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ओम
प्रकाश जिंदल
एक कर्मयोगी की कहानी !
ओम
प्रकाश जिंदल। देश के उद्योगजगत का ऐसा नाम है जो देश-विदेश और
अपने
गृह प्रांत हरियाणा में औद्योगिक क्रांति के लिए प्रेरणा के
रूप में जाना जाता है। व्यवसाय के विस्तार में कड़ी मेहनत और
शानदार रणनीतियों का सफलतापूर्वक प्रयोग करने वाले ओम प्रकाश
जिंदल का यह जन्म का महीना है। सात अगस्त को जन्में ओम प्रकाश
जिंदल ने सफलताओं के शिखर छुए हैं और इस क्षेत्र में आने वालों
के लिए एक वातावरण विकसित किया है। हरियाणा राज्य की
अर्थव्यवस्था में इस औद्योगिक परिवार का भारी योगदान माना जाता
है इसलिए आज बाबूजी के नाम से प्रसिद्ध ओमप्रकाश जिंदल का नाम
बड़े आदर भाव से लिया जाता है। उन्हें सभी लोग अपना आदर्श
मानते हैं।
कुछ लोग जन्म से ही महान पैदा होते हैं, और कुछ लोग
अपनी मेहनत के बलबूते पर अपने कर्म से महान बनते हैं, जो भावी
पीढ़ी के लिए छोड़ते हैं वो आदर्श जिन्हें अपनाकर वह अपनी
प्रगति के मार्ग प्रशस्त करती है। ओम प्रकाश जिंदल हरियाणा के
ऊर्जा मंत्री रहे हैं और 11वीं लोकसभा के सदस्य भी रहे। उन्हें
लोग प्यार से बाबूजी पुकारते थे। अंदाजा लगाया जा सकता है कि
एक उद्योगपति के साथ-साथ उनका सामाजिक और राजनीतिक दायरा कितना
विकसित था। यह सम्मान बहुत कम लोगों को हासिल होता है। जीवन
उत्कृष्टता की छाप छोड़ने वाले जुझारू उद्योगपति और सोने सी
खरी आत्मा वाले सांसद के रूप में उनको सभी के लिए प्रेरणा
स्त्रोत माना जाता है। ओम प्रकाश जिंदल आज भी अपने सिद्धांतों,
आदर्शों एवं ईमानदारी के रूप में आज भी जीवित हैं और चर्चा में
रहते हैं।
मैन ऑफ स्टील के अलंकरण से सुशोभित ओम प्रकाश जिंदल
तकनीकी एवं इंजीनियरिंग कार्यों में अत्यधिक रूचि रखते थे। यह
तब है जब उन्होंने तकनीकी एवं इंजीनियरिंग की कोई विधिवत
शिक्षा नहीं ली थी लेकिन इन विषयों के प्रति गहरे लगाव और गहन
अभिरूचि ने उन्हें उन्नति के शिखर पर पहुंचा दिया। यही नहीं वह
ऐसे व्यक्ति थे जिनका प्रबंधन भी उच्चकोटि का था, जो सर्वप्रथम
किसान थे, फिर साधारण व्यापारी, उसके बाद बाल्टी निर्माता और
अंत में अंतरराष्ट्रीय ख्याति के उद्योगपति एवं हरियाणा के
लोकप्रिय नेता हुए। उद्योग, राजनीति और जनकल्याण के क्षेत्रों
में अपनी अलग पहचान बनाकर उन्होंने औद्योगिक विकास और
उद्यमशीलता को नई परिभाषा दी। ओम प्रकाश जिंदल की सफलता का
पहला और प्रमुख उजला पक्ष यह था कि वह पैदायशी इंजीनियर थे।
उनमें इंजीनियरिंग की जन्मजात प्रतिभा थी, जो असाधारण और
अद्भूत थी। कुछ व्यक्ति जो अपनी प्रतिभा का रचनात्मक कार्यों
में भरपूर उपयोग करते हैं, उनमें ओम प्रकाश जिंदल प्रमुख रूप
से गिने जाते हैं।
वह
ऐसे व्यक्ति थे, जो हर कठिन परिस्थिति को
भी अपने लिए अनुकूल बना लेते थे। ऐसे कम लोग होते हैं जिन्हें
अपने उद्योग और कारोबार की सूक्ष्म जानकारी होती है। वह हमेशा
अपनी खुद की तकनीक पर विश्वास करते थे, जो उनकी कामयाबी का
प्रमुख सकारात्मक पक्ष था। उत्पादन में उन्होंने स्वदेशी को
प्राथमिकता दी। महंगी मशीनों का आयात करने की अपेक्षा, वह इस
बात पर जोर देते थे कि अपने पारंपरिक ज्ञान के आधार पर स्वदेशी
तकनीक का विकास किया जाए। अपने तकनीकी ज्ञान पर विश्वास और
बाजार की गहन सूझबूझ को समझने की असाधारण क्षमता थी, जिसकी वजह
से उनका औद्योगिक साम्राज्य दिन दुनी रात चौगुनी तरक्की कर
विस्तृत होता गया। देश के ही संसाधनों से उत्पादन करने के उनके
परीक्षण व प्रयोग आजीवन चलते रहे। वह आराम पसंद व्यक्ति नहीं
थे। हर काम अपने हाथों से करने में विश्वास रखते थे।
उनकी व्यवहार कुशलता के सब कायल थे। उनसे जो भी मिलता
था प्रभावित हुए बगैर नहीं रह पाता था। वह मजदूर के साथ मजदूर
की तरह और इंजीनियर के साथ इंजीनियर की तरह काम करते दिखाई
देते थे। उद्योग स्थापना के समय घंटों धूप में खड़े होकर हर
काम को बारीकी से देखना उनकी आदतों में शामिल था। उन्हें
हथौड़ा चलाते हुए भी देखा जा सकता था। उन्होंने अपने बचपन में
हल चलाया, खेतों में घंटों काम भी किया करते थे। वे अपने
कर्मचारियों के साथ गहरा लगाव रखते थे। वे अक्सर कहते थे मैं
लोहे और पत्थर से स्टील तो बनाता तो हूं, पर दिल तो मेरा मोम
का है। वे अपने कर्मचारियों को नाम से पुकारना पसंद करते थे।
उनके बड़प्पन और उदार दिल के कारण उनके कर्मचारी आदर एवं
सम्मान देते हुए बाबूजी कहकर बुलाते थे। वह ऐसे मालिक थे, जिन
तक छोटे कर्मचारियों की भी सीधी पहुंच थी। वे मजदूर और मैनेजर,
दोनों की ही समस्याओं को बराबर सुनते और हल करते थे।
जिंदल उद्योग समूह के संस्थापक ओम प्रकाश जिंदल का जन्म
7 अगस्त 1930 में हरियाणा राज्य के नलवा गांव (हिसार) में एक
किसान परिवार में हुआ। उस समय भारत अंग्रेजों के अधीन था,
जाहिर है कि उस समय देश अनेक समस्याओं से जूझ रहा था। लेकिन
उन्हें बचपन से ही मशीनों में रुचि थी। ओम प्रकाश जिंदल के
जीवन के बारे में एक बड़ी ही रोचक कहानी प्रचलित है कि संभवतः
1951 में जब वह कलकत्ता की एक सड़क से गुजर रहे थे, तब उनकी
नजर किनारे ही पड़ी स्टील पाइपों के ढेर पर पड़ी, जिन पर लिखा
था-मेड इन इंग्लैंड। उसी समय उनके मन में विचार आया कि स्टील
बनाने का यह काम हम स्वयं क्यों नहीं कर सकते? और इसी सोच ने
उन्हें एक दिन स्टील पाइप उद्योग स्थापित करने के लिए प्रेरित
किया। दौर बदलते रहे और सफलता उनके कदमों को चूमती रही। एक दिन
ऐसा भी आया जब दूरगामी सोच वाला हरियाणा का यह होनहार युवा
बिना किसी औपचारिक स्कूली शिक्षा और तकनीकी पृष्टभूमि के अपनी
मेहनत के दम पर देश का एक प्रमुख इस्पात निर्माता बना।
इस्पात उद्योग में बुलंदियां हासिल करने के सफर में
उन्होंने कटे और बेकार फेंक दिए गए पाइपों का व्यापार शुरू
किया। वह इस तरह के पाइप, आसाम के बाजारों से नीलामी में
खरीदते थे और उन्हें कलकत्ता में बेचते थे। कोलकाता के पास में
लिलुआ नामक स्थान में पाइप बेंड और सॉकेट बनाने की एक फैक्टरी
लगाई। यह सबसे पहली औद्योगिक ईकाई थी, जिसे ओम प्रकाश और उनके
भाइयों ने 1952 में स्थापित की और इसका नाम जिंदल (इंडिया)
लिमिटेड रखा गया। टाटा और कलिंग के बाद, भारत में अपनी तरह की
तीसरी फैक्टरी थी। इस उपलब्धि के चलते ओम प्रकाश जिंदल पश्चिम
बंगाल और पूर्वी भारत में लोकप्रिय हो गए। यहां कुछ सालों तक
काम करने के बाद 1960 में अपने पैतृक जिला हिसार आ गए और यहां
भी उद्योग लगाया। उन्होंने 34 औद्योगिक इकाइयां स्थापित कीं।
इनमें से 30 भारत में, तीन अमेरिका में और एक इंडोनेशिया में
स्थित हैं। अब इन इकाइयों का संचालन उनकी पत्नी सावित्री देवी
जिंदल और चार पुत्र पृथ्वी राज जिंदल, सज्जन जिंदल, रतन जिंदल
और नवीन जिंदल करते हैं। जिंदल उद्योग समूह का मुख्य व्यवसाय
स्टील से संबंधित है, फिर भी उसे चार वर्गों-पाइप्स, कार्बन
स्टील, स्टेनलेस स्टील, रेल व ऊर्जा में बांटा जा सकता है।
अपने पिता की ही तरह उनके चारों पुत्र कामयाब उद्योगपति माने
जाते हैं और अपनी कंपनियों को नई ऊंचाईयों ले जाते हुए देश के
औद्योगिक विकास में योगदान दे रहे हैं।
वह प्रारंभ से ही अपने सामाजिक दायित्व के प्रति सजग
रहे। जनसेवा के कामों के लिए उन्होंने आजीवन पहल की। स्वास्थ्य
और शिक्षा सुविधाओं के विस्तार में उनके योगदान को सदैव याद
किया जाता रहेगा। भारत में स्वतंत्रता के बाद आधुनिक भारत के
ऐसे व्यक्ति थे, जो पहले किसान थे, बाद में व्यापारी बने फिर
उद्योगपति और अंत में कामयाब राजनीतिज्ञ एवं समाजसेवक। सन्
1991 में पहली बार वे विधायक चुने गए। सन् 1996 में कांग्रेस
की टिकट पर कुरुक्षेत्र से लोकसभा के लिए चुने गए। हिसार से
दोबारा विधायक बनने के साथ ही ओम प्रकाश जिंदल ने प्रदेश की
राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाई। इसी दौरान अपने छोटे पुत्र
नवीन जिंदल को 2004 में लोकसभा का चुनाव कुरुक्षेत्र से
लड़ाया, जिसमें उन्हें विजय हासिल हुई। वर्ष 2005 में पुनः
हिसार से विधायक के लिए खड़े हुए और जीत हासिल हुई। राजनीति
में भ्रष्टाचार को दूर करने का सपना लिए स्वर्गीय जिंदल को
ऊर्जा मंत्री बनाया गया। राजनीति और जनसेवा करते हुए वे
लोकप्रियता के शिखर पर पहुंचे और इस संसार से विदा ले ली।
किसान से सफल उद्योगपति, सुप्रसिद्ध समाजसेवी व कुशल
राजनीतिज्ञ के रूप में ओम प्रकाश जिंदल ने जीवन की प्रत्येक
कसौटी पर खरा उतर कर कर्मयोगी-सा जीवन बिताया व कठिन परिश्रम,
निष्ठा और सच्चाई से प्रत्येक कार्य को उत्कृष्ठा से कर अपने
स्वप्नों को साकार कर दिखाया। उनका जीवन समाज का प्रेरणा
स्त्रोत बन, आने वाली पीढि़यों का सदैव मार्गदर्शन करता रहेगा।
इस्पात जगत के पुरोधा व स्वच्छ राजनीति के शिखर पुरुष को शत्
शत् नमन।
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