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पिछड़ों
की उपेक्षा के खिलाफ अप्रैल में विराट रैली
लखनऊ।
समाजवादी पार्टी ने कहा है कि कांग्रेस, भाजपा और बसपा पिछड़ों
की विरोधी है। समाजवादी पार्टी ने शासन में पिछड़ों को जो
सुविधाएं दी थीं, उन्हें मायावती सरकार ने छीन लिया है। राज्य
में पिछड़ों की ताकत को कमजोर करने का प्रयास हो रहा है। पिछड़ा
वर्ग अपने हितों की रक्षा के लिए अप्रैल में विराट रैली करेगा
और 2012 के विधान सभा चुनावों में समाजवादी पार्टी की सरकार
बनाने में अहम भूमिका निभाएगा। समाजवादी पिछड़ा वर्ग प्रकोष्ठ
की बैठक में पिछड़े वर्ग के प्रमुख प्रतिनिधियों ने कहा है कि
मुलायम सिंह यादव के नेतृत्व में समाजवादी पार्टी में ही
पिछड़ें वर्गो का सम्मान सुरक्षित है।
बैठक में वक्ताओं ने बसपा राज में पिछड़ों के उत्पीड़न की
घटनाएं बयान करते हुए बताया कि आबादी का साठ प्रतिशत होने के
बावजूद पिछड़े वर्ग की उपेक्षा हो रही है। सरकार के कार्यों के
25 लाख के ठेकों में अनुसूचित जाति/जनजाति के आरक्षण के
सापेक्ष पिछड़ों को आरक्षण नहीं दिया गया है। उन्हें
शासन-प्रशासन में हाशिए पर रखा गया है। मुलायम सिंह यादव सरकार
ने जो उन्हें तमाम सुविधाएं दी थी, उन्हें भी छीन लिया गया है।
पिछड़ा वर्ग प्रतिनिधियों ने यह भी कहा कि समाजवादी
पार्टी ने पिछड़ों के हक में बराबर संघर्ष किया है। इस बैठक में
सरकारी अन्याय के विरूद्व आन्दोलन तेज करने, दौरे करके समाज
में जन जागरण पैदा करने और अप्रैल माह में पिछड़े वर्ग की
विराट रैली को सफल बनाने के बारे में रणनीतिक चर्चा की गई।
बैठक में कहा गया कि यह पिछड़े समाज की परीक्षा की घड़ी है,
इसमें उन्हें खरा उतरना है।
बैठक की अध्यक्षता सांसद राम नारायण साहू ने की। इसमें
सपा के प्रदेश प्रवक्ता राजेन्द्र चौधरी अतिरिक्त सचिव एसआरएस
यादव, समाजवादी पिछड़ा वर्ग प्रकोष्ठ के प्रदेश उपाध्यक्ष चौधरी
लालता प्रसाद निषाद, पूर्व विधायक ताराचंद्र सोलंकी, जगदीश
कुशवाहा, पूर्व सांसद, जयगोपाल सोनी, जगन्नाथ यादव एडवोकेट,
योगेन्द्र चौहान, अनिल राजभर, नानकदीन भुर्जी, जानकी पाल,
मंजूरानी मौर्य, डा रामगोविंद प्रजापति, तुलसीराम चौरसिया,
राकेश प्रजापति, डा आरडी गोस्वामी, अफजल अंसारी, श्रीनिवास
जोगी, जगत नारायण मौर्य, सुरेशराम चौरसिया, रवीन्द्र यादव, डा
रामदुलार राजभर, सहजराम चौहान, सुंदरलाल चौहान और अमित पाल की
उपस्थिति उल्लेखनीय रही।
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