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शाहिद सिद्दीकी बसपा से निष्कासित
लखनऊ।
बहुजन समाज पार्टी ने शाहिद सिद्दीकी को अनुशासनहीनता करने
और पार्टी विरोधी गतिविधियों में लिप्त रहने के कारण पार्टी से
निष्कासित कर दिया गया है। बीएसपी के राष्ट्रीय महासचिव बाबू
सिंह कुशवाहा ने बताया कि शाहिद सिद्दीकी की पार्टी नेतृत्व के
विरूद्ध मीडिया में बयानबाजी को पूर्णतः निराधार एवं
दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने कहा कि बीएसपी देश की कैडर आधारित
सबसे बड़ी पार्टी है, जो अपने जुझारू, निष्ठावान और पार्टी के
लिए खून-पसीना बहाने वाले कार्यकर्ताओं को पूरा मौका देती है।
उन्होंने कहा कि बीएसपी में स्वार्थी, पदलोलुप और अपने हित
साधने वाले लोगों के लिए कोई जगह नहीं है। शाहिद सिद्दीकी ने
जुलाई, 2008 में समाजवादी पार्टी छोड़कर बहुजन समाज पार्टी की
सदस्यता ग्रहण की थी।
कुशवाहा
ने कहा कि यह बेहद अफसोस जनक बात है कि पार्टी की नीतियों
को जानने के बावजूद सिद्दीकी ने बीएसपी ज्वाइन करते ही नेतृत्व
पर राज्य सभा में भेजे जाने का दबाव बनाना शुरू कर दिया था।
उन्होंने कहा कि उस समय पुनः सिद्दीकी को यह बताया गया था कि
बीएसपी में आन्तरिक लोकतंत्र का पूरा आदर किया जाता है। बीएसपी
इकलौती ऐसी पार्टी है, जो परिवारवाद, वंशवाद और चापलूसी को
बिल्कुल बढ़ावा नहीं देती।
कुशवाहा ने कहा कि सिद्दीकी की मांग पर बीएसपी ने उन्हें
लोकसभा आम चुनाव में बिजनौर से पार्टी का उम्मीदवार बनाया था।
बीएसपी प्रत्याशी होने के बावजूद चुनाव के दौरान सिद्दीकी अपने
पुराने संपर्कों से प्रभावित होकर सपा के लोगों के बीच ही
घूमते रहे और उन्होंने बीएसपी के समर्पित कार्यकर्ताओं और अपने
क्षेत्र की जनता के साथ कोई ताल-मेल नहीं बैठाया। इसके कारण वे
लोकसभा का चुनाव हार गए। उन्होंने कहा कि बिजनौर बीएसपी की
परम्परागत रूप से मजबूत सीट थी, जिसे हर हालत में जीता जा सकता
था, लेकिन सिद्दीकी की गलत कार्यशैली
के कारण पार्टी यहां से चुनाव हार गई।
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