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असीमा की
कहानी पसंद आएगी- ग्रेसी सिंह
मुंबई ।
फिल्म लगान और मुन्नाभाई एमबीबीएस के माध्यम से हिन्दी
फिल्म जगत में अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराने के बावजूद
ग्रेसी सिंह को यहां की फिल्म नगरी में कुछ खास तवज्जो नहीं
मिल पाई। यही कारण है कि कुछ दिनों के लिए ग्रेसी सिंह दक्षिण
भारतीय फिल्म उद्योग की ओर मुड़ गई थीं, लेकिन एक बार फिर
महिला केंद्रित फिल्म असीमा के माध्यम से हिन्दी फिल्म जगत में
ग्रेसी सिंह की वापसी हो रही है और ग्रेसी सिंह इस फिल्म को
लेकर काफी उत्साहित भी हैं। यह फिल्म शैलजा कुमारी लिखित
उपन्यास असीमा पर आधारित है, जिसके निर्देशक हैं शिशिर मिश्रा।
ग्रेसी सिंह को पूरा विश्वास है कि अपनी मजबूत कथा के कारण
यह फिल्म हर किसी के दिल को छू लेगी। इस संबंध में उन्होंने
कहा, ‘मेरे लिए ये स्क्रीप्ट सबसे अधिक मायने रखती है। मैं
काफी खुश हूं कि मेरी आने वाली फिल्म असीमा आम फिल्मों से
बिल्कुल इतर है। इस फिल्म की स्क्रीप्ट पढ़ने के बाद मुझे
अहसास हुआ कि यह एक महिला के जीवन के प्रत्येक क्षेत्र से
जुड़ी हुई है, चाहे वह मां-बेटी का संबंध हो या स्त्री-पुरुष
का।’ इस फिल्म में अपनी भूमिका के विषय में उन्होंने कहा, ‘यह
भूमिका मुझे बहुत पसंद थी, इसलिये मैंने इसे स्वीकार किया।
फिल्म में एक महिला के जीवन के तीन चरणों को प्रदर्शित करने का
मुझे मौका मिला है। यह एक महिला की जीवन यात्रा की एक कहानी
है, जिसे सफलता के साथ-साथ भावनात्मक आघात का स्वाद भी चखना
पड़ता है। यह काफी चुनौतीपूर्ण भूमिका थी। लेकिन इसका यह मतलब
नहीं है कि फिल्म गंभीर है। यह फिल्म सामाजिक संदेश तो देती ही
है, साथ में मनोरंजन का भी ख्याल रखती है।’
फिल्म के निर्देशक शिशिर मिश्रा ने फिल्म समय की धारा में
शबाना आज़मी और भीगी पलकें में स्मिता पाटिल को भी निर्देशित
किया था। इस संबंध में पूछे जाने पर ग्रेसी सिंह ने कहा कि
शबाना आज़मी और स्मिता पाटिल की श्रेणी में मुझे रखा जाना उचित
नहीं है। मैं अपनी तुलना इन दोनों के साथ कैसे कर सकती हूं?
लेकिन इस फिल्म का एक हिस्सा होकर मैं अपने आप को गौरवांवित
जरूर महसूस कर रही हूं, क्योंकि शिशिर मिश्रा ने मुझे न सिर्फ
एक महिला के जीवन के विभिन्न चरणों को प्रदर्शित करने में मदद
की है, बल्कि इससे मुझे काफी संतुष्टि भी मिली है। यह भूमिका
मेरे लिए मेरे सपनों की भूमिका से कुछ ज्यादा है। कोई बड़ा या
छोटा नहीं होता है। यह स्क्रीप्ट और कहानी है, जो खुद बोलती
है। मुझे पूरा विश्वास है कि असीमा की कहानी दर्शको को पसंद
आएगी।
शिशिर मिश्रा ने एक महिला की जीवन यात्रा को चित्रित किया
है, बहुत ही खूबसूरत तरीके से। वह अपनी पहचान के लिए लड़ती है।
शिशिर न सिर्फ एक प्रतिभाशाली निर्देशक हैं, बल्कि आप उनसे
बहुत कुछ सीख भी सकते हैं। यदि वह किसी खास दृश्य को खास तरीके
से चाहते हैं तो वह इसके लिए आपको पूरी तरह से आश्वस्त कर देते
हैं।’ यह पूछे जाने पर कि सेट पर तो वह सभी को सख्त अनुशासन
में रखते हैं, ग्रेसी सिंह ने कहा, ‘ऐसा नहीं है, लेकिन वह
अपने दिन की शुरुआत सुबह जगन्नाथ मंदिर में पूजा करने से करते
हैं, क्योंकि उनका मानना है कि दिन की शुरुआत भगवान के
आर्शीवाद से करने से सारा दिन बेहतर निकलता है और सारी बाधाएं
दूर हो जाती हैं। हर कोई फिल्म की बेहतरी के लिए काम करता है।
हम लोगों ने 45 दिन में फिल्म को सफलतापूर्वक पूरा कर लिया।’

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