प्रवर्तन निदेशालय ने भी मांगा अमर सिंह

पर आर्थिक आरोपों का विवरण

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लखनऊ। केंद्र सरकार के प्रवर्तन निदेशालय ने समाजवादी पार्टी के महासचिव और राज्यसभा सदस्य अमर सिंह से जुड़े आर्थिक मामलों का विस्तृत विवरण मांगा है। अमर सिंह पर आरोप है कि उन्होंने पूर्ववर्ती सरकार के कार्यकाल में उप्र विकास परिषद के अध्यक्ष के रूप में अपने पद का दुरूपयोग करते हुए चुनिंदा उद्योगपतियों को हज़ारों करोड़ रूपए के सरकारी ठेके दिए। अमर सिंह से जुड़े कथित आर्थिक घोटाले की कथित सूचना प्राप्त होने के बाद केंद्र सरकार के प्रवर्तन निदेशालय ने अपने पत्र संख्या-पीएमएलए/एमआईएससी/ एलजे़डओ/2009/760 दिनांक 27 अक्टूबर, 2009 के द्वारा उत्तर प्रदेश की आर्थिक अपराध शाखा से अग्रिम कार्रवाई हेतु विस्तृत विवरण मांगा है, जिसे राज्य सरकार ने केंद्र सरकार के प्रवर्तन निदेशालय को भेज दिया गया है।
ज्ञातव्य है कि अमर सिंह और उनके सहयोगियों के विरूद्ध कानपुर शहर के थाना बाबूपुरवा में शिवाकांत त्रिपाठी ने अपराध संख्या- 458/09 के अन्तर्गत धारा-420/467/471/120 बीआईपीसी व 7/8/9/10/13 (1)(सी) पीसी एक्ट व 3/4 पीएमएल एक्ट के तहत 15 अक्टूबर, 2009 को एफआईआर दर्ज कराई थी। एफआईआर में अमर सिंह और उनके सहयोगियों पर कूटरचित दस्तावेज तैयार करने, लोक सेवक होते हुए गलत ढंग से धन अर्जित करने और इंकम टैक्स की गलत आयकर विवरणी अंकित करने का उल्लेख है। उत्तर प्रदेश सरकार ने इस प्रकरण की जांच राज्य की आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्लू) को सौपी है। एफआईआर में प्रथम दृष्टया जो आरोप लगाये गये हैं वो ये हैं-
अमर सिंह ने पूर्ववर्ती प्रदेश सरकार के कार्यकाल में उत्तर प्रदेश विकास परिषद के अध्यक्ष के रूप में अपने पद का दुरूपयोग करते हुए हजारों करोड़ रूपये के सरकारी ठेके चुनिंदा उद्योगपतियों को दिये गये और इनके बदले में अमर सिंह ने ऐसी कंपनियों को कमीशन के रूप में धन और ठेके दिलवाए जिन्हें अमर सिंह प्रत्यक्ष अथवा अपरोक्ष रूप से संचालित कर रहे थे। वर्ष 2004 से 2007 के दौरान अमर सिंह ने इन कंपनियों को ठेके दिलाने का कार्य किया, जिनको न तो सम्बन्धित कार्य का अनुभव था और न ही उन कार्यों को करने के लिए संसाधन अथवा क्षमता ही थी। अमर सिंह ने इस कार्य में कई अन्य आर्थिक विशेषज्ञों की सहायता से बहुत सी इस प्रकार की कम्पनियां खोलीं जिनकी परस्पर एक दूसरे में अंशधारिता दिखाकर उनको अपने सहयोगियों/मित्रों को निदेशक मण्डल में रखकर नियंत्रित किया जाना दिखाया। इनमें से कई कम्पनियों में उपरोक्त प्रकार से भारी मात्रा में धन एकत्र होने के बाद उन्हें दो कम्पनियों-मैसर्स सर्वोत्तम कैप्स लिमिटेड और मैसर्स पंकजा आर्ट्स एण्ड क्रेडिट प्राइवेट लिमिटेड में विलय कर दिया गया।
आरोप के अनुसार जिन छोटी-छोटी कम्पनियों में बाहर से धन लाकर दो बड़ी कम्पनियों में उनका विलय किया गया, उन कम्पनियों का विलय करने से पूर्व उनके शेयर का मूल्य कृत्रिम रूप से कई सौ गुना बढ़ा दिया गया। उदाहरण के तौर पर यह भी आरोपित है कि मैसर्स श्याम दादा मर्चेन्ट्स प्राइवेट लिमिटेड, जिसका मैसर्स पंकजा आर्ट्स एण्ड क्रेडिट प्राइवेट लिमिटेड में विलय किया गया था, उसकी वर्ष 2004-05 में कुल आय 5.78 लाख रूपये थी और लाभ मात्र 1250 रूपये था, फिर भी उसके 81.77 लाख रूपये के शेयरों का मूल्य विलय करते समय 12.46 करोड़ रूपये आँका गया है। इस प्रकार पूरे घटनाक्रम के पश्चात जहां सभी छोटी-छोटी कम्पनियां विलय होने के बाद पूर्णतया समाप्त हो गईं, वहीं उनमें जमा पूरा धन अमर सिंह और उनकी पत्नी और निकट मित्रों, सहयोगियों की उपरोक्त दो कम्पनियों में वैध धन के रूप में आ गया।
एफआईआर में ऐसे गंभीर आरोपों को देखते हुए सम्पूर्ण प्रकरण की विवेचना के कई तथ्य सामने आये हैं, जिनकी जांच के लिए आवश्यकतानुसार-नियमानुसार आर्थिक अपराध शाखा अन्य विशिष्ट एजेन्सियों से भी सहयोग लेगी। प्रदेश सरकार की जांच एजेन्सी आर्थिक अपराध शाखा ने प्रवर्तन निदेशालय के पत्र के क्रम में इस मामले से जुड़े समस्त अभिलेख उसे भेज दिए हैं। इसके अलावा आर्थिक अपराध शाखा ने कम्पनी मामलों के मंत्रालय के सीरियस फ्रॉड इन्वेस्टीगेशन ऑफिस (एसएफआईओ) को भी प्रकरण के सम्बन्धित बिन्दु संदर्भित कर दिये हैं और इस प्रकरण में नियामक प्राविधानों के उल्लंघन और सम्बन्धित कम्पनियों के शेयर मूल्यों में कथित हेरा-फेरी के आरोपों के सम्बन्ध में सिक्योरिटीज़ एण्ड एक्सचेन्ज बोर्ड ऑफ इण्डिया (सेबी) से अपनी रिपोर्ट उपलब्ध कराने का अनुरोध किया है। इसके साथ ही साथ राज्य सरकार ने भारत सरकार के राजस्व विभाग, जिसमें आयकर और
प्रवर्तन निदेशालय सम्मिलित हैं और कम्पनी मामलों के मंत्रालय को इस मामले से संबंधित सम्पूर्ण विवरण भेज दिया है।