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आईपीएल लीग ने
उड़ाई
विज्ञापनदाताओं
की नींद
मुंबई। भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड हाल ही में हुए
डीएलएफ इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) को चाहे जितना भी सफल बता
रहा हो, लेकिन उसने आगे होने वाले खेल टूर्नामेंटों की तो सेहत
पहले से ही बिगाड़ दी है। आईपीएल के अधिकृत प्रसारणकर्ता सेट
मैक्स ने टूर्नामेंट में हुए 59 मैचों में ज्यादातर रकम खुद ही
डकार ली। उसे तकरीबन 300 करोड़ रुपये की कमाई हुई, जबकि
विज्ञापनदाताओं की झोली काफी हद तक खाली ही रही। इसी वजह से
जल्द होने वाली क्रिकेट टूर्नामेंटों को विज्ञापनदाताओं का
टोटा पड़ रहा है।
ईएसपीएन पर प्रसारित होने वाले इस टूर्नामेंट में
विज्ञापनों के लिए कॉमर्शियल टाइम खरीदने में कंपनियां
दिलचस्पी नहीं दिखा रही हैं। इसी वजह से ईएसपीएन को महज चार
प्रायोजक भारती एयरटेल, हैवल्स, फ्यूचर समूह और मारूति मिल पाए
हैं। इनके अलावा टीवीएस, नेस्ले, एमवे, बिड़ला सन लाइफ
इंश्योरेंस, टाटा टेलीसर्विसेज और जीएम पेंस स्पॉट कॉमर्शियल
टाइम खरीदने वालों की फेहरिस्त में हैं।
ग्रुप एम के मुख्य परिचालन अधिकारी विक्रम सखूजा ने
बताया कि सोनी ने भी कुछ विज्ञापकों के साथ करार किये थे और
ब्रांड्स ने भी इस पर काफी खर्च किया था। बाद में ब्रांड्स को
इसका फायदा भी हुआ। इसके मुकाबले एशिया कप को लेकर विज्ञापनों
में काफी उदासीनता दिखाई दी।
इस सीरीज के दौरान विज्ञापनों के लिए ईएसपीएन 10
सैंकेंड के स्पॉट के लिए 2-2.5 लाख के बीच कीमत मांगे जबकि
विज्ञापन दाता इस स्पॉट के लिए 1.2-1.3 लाख रुपये ही देने की
बात कर रहे थे। आईपीएल के बाद विज्ञापन उद्योग काफी उदासीन हो
गया है। इसी कारण नियो स्पोर्ट्स पर प्रसारित हुई भारत
पाकिस्तान बांग्लादेश के बीच त्रिकोणीय श्रृंखला भी विज्ञापनों
के लिए तरसी है।
यह चैनल दावा कर रहा है कि उसने (डीडी और नियो) 10
सैकेंड का विज्ञापन स्पॉट लगभग 2.5 लाख रुपये में बेचा है।
लेकिन मीडिया कंपनियों के मुताबिक चैनल ने यह स्पॉट 1.75-1.8
लाख रुपये में बेचे हैं। आईपीएल के दौरान 10 सैकेंड के स्पॉट
की कीमत 2.5 से 3 लाख रुपये के बीच थी जबकि फाइनल और सेमीफाइनल
के लिए यह कीमत बढ़कर 6-7 लाख रुपये हो गई थी। अभी हुई
भारत-श्रीलंका सीरीज
और सितंबर में होने वाली भारत-ऑस्ट्रेलिया
सीरीज और आईसीसी चैंपियंस ट्रॉफी के लिए यही हाल रहने वाला है।
‘जून से लेकर अगस्त तक
का समय विज्ञापन एजेंसियों के लिए काफी सुस्त रहता है क्योंकि इस
दौरान क्रिकेट बहुत ज्यादा नहीं होता है। कोई भी विज्ञापन
एजेंसी तभी निवेश करती है जब उसे यकीन हो कि ज्यादा से ज्यादा
लोग उस सीरीज को देखेंगे।’ जैसे नवंबर 2007 में भारत-पाकिस्तान
सीरीज और अक्टूबर में भारत-आस्ट्रेलिया सीरीज से नियो को लगभग
250 करोड़ रुपये का मुनाफा हुआ था।

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