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एएमयू
प्रकरण की सीबीआई जांच की मांग
अलीगढ़। एएमयू के ईसी सदस्यों, कोट सदस्यों ऐकेडमिक
कौंसिल सदस्यों ने विश्वविद्यालय बंद करने के फैसले को
न्यायोचित ठहराया है और भारत सरकार एवं राष्ट्रपति से मांग की
है कि वे एएमयू के इस पूरे प्रकारण की जांच सीबीआई से कराएं।
एक प्रेसवार्ता में ईसी सदस्य डा मुजाहिद बेग ने कहा कि
अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय की स्थिति विगत एक सप्ताह से
बिगड़ रही थी उसको देखते हुये विश्वविद्यालय को अनिश्चितकाल के
लिए बन्द करना ही न्यायोचित था, जिसका फैसला कुलपति ने विभिन्न
संकायों के डीन की उपस्थिति में लिया।
उन्होंने कहा कि जिस तेजी से हालात बिगड़ रहे थे, वह
विश्वविद्यालय के हित में नहीं थे, यदि यह फैसला थोड़ी देरी से
लिया गया होता तो हो सकता था कि कुछ और छात्र काल के गाल में
समा जाते। बेग का कहना है कि यूनिवर्सिटी के छात्र शाहनवाज की
हत्या के बाद कैम्पस में घटित घटनाएं एक सोचा-समझा षडयंत्र था,
जिसका उदाहरण धरने पर बैठे छात्रों की खुले तौर पर एक वर्ग
विशेष ने आर्थिक सहायता की और नगर के शरारती तत्वों को उकसाकर
विभिन्न प्रकार के षडयंत्र रचकर शिक्षकों से बदतमीजी की है।
प्रेसवार्ता में कहा गया कि यह वही वर्ग है जो कल तक
पर्दे के पीछे से षडयंत्रों से विश्वविद्यालय को हानि पहुंचा
रहा था। अब इस घटना में उनके चेहरे से पर्दा हट गया है और वह
सामने आ गए हैं। पहले ये लोग कुलपति को विभिन्न प्रकार से अपने
चंगुल में फांसना चाहते थे, परंतु कामयाब नहीं हो सके, तब
उन्होंने छात्र की हत्या के बाद एएमयू के छात्रों को अपने
चंगुल में फंसा कर वह हरकतें कीं कि कुलपति और डीन को
विश्वविद्यालय को बन्द करना पड़ा।
प्रेसवार्ता में वक्ता ने दावा किया कि मौजूदा कुलपति
विश्वविद्यालय को शान्तिपूर्ण वातावरण में अग्रसर करते रहे हैं
और भविष्य में भी उनसे यही आशा है कि वे विश्वविद्यालय को
विकसित करते रहेंगे। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय के इतिहास
में यह पहला मौका होगा कि मृतक छात्र के परिवार के किसी एक
सदस्य को विश्वविद्यालय में नौकरी दी जायेगी, ऐसा करके कुलपति
ने सराहनीय कार्य किया है।
वक्ता ने कहा कि जो वर्ग कुलपति का विरोध कर रहा है वह
न तो विश्वविद्यालय से प्रेम करता है और न ही उम्मा का
शुभचिंतक है और अब उनके चेहरों से पर्दा हट चुका है। जो लोग कह
रहे हैं कि वे मानव संसाधन मंत्री और विजिटर से विश्वविद्यालय
की समस्याओं को रखेंगे, वह यह भूल रहे हैं कि दूसरे लोग भी
वहां तक जाने में सक्षम हैं। हम लोग भारत सरकार और राष्ट्रपति
से मांग करते हैं कि इस पूरे प्रकारण की जांच सीबीआई से कराई
जाए।
एएमयू बंद
करने का विरोध भी शुरू
टीचर भी कुलपति के फैसले के
खिलाफ
अलीगढ़ । एएमयू को अनिश्िचतकाल के लिए बंद करने के 12
घंटे के भीतर ही कुलपति के फैसले का विरोध भी शुरू हो गया है।
यह विरोध करने वाले भी काफी जिम्मेदार नागरिक हैं जिनका
ताल्लुक किसी न किसी रूप में एएमयू से है। एएमयू को तत्काल
खोलने की मांग के साथ ही उन्होंने छात्रसंघ चुनाव की भी वकालत
की है। एएमयू टीचर एसोसिएशन कुलपति के फैसले के खिलाफ खुलकर
सामने आ गई है। एसोसिएशन की स्टॉफ क्लब में एक महत्वूपर्ण बैठक
हुई जिसमें एसोसिएशन के अध्यक्ष मुख्तार अहमद और सेक्रेटरी
जमशेद सिद्दीकी सहित सारे पदाधिकारी मौजूद थे और उन्होंने
कुलपति के फैसले को एकतरफा बताया। एसोसिएशन का कहना है कि कोई
तो बात है कि कुलपति और छात्रों के बीच में बहुत ज्यादा
दूरियां बढ़ चुकी हैं। एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने एक प्रेस
कांफ्रेंस करके अपने फैसले और प्रतिक्रिया से मीडिया को अवगत
कराया एसोसिएशन के अध्यक्ष मुख्तार अहमद ने कहा कि टीचर
एसोसिएशन कुलपति के फैसले का विरोध करती है और तुरंत ही एएमयू
को खोलने की मांग करती है। इस प्रकार से एएमयू में राजनीतिक
लड़ाई जोर-शोर से शुरू हो चुकी है जिसके पीछे एएमयू की बंदी एक
प्रमुख कारण जुड़ गई है। एएमयू और उससे संबंधित सभी शिक्षा
संस्थानों को आगामी आदेश्ा तक के लिये बंद कर दिए जाने के बाद
छात्र परिसर छोड़कर अपने घरों को लौट रहे हैं। विश्वविद्यालय
प्रशासन ने उनके घर जाने के लिए बसों और रेलगाड़ियों में विशेष
बोगियों की व्यवस्था की है। उधर छात्रों का धरना बदस्तूर जारी
है।
विश्वविद्यालय प्रशासन का कहना है कि एएमयू को बंद करने
का निर्णय कुलपति प्रोफेसर पीके अब्दुल अजीज की अध्यक्षता में
सभी संकायों के डीन, कॉलेजों के प्राचार्यो से दो घंटे से अधिक
चली गहन मंत्रणा के बाद लिया गया था। बैठक में वरिष्ठ
प्राध्यापकों का विचार था कि कुछ अवांछनीय तत्व विश्वविद्यालय
परिसर में अशांति पैदा करना चाहते हैं और तरह-तरह की भ्रामक
खबरें फैला कर माहौल को तनावपूर्ण बना रहे हैं। परिसर में झूठी
खबरें फैलाकर माहौल को खराब करने की चेष्टा की गई। ईसी के कुछ
सदस्यों का कहना है कि विश्वविद्यालय बंद करने के बारे में
उनसे राय नहीं ली गई और इस संबंध में ईसी के सदस्य मानव संसाधन
मंत्री कपिल सिब्बल से मिलेंगे। कुलपति का कहना है कि एएमयू के
कुलाधिपति जस्टिस अहमदी से विचार-विमर्श करके ही विश्वविद्यालय
को बंद करने का फैसला किया गया। एएमयू टीचर एसोसिएशन कुलपति के
फैसले के खिलाफ खुलकर सामने आ गई है। एसोसिएशन की स्टॉफ क्लब
में एक महत्वूपर्ण बैठक हुई जिसमें एसोसिएशन के अध्यक्ष
मुख्तार अहमद और सेक्रेटरी जमशेद सिद्दीकी सहित सारे पदाधिकारी
मौजूद थे और उन्होंने कुलपति के फैसले को एकतरफा बताया।
एसोसिएशन का कहना है कि कोई तो बात है कि कुलपति और छात्रों के
बीच में बहुत ज्यादा दूरियां बढ़ चुकी हैं। एसोसिएशन के
पदाधिकारियों ने एक प्रेस कांफ्रेंस करके अपने फैसले और
प्रतिक्रिया से मीडिया को अवगत कराया एसोसिएशन के अध्यक्ष
मुख्तार अहमद ने कहा कि टीचर एसोसिएशन कुलपति के फैसले का
विरोध करती है और तुरंत ही एएमयू को खोलने की मांग करती है। इस
प्रकार से एएमयू में राजनीतिक लड़ाई जोर-शोर से शुरू हो चुकी
है जिसके पीछे एएमयू की बंदी एक प्रमुख कारण जुड़ गई है।
पच्चीस अक्टूबर को रेलवे स्टेशन के निकट बीएससी के
छात्र शाहनवाज आलम की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी जिसके
विरोध में छात्रों ने धरना प्रदर्शन शुरू कर दिया था।
विश्वविद्यालय प्रशासन ने मृतक छात्र के परिवार के एक सदस्य को
नौकरी देने और उसके परिवारजनों को आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने
की घोषणा भी की थी। इसके बावजूद परिसर में छात्रों ने कुछ
मांगे उठा कर धरना शुरू कर दिया। इसके बाद जो राजनीतिक
उतार-चढ़ाव आए उसकी परिणिति इस रूप में हुई। एक कारण यह भी था
कि जो छात्र अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे हैं उनके
स्वास्थय की भी विश्वविद्यालय प्रशासन को चिंता थी क्योंकि इन
छात्रों ने उपचार कराने से मना कर दिया था। इस स्थिति से बचने
के लिए वरिष्ठ प्राध्यापकों ने हड़ताली छात्रों से अनेक बार
भेंटवार्ता भी की थी और स्वंय कुलपति ने छात्रों से भी सीधा
संवाद किया था परन्तु हड़ताली छात्रों को बाहरी तत्वों का
समर्थन मिलने के कारण और विश्वविद्यालय परिसर में आशांति का
माहौल पैदा न हो इसलिये विश्वविद्यालय प्रशासन ने यूनिवर्सिटी
को बंद करने का निर्णय लिया गया।
कुलपति ने छात्रों से अपील की है कि वह अपने
छात्रावासों को कर अपने घरों को लौट जाएं उनको घर तक पहुंचाने
के लिये विश्वविद्यालय प्रशासन ने सौ विशेष बसों और दस विशेष
रेलों के साथ अलीगढ़ से गुजरने वाली रेलों में दो विशेष
बोगियां लगाने के भी प्रबन्ध किये हैं। सभी हालों के
प्रवोस्टों को निर्देश दिये गये हैं कि यदि जरूरत पड़ती है तो
वह छात्रों को जाने के लिये किराया उपलब्ध करा दें। अधिकांश
छात्र जा चुके हैं। सबसे पहले मिंटो सर्किल के बच्चों को यहां
से उनके घरों को भेजा गया। लाइब्रेरी सहित कक्षाओं में ताले
डाल दिए गए हैं। आंदोलनकारी छात्रों का यही कहना है कि वे
कुलपति सहित तीन अधिकारियों के इस्तीफे से नीचे बात नहीं
करेंगे छात्रों की इसी ज़िद को उन तत्वों से जोड़ कर देखा जा
रहा है जिन्होंने कुलपति के खिलाफ शुरू से ही मोर्चा खोल रखा
है।
कुलपति के खिलाफ वित्तीय मामलों में गड़बड़ी और
भ्रष्टाचार भी एक बड़ा मुद्दा बन रहा है। आरोप है कि उन्होंने
विकास के नाम पर खुद ही बाहरी तत्वों को ठेके इत्यादि का काम
दिया। हालॉकि एएमयू का एक वर्ग इस तरह के आरोपो से सहमत नहीं
है। विश्वविद्यालय बंदी को लेकर विभिन्न प्रतिक्रियाएं आ रही
हैं। एएमयू की ईसी के सदस्य जफरयाब जिलानी, खुर्शीद खान और
हाफिज़ इलियास ने स्वतंत्र आवाज़ डॉट कॉम से कहा है कि वे मानव
संसाधन मंत्री कपिल सिब्बल से मिलकर अनुरोध करेंगे कि वे एएमयू
को अनिश्चितकाल के लिए बंद करने के आदेश को वापस कराएं क्योंकि
कुलपति ने ईसी के सभी सदस्यों को विश्वास में नहीं लिया है।
ज़फरयाब ज़िलानी ने कहा है कि कुलपति तानाशाही से काम कर रहे
हैं और वे पांच अक्टूबर को एचआरडी मिनिस्टर को लिखकर दे चुके
हैं इनको यहां से हटा दिया जाए या लंबी छुट्टी पर भेज दिया
जाए। उन्होंने कहा कि कुलपति अब्दुल अजीज संसद की तौहीन कर रहे
हैं जिसने कि छात्रसंघ चुनाव कराने की विधिक आज्ञा प्रदान कर
रखी है। यह छात्रों का अधिकार है जिसे कुलपति कैसे छीन सकते
हैं? ज़फरयाब ज़िलानी ने तुरंत बंदी खत्म करने की मांग करते
हुए आरोप लगाया कि वीसी का यह अपना फैसला हो सकता है इसके पीछे
एएमयू के समस्त टीचर या दूसरे अधिकारी नही हैं। एएमयू जिस तरह
से बंद किया गया है वह घोर अलोकतांत्रिक है। एएमयू की टीचर
एसोसिएशन के तेवर भी कुछ ऐसे ही हैं। टीचर एसोसिएशन का रूख भी
कुलपति के लिए अनुकूल नहीं रहा है।
विश्वविद्यालय की स्थिति को सामान्य बनाये रखने के लिये
जिला प्रशासन का भी पूरा सहयोग लिया जा रहा है। जिला प्रशासन
काफी सतर्कता बरत रहा है और वह किसी भी गड़बड़ी को रोकने के
लिए तैयार है। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक असीम अरूण ने फिर कहा है
कि छात्र प्रजातांत्रिक तरीके से अपनी बात रखें और बाहरी
तत्वों को परिसर में आने का मौका न दें। छात्रों के धरने पर
बैठे रहने के कारण जिला प्रशासन ने कुछ कदम उठाए हैं जिनमे
उनसे अपील की गई है कि जब विश्वविद्यालय अनिश्चितकाल के लिए
बंद हो गया है तो वे एएमयू परिसर को खाली कर दें। आंदोलनकारी
छात्रों पर इस अपील का कोई असर नही हुआ है। छात्रों का धरना
जारी है। उन्होंने कहा है कि यदि उन्हें धरने से जबरन हटाया
गया तो वे गिरफ्तारियां देंगे। परिसर में पीएसी और रैपिड एक्शन
फोर्स के जवान गश्त लगा रहे हैं।
टीचर्स एसोसिएशन के प्रस्ताव में कुलपति की भर्त्सना
अलीगढ़। अलीगढ़ मुस्लिम
यूनीवर्सिटी टीचर्स एसोसिएशन की 31 अक्टूबर को कार्यकारिणी
बैठक हुई जिसमें विश्वविद्यालय को बंद किये जाने के लिए
कुलपति की कड़ी भर्त्सना की गई। पारित प्रस्ताव में
विश्वविद्यालय बंद किए जाने के निर्णय को अत्यंत
दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा गया है कि यह हज़ारों छात्रों के
कैरियर और भविष्य के साथ खिलवाड़ है। इस समय, जबकि छात्र
शांतिपूर्ण ढंग से धरना दे रहे थे, विश्वविद्यालय को बंद किए
जाने की कोई आवश्यकता नहीं थी। बातचीत के जरिए समस्या का हल
निकाला जा सकता था। विश्वविद्यालय बंद किए जाने से एक दिन
पूर्व कक्षाएं भी आरंभ होने लगी थीं। जैसाकि जनसंपर्क अधिकारी
राहत अबरार के बयान से भी स्पष्ट होता है। इससे साबित होता है
कि कुलपति और उनका प्रशासन स्थिति से निबटने में नाकाम रहा है।
अमूटा कार्यकारिणी ने पहले भी प्रस्ताव पारित किया था
कि जिस कुलपति के विरूद्ध जांच चल रही हो, उसे विश्वविद्यालय
चलाने का नैतिक अधिकार नहीं है, विश्वविद्यालय की मौजूदा
समस्या का कारण सिर्फ विद्यार्थियों, शिक्षकों और कुलपति के
मध्य संप्रेषण का अभाव है, पिछले तीन वर्ष से छात्रसंघ चुनाव न
कराये जाने के कारण विद्यार्थियों की कोई प्रतिनिधि संस्था
नहीं है और शिक्षक प्रतिनिधियों से कुलपति कोई संवाद नहीं
रखते। कार्यकारिणी ने मांग की है कि वर्तमान कुलपति के दौर के
समूचे घटनाक्रम की जांच उच्चतम न्यायालय के जज से कराई जाए,
जिससे कि ऐसी गड़बड़ियों का मूल कारण ज्ञात हो सके।
कार्यकारिणी ने सरकार से शाहनवाज़ के परिजनों को 20 लाख रूपए
मुआवजा देने की मांग को दोहराया। अमूटा कार्यकारिणी ने
विश्वविद्यालय को अनिश्चितकाल के लिए बंद किए जाने के आदेश
को अविलंब वापस लिए जाने की पुरजोर मांग की। इस बैठक में
सह-सचिव डा नूरूल हसन और कार्यकारिणी के सदस्य डा मलिक
इरशादुल्लाह, डा इरफान, डा वसीम राजा आदि मौजूद थें। बैठक की
अध्यक्षता प्रो मुख्तार अहमद ने की।
किसान मेले का आयोजन
अलीगढ़। उप निदेशक कृषि डा ओमवीर सिंह ने जनपद के
किसानों से अपील की है कि वे कृषि जगत में आई नई-नई तकनीकियों
और जानकारियों को हासिल कर फसल की लागत कम करें और पैदावार
बढ़ाएं। कृष्णांजलि नुमाईश ग्राउंड में किसानों के लिए एक मेले
का भी आयोजन किया गया। इसमे मृदा परीक्षण, भूमि संरक्षण, मृदा
सर्वेक्षण, वर्मी कम्पोष्ट, जैविका खाद, जैव उर्वरक, कृषि
यंन्त्र, कृषि रक्षा उपकरण, रबी फसलों के बीजों की जानकारी
उपलब्ध कराई कराई गई। मेले में भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान
नई दिल्ली और चन्द्रशेखर आजाद, कृषि और प्रौद्यौगिकी
विश्वविद्यालय कानपुर के वैज्ञानिकों ने कृषि की नवीनतम तकनीकी
जानकारियां दीं। नवीनतम कृषि यंन्त्रों का प्रदर्शन भी कृषकों
के सामने किया गया।
मंडलायुक्त की समीक्षा बैठक
अलीगढ़। अलीगढ़ के मंडलायुक्त डा पीवी जगनमोहन की
अध्यक्षता में 6 नवम्बर को नुमाईश ग्राउंड, स्थिति आयुक्त
सभागार में प्रातः10 बजे से वर्ष 2009-10 में वर्ष 1995-96 में
चयनित अम्बेडकर ग्रामों में कराये गये विकास कार्यों की मंडल
स्तर पर समीक्षा बैठक होगी। अपरान्ह 1-30 बजे से 3-30 बजे तक
कानून व्यवस्था की समीक्षा बैठक होगी। मंडल स्तरीय अधिकारियों
को निदर्शित किया गया है कि वे बैठक से संबंधित विवरण पत्र
सहित बैठक में उपस्थित हों।
एएमयू
अनिश्िचतकाल के लिए बंद
अलीगढ़। अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के छात्र
शाहनवाज़ की हत्या का मामला एएमयू को अनिश्िचतकाल के लिए बंद
करने के फैसले तक पहुंच गया। शुक्रवार की शाम को एएमयू प्रशासन
ने घोषणा की कि विश्वविद्यालय को अनिश्िचतकाल के लिए बंद
किया जाता है। छात्रों को अड़तालिस घंटों के भीतर छात्रावास
खाली करके अपने घर चले जाने को कहा गया है। उनके जाने के लिए
एएमयू प्रशासन ने 100 विशेष बसों का प्रबंध किया है और 10
विशेष रेलगाड़ियों की व्यवस्था की बात कही है। जो रेलगाड़ियां
अलीगढ़ से गुजरती हैं उनमें भी दो विशेष बोगियां लगवाने की
कोशिश की जा रही हैं।
कुलपति प्रोफेसर अब्दुल अजीज़ ने अपने लिए पीड़ादायक
कदम बताया और कहा कि घटनाक्रम को देखते हुए एएमयू प्रशासन के
सामने इसके अलावा कोई चारा नही बचा था। उन्होंने किसी भी
प्रकार के दबाव को मानने और एएमयू परिसर में बाहरी तत्वों के
प्रवेश करने के प्रयास को विफल करते हुए आंदोलनकारी छात्रों से
बार-बार अपील की थी कि वे इस कठिन दौर में परिसर में
शांतिपूर्ण वातावरण स्थापित करते हुए कक्षाओं को सुचारू रूप से
चलाने में मदद करें। कई दिन से कुछ छात्र बाब-ए-सय्यद गेट पर
धरना देकर कुलपति और दो अन्य शीर्ष अधिकारियों के इस्तीफे की
मांग और छात्रसंघ चुनाव कराने की मांग पर अड़े हुए थे लेकिन
एएमयू प्रशासन ने उनके दबाव को नही माना और हालात सामान्य
बनाने के काफी प्रयास करने के बाद विश्वविद्यालय को
अनिश्िचतकाल के लिए बंद करने के आदेश दे दिए।
अलीगढ़ के रेलवे स्टेशन के बाहर एक होटल के सामने एएमयू
के छात्र शाहनवाज़ की एक अपराधी के हाथों हत्या हुई थी। कहा
जाता है कि इसके बाद एएमयू के छात्रों ने रेलवे स्टेशन पर
ट्रैक पर जाकर हंगामा किया और रेलें रोक दी। इससे यहां के
हालात खराब होते चले गए और छात्र आंदोलन पर उतर आए। तीन छात्र
बाब-ए-सय्यद गेट पर हड़ताल पर बैठ गए और कुलपति सहित दो अन्य
अधिकारियों के इस्तीफे की मांग करने लगे। इस आंदोलन में बाहर
के लोग भी शामिल हो गए जो कभी एएमयू के भी छात्र रहे हैं।
एएमयू प्रशासन ने काफी कोशिशें कीं कि हालात सामान्य हों लेकिन
छात्रों के आंदोलन में बाहर के लोगों की सक्रियता को देखते हुए
एएमयू प्रशासन ने शुक्रवार को एएमयू को अनिश्िचतकाल के लिए
बंद करने का फैसला ले लिया।
छात्रों को यहां से भेजने को देखते हुए ऐसा लगता है कि
एएमयू प्रशासन पहले ही एएमयू को बंद करने का फैसला ले चुका था।
एएमयू के अनिश्िचतकाल के लिए बंद कर देने की खबर आने के बाद
भी छात्रों का धरना जारी रहा। छात्रों का कहना है कि वे अपनी
लड़ाई जारी रखेंगे और यहां से लेकर दिल्ली तक धरना देंगे।
छात्रों ने फिर से कुलपति का इस्तीफा मांगा है। एएमयू को बंद
करने की खबर मिलते ही छात्रों में खलबली मच गई और छात्र अपने
हॉस्टलों में जाकर अपना सामान समेटने लगे हैं।
रेलवे ट्रैक पर उपद्रव में
एएमयू के छात्र शामिल नहीं-एसएसपी
अलीगढ़। अलीगढ़ के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक असीम अरूण ने
एएमयू के आंदोलनरत छात्रों को अवगत कराया है कि शाहनवाज मामले
में रेलवे स्टेशन पर उपद्रव करने वालो में प्राथमिकी में नामजद
व्यक्तियों-छात्रों के नाम घटना स्थल पर उनसे ही बातों-बातों
में पूछकर ज्ञात किये गये थे और उसी आधार पर थाना सिविल लाइन्स
पर अभियोग में नामजदगी की गई थी। उसकी गहराई से विवेचना में
फोटोग्राफ मिलान और अन्य श्रोतों से ज्ञात हुआ है कि उन
छात्रों-व्यक्तियों ने उस समय गलत नाम बताकर पुलिस को भ्रमित
किया था। अब जो सही नाम प्रकाश में आ रहे हैं वे न तो वर्तमान
में विश्वविद्यालय के छात्र हैं और न ही वे ऐसी पात्रता रखते
हैं कि भविष्य में एएमयू के छात्र बन सकें।
एसएसपी का कहना है कि रेलवे स्टेशन के आस-पास मौजूद सभी
छात्र पुलिस प्रशासन के समझाने पर वापस चले गये थे, केवल 14-15
छात्र-व्यक्ति ही शेष थे जिन्हें हल्का बल प्रयोग कर रेलवे
ट्रैक से हटाया गया। जो व्यक्ति ट्रैक से नहीं हटे, उनके खिलाफ
कानूनी कार्रवाई अमल में अवश्य लाई जाएगी। अभी तक की जांच से
प्रकाश में आये नामों में कोई भी वर्तमान में एएमयू का छात्र
नहीं है। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक ने एएमयू के छात्रों से अपील की
है कि वे ऐसे छात्रों-व्यक्तियों के विरूद्ध कानूनी कार्रवाई
करने में पुलिस प्रशासन को सहयोग दें जो गैर कानूनी कार्यो में
लिप्त थे। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक का कहना है कि प्रजातान्त्रिक
व्यवस्था में सभी को अपनी बात कहने और संविधान सम्मत मांगों के
लिए गांधीवादी तरीके से प्रदर्शन-आन्दोलन करने का अधिकार है।
जब तक छात्र कानून के दायरे में रहकर आंदोलन या कोई कार्य
करेंगे तब तक पुलिस प्रशासन उनके साथ है। छात्र यह भी ध्यान
रखें कि रेलवे स्टेशन की तरह भविष्य में कोई भी बाहरी-अपराधिक
तत्व उनके बीच घुसकर गड़बड़ी न फैला सके।
एएमयू में खींच-तान,
धरना जारी, हालात अभी सामान्य नहीं
अलीगढ़ । छात्रों में एएमयू को अनिश्चितकाल के लिए बंद
करने की चर्चाओं के बीच एएमयू प्रशासन ने दावा किया है कि
शाहनवाज की हत्या के बिगड़े माहौल पर नियंत्रण पा लिया गया है
और अब परिसर में हालात सामान्य हो रहे हैं। सभी विभागों और
विश्वविद्यालय से सम्बन्धित स्कूलों में शैक्षणिक गतिविधियां
शुरू हो गई हैं। जो छात्र धरने पर आंदोलनरत हैं, कुलपति
प्रोफेसर पीके अब्दुल अजीज की टीम उनसे धरना खत्म करने के लिए
बात-चीत जारी रखे हुए है। उधर विश्वविद्यालय के छात्रों का एक
वर्ग कह रहा है कि उन्होंने जो मांगे रखी हुई हैं उनके पूरा
हुए बगैर धरना और आंदोलन वापस नहीं होगा। दिल्ली में एएमयू
ओल्ड ब्याज़ एसोसिएशन की एक बैठक भी हुई है जिसमे एसोसिएशन के
नेताओं ने एएमयू के आंदोलनरत छात्रों की मांगों को जायज़ मानते
हुए अपना समर्थन दिया है। एसोसिएशन के नेता और एएमयू छात्रसंघ
के पूर्व अध्यक्ष खालिद मसूद ने छात्रों के बीच में आकर अपनी
तकरीर में कुलपति को छात्रों के मामले में हठधर्मी बताया और उन
पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाकर उनसे नैतिकता के आधार पर
इस्तीफा भी मांगा। यहां के हालात देखकर एएमयू में छात्रों का
बड़ा वर्ग बड़ी दुविधा में हैं कि वह क्या करे? वह अपने भविष्य
के लिये चिंतित है, और अपनी पढ़ाई लिखाई में व्यस्त रहना चाहता
है। ग्रीवेंस कमेटी के छात्रों का कहना है कि एएमयू का एक वर्ग
ही ऐसा है जो छात्रों के बीच में राजनीतिक गतिविधियों को
विस्तार देने के लिए छात्रसंघ चुनाव के जरिए परिसर में सक्रिय
रहना चाहता है।
विश्वविद्यालय के वरिष्ठ प्राध्यापकों ने प्रोफेसर एम
सलीमउद्दीन के नेतृत्व में धरने पर बैठे छात्रों से भेंट कर
उनसे आग्रह किया कि वह विश्वविद्यालय के छात्रों के हितों को
ध्यान में रखते हुए अपना धरना समाप्त कर दें, परंतु एक छात्र
के सहमत न होने के कारण धरना समाप्त नहीं हो सका। कहा जा रहा
है कि छात्र इस बात पर राजी थे कि धरने को खत्म कर उनकी
समस्याओं का निदान बातचीत से हो जाए। दिल्ली में एएमयू ओल्ड
ब्याज़ एसोसिएशन के नेताओं ने जिस प्रकार इस धरने को समर्थन
दिया है उससे लगता है कि यह मामला और आगे तक जा सकता है मगर इस
बात की गारंटी नहीं है कि एएमयू प्रशासन छात्रों की मांगे मान
लेगा या वह इस आंदोलन से घबरा जाएगा। कुलपति इस बात पर कतई
तैयार नहीं हैं कि शाहनवाज की मौत की दुखद घटना को छात्रसंघ की
राजनीति के लिए इस्तेमाल किया जाए। उन्होंने विश्वविद्यालय में
शांति व्यवस्था के जो उपाय किए हैं उनमे एक यह भी है कि
उन्होंने अलीगढ़ जिला प्रशासन से बात करके उन छात्रों को राहत
दिलवाई है जिनके नाम सुनी सुनाई बातों पर एफआईआर में आ गए थे।
एसएसपी अलीगढ़ असीम अरूण ने भी छात्रों से अपील में यह स्थिति
स्पष्ट कर दी है।
कुलपति बराबर वरिष्ठ शिक्षकों से भेंटवार्ता कर रहे हैं
ताकि परस्पर सहयोग से विश्वविद्यालय की स्थिति को सामान्य हो
सके। उन्होंने समस्त आवासीय और गैर आवासीय हालों के प्रवोस्टों
की मीटिंग में वर्तमान स्थिति की समीक्षा की है और प्रवोस्टों
से आग्रह किया है कि रात्रि में भी छात्रावासों पर कड़ी
निगरानी रखी जाये ताकि अवांछनीय तत्व मौके का फायदा न उठा
सकें। कुलपति ने प्रवोस्टों की मीटिंग के बाद समस्त संकायों के
डीन और कॉलेजों के प्राचार्यो की मीटिंग भी बुलाई जिसमें
कक्षाओं को नियमित तरीके से चलाने के लिये रूप रेखा तैयार की
गई। सभी डीन संकाय अपने अपने संकायों में सुबह से ही मौजूद
रहेंगे ताकि छात्रों की पढ़ाई को सुचारू रूप से जारी रखा जाये।
कुछ युवकों ने कक्षाओं में व्यवधान डालने का प्रयास भी किया।
वह अपने चेहरों को ढक कर कक्षाओं के बहिष्कार के लिये छात्रों
को उकसा और धमका रहे थे। एएमयू प्रशासन की यह बड़ी चिंता नहीं
है कि छात्र धरने पर बैठे हैं बल्कि चिंता यह है कि इनकी आड़
में असामाजिक और बाहरी तत्व परिसर में घुसपैठ करके अशांति
फैलाने की कोशिश में कामयाब न हो जाएं।
विश्वविद्यालय प्रशासन ने नियमित कक्षाओं के लिये
वरिष्ठ प्राध्यापकों के पॉच ग्रुप बनाये हैं। प्रोक्टर
प्रोफेसर मुजफ्फर ए सिद्दीकी और डीए सडब्ल्यू भी बराबर परिसर
में घूम रहे हैं ताकि शरारती तत्वों पर अंकुश लगाया जा सके। एक
दो जगह कक्षाओं में व्यवधान डालने का प्रयास भी किया गया परंतु
वह अपने उद्देश्यों में सफल नहीं हो सके। छात्रों से भी अपील
की गई है कि वह गुमराह करने वाले तत्वों से सावधान रहें और
कक्षाओं में उपस्थित होकर शांतिपूर्ण वातावरण को बनाये रखने
में सहयोग प्रदान करें। आंदोलन करने वाले छात्रों की यह मंशा
तो स्पष्ट है कि वे परिसर में राजनीतिक गतिविधियों की बहाली
चाहते हैं लेकिन एएमयू प्रशासन चाहता है कि परिसर की संवेदनशील
स्थिति को देखते हुए यहां ऐसी गतिविधियों की इज़ाजत देने का
मतलब है कि परिसर का शैक्षणिक माहौल चौपट करना। कुलपति पहले से
ही ईसी और प्राध्यापकों की गुटबाज़ी का सामना करते आ रहे हैं
इसलिए वे नहीं चाहते कि छात्रसंघ चुनाव करा कर एक और मोर्चा
खुले। कुलपति की इस नीति का अलीगढ़ के गणमान्य लोग और एएमयू
प्रशासन के अधिकारी भी समर्थन करते हैं।
एएमयू के वर्तमान हालात सामान्य नहीं कहे जा सकते
क्योंकि छात्रों का धरना जारी रहने तक स्थिति में कोई बदलाव
नहीं दिख सकता। हॉस्टल में रहने वाले बहुत से छात्र यहां का
माहौल देखकर अपने घरों को भी चले गए हैं जोकि सामान्य स्थिति
होने पर ही वापस आएंगे। कहने वाले बार-बार कह रहे हैं कि
विश्वविद्यालय प्रशासन ने इन छात्रों की व्यवहारिक समस्याओं की
अनदेखी नहीं की होती तो आज यह नौबत नहीं आती। माना कि कुलपति
का पक्ष सही है लेकिन विश्वविद्यालय के छात्रों के संपर्क में
रहने वाले उनके अधिकारियों ने जिम्मेदारी से अपने कर्तव्यों का
निर्वहन नहीं किया तभी आज छात्रों और प्रशासन के बीच तनाव बढ़
गया है। आंदोलन करने वाले छात्रों से बार-बार अपील की जा रही
है कि वे अपना आंदोलन वापस ले लें, देखिए, आगे क्या होता है।
प्रोफेसर राकेश भार्गव का
अमरीका में व्याख्यान
अलीगढ़ । एएमयू के जवाहर लाल नेहरू मेडीकल कॉलेज के टीबी
एण्ड चेस्ट डिजीज़ विभाग के अध्यक्ष प्रोफेसर राकेश भार्गव को
अमेरिका में आयोजित होने वाली अमेरिकन कॉलेज ऑफ चेस्ट फिजिशियन
कांफ्रेंस में आमंत्रित किया गया है। अमेरिका के सेनटियागो शहर
में 5 नवम्बर तक आयोजित होने वाली इस कांफ्रेंस में प्रोफेसर
राकेश भार्गव अनएक्सपलोर्ड एसोशिएशन ऑफ बांक्रोजेनिक केरसीनोमा
एण्ड एसपरग्लोसिस विषय पर अपना शोध पत्र प्रस्तुत करेंगे। प्रोफेसर भार्गव ने अपने शोध पत्र में इस बात का पता
लगाया है कि फेफड़ों के कैंसर के 45 प्रतिशत मरीजों में फफूंद
का संक्रमण पाया गया। ऐसा अध्ययन विश्वविद्यालय के चिकित्सा
जगत में पहली बार किया गया है। इस विषय पर और अधिक शोध कर इस
बात का पता लगाया जाएगा कि कहीं फेफड़ों के कैंसर के लिए फफूंद
का संक्रमण तो कार्य नहीं कर रहा है। प्रोफेसर राकेश भार्गव
इसके अलावा वार्षिक दीक्षान्त समारोह में अमेरिकन कॉलेज ऑफ
चेस्ट फिजिशियन (एफसीसीपी) की फैलोशिप भी ग्रहण करेंगे।
एएमयू के तीन छात्र
भूख-हड़ताल पर
अलीगढ़। अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में बाब-ए-सय्यद
गेट पर तीन छात्र भूख-हड़ताल पर बैठे हुए हैं इससे एएमयू परिसर
का वातावरण राजनीति से काफी गर्माया हुआ है। जेएनयू और जामिया
मिल्लिया दिल्ली के छात्र नेताओं ने भी यहां आकर छात्रों के
बीच में भाषण किया और छात्रों की मांगों का समर्थन किया। धरने
पर बैठे छात्र हैं मोहम्मद शहजान, इब्राहिम और सय्यद मुकर्रम
अली जिनका कहना है कि कुलपति, प्राक्टर और डीएसडब्ल्यू जब तक
इस्तीफा नही देते हैं तब तक वह अपनी भूख-हड़ताल खत्म नही
करेंगे। इनकी मांग छात्रसंघ चुनाव की भी है। उधर एएमयू प्रशासन
ने मौलाना लाइब्रेरी बंद कराने गए सात छात्रों को बुल ने
पकड़कर उनके परिचय-पत्र ज़ब्त कर लिए और लिखा-पढ़ी के बाद
उन्हें चेतावनी देकर परिसर से बाहर कर दिया। परिसर में धरने पर
भारी संख्या में छात्र इकट्ठा हुए।
एएमयू छात्रसंघ के पूर्व अध्यक्ष अब्दुल हफीज गांधी, और
उनके समय छात्रसंघ के सचिव रहे फर्रूक खान, जेएनयू दिल्ली
छात्रसंघ के अध्यक्ष संदीप सिंह, संयुक्त सचिव मुबीन खान और
जामिया मिल्लिया के सामान्य स्तर के छात्रनेता तो यहां आए
लेकिन इनके अलावा एएमयू का कोई और नामधारी नेता नही पहुंचा
जिससे कि समझा जाता है कि इन छात्रों के आंदोलन को पर्दे के
पीछे से शह मिल सकती है लेकिन कोई बड़ा नेता सामने आने को
तैयार नही है। एएमयू प्रशासन भी किसी भी स्थिति से निपटने के
लिए तैयार है। कुलपति ने छात्रों की समस्याओं का पता लगाने के
लिए एक कमेटी गठित कर दी है और एएमयू परिसर की शांति व्यवस्था
बनाए रखने के लिए छात्रों से बातचीत की प्रक्रिया को सद्भाव
तरीके से चालू रखा है। परिसर में पुलिस की रैपिड एक्शन फोर्स
ने भी गश्त की है और जिला प्रशासन भी चौकन्ना है।
अलीगढ़ के वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक असीम अरूण ने छात्रों
से शांति-व्यवस्था बनाए रखने की अपील करते हुए कहा है कि वे
केवल प्रजातांत्रिक तरीके से अपनी मांगों और समस्याओं को एएमयू
प्रशासन के सामने रखें लेकिन कानून हाथ में नही लें अन्यथा
प्रशासन कड़े कदम उठाएगा। छात्रों का एक गुस्सा इस कारण भी है
क्योंकि शाहनवाज़ की रेलवे स्टेशन के बाहर हत्या के बाद
छात्रों के रेलवे स्टेशन पर गाड़ी रोकने और उपद्रव करने के
आरोप में कई छात्रों के खिलाफ एफआईआर में सीआरपीसी की गंभीर
धाराएं लगाई गई हैं जिन्हें तत्काल हटाया जाए। एएमयू प्रशासन
ने पुलिस प्रशासन से बात करने की बात कही है लेकिन एएमयू
प्रशासन इन छात्रों की इस्तीफे वाली मांग को मानने को तैयार
नही है जिससे छात्रों और एएमयू प्रशासन के बीच गतिरोध बना हुआ
है।
एएमयू के पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष अब्दुल हफीज गांधी और
जेएनयू दिल्ली छात्रसंघ के अध्यक्ष संदीप सिंह सहित कई छात्र
नेताओं ने धरने पर बैठे छात्रों को संबोधित किया और कहा कि
किसी भी छात्र के उत्पीड़न को बर्दाश्त नही किया जाएगा।
उन्होंने एएमयू में छात्रसंघ चुनाव की वकालत की और छात्रों को
अपना पूर्ण समर्थन दिया। एएमयू प्रशासन दिन भर छात्रों की
परिसर में गतिविधियों का पर्यवेक्षण करता रहा और इस बात की
कोशिश की कि छात्र किसी प्रकार की कोई उत्तेजनात्मक कार्रवाई न
कर सकें। छात्रों से वीसी की टीम भी वार्ता करने आई थी और उसने
कहा कि उनकी मांगें उचित नही हैं। मगर छात्र प्रशासन की बात को
नही मान रहे हैं। धरना जारी है और अपने धरने का समर्थन हासिल
करने के लिए ये छात्र एएमयू के पूर्व छात्र नेताओं से संपर्क
कर रहे हैं। जहां तक एएमयू से जुड़े बौद्धिक वर्ग और शहर के
संभ्रांत और प्रभावशाली नागरिकों का प्रश्न है वे भी छात्रों
से सहानुभूति तो रखते हैं लेकिन इस तरह से उनके आंदोलन को वे
भी समर्थन नही कर रहे हैं। यही कारण है कि एएमयू के कुछ लोग
सीधे सामने आने से कतरा रहे हैं।
फिज़ा खराब करने की इज़ाजत
नहीं-कुलपति और ग्रीवैंस कमेटी
अलीगढ़ ।
एएमयूकी वर्तमान स्थिति पर विचार-विमर्श करने के लिए कुलपति
प्रोफेसर पीके अब्दुल अजीज की अध्यक्षता में ग्रीवैंस कमेटी की
एक महत्वपूर्ण बैठक पॉलिटेक्निक सभागार में हुई जिसमें
सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि विश्वविद्यालय परिसर में
शांतिपूर्ण शैक्षणिक वातावरण में जो भी तत्व व्यवधान डालने का
प्रयास कर रहे हैं, उनके विरूद्ध कड़ी कार्रवाई की जाए और
बाहरी तत्वों को परिसर में घुसने न दिया जाए। आवासीय और गैर
आवासीय हालों के लगभग डेढ़ सौ छात्रों ने कुलपति को भरोसा
दिलाया कि इस कठिन घड़ी में वह पूरी तरह से संस्था की गरिमा और
प्रतिष्ठा को बनाये रखेंगे और स्थिति को सामान्य बनाने में
विश्वविद्यालय प्रशासन को हर तरह से सहयोग प्रदान करेंगे।
ग्रीवैंस कमेटी के छात्र और छात्राओं ने कहा कि उनकी जो
भी समस्याएं हैं उनका हल बाद में किया जाना चाहिए, पहली
प्राथमिकता छात्रों के भविष्य और परिसर में शांतिपूर्ण वातावरण
की है। छात्रों ने कुलपति से आग्रह किया कि किसी भी स्थिति में
विश्वविद्यालय को बंद न किया जाए क्योंकि इसका सीधा प्रभाव
छात्रों के भविष्य पर पड़ेगा। इस बात को भी बैठक में प्रमुखता
से कहा गया कि ग्रीवैंस कमेटी में जो भी छात्र हैं वह इस एएमयू
के मेधावी छात्र हैं। छात्रों ने कहा कि जो लोग भी कुलपति और
अन्य अधिकारियों के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं वह एएमयू में
गड़बड़ी पैदा करना चाहते हैं ताकि विश्वविद्यालय में अराजकता
का माहौल फिर से कायम हो जाए। छात्रों ने कहा कि वे इस तरह की
मांग की भर्त्सना करते है।
बैठक में इन छात्रों का यह भी कहना था कि कुछ बाहरी
तत्वों ने क्लासों में व्यवधान डालने का प्रयास भी किया जिनका
उद्देश्य विश्वविद्यालय को बंद कराने का है इसलिए ऐसे तत्वों
से सख्ती से निपटा जाए और यदि आवश्यकता हो तो जिला प्रशासन का
सहयोग भी हासिल किया जाए। कुलपति प्रोफेसर अजीज ने कहा कि
विश्वविद्यालय प्रशासन का यही उद्देश्य है कि परिसर में शांति
व्यवस्था बनी रहे और अपराधिक तत्वों को परिसर में घुसने न दिया
जाए। उन्होंने कहा कि एएमयू को किसी भी हालत में बंद नहीं होने
दिया जाएगा और शैक्षणिक वातावरण में जो लोग व्यवधान डालने का
प्रयास कर रहे हैं उनके विरूद्ध कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
कुलपति ने कहा कि छात्रों की जायज मांगों को पूरा किया
जाएगा। उन्होंने कहा कि मानवीय संवेदनाओं को ध्यान में रखा
जाना चाहिए, धरना प्रदर्शन से किसी भी समस्या को हल नहीं किया
जा सकता। कुलपति ने कहा कि छात्रों की सुरक्षा उनकी पहली
प्राथमिकता है, वह सभी छात्र गुटों से वार्ता कर रहे है और
वर्तमान स्थिति को सामान्य बनाने में सभी का सहयोग प्राप्त कर
रहे हैं। कुलपति ने स्पष्ट किया कि वह परिसर में पुलिस फोर्स
के इस्तेमाल के पक्ष में नहीं हैं। इस धरने में वही लोग शामिल
हैं जिन्होंने सितम्बर 2007 में विश्वविद्यालय में अशान्ति
फैलाई थी जिसकी वजह से विश्वविद्यालय को अनिश्चितकाल के लिए
बंद करना पड़ा था। उन्होंने धरने पर बैठे छात्रों से अपील की
है कि विश्वविद्यालय के हितों को ध्यान में रखते हुए वे अपना
धरना समाप्त करें।
वरिष्ठ प्राध्यापक प्रोफेसर एम सलीमउद्दीन ने कहा कि
विश्वविद्यालय को सामान्य बनाये रखने के लिये जरूरी है कि
परिसर में पूरी तरह शान्ति का वातावरण कायम हो। उन्होंने कहा
कि यदि विश्वविद्यालय को बंद किया जाता है तो इसका सबसे बड़ा
नुकसान छात्रों का ही होगा, जबकि कुछ दिग्भ्रमित लोग इस तरह का
वातावरण उत्पन्न कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि छात्रों के
अभिभावकों से भी सम्पर्क स्थापित किया जा रहा है ताकि वह अपने
बच्चों को समझा सकें। रजिस्ट्रार प्रोफेसर वीके अब्दुल जलील ने
भी अपने विचार और सुझाव रखे और छात्रों का सहयोग बनाए रखने के
लिए धन्यवाद दिया।
इससे पूर्व शहर के गणमान्य नागरिकों और यूनिवर्सिटी
कोर्ट के निर्वाचित सदस्यों की एक बैठक कुलपति निवास पर हुई
जिसमें नवाब इब्ने सईद ऑफ छतारी, विवेक बंसल एमएलसी, प्रोफेसर
हकीम जिल्लुर्रहमान, प्रोफेसर जकिया अथर सिद्दीकी, प्रोफेसर
रियाजउर्रहमान खान शेरवानी, प्रोफेसर अली अख्तर खान ने भी
परिसर में शान्ति व्यवस्था को बनाये रखने में विश्वविद्यालय
प्रशासन को सहयोग देने और अवांछनीय तत्वों को चिन्हित कर उनके
विरूद्ध कड़ी कार्रवाई में साथ देने की बात कही।
छात्रों की सभी समस्याओं पर
कमेटी गठित
अलीगढ़। एएमयू के कुलपति प्रोफेसर पीके अब्दुल अजीज ने
डीन स्टूडैंटस वैलफेयर प्रोफेसर मुहम्मद जुबैर खान के संयोजन
में समस्त संकायों के डीन की एक कमेटी गठित की है जो छात्रों
की आवासीय और पढ़ाई से सम्बन्धित सभी समस्याओं को चिन्हित कर
एक महीने के भीतर विस्तृत रिपोर्ट तैयार करके कुलपति को
प्रस्तुत करेगी ताकि छात्रों की समस्याओं का समाधान हो सके और
उन्हें बेहतर से बेहतर सुविधायें उपलब्ध हो सकें।
एएमयू प्रशासन का छात्रों से
सीधे संवाद
अलीगढ़। मुस्लिम विश्वविद्यालय प्रशासन ने व्यापक
पैमाने पर छात्रों से सीधे संवाद का अभियान शुरू किया है जिसके
अन्तर्गत कुलपति, समस्त संकायों के डीन और आवासीय हालों के
प्रवोस्टों ने सभी आवासीय हालों के डेढ़ सौ से अधिक
छात्र-छात्राओं से अपने-अपने स्तर पर भेंट की ताकि आपसी विचार
विमर्श से उनकी सभी समस्याओं का हल निकाला जा सके।
पॉलिटेक्निक सभागार में छात्रों ने ग्रीवैंस कमेटी की
बैठक में जो भी समस्याएं रखी थीं उनका भी निदान किया जायेगा।
छात्रों ने समस्त संकायों के डीन और आवासीय हालों के
प्रवोस्टों के साथ बैठक में भी अपनी समस्यायें रखीं थीं। इन
सभी समस्याओं के निवारण के लिये कुलपति की अध्यक्षता में उनके
निवास पर बुधवार की शाम को एक बैठक हुई।
छात्रों ने जो प्रमुख तौर पर अपनी समस्यायें प्रस्तुत
की हैं उनमें सैंट्रल कैन्टीन को अधिक समय तक खोलने, आवासीय
हालों में कैन्टीन स्थापित करने, खाने की गुणवत्ता पर ध्यान
देने, रीडिंग रूम की स्थापना और नई पुस्तकें उपलब्ध कराने,
विद्युत समस्या, अपने अभिभावकों को गेस्ट हाउस में ठहराने की
व्यवस्था करने, छात्रावासों के बाहर साइकिल स्टैंड की व्यवस्था
जैसे मुद्दो को उठाया है। कुलपति ने कहा कि सभी डीन संकाय
अपने-अपने स्तर पर छात्रों की समस्याओं का पता लगाकर एक
विस्तृत रिपोर्ट तैयार करें ताकि उस पर अमल किया जा सके और
छात्रों को बेहतर सुविधायें उपलब्ध कराई जा सकें।
शाहनवाज़ बना छात्रसंघ चुनाव का मुद्दा
अलीगढ़ ।
अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के छात्र शाहनवाज़ की हत्या का
मामला ठंडा नहीं हुआ है अपितु एएमयू के छात्रों ने
विश्वविद्यालय प्रशासन के सामने अपने मांगे रखकर इस मामले को
और ज्यादा मुखर बना दिया है। यूं तो छात्रों का एक वर्ग काफी
समय से विश्वविद्यालय प्रशासन की कार्यप्रणाली से असंतुष्ट चल
रहा है, उसे शाहनवाज़ की हत्या के मामले
ने और मौका दे दिया
है जिससे एएमयू प्रशासन भारी दबाव में है और वह किसी भी प्रकार
से इस कठिन दौर से निकलने की कोशिश कर रहा है। बाब-ए-सय्यद गेट
पर छात्रों के जमावड़े और एएमयू प्रशासन के कक्षाएं सुचारू रूप
से फिर से शुरू होने के दावे में बहुत अंतर दिखाई देता है। इस
घटनाक्रम से शांतिपूर्ण तरीके से निपटने में एएमयू प्रशासन की
लाचारी और उसकी विफलताएं साफ दिखती हैं। शाहनवाज़ की हत्या
एएमयू परिसर के बाहर हुई है और इसे एक अपराधी ने नाहक ही अंजाम
दिया है, यदि यह हत्या एएमयू परिसर में हो गई होती तो एएमयू की
शांति-व्यवस्था का क्या हाल होता इसकी कल्पना नही की जा सकती।
सवाल है कि यदि एएमयू में अब सब-कुछ सामान्य हो गया है
तो फिर एएमयू प्रशासन के किसलिए हाथ-पांव फूले हुए है
और उसके अधिकारी परिसर में शांति बनाए रखने के लिए बैठकें और
अपीलें कर रहे हैं? जाहिर है कि मामला बहुत गर्माया हुआ है और
एएमयू प्रशासन के नियंत्रण के बाहर जाता दिख रहा है। छात्रों
ने साफ-साफ कहा है कि कुलपति और उनके शीर्ष अधिकारी हालात से
निपटने में विफल साबित हुए हैं और वे अब भी उसी ढुल-मुल
कार्यप्रणाली से चल रहे हैं और वे छात्रों की समस्याओं पर
ध्यान न देकर विश्वविद्यालयों की ईसी और प्राध्यापकों की
आंतरिक राजनीति में उलझे हुए हैं। छात्रों का कहना है कि उनकी
समस्याओं को छात्रों के नज़रिये से नही देखा जा रहा है इसलिए
एएमयू प्रशासन और छात्रों के बीच इस समय संबंध तनावपूर्ण हैं।
कुलपति प्रोफेसर अब्दुल अजीज के बारे में कहा जा रहा है
कि वे निश्िचत रूप से एक विद्वान और शरीफ इंसान हैं और एएमयू
की बेहतरी के लिए काम भी कर रहे हैं मगर जहां तक उनके प्रशासन
का प्रश्न है कि उसमें वह कमजोर साबित हो रहे हैं यही कारण है
कि एएमयू का एक तबका जो शुरू से ही एएमयू में दबाव की राजनीति
करता है उससे निपटने में नाकाम हो रहे हैं। इसका सबसे बड़ा
नुकसान छात्रों का हो रहा है जिसमें उनकी दैनिक समस्याएं बढ़ती
जा रही हैं और उनके सही समाधान सामने नही हैं। छात्रसंघ चुनाव
की वकालत करते हुए वर्तमान और पूर्व छात्रों का कहना है कि
बहुत सारी समस्याओं की जड़ एएमयू में छात्रसंघ चुनाव पर
प्रतिबंध का लगना है। इसके विपरीत एएमयू प्रशासन का तर्क है कि
चूंकि परिसर में अराजक तत्वों का बोल-बाला हो जाता है और पढ़ाई
का वातावरण दूषित होता है इसलिए इन चुनावों पर रोक लगाई गई है।
एएमयू प्रशासन का यह भी दावा है कि कुछ घटनाओं को छोड़कर परिसर
में शैक्षणिक वातावरण अच्छा है।
छात्रसंघ चुनाव की मांग को लेकर एएमयू में अलग-अलग मत
हैं। कुछ छात्रों और प्राध्यापकों का कहना है कि यह चुनाव बहुत
जरूरी हैं क्योंकि एएमयू में पढ़ाई के साथ-साथ लीडरशिप के
विकास की भी बहुत आवश्यकता है। यह सभी जानते हैं कि क्वालिटी
लीडरशिप के लिए विश्वविद्यालय ही उपयुक्त पाठशालाएं हैं
क्योंकि यहां से ही छात्र अपनी मर्जी और प्रतिभा के हिसाब से
अपने भविष्य के रास्ते का निर्धारण करते हैं। छात्रों को यदि
परिसर में राजनीतिक गतिविधियों की सीमित छूट नही मिलेगी तो
उनमें राजनीतिक गुण विकसित नही हो सकते क्योंकि यह जरूरी नही
है कि राजनीति में आने वालों की राजनीति ही पृष्ठभूमि हो। यह
विश्वविद्यालय प्रशासन की रणनीतियों का ही दोष कहा जाएगा कि
वह छात्रों में लीडरशिप को विकसित करने में विफल होता आया है।
छात्रसंघ्ा चुनाव पर प्रतिबंध भी हों और छात्रों की जरूरी
समस्याओं का समाधान भी न हो तो इसमें टकराव को कौन रोक सकता
है? अकेले कुलपति ही यहां की समस्याओं की दवा नही हैं, छात्रों
की भी बहुत बड़ी जिम्मेदारी है, जिनकी आड़ में यहां अराजकतत्व
शरारत के मौके तलाशते हैं।
एएमयू में एक तबका पूरी तरह से छात्रसंघ चुनाव के खिलाफ
है और उसका कहना है कि इन दो दशकों में छात्रसंघ चुनाव के नाम
पर अराजकतत्वों का एएमयू परिसर में जो नंगा-नाच हुआ है उसको
देखते हुए परिसर का माहौल और ज्यादा बिगड़ने की इजाजत नहीं दी
जा सकती। माना जा सकता है कि एएमयू ने देश को बड़े-बड़े लीडर
दिए हैं मगर यह भी माना जाना चाहिए कि इसी एएमयू से ऐसी
प्रतिभाएं भी निकली हैं जिन्होंने आज पूरी दुनिया में एएमयू का
नाम रौशन कर रखा है। एएमयू में अगर शैक्षणिक वातावरण उच्च स्तर
का नही होता तो आज दुनिया में एएमयू को एक और ताजमहल न कहा
जाता। कई बार एएमयू में छात्रों की पढ़ाई और राजनीति में काफी गतिरोध
आए जिस कारण विश्वविद्यालय प्रशासन को ऐसे भी निर्णय लेने
पड़े जिनसे सामान्य छात्रों को विद्याध्ययन में कठिनाईयां
आईं लेकिन परिसर में सुरक्षा का माहौल भी स्थापित करना होता है
जिसमें सभी की जिम्मेदारी है। एएमयू में छात्रसंघ चुनाव न
कराने के और भी कारण हैं जिनका संबंध यहां के प्राध्यापकों और
ईसी सदस्यों की आंतरिक गुटबाजी है जिसके
कि छात्र शिकार
ही बने
रहते हैं।
शाहनवाज़
की हत्या से उपजे हालात छात्रों को उकसाए रखने के लिए काफी
हैं। विश्वविद्यालय प्रशासन की यही एक चिंता है कि इन हालातों
को अराजकतत्वों की शह न मिले। एएमयू प्रशासन मान रहा है कि
मौजूदा घटनाक्रम में कुछ अराजकतत्व कूद पड़े हैं और
वे कुछ छात्रों को बहका और भड़का रहे हैं। विभिन्न घटनाओं और
अलीगढ़ जिला प्रशासन की सूचनाओं को देखते हुए परिसर में काफी
चौकसी बढ़ाई गई है, छात्र भी अपनी तरह से विश्वविद्यालय
प्रशासन के सामने विभिन्न मांगे रखकर अपना दबाव बनाए हुए हैं।
इस प्रकार यहां कि स्थिति के सामान्य होने का दावा नही किया जा
सकता, यह अलग बात है कि शाहनवाज़ की हत्या से दुखी एएमयू
प्रशासन ने अपनी ओर से कई कदम उठाए हैं और वह छात्रों से संवाद
स्थापित करने और उनकी समस्याओं को और ज्यादा ध्यान से देखने और
हल करने की कोशिश में लगा है, लेकिन इतना तय है कि एएमयू
प्रशासन छात्रसंघ चुनाव जैसी मांगों पर सहमत नही है, यह अलग
बात है कि इस समय उस पर छात्रों की इस मांग
को पूरा करने का भारी दबाव है।
शाहनवाज़ की आत्मा की शान्ति के
लिए कुरआन ख्वानी
अलीगढ़। एएमयू के एनआरएससी हाल के छात्र शाहनवाज़ आलम
की हत्या पर उसकी आत्मा की शान्ति के लिए वीएम हाल की मस्जिद
में कुरआन ख्वानी की गई, जिसमें प्रवोस्ट डा खालिद बिन यूसुफ
खॉ, वार्डन डा मौहम्मद आमिर, डा अब्दुल्लाह, डा आरफ मतीन, डा
सैयद फ़ैज़ ज़ैदी और सीनियर हॉल इमरान अली खान, सीनियर फूड
सादानउल्लाह खॉ, कॉमन रूम सेक्रेट्री अहमद उसामा, एसपीएम
सुन्नी मुसर्रत अहमद आरजू और डाइनिंग हॉल इन्चार्ज डा राशिद
उस्मानी सहित अनेक छात्रों ने भाग लिया और शाहनवाज़ आलम की
मग़फिरत और शोक संतृप्त परिवार को धैर्य प्रदान करने की दुआ
की। साथ ही सभी छात्रों से शांति सद्भाव बनाये रखने की अपील भी
की गई।
साहित्य कैसे पढ़ें? विषय पर
व्याख्यान
अलीगढ़। एएमयू में हिंदी विभाग की साहित्य-परिषद की
संगोष्ठी में बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय के प्रोफेसर अवधेश
प्रधान ने साहित्य कैसे पढ़ें? विषय पर व्याख्यान दिया।
उन्होंने कहा कि 'साहित्य पढ़ा और सुना दोनों जाता है, यदि हम
कविता की बात करते हैं तो पाते हैं कि कविता पढ़ते या सुनते
समय पाठक, श्रोता पर प्रथम प्रभाव ध्वनि का वर्ण विन्यास का
पड़ता है, कविता हमारे स्तर पर यहीं खुलती है, अर्थ ग्रहण करने
से पूर्व की प्रक्रिया, ध्वनि और वर्ण विन्यास को समझने की है।
कविता का दूसरा स्तर लय पर खुलता है, प्रत्येक रचनाकार की अपनी
लय होती है, इन दोनों स्तरों से गुजरते हुए ही अर्थग्रहण की
प्रक्रिया आती है। अंतिम दशा रसानुभूति की है, कविता की
व्याख्या में रसानुभूति संभव नहीं है।'
प्रोफेसर अवधेश प्रधान ने देव, निराला, कबीर आदि की
कविताओं की व्याख्या करते हुए बताया कि उन्हें किस तरह पढ़ना
चाहिए। उनके अनुसार कविता को समझने के लिए कवि-कविता की मनोदाश
को जानना आवश्यक होता है। कविता में वर्ण विन्यास से लेकर
रसानुभूति तक एक अवयविक एकता होती है, एक क्रमिक विकास होता
है। कविता का तीसरा स्तर व्यंजना का है। कहानी में भी यही गुण
पाया जाता है। भाषा भी इसमें एक कारक है। बड़े रचनाकार की सरल
भाषा इसी कारण कभी-कभी छलती है। कहानी स्वंय कुछ नहीं कहती।
उसके भीतर से अर्थ पाठक स्वयं ग्रहण करता है। साहित्य में छिपे
हुए संदर्भो और संकेतों को पकड़ना भी पाठक के लिए महत्वपूर्ण
है।
डा भरत सिंह ने प्रोफेसर प्रधान के व्याख्यान का
सारगर्भित विश्लेषण करते हुए उनका आभार प्रकट किया।
विभागाध्यक्ष प्रोफेसर एमई जुबैरी ने इस व्याख्यान को युवाओं
के लिए लाभकारी और प्रेरणास्पद बताया। संचालन साहित्य परिषद के
प्रभारी डा आशुतोष कुमार ने किया। प्रोफेसर प्रदीप सक्सेना,
प्रोफेसर आरिफ नजीर, प्रोफेसर कुंज मेत्तर, अजय बिसारिया, डा
इफ्फत असगर, डा वेद प्रकाश, डा आशिक अली, डा रमेश रावत आदि
शिक्षक इस अवसर पर मौजूद थे। शोधार्थी और छात्र-छात्राएं भी
काफी मात्रा में उपस्थित थे जिन्होंने अनेक प्रश्न भी पूछे।
यूनानी मेडीसन संकाय में
कार्यशाला
अलीगढ़। हिफ़जाने सेहत व समाजी तिब विभाग, यूनानी
मेडीसन संकाय में एक कार्यशाला का आयोजन पोलियो के फालिज की
पहचान और रिर्पोटिंग विषय पर नेशनल पोलियो सर्विलेंस प्रोजेक्ट
के सहयोग से किया गया। संगोष्ठी से पूर्व अजमल खॉ तिब्बिया
कॉलेज अस्पताल के बाह्यरोगी विभाग में टीकाकरण केन्द्र का
उद्घाटन मुख्य चिकित्साधिकारी मलखान सिंह जिला चिकित्सालय
अलीगढ़ डा उमाकान्त गुप्ता ने किया, जिसमें जच्चा-बच्चा
तहफ्फुज़ी कार्ड का विमोचन किया गया।
मुख्य अतिथि डा एस मनाजिर अली, निदेशक एमएएस और
विभागाध्यक्ष बाल रोग विभाग, जेएनएमसी एएमयू अलीगढ़ ने संबोधित
करते हुए तिब्बिया कॉलेज अस्पताल में टीकाकरण केन्द्र बनने और
डा एसएम सफदर आरफ को नोडल अधिकारी बनने पर बधाई दी। इस अवसर पर
डीन यूनानी मेडीसिन संकाय, प्रोफेसर ताजउद्दीन, प्रधानाचार्य
हकीम सऊद अली खान भी उपस्थित थे। कार्यशाला में 22 शिक्षकों ने
भाग लिया।
टेक्निकल सेशन में डा सुधीर नायक और डा शाहनवाज़ खान
एसएमओ विश्व स्वास्थय संगठन ने पोलियो के फालिज के संबंध में
विस्तृत जानकारी प्रदान की। डा एसएम सफदर अशरफ नोडल आफीसर
डब्ल्यूएचओ और विभागाध्यक्ष हिफ़ज़ाने सेहत और समाजी तिब विभाग
ने बताया कि कुलपति ने विभाग को पोलियो सर्विलेंस का नोडल
सेंटर बनाने की अनुमति प्रदान की है। इस मौके पर डा फरखुन्दा
जबीं और डा अब्दुल अजीज़ खान, प्रोफेसर अनीस अहमद अन्सारी,
प्रोफेसर खालिदज़मा खान, प्रोफेसर अनीस इस्माइल, प्रोफेसर कमर
अख्तर काज़मी, प्रोफेसर अब्दुल मन्नान, डा आमना नाज़, डा
सुबूही मुस्तफा और डा अम्मार इब्ने अनवर भी उपस्थित थे।
एएमयू में छात्र संयम बरतें-प्राध्यापकों की अपील
अलीगढ़। अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के लगभग दो सौ
वरिष्ठ प्राध्यापकों ने छात्रों के नाम जारी अपील में कहा है
कि एक मेधावी छात्र की जघन्य हत्या से प्राध्यापकों को भी इतना
ही दुःख हुआ है जितना उनको हुआ है। इस घटना का शिक्षकों के
दिलों पर भी गहरा प्रभाव हुआ है। किसी तरह का कोई मुआवजा या
कानूनी कार्यवाही उस बहुमूल्य जान का बदला नहीं हो सकती, जिसको
एक अपराधी ने इतनी बेरहमी के साथ हमसे छीन लिया है।
वरिष्ठ प्राध्यापकों ने छात्रों से अपील की है कि वह इस
संकट की घड़ी में संयम बरतें और इस बात पर भी विशेष ध्यान दें
कि असामाजिक तत्व कहीं छात्रों के विरोध को अपने हितों के लिए
इस्तेमाल न करें और छात्र बिरादरी में शामिल होकर
विश्वविद्यालय की सम्पत्ति को क्षति पहुंचाने का या ऐसा कोई
कृत्य न करें जिससे इस संस्था की गरिमा को ठेस पहुंचे।
छात्रों के नाम अपील में कहा गया है कि यह समय संयम के
साथ विचार-विमर्श करने और समस्या का समाधान ढ़ूंढ़ने का है
जोकि छात्रों के सहयोग से ही सम्भव है। छात्र अपने आवासीय
छात्रावासों, कक्षाओं और विश्वविद्यालय परिसर में आवश्यक
निगरानी रखें ताकि किसी बाहरी तत्व को इस प्रतिष्ठित संस्था के
नाम और इसकी प्रतिष्ठा को आघात पहुंचाने का अवसर उपलब्ध हो। यह
छात्रों के भविष्य के लिये भी जरूरी है कि विश्वविद्यालय परिसर
में जल्द से जल्द शांति का माहौल बहाल हो। अपील में कहा गया है
कि उस छात्र को सबसे बड़ी श्रद्धांजलि यही होगी कि छात्र अपने
भविष्य को बनाने के लिये ज्ञान प्राप्ति को सर्वोच्च प्रमुखता
दें।
बयान पर हस्ताक्षर करने वाले दो सौ प्राध्यापकों में
पूर्व कुलपति प्रोफेसर एम सलीमउद्दीन, स्टाफ एसोसिएशन के पूर्व
अध्यक्ष प्रोफेसर सलीम अख्तर, पूर्व कंट्रोलर प्रोफेसर मुहम्मद
इरफान, पूर्व प्रोक्टर प्रोफेसर रहीम उल्लाह खान, नाजिमे
दीनियात मुफती जाहिद अली खॉ, आटर्स संकाय के पूर्व डीन
प्रोफेसर अबुल कलाम कासिमी, प्रोफेसर तारिक मंसूर, प्रोफेसर
अमानउल्लाह खान, पूर्व डीन प्रोफेसर नूर मुहम्मद, पूर्व
प्रोक्टर प्रोफेसर अखलाक अहमद, डा चक्रवर्ती, प्रोफेसर मुरारी
लाल मिश्रा, डा शकील समदानी प्रमुख हैं। इससे पहले कुलपति
निवास पर वरिष्ठ प्राध्यापकों की एक बैठक में विश्वविद्यालय की
वर्तमान स्थिति पर विचार विमर्श किया गया। बैठक में शांतिपूर्ण
वातावरण के लिये शिक्षकों ने सुझाव भी पेश किये और कुलपति को
पूरे सहयोग का आश्वासन भी दिया।
कुलपति प्रोफेसर अजीज ने कहा कि वह छात्रों के हितों को
सर्वोच्च प्राथमिकता देते हैं और उनसे हर तरह की बातचीत के
लिये तैयार हैं, छात्रों को अपनी समस्याओं को लिखित रूप में
प्रस्तुत करना चाहिये ताकि उनका शीघ्र समाधान हो सके, साथ ही
बाहरी तत्वों से विश्वविद्यालय परिसर को पूरी तरह सुरक्षित रखा
जाये। कुलपति ने छात्रों के अभिभावकों से भी अपील की है कि वह
अपने बच्चों को प्रेरित करें कि वह विश्वविद्यालय में
शांतिपूर्ण वातावरण को बनाये रखने में निजी स्वार्थी तत्वों से
अपने आप को अलग रखें ताकि जिस उद्देश्य की पूर्ति के लिये
अभिभावकों ने उन्हें यहां भेजा है वह पूरा हो सके। एएमयू का
शैक्षिक वातावरण दूषित न हो, छात्रों का दायित्व है कि वे अपने
शिक्षकों का आदर करें और शांति व्यवस्था और अनुशासन को बनाये
रखने में विश्वविद्यालय प्रशासन के साथ सहयोग करें।
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