुख्यमंत्री ने कहा कि नियमानुसार जो
उद्योग वेल्यु एडीशन करेगा वही कोल ब्लॉक रख सकता है और यदि
कोई विस्तार करने मे असफल होता है तो केंद्र सरकार उसे तुरंत
रद्द कर देती है। परंतु विपक्ष मुख्यमंत्री के जवाब से संतुष्ट
नही हुए और उसने सदन से फिर बहिर्गमन कर दिया।
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