मधुरेश और ज्योतिष को प्रमोद वर्मा सम्मान

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hindi news portalरायपुर। द्वितीय प्रमोद वर्मा स्मृति आलोचना सम्मान से प्रतिष्ठित कथा आलोचक मधुरेश और युवा आलोचक ज्योतिष जोशी को सम्मानित किया जायेगा। यह सम्मान उन्हें 31 जुलाई को प्रेमचंद जयंती पर रायपुर में आयोजित द्वितीय अखिल भारतीय प्रमोद वर्मा स्मृति समारोह में प्रदान किया जायेगा। इस अवसर पर शताब्दी पुरुष द्वय अज्ञेय और शमशेर पर राष्ट्रीय संगोष्ठी का भी आयोजन किया गया है। यह सम्मान हिंदी आलोचना की परंपरा में मौलिक और प्रभावशाली आलोचना दृष्टि को प्रोत्साहित करने के लिए 2 आलोचकों को दिया जाता है। चयन समिति के संयोजक जयप्रकाश मानस ने बताया कि इस उच्च स्तरीय निर्णायक मंडल के केदार नाथ सिंह, डॉ धनंजय वर्मा, डॉ विश्वनाथ प्रसाद तिवारी, विजय बहादुर सिंह और विश्वरंजन ने एकमत से वर्ष 2010 के लिए दोनों आलोचकों का चयन किया है। मुक्तिबोध, हरिशंकर परसाई और श्रीकांत वर्मा के समकालीन आलोचक, कवि, नाटककार और शिक्षाविद् प्रमोद वर्मा की स्मृति में गठित संस्थान ने प्रथम आलोचना सम्मान से गत वर्ष श्रीभगवान सिंह और कृष्ण मोहन को नवाज़ा था। बरेली निवासी मधुरेश वरिष्ठ एवं पूर्णकालिक कथा आलोचक हैं जिन्होंने पिछले 35 वर्ष से हिंदी कहानी और उपन्यासों पर उल्लेखनीय कार्य किया है। डॉ ज्योतिष जोशी ने युवा पीढ़ी में पिछले डेढ़ दशक से अपनी मौलिक साहित्य, कला और संस्कृति आलोचना के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य करते हुए अपनी प्रखर उपस्थिति से सबका ध्यान आकृष्ट किया है।

पत्रकार जगदीश उपासने को पितृशोक
रायपुर। इंडिया टुडे के कार्यकारी सम्पादक जगदीश उपासने और भारतीय जनता पार्टी छत्तीसगढ़ के प्रदेश उपाध्यक्ष सच्चिदानंद उपासने के पिता दत्तात्रय उपासने का सोमवार को निधन हो गया वे 87 वर्ष के थे। दत्तात्रय उपासने प्रख्यात समाज सेवी थे और धर्मपत्नी रजनीताई उपासने रायपुर शहर से विधायक भी रही हैं। उपासने परिवार का राजनीति एवं समाज सेवा में  काफी योगदान रहा है। परिवार के मुखिया के नाते दत्तात्रय उपासने ने आपात काल का वह दौर भी झेला था, जब उनके परिवार के अधिकतर सदस्य जेल में डाल दिए गए थे। भाजपा परिवार में भी उनका अभिभावक जैसा सम्मान था। यही कारण है कि जब उन्होंने स्थानीय अस्पताल में अंतिम सांस ली तो उस समय मुख्यमंत्री डॉ रमन सिंह सहित और भाजपा नेता एवं कार्यकर्ता वहां उपस्थित थे। वे अपने पीछे भरापूरा परिवार छोड़ गये हैं। उनका अंतिम संस्कार शाम मारवाड़ी शमशान घाट, रायपुर में किया गया।

 

प्रमोद वर्मा सम्मान हेतु प्रविष्टियां भेजें

रायपुर। मुक्तिबोध, परसाई और श्रीकांत वर्मा के समकालीन एवं हिंदी के वरिष्ठ आलोचक, कवि, नाटककार, विचारक और शिक्षाविद् प्रमोद वर्मा की स्मृति में वर्ष 2009 से शुरू किए गए राष्ट्रीय स्तर के पुरस्कारों के लिए वर्ष 2010-11 के सम्मान हेतु प्रविष्टियाँ आमंत्रित की गईं हैं।
प्रमोद वर्मा आलोचना सम्मान के अंतर्गत 40 वर्ष से अधिक आयु वाले आलोचक की ऐसी मौलिक आलोचनात्मक कृति जो पिछले पाँच वर्षों में प्रकाशित हुई हो, पर विचार किया जायेगा। सम्मान के अंतर्गत अप्रकाशित पांडुलिपि भी स्वीकार की जाएगी। पुरस्कार स्वरूप चयनित आलोचक को संस्थान राष्ट्र स्तरीय समारोह में 21 हज़ार रुपये नगद, प्रशस्ति पत्र, प्रतीक चिन्ह आदि से सम्मानित करेगा।
प्रमोद वर्मा आलोचना सम्मान (युवा) के अंतर्गत 40 साल से कम आयु वाले युवा आलोचक के ऐसे मौलिक आलोचनात्मक लेखन, प्रकाशित कृति या अप्रकाशित पांडुलिपि पर विचार किया जायेगा जो आलोचना के प्रचलित प्रतिमानों से हटकर एवं प्रभावकारी हो। ऐसे आलोचकों की कृतियाँ पिछले 2 वर्षों के भीतर प्रकाशित हुई हों। सम्मानस्वरूप चयनित आलोचक को संस्थान राष्ट्र स्तरीय समारोह में 11 हज़ार रुपये नगद, प्रशस्ति पत्र, प्रतीक चिन्ह आदि से सम्मानित करेगा।
प्रमोद वर्मा आलोचना सम्मान (राज्य स्तरीय) के अंतर्गत छत्तीसगढ़ राज्य के आलोचकों को उनकी मौलिक आलोचनात्मक लेखन, प्रकाशन के लिए सम्मानित किया जायेगा। ऐसे आलोचकों की कृति पिछले एक वर्ष के भीतर प्रकाशित हुई हों। सम्मान चयनित आलोचक को संस्थान द्वारा 7 हज़ार रुपये नगद, प्रशस्ति पत्र, प्रतीक चिन्ह आदि से सम्मानित करेगा। पुरस्कार के निर्णायक मंडल में केदार नाथ सिंह, गंगाप्रसाद विमल, डॉ. धनंजय वर्मा, विश्वनाथ प्रसाद तिवारी, विश्वरंजन शामिल हैं। निर्णायक मंडल (राज्य स्तरीय) में प्रभात त्रिपाठी, डॉ. बलदेव, डॉ. सुशील त्रिवेदी, गिरीश पंकज, विश्वरंजन हैं।
प्रविष्टि के रूप में प्रकाशित कृति या पांडुलिपि की दो प्रतियाँ भेजनी होंगी। प्रविष्टि के साथ आलोचक का संक्षिप्त बायोडाटा और छायाचित्र भेजना आवश्यक होगा। प्रविष्टि कोई प्रकाशक, समीक्षक, प्रशंसक या स्वयं आलोचक भी भेज सकते हैं। प्रविष्टि प्राप्त होने की अंतिम तिथि? 30 मार्च, 2011 है। प्रविष्टि भेजने का पता है? जयप्रकाश मानस, कार्यकारी निदेशक, प्रमोद वर्मा स्मृति संस्थान, छगमाशिम, आवासीय परिसर, पेंशनवाड़ा, रायपुर, छत्तीसगढ़। या ई-मेल-pandulipipatrika@gmail.com  से भी संपर्क कर सकते हैं।

 

सृजनगाथा ने मीडियाकर्मी सम्मानित किए

रायपुर। वेब पत्रिका सृजनगाथा डॉट कॉम एवं प्रमोद वर्मा स्मृति संस्थान के सहयोग से छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के प्रेस क्लब में आयोजित एक गरिमामय व्याख्यान एवं सम्मान समारोह  में हिंदी ब्लॉग लेखन में उल्लेखनीय योगदान के लिए प्रदेश के ब्लॉगर संजीत त्रिपाठी सहित साहित्यकारों और पत्रकारों का सम्मान किया गया।  सृजनगाथा डॉट कॉम का यह चौथा आयोजन था। व्याख्यान में कविता क्या, कविता क्यों विषय पर प्रमुख व्याख्यान देते हुए इलाहाबाद से आए प्रमुख आलोचक, कवि एवं उन्नयन के संपादक प्रकाश मिश्र ने कहा कि यश और धन कविता के शत्रु नहीं है पर कविता को मनुष्यता पर आधारित होना चाहिए, कविता को कुरूपता से बचना चाहिए और उसे सहज भी होना चाहिए, कविता की शुरूआत से आज तक कई परिवर्तन आए है, छंद लय रस से लेकर गद्यात्मक कविता का दौर भी आया है। उन्होंने कहा कि गद्यात्मक कविता के माध्यम से भी भाव की अभिव्यक्ति की जा सकती है, केवल निरा छंद कौशल ही कविता नहीं है, जिसमें संवेदना,संस्कृति एवं जीवन में संसार का भाव हो वही कविता है।
कार्यक्रम के अध्यक्षीय उद्बोधन में छतरपुर से पधारे वरिष्ठ आलोचक और शिक्षाविद् डॉ गंगा प्रसाद बरसैया ने कहा कि कविता वेदों से शुरू होती है और मनुष्य जीवन में परिवर्तन के साथ चलती है। रस का संबंध मनुष्य की अनुभूति से है कविता में कड़ी शब्द साधना है, कविता धरती से दूर जाएगी तो वह समाप्त हो जाएगी, कविता सत्ता के भरोसे अधिक दिन तक ज़िंदा नही रह सकती है, जनता की बात हो वहीं कविता है, कविता लोगों की आंख खोलती है और आदमी को आदमी से जोड़ती है, आज कविता ने जमीन छोड़ दी है और धरती से दूर हो रही है, यहां पाठक का संकट नही है, कविता से आचरण का संबंध है।
व्याख्यान पर अपनी टिप्पणी देते हुए वरिष्ठ साहित्यकार छत्तीसगढ़ के पूर्व निर्वाचन आयुक्त सुशील त्रिवेदी ने कविता लिखने का प्रयोजन आनंद बताया। वरिष्ठ पत्रकार एवं छत्तीसगढ़ ग्रंथ अकादमी के संचालक रमेश नैय्यर ने कहा कि जब तक इंसान और इंसानियत ज़िंदा है तब तक कवि को कविता करते रहना चाहिए, कविता रस संगीत से मुक्त नही हो सकती है। वरिष्ठ पत्रकार एवं दैनिक अमृत संदेश के प्रधान संपादक गोविंद लाल वोरा ने कहा कि कविता जोश पैदा करती है, मन से निकला भाव कविता है। जनसत्ता के संपादक अनिल विभाकर ने कहा कि कविता के लिए सर्वप्रथम पाठक होना ज़रूरी है, कविता का संबंध जीवन मूल्य से है और उसमें कमी आने के कारण पाठकों का संकट उत्पन्न हो गया है।
कार्यक्रम के आरंभ में सृजनगाथा डॉट कॉम के संपादक जयप्रकाश मानस ने अतिथियों का स्वागत किया। लघु कथाकार राम पटवा ने स्वागत भाषण में सृजनगाथा डॉट काम के बारे में विस्तार पूर्वक जानकारी दी। कार्यक्रम के द्वितीय सत्र सम्मान समारोह में सनत चतुर्वेदी पत्रकारिता क्षेत्र में, अशोक शर्मा  वेब तकनीक के क्षेत्र में योगदान के लिए सम्मानित किए गए। रेडियो रंगीला के संपादक संदीप अखिल, फ़ोटो पत्रकारिता के लिए नरेंद्र बंगाले, लघु पत्रिका क्षेत्र में दीपांशु पाल, इलेक्ट्रानिक मीडिया से संतोष जैन, कथा लेखक कैलाश वनवासी, हिंदी ब्लॉग लेखन में योगदान के लिए संजीत त्रिपाठी का सम्मान किया गया। सम्मान स्वरूप रचनाकारों और मीडियाकर्मियों को शॉल, श्रीफल, प्रशस्ति पत्र, प्रतीक चिन्ह आदि से सम्मानित किया गया। कार्यक्रम का संचालन डॉ सुधीर शर्मा ने किया और आभार प्रदर्शन वरिष्ठ पत्रकार आरएनएस के संपादक, एचएस ठाकुर ने किया।

 

आदिवासी समाज में भूमकाल दिवस की वर्षगांठ

रायपुर। बस्तर क्षेत्र के सर्व आदिवासी समाज के लोगों ने भूमकाल दिवस की 100 वीं वर्षगांठ मनाई। देश की आजादी के लिए अंग्रेजी हुकुमत के खिलाफ लड़ने वाले शहीद गुंडाधूर, डेवरीधुव और अन्य सभी शहीद आदिवासियों को श्रंदाजलि देने के लिए प्रत्येक वर्ष 10 फरवरी को भूमकाल दिवस मनाया जाता है परंतु सत्य यह है कि अंग्रेजी हुकुमत के खिलाफ संघर्ष करते हुए अपने प्राणों की आहुति देने वाले आदिवासियों को 100 वर्ष बाद भी हत्यारे और लुटेरे नक्सलियों के खिलाफ संघर्ष करना पड़ रहा है।
बस्तर के पुलिस अधीक्षक पी सुंदरराज ने बताया कि इस वर्ष जगदलपुर में आयोजित किये जा रहे भूमकाल स्मृति दिवस के कार्यक्रम में नक्सलियों के खिलाफ आदिवासी वर्ग के लोगों का आक्रोश एवं नाराजगी देखने को मिली। बस्तर पुलिस ने विगत कुछ महीनों से जन जागरण अभियान के माध्यम से नक्सलियों के असली चेहरे को उजागर किया है। नक्सलियों ने निर्दोष आदिवासियों को मुखबिर होने के शक के आधार पर हत्या करना, आदिवासी बच्चों के आश्रम/स्कूल को तोड़फोड़ करना, आदिवासी क्षेत्रों के विकास के लिए बनाई जाने वाली रोड एवं सड़कों को क्षतिग्रस्त करना, आदिवासी बालक/बालिकाओं को जबरन अपने साथ ले जाकर उन्हें हथियार पकड़ाना जैसी जन विरोधी हरकतों से तंग आकर बस्तर क्षेत्र के आदिवासी धीरे-धीरे नक्सलियों के खिलाफ अपनी आवाज उठा रहे हैं।
पिछले महीने नारायणपुर क्षेत्र में दो निर्दोष आदिवासी बच्चों को बिना किसी कारण के मारे जाने से बस्तर क्षेत्र की जनता ने नक्सलियों के खिलाफ सड़क पर उतरकर प्रदर्शन किया। इस सिलसिले में आज भी भूमकाल स्मृति दिवस कार्यक्रम में कई स्थानों पर नक्सलियों के विरोध में बैनर, पोस्टर देखने को मिले। इन सभी घटनाक्रमों को देखते हुए बस्तर पुलिस एवं बस्तर की जनता विश्वास करती है कि दिशाहीन एवं विचारविहीन नक्सलियों का खात्मा जल्दी से जल्दी होगा।

 

न्यायालय के आदेशों के पालन में नक्सलियों का अड़ंगा

रायपुर छत्तीसगढ़ के पुलिस महानिदेशक विश्वरंजन ने कहा है कि पुलिस सर्वोच्च न्यायालय के उस दिशाबोध के परिपालन में सारे प्रयास करेगी जिसमें कहा गया है कि उच्चतम न्यायालय, नई दिल्ली में लंबित एक याचिका के 12 याचिकाकर्ताओं को उपस्थित कराए। पुलिस महानिदेशक ने कहा है कि हर प्रकार की क्षति की संभावनाओं के बावजूद भी सर्वोच्च न्यायालय के आदेश तामील करने से छत्तीसगढ़ पुलिस पीछे नहीं हटेगी। सर्वोच्च न्यायालय के याचिकाकर्ताओं को खोजने का संपूर्ण प्रयास करेगी, हालांकि याचिकाकर्ताओं के गांव गच्चनपल्ली और गोम्पाड लगभग पूरी तरह से नक्सली कब्जे में हैं, नक्सलियों ने यहां पूरा आधिपत्य स्थापित कर रखा है। ये दोनों गांव अत्यंत दुर्गम पहाड़ी क्षेत्र में आते हैं जहां पहुंचने के लिए पगडंडियों, नदी-नालों को पार करना पड़ता है।
आदेश
की तामीली के लिए विश्वरंजन ने संबंधित अधिकारियों को कड़े निर्देश जारी किये हैं। पुलिस बल गांव की ओर लगातार आगे बढ़ रहा है। सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशानुसार जिला दंतेवाड़ा पुलिस की एक टुकड़ी प्रकरण में उल्लेखित एवं लंबित याचिका के 12 ग्रामीण याचिकाकर्ताओं को उपस्थित कराने के लिए उनके गांव गच्चनपल्ली के लिए रवाना की गई थी किन्तु 9 फरवरी के प्रातः साढे छः बजे पुलिस पार्टी नक्सलियों के इंजरम-भेजी मार्ग पर बिछाए प्रेशर बम एवं एम्बुश की चपेट में आ गई। प्रेशर बम के अचानक फटने से एसपीओ हरिराम के दोनों पैर उड़ गये और वह गंभीर रूप से घायल हो गया है। उसे चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के लिए हेलीकाप्टर से जगदलपुर अस्पताल भेजा गया है।
सर्वोच्च
न्यायालय के आदेश के परिपालन में त्वरित कार्रवाई करने हेतु डीजीपी के निर्देश पर इंजरम बेसकैम्प से जिला पुलिस बल के लगभग 300 की संख्या में जवान एसपीओ गाईड के साथ 8 फरवरी की रात्रि रवाना हुए थे जिन्होंने ग्राम गोरखा-भेज्जी होते हुए गच्चनपल्ली के लिए प्रस्थान किया था। सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश की जानकारी चूंकि नक्सलियों को हो चुकी थी, इसलिए नक्सलियों ने ग्राम गोरखा के पास बड़ी संख्या में उपस्थित होकर एम्बुस लगाया था। जैसे ही पुलिस पार्टी बड़े भोर से गोरखा ग्राम पहुंची तभी नक्सलियों ने ब्लास्ट करते हुए पुलिस पार्टी पर अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी, जिसमें हरिराम को गंभीर चोट पहुंची।
विश्वरंजन
ने आंतरिक सुरक्षा सहित सांवैधानिक मूल्यों, कानून, न्यायालयीन के प्रति छत्तीसगढ़ पुलिस की प्रतिबद्धता को दोहराते हुए कहा है कि न्यायालयलीन आदेश के परिपालन में तत्पर दंतेवाड़ा पुलिस की एक टुकड़ी पर नक्सलवादियों का सुनियोजित एवं जानलेवा हमला उनके संविधान विरोधी चरित्र का ही उदाहरण है। ज्ञातव्य है कि सर्वोच्च न्यायालय में हिमांशु कुमार एवं अन्य की याचिका क्रमांक 103/2009 में सुनवाई के दौरान 12 परिवादियों को सर्वोच्च न्यायालय में अग्रिम सुनवाई हेतु 15 फरवरी को उपस्थित कराने हेतु निर्देशित किया गया है। ये परिवादी हैं? सोयम रामा पुत्र सोयम कन्ना, कुंजाम हिड़मा पुत्र पगेता, माड़वी हिड़मा पुत्र माड़वी कोसा, माड़वी सुकड़ा पुत्र माड़वी कोसा, माड़वी पोज्जा पुत्र माड़वी हुर्रा, सोयम दुला पुत्र सोयम, बुलाकी सुकठी पत्नी मुक्का, गाड़पी हुर्रे पत्नी माड़वी हुर्रा, माड़वी राजा पुत्र माड़वी जोगा, मड़कम मुक्के पत्नी मड़कम चुजा, कोवासी कोसा पुत्र कोवासी गंगा, सोढ़ी संबो पत्नी सोढ़ी बदरा। ये सभी गोम्पाड़ और गच्चनपल्ली गांव के निवासी हैं।
छत्तीसगढ़
पुलिस अब माओवादी-नक्सलियों के प्रजातांत्रिक इकाईयों, शासन,पुलिस और अर्धसैनिक बल के विरुद्ध लगातार दुष्प्रचार से निपटने के लिए सामाजिक तरीकों को प्राथमिकता दे रही है। नक्सलियों के भ्रामक एवं तथ्यरहित दुष्प्रचार अभियान के विरूद्ध जनजागरण के लिए छत्तीसगढ़ पुलिस ने राज्य भर में नक्सलविरोधी प्रचार अभियान चला रखा है ताकि नक्सली हिंसा की वास्तविकता से सामान्य जनता परिचित हो सकें।

http://www.cgpolice.blogspot.com

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